सोमवार, 26 सितंबर 2016

दीवाली क्यूकर मनावां

दीवाली क्यूकर मनावां
सते, फते, नफे, कविता, सविता अर भरपाई शनिवार नै फेर कट्ठे होगे। इतनी देर मैं सुमन बी आगी। सते बोल्या - सुमन के बात किमै कमनू सी दिखै सै? सुमन बोली - ना इसी तो कोए बात ना। सते बोल्या - सुमन ले तों ना बताना चाहन्दी तो कोए बात ना फेर बात तो किमै ना किमै सै। सुमन बोली - वा मेरी चाची नहीं सै मैडीकल मैं। काल उसकै धोरै गयी थी उसनै दीवाली का न्योता देवण अक पहलम की ढालां सारे मिलकै दीवाली मनावांगे। फेर मेरी चाची तो रोवण लाग्गी मेरी बात सुणकै। एकबै तो मेरै समझ मैं नहीं आया अक वा रोई क्यों? फेर मनै होसला-सा करकै बूझ लिया अक चाची तूं क्यूं रोई? मनै बता। बताए तै दुःख आधा होन्ता बताया। चाची बोली - तेरा भाई राजकुमार तो अमरीका बैठ्या सै, तनै बेरा ए सै। तेरी भाण बंगलौर मैं सै अर उसनै बंगलौर बहोत भा ग्या। तेरा चाचा ओमान देश मैं सै। अर मैं एकली रोहतक मैं सूं। होली पै तीन साल मैं एकबै कट्ठे होए थे सारे, बता ईब दीवाली नै हटकै कट्ठे क्यूकर होवां? ईब क्यूकर गाम मैं आकै दीवाली मनावां? मैं बोली - देख चाची या तो आच्छी बात सै थाम चारों कमावण लागरे। घर नै धन दौलत तै भरण लागरे। दीवाली नै भी तो आपां लक्ष्मी की पूजा इसे खातर करया करां सां ना अक घर मैं लक्ष्मी मतलब धन का वास हो। तो थारी तो दीवाली रौजै ए मनै सै चाची। ईसे दीवाली आले दिन मोबाइल पै और पांच-पांच मिनट फालतू बात कर लियो और तै मैं के बताऊं चाची। चाची बोली सुन बेटी पीस्से का रौल्ला कोन्या। पीस्यां की तो गलेट सी लागैं सैं। फेर इतना पीस्सा बी किस काम का अक माणस दो दिन आपस मैं बैठकै दुख-सुख की ना बतला पावै। खुदा ना खास्ता मेरै किमै होज्या तो मेरी संभाल कूण करैगा? इसे पीस्से नै के चाट्टैं? बेटी या बात तो सही सै अक पीस्सा बी होना चाहिए फेर निरा पीस्सा बी किस काम का? सते बोल्या - जिन धोरे पीस्सा सै वे तो उकी पूजा करकै मना लेंगे दीवाली फेर जिन धोरै फूट्टी कोड्डी बी कोन्या वे किसकी धौंक मारैं? दीवाली का मतलब सै अच्छाई की बुराई पै जीत। नफे बोल्या - भाई फेर तो दीवाली नहीं दिवाला मनाना चाहिए। कविता नै बूझ लिया - क्यूं दिवाला क्यूं? नफे बोल्या - बुराई की अच्छाई पै जीत चारों कान्हीं होण लागरी सै आज।
झूठे का साच पै बोलबाला सै अक नहीं? गाम मैं शरीफ नै कूण बसण देसै आज के दिन? छोरियां का जीना मुश्किल कर राख्या सै। सविता बोली - म्हारा तो दीवाली मनावण नै कती जी कोन्या करदा। कविता बोली - जै म्हारे बरगे बी न्यों हार मानकै बैठज्यांगे तो सच्चाई की खातर अर अच्छाई की खातर कौन आवाज बुलंद करैगा? हमनै दीवाली का दिन अपनै ऐशोआराम बधावण की खातर पीस्से की पूजा करण के दिन के रूप मैं देखण की जागां बुराई के खिलाफ सच्चाई की जीत की खातर अपना संकल्प पुख्ता करण के दिन के रूप में देखना चाहिए।
