सोमवार, 26 सितंबर 2016

धन काला मन काला

धन काला मन काला
सते, फत्ते, नफे, सरिता, कविता, सविता, ताई भरपाई शनिवार नै फेर कट्ठे होगे जन चेतना केंद्र मैं। सरोज के आवण की बाट देखैं थे अक रोजगार गारंटी कानून पै जो कुछ बचर्या सै उसपै बात करनी थी। सरोज का सन्देशा आग्या अक आज उसकी एक और मीटिंग सै इस करकै वा कोनी आ सकदी। खैर बात चाल पड़ी एक ब्याह की। नफे बोल्या - भक्कड़ बाल राख्या था भाई न्यादर क्यां कै ब्याह मैं। सरिता बोली - फेर काला धन के थोड़ा सै उनपै। ताई भरपाई बोली - दो तै बड्डे अफसर अर बीस किल्ले। इन धोरैं धोला धन के थोड़ा सै जो काला धन लावैंगे। सरिता बोली - साच्यी बात याहे सै ताई। चाल मेरी गेल्यां जै कोए बी पेमैंट इननै चैक तै करी हो तै मनै बता दिये। कविता बोली - यो काला धन हो सै कै? सते बोल्या - काला धन वो धन सै जो सरकार कै साहमी घोषित नहीं कर्या जान्ता। उसपै कानून द्वारा लागू टैक्स बी कोन्या दिया जान्ता। ताई बोली - या तो ठीक सै सते। फेर यो काला धन आवै कड़े तै सै? सते बोल्या - धन मतलब धौला धन सैकड़ों, हजारों रास्तों से काला धन बन सकै सै। कुछ रास्ते सैं ज्यूकर घूसखोरी का। सरकारी कर्मचारी, नेता, पुलिस आदि घूस लेवैं सैं अर घूसखोरी का यू पीस्सा, ये घूस घोषित नहीं करते। यो घूस का धन काला धन बन ज्यावै सै। फत्ते बोल्या - सुन्या से भारत सब तै ज्यादा घूसखोर देश है? सते बोल्या - सबते ज्यादा नहीं, म्हारा नम्बर 97वां सै। मतलब लगभग 96 देश हमतै फालतू सूदखोर सैं अर लगभग 60-70 देश म्हारे तै कम घूसखोर सैं। सविता बोली - सते जी थाम काले धन का रिकाट चढ़ारे थे यो बदल क्यूं दिया? सते बोल्या - हां-हां, दूसरा काला धन पैदा करण का रास्ता सै सरकारी खर्च के तरीके तै। म्हारी केंद्र की सरकार हर साल लगभग 6,00,000 करोड़ रुपये खर्च करै सै अर म्हारी प्रदेशां की सरकारें भी कुल मिला के इतना ए खर्च करैं सैं।
ताई बोली - इतना पीस्सा क्यां पै खरच कर्या जा सै? सते बोल्या - देश की सुरक्षा, शिक्षा, कृषि, सड़क, पुल, नहर इत्यादि पै। नफे बोल्या - इस खरच तै काला धन क्यूंकर पैदा हुया? सते बोल्या - एक म्हारे देश के प्रधानमंत्री नै भी मान्या था कि लगभग 85 प्रतिशत रुपइये घोषित कामां मैं कोन्या लागते। बिचौलिये की मदद तै बाबू, ठेकेदार, नेता लोग इसनै हड़प ज्यावैं सैं। यो 85 प्रतिशत अघोषित धन सै मतलब काला धन। सविता बोली - हे मेरी मां, 85 प्रतिशत मतलब - इसका तो औड़ ए कोनी। सते बोल्या - जै साल का सरकारी खरच 10,000 करोड़ रु. होसै तो लगभग 8,50,000 करोड़ रु. हड़प लिये जावैं सैं। 85 प्रतिशत जै फालतू बी मान लिया जावे क्योंकि यो आंकड़ा भी एक नेता का भाषण था अर 50 प्रतिशत भी हड़पने की दर मान ली जावै तो भी सालाना 5,00,000 करोड़ रु. काला धन बनता है आये साल।
