सोमवार, 26 सितंबर 2016

सैर अमरीका की

सैर अमरीका की
     कई बार बात चालै तो हम बड़े ऊम्हा कै कहवांगे अक मेरा छोरा अमरीका जारया सै। छोरा भी अमरीका के बारे मैं खूब बढ़ा-चढ़ा के लिखैगा। वैटरनरी का डाक्टर होगा अर अमरीका मैं किसे किरयाणा की दुकान मैं सेलज मैन लागरया होगा फेर बी न्यों लिखैगा अक तीजां केसे कटरे सैं। कोए न्यूं नहीं लिखै अक उड़ै म्हारी गेल्यां दोयम दरजे का व्यवहार हो सै। म्हारले छोरे नै ये सारी बात लिख कै भेजी। अमरीका मैं दुनिया की जनता का 6 प्रतिशत रहवै सै। फेर अमरीका धोरै दुनिया की दौलत का 50 प्रतिशत सै। आई किमै समझ मैं अक नहीं आई। पिस्तौल की नोक पै तीसरी दुनिया नै लूट लूट कै कमाई सै अमरीका नै या दौलत। अर ईब कुणसा थम्ब लिया। ईब्बी जारी सै या लूट। पहलम इस लूट मैं ईस्ट इंडिया कंपनी शामिल थी ईब मोनसैंटो बरगी घणिए कंपनी शामिल होगी। तेल के सबतै फालतू भंडार साउदी अरबिया मैं सैं अर दूसरे नंबर के भंडार सैं तेल के इराक मैं। इन तेल के भंडारां पै कब्जा करण की खातर अमरीका नै सारे अंतर्राष्ट्रीय कायदे कानून ताक पै धरकै पढ़ण बिठा दिया। सद्दाम नै पहलम इराक के सीन पै अमरीका ले कै आया अर जिब बात सूत नहीं आई तो सद्दाम शैतान बना दिया। इराक तबाह कर दिया अपनी लूट बरकरार राखण खातर। दुनिया मैं एक साल मैं मिलट्री के बजट पै कितना खर्च होवै सै? बेरा सै के? कड़ै फुरसत सै आपस मैं लड़ण तै अर कै ताश खेलन तै जो इसी-इसी बातां का बेरा हो। दुनिया का मिलट्री बजट 900 बिलियन बताया एक साल का। अमरीका इस मिलट्री खर्च का 50 प्रतिशत खर्च करै सै। मतलब अमरीका आधे मैं अर बाकी दुनिया का मिलट्री खर्च बाकी के आधे मैं। मतलब अमरीका दुनिया का दादा पाक रया सै। बाकी दुनिया निरक्षरता, भूख, बेरोजगारी अर बीमारी की गिरफ्तर मैं सै। अर आपां भी इन चीजां नै किस्मत का खेल मानकै छाती पै मुक्का मारकै बैठे रहवां सां। यूएनओ के हिसाब तै अमरीका के इस बजट खर्चे का जै 10 प्रतिशत बीमारी, निरक्षरता, भूख अर बेरोजगारी दूर करण मैं ला दिया जावै तो दुनिया के नक्शे पर तै ये चारों महामारी खत्म हो सकैं सैं। दूसरे विश्व युद्ध तै लैके ईब ताहिं युद्धां मैं 86 मिलियन के लगभग माणस मारे जा चुके सैं अर ईब अमरीका के निशाने पै ईरान सै। अमरीका धोरै खुद तै 10,000 तै फालतू न्यूकलियर हथियार सैं फेर इराक पै अर ईरान पै हथियारां का बाहणा करकै हमला करण का खेल म्हारे सबकै साहमी सै।
     दूसरी बात अमरीका मैं सै अक उडै़ सौंदर्य प्रसाधनां के कारखाने बहोत सैं। उनके अपने देश मैं इनकी खपत की सीमा आगी। दूसरे देशां मैं ये बेच्चण की खातर ये ल्याये ‘सुंदरी प्रतियोगिता’ अर ‘फैशन शो’। जित देखो उड़े ए मिस गांव, मिस शहर, मिस तहसील, मिस जिला, मिस प्रदेश, मिस इंडिया, मिस एशिया अर मिस वर्ल्ड के कम्पीटीशन आ गे। अमरीका मैं इन सौंदर्य प्रसाधनां पै साल में 8 अरब डालर खर्च कर दिये जावैं सैं। पूरे यूरोप अर अमरीका मैं 12 अरब डालर साल का खर्च इत्तर पै होज्या सै। ईब पाउडर लिपस्टिक पै खर्च तो विकास के काम आवै