सरिता बोली - थामतै बात की बाल की खाल तारण लागज्याओ सो। दीवाली तो खील पताश्यां का त्यौहार सै। दीवे बालो, मोमबत्ती बालो, चीन आली बिजली की लड़ चासो, पटाखे भटकाओ, खीर बनाओ, लक्ष्मी पूजा करो अर तान कै सो ज्याओ। थाम भगत सिंह क्यों बनना चाहो सो? सै के थारा भगत सिंह बनने का ब्यौंत? सविता नै सरिता की बात का जवाब दिया - बात तो सही सै सरिता तेरी फेर यू सब करण खातर घर मैं थोड़ा-घणा माहौल तो होना ए चाहिए ना। इस एक साल मैं गाम मैं आठ जण्यां नै तो खेती की मार खाकै फांसी खा ली। चार छोरी अर तीन छोर्या नै सल्फास की गोली खाकै ज्यान दे दी। तीन जने कैंसर का शिकार होकै तड़प-तड़प कै मरगे। दो जने इस डेंगू ने लील लिये। स्कूल मैं च्यार छोरियां गेल्यां के बणी थामनै बेरा सै। घर-घर मैं दारू नै तहलका मचा राख्या सै। बता इसे माहौल मैं दीवे बाल कै जै चान्दना करण की कोशिश बी करांगे तो भीतरले मैं चान्दना क्यूकर होवैगा? सते बोल्या - फेर दीवाली नहीं मनावां ईबकै? फते बोल्या - हालात तो इसे ए सैं फेर आपां तो गाम की साथ सां, ज्यूकर फैसला होगा वो सिर माथै। सते बोल्या - न्यों जी तोड़े कोन्या काम चालै भाइ। न्यौं तो बुराई और सिर पै चढ़कै बोलैगी। हमनै दीवाली का दिन इस बात की खातर मनाना चाहिए अक आपां अच्छाई अर बुराई की लड़ाई मैं अच्छाई का साथ निभावण का प्रण करां, आपां छांट कै महिला भ्रूण हत्या कै खिलाफ आवाज ठावण का प्रण करां, नशे, हिंसा, सैक्स के पैकेज का विरोध करां, समाज मैं व्याप्त गैर वैज्ञानिक रुझान, रूढ़िवाद अर पाखंड का मुकाबला करां, दहेज अर बाल विवाह के खिलाफ आवाज बुलंद करां, विज्ञान के जन विरोधी इस्तेमाल का विरोध करां, लड़कियां की खरीद-फरोख्त का विरोध करां। गाम मैं बढ़िया शिक्षा, बढ़िया स्वास्थ्य की बात करां। पंचायत की रचनात्मक सक्रियता की खातर काम करां। सविता बोली - सते की बात सुनकै तो किमै भीतरलैं मैं चान्दना-सा हुया। ये सारे प्रण करते हुए एक-एक दीवा कै मोमबत्ती आपां नै चासनी चाहिए।
अच्छाई की बुराई पै जीत की खातर कुछ ना कुछ तो आपां नै करना चाहिए ना? हम पांच जनियां नै दीवाली के दिन कट्ठी होकै यो घूंघट तार बगाना चाहिए फेर तो दीवाली का कोए मतलब होगा म्हारी खातर। कविता, सरिता, सविता, सुमन अर भरपाई मिलकै बोली - दीवाली नै तार बगावांगे इस घूंघट की बुराई नै। नफे बोल्या - कितना बढ़िया हो जै 10-20 गामां मैं बहादुर महिला यो काम कर दें इस दीवाली नै।
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