सोमवार, 26 सितंबर 2016

बहम का मरज

बहम का मरज
म्हारे बुजुर्गों धोरै न्यों सुनते आवां सां अक बहम के मरीज की दवाई तो लुकमान बी टोहन्ते टोहन्ते मरग्या। फेर आजकाल बहम के मरज की दवाई की मांग बहोत सै। जिसकै देखो उसे के क्याहें ना क्याहें का बहम होर्या सै। बंशीलाल जी कै दारुबंदी का बहम होर्या था। भजनलाल कै हटकै चीफ मिनिस्टरी का बहम होर्या था। देबीलाल कै अपने पोते-पड़पोत्यां नै दादालाही मुख्यमंत्री की गद्दी दिवावण का बहम होर्या था। जनता कै तीनूं लालां का बहम होर्या था। बीरेन्द्र सिंह कै बहम बड़ग्या था अक इन तीनों लालां की छुट्टी करकै मैं खुद चीफ मिनिस्टर बणज्यां। म्हारे वर्तमान मुख्यमंत्री नै हरियाणा भ्रष्टाचार अर भयमुक्त करण का बहम पाल राख्या सै। म्हारे रामदेव जी नै सारी बीमारी योग तै ठीक करण का बहम खुद बी पाल राख्या सै अर दुनिया कै बी बाड़ दिया यो बहम। बाकी बी घणे ए सै जो चेयरमैन बणण का बहम पकड़े घूमैं सैं। घणे ए इसे बी सैं जो एकै रात में अरबपति होवण का बहम लादे घूमैं सैं। कोए किसे लुगाई के बहम मैं पागल हुया हांडै सै। जड़ कैहण का मतलब यो सै अक बहम के मरज की दवाई की पूरे हरियाणा के हरेक मरद-औरत नै जरूरत सै। जै इस बहम के मरज की दवाई का नुस्खा कितै मेरे हाथ लागज्या तो मेरी चांदी जरूर होज्यागी इसका बहम मेरे बी सै। म्हारे कुलदीप जी कै लेटैस्ट बहम हुआ सै अपनी ए पार्टी कै खिलाफ बोलण का।
इस मरज की दवाई खातर मनै पूरा भारत महान घूम कै देख लिया पाछले दो साल मैं। जड़ै जड़ै गया उड़ै बी इस बीमारी का प्रकोप तो फैल्या पाया फेर इलाज का नुस्खा कोन्या थ्याया। कई बै तो इसा जी करै सै अक इन सियासतदानां नै जी भर कै गाल द्यूं अक इस मामूली सी बीमारी की दवाई बी नहीं तैयार करवा सके इब ताहिं। ऊं तो माणस चांद पै जा लिया, स्टैम सैल की खोज कर ली, जीन्ज़ की डिकोडिंग कर दी फेर बहम की दवाई ईजाद नहीं करी। अर ज्यों ज्यों बाजार व्यवस्था मैं मुनाफाखोर विकास होन्ता जावण लागर्या सै त्यों त्यों बहम का मरज बी चढ़ती कला पै सै। कई बै मेरा तो इसा जी करै सै अक इन सारे बहमियां नै कठ्ठे करकै दिल्ली मैं एक प्रदर्शन कर्या जा तो गिनिज़ बुक मैं नाम लिखणतै कोए नहीं रोक सकदा। दुनियां के 50 प्रतिशत बहमी म्हारे प्यारे भारत महान देश मैं रैहन्ते बताये। ऊं तो म्हारे बड्डे बडेरे कैहगे अक बहम की कोए दवाई तो होणी ए चाहिए, ना तो ये हरियाणा के म्हारे तेजतर्रार सियासतदान अर उनके लाडले मेडिकल के वार्ड नंबर 13 मैं भर्ती करवाने पड़ैंगे तो फेर हरियाणा नै कूण संभालैगा? हरियाणा नै राह कूण दिखावैगा? सोचो किमै तो अक न्योय ताश खेलते रहोगे अर एक दिन कैहद्योगे - ओहले! हमनै के बेरा था यो बहम का मरज इतना फैल ग्या।