नहीं। भारत देश मैं जो लोग एक कान्हीं जीन्स का विरोध करैं सैं उन्हें के जीन्स के बड्डे शोरूम बी सैं। जो लोग फैशन का विरोध करैं सैं उनके ए फैशन सैंटर सेल की खातर सैं। रूढ़िवाद अर अन्ध उपभोग्यतावाद दोनूं गले मिलकै चान्दी कूट्टण लागरे सैं। एक और बात सै अक यूरोप अर अमरीका मैं पालतू पशुआं के खानपान पै 17 अरब डालर साल के खर्च होज्या सैं। इसे ढाल पूरी दुनिया मैं नशीली दवाइयां पै 400 अरब डालर का खर्च होज्या सै। म्हारे बरगे देश के नौजवान सुल्फा पीकै टुन्न हुए रहवैं ताकि इननै अमरीका की इस लूट का बेरा नहीं लाग्गै। जै लाग्गै बी तो जात-पात गोत-नात के चक्करां मैं बांट कै राखो ताकि ये नौजवान लड़के-लड़की अमरीका के गुण गाये जावैं उसकैं खिलाफ नहीं बोलैं। अमरीका की लूट के बारे मैं इननै बेरा नहीं लाग ज्यावै। नशा, सैक्स, हिंसा का पैकेज कसूता तैयार कर राख्या सै अमरीका नै म्हारे नौजवानां की खातर। जो हरियाणा के अमरीका जाकै बसगे उननै बी ये चीज कोन्या दीखण देन्ता अमरीका। अपमान सहन करकै बी वे उड़ै पीस्से की कमाई कै लागरे सैं। लागे रहो। फेर इन बातां पै बी गौर फरमाइयो। जै झूठी होतै सम्पादक धोरै चिटठ्ी भेज कै मनै बताइयो अर जै ठीक लागती हो तै चिट्ठी गेर कै मेरा होंसला बधाइयो।
      म्हारी तीसरी दुनिया के देशां पैं 1300 अरब डालर का कर्ज बताया। भारत पै यो कर्ज का बोझ सै 400 हजार करोड़ रुपइये। एक खास बात और सै अर वा सै अक दुनिया के मेहनत कशां नै इतनी मेहनत करी सै अक यू संसार आज तै पहलम इतना धनी नहीं था। 1960-2000 के बीच संसार का शुद्ध उत्पाद आठ गुणा तै फालतू बध्या सै। 1950 मैं सबतैं धनी देशां की 20 प्रतिशत आबादी के धोरै दुनिया की सबतै गरीब आबादी तै 34 गुणा संसाधन थे। 2000-2001 में धनी 20 प्रतिशत आबादी के धोरै संसार के संसाधना का 83 प्रतिशत सै जबकि सबतै गरीब 20 प्रतिशत के धोरै 1.5 प्रतिशत संसाधन सैं। अमरीका हड़खाया होरया सै। यो अपनी जनता के सुख की खातर दुनिया की बाकी जनता के सुखां पै हमला बोलण लागरया सै। पूरी मानवता नै खतरा पैदा होन्ता जावण लागरया सै। यू एक देश पै एक या दूसरी पार्टी का मामला नहीं सै। साम्राज्यवाद नै जालिम शिकंजा कस दिया सै। यू एक-एक देश का सवाल नहीं पूरी दुनिया नै बचावण का सवाल सै। जिस राही पै दुनिया ईब जावण लागरी सै उस राही पै मानवता का विनाश लाजमी सै इस वैश्वीकरण की छत्रछाया मैं। फेर दुनिया की जनता समझण लागरी सै। मानवता अपनी नाड़ इस वैश्वीकरण की कुल्हाड़ी के तलै कोन्या धरै। मानवता का जिन्दा रहवण का जज्बा अर मनुष्य के विचार की ताकत संसार का विनास कोन्या होवण दे। फेर हरेक महिला पुरुष नै अपने स्तर पै इस संसार नै बचावण की खातर, अपने आप नै बचावण की खातर मिलजुल कै किमै ना किमै तो करना पड़ैगा। के करां? क्यूकर करां? कद करां? कित करां? ये सारे सवाल सैं जिन पै बैठकै विचार करने की जरूरत सै। फेर फुरसत किसनै सै इन बातां पै विचार करने की? फुरसत हो चाहे ना हो विचार तो करना ए पड़ैगा।
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