ताई बोली - कमाल होग्या। हमनै तो कदे सुण्या नहीं अक म्हारे देश मैं इतना काला धन सै। म्हारे थोड़े से धौले धन की इसकै आगै के बिसात? सते बोल्या - कुछ अर्थशास्त्रियों ने काले धन का अनुमान लगाया सै कि यो म्हारे देश के सकल सालाना उत्पाद का 40 प्रतिशत सै। आज भारत का सालाना उत्पाद लगभग 30,00,000  करोड़ रुपये सैं तो देश की अर्थव्यवस्था मैं 12,00,000 करोड़ रुपये का काला धन खपर्या सै। कुछ दूसरे इस अनुमान नै कम मानै सैं। उनके हिसाब तै काला धन 60,00,000 करोड़ रु. सैं। सविता बोली - सते माड़ी सी ब्रेक लाले। इतना पीस्यां का हिसाब सोच कै मेरा तो दिमाग पाट्टण नै होर्या सै। इतना काला धन न्यौए बनै सै - घूसखोरी, सरकारी खर्चा अर और बेरा ना के के। सते बोल्या - और के आजादी के बाद के 30-40 सालों मैं इस पीस्से की हड़प नै देश मैं केंद्रीय दलों की साथ-साथ प्रांतीय मुख्य राजनैतिक शक्तियों को जन्म दिया अर 1990 तक देश इतना कंगाल बना दिया कि विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की शरण मैं जाणा पड़ग्या। नई उदारीकरण अर निजीकरण की राजनीति शुरू हुई...। सविता बोली - सते, राजनीति की तरफ स्टेरिंग मतना मोड़ै।
हम पहलम काले धन की चरचा आज पूरी करल्यां। सते बोल्या - हां या बात भी ठीक सै। तीजा बड्डा रास्ता काला धन बणावण का सै टैक्स की चोरी। मान लिया मैं एक दुकानदार सूं। हर बिक्री की साथ-साथ मनै बिल बना कर सेल्ज टैक्स काटना चाहिए। अर यू टैक्स सरकार मैं जमा करवाना चाहिये। फेर मैं कै तो बिल कोनी काटता या काटूं सूं भी तो ‘दो नम्बर’ का बिल काटूं सूं अर सेल्स टैक्स का पीस्सा सरकार नै कोनी भेजता। यू हड़प्या हुआ टैक्स काला धन बणज्या सै। कविता बोली - योहे वैट का भी तो झमेला पड़र्या सै ना? सते बोल्या - ठीक समझे। वैट लागू होण पै इसी चोरी असम्भव तो नहीं फेर मुश्किल जरूर हो ज्यागी। मैं मिल का मालिक सूं। मेरी आमदनी 100 रुपइये सै इसपै 18 रुपइये एक्साइज टैक्स बनता है। मैं बिना बिल्टी के अपने माल का ट्रक लदवाद्यूं तो 18 रुपइये बचगे। कै फेर मनै 50 रु. की बिल्टी बनवाई अर सिर्फ 9 रु. का एक्साइज टैक्स भर्या। बस काला धन तैयार। सविता बोली - आपां मकान, दुकान कै जमीन बेचां सां मानो 2 लाख रु. की, फेर सेल डीड बनवाई सिर्फ 50 हजार की। बस काला धन होग्या तैयार। बिदेश तै मशीन खरीदी एक करोड़ की पर बेचण आली कंपनी तै बिल बनवाया डेढ़ करोड़ का मतलब डेढ़ करोड़ का लोन लेकै ताकि 50 लाख रुपइये म्हारे निजी बिदेशी बैंक खाते मैं जमा हो ज्यावैं। काला धन तैयार। हरि की ढालां काले धन की महिमा भी अनन्त सै। मनै बी सारे तरीक्यां का कोनी बेरा। जै किसे नै बेरा हो तै लिख चिट्ठी मैं गेर दिये। काले धन तै मन धौला क्यूकर रह सकै सै? इसका भी कोए जुगाड़ थारे धोरै हो तै मनै बतावण की मेहरबानी करियो

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