जै इस मरीज की दवाई नहीं सै तो इसकी खोज तो करी ए जाणी चाहिए। बेरा ना म्हारे प्रदेश के डाक्टर कौन सी बीमारी के इलाज की खोज मैं जुटरे सैं अक इस बहम के मरज कान्हीं उनका बी ध्यान कोनी जार्या। एक बात और बी सुणण मैं आवै सै अक बहम का मरज छूत का रोग सै। यो एक माणस तै दूसरे अर दूसरै तै तीसरे मैं बहोत तावला फैलै सै। ज्यूकर रामदेव का योग का बहम (चौबीस घंटे टीवी के ऊपर योग करता दीखै सै) म्हारे मध्यम वर्ग के लोगां मैं फैलग्या। एक खास बात और सै अक इस रोग के शिकार माणसां के राज दरबार खत्म होगे, घरबार उजड़गे अर कानी कोड्डी के नहीं रहे वे माणस। माणस कै चाहे कैंसर होज्याओ फेर यो बहम का मरज नहीं होणा चाहिए। कैंसर का तो फेर बी इलाज सै फेर इस बहम का इलाज कड़ै सै? शंका, शक्क, इस मरज के दूसरे नाम बी लिए जावैं सैं फेर बहम तो बहम सै। हो सकै सै और बी कई नाम हों इसके मनै तो बेरा ना उनका थामनै बेरा होतै लिखकै भेजियो एक पोस्टकार्ड पै मेरे बीरा!
एक बर एक इसे माणस कै घरां जाणा पड़ग्या। जिसकी गेल्यां कदे उसका कसूता बैर रह्या था जीत सिंह नै। फेर आजकाल ठीकठ्याक बोलचाल थी उनकी। सामण का म्हिणा था उसनै घेवर मंगा राख्या था। जीत सिंह नै खाणा पड़ग्या घेवर पर घरां आया इतनै उसकै यो बहम होग्या अक कदे नफे सिंह नै घेवर मैं जहर ना मिला दिया हो? बस फेर के था जीत सिंह कै तो पस्सीने आगे, दिल का पंखा सा चाल पड्या, नाड़ी सौ तै ऊपर गई, जी घबरावण लाग्या। तीन च्यार बर पेशाब करण गया। इसा होग्या जणों गात का जमा ए सत् लिकड़ग्या हो। भाज्या भाज्या डाक्टर धोरै पहोंच्या। डाक्टर नै चैक कर्या सब किमै ठीकठ्याक था। डाक्टर नै जीत सिंह समझाया अक बहम मतना करै सब किमै ठीक सै। फेर जीत सिंह तो सैड़दे सी बोल्या अक बहम नहीं मनै लागै सै किमै ना किमै होण आला सै। देख बालक रुलज्यांगे मेरे तो अर तों डाक्टर ओहले कैहके एक औड़ नै होज्यागा। सारी रात पूरा घर ताणकै राख्या। आध घंटा बी नहीं सो कै देख्या बस मसकोड़े मारदा रह्या।
हरियाणे मैं यू बहम मनै लाग्गै सै अक सैबी थोड़ा फालतू। क्यों सै इसा? इस पर गहन विचार करण की जरूरत सै। म्हारा हरियाणा आर्थिक तरक्की मैं तो नंबर एक पै आ लिया फेर इसके सामाजिक सूचकांक बहोत खराब सैं मेरै इसे बात का बहम होर्या सै? फेर बहम बहम मैं बी फरक बताया। एक बहम सै समाज नै पाछे नै खींच्चण का अर एक बहम सै समाज नै आगै नै खींच कै लेज्यावण का। और बी किस्म सैं बहम भी होंसैं इनका मनै तो घाट बेरा सै। जितना बेरा था लिख दिया किसे नै फालतू बेरा हो तै जरूर लिखकै भेजियो। मनै थारी चिट्ठी की बाट रहवैगी। कदे कदे तो लिख दिया करो। मैं आये हफ्ते लिखण लागर्या। थाम कदे बी चिट्ठी कोनी गेरदे। या आच्छी बात नहीं सै। कदे थाम बी न्यों तो नहीं सोचो सो अक मेरै बी लिखण का बहम होग्या।
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