सोमवार, 26 सितंबर 2016

म्हारा नौजवान - मतलब युवक अर युवती

म्हारा नौजवान - मतलब युवक अर युवती
आमतौर पै जोश दिवावण आले भाषणां में युवा वर्ग ताहिं बड़े जोर-शोर तै कहया जावै सै अक यू समाज थामनै ए तो बदलना सै। आओ अर सामाजिक बदलाव के संघर्ष में कूद पड़ो। देखियो मेरे बीरा घणी तावल मतना करियो। बदलण तो दुनिया लागे रही है। समाज मैं बहोत तेज़ बदलाव आवण लागरे सैं। जिसनै देखै ओहे गुड़गामा कान्ही मुंह करकै भाज्या जावण लागरया सै। बेरा ना गुड़गामा मैं इसा के बदलाव होग्या। अपने जीवन साथी भी लोग आज कोट की ढाल बदलण लाग लिये। परंपरा के नाम पै सती प्रथा हटकै समाज पै छान्ती जावण लागरी सै। तो देखियो वादे बिना सोचे-समझे डांक मार ज्याओ अर फेर बेरा लागे अक ये तो समाज बदलाव की उल्टी गाड्डी में बैठ लिये। इस समाज बदलाव पै भी बहोत बात करण की ज़रूरत सै। इसपै अध्ययन, गंभीर बातचीत अर चिंतन मनन करण की ज़रूरत सै। खूब सोच-विचार करकै अपना रास्ता चुनियो कदे फेर बाद मैं जल्दबाजी मैं करे गये फैसले पै माथा पकड़ कै रोना पड़ै। देश की आजादी के दौर में बात दूसरी थी। उस वख्त सबका एक निशाना था अक अंग्रेज ताहवणा सै। तो सारे न्यारे-न्यारे विचारां के लोग एका बणाकै जुटगे ताहवण मैं।
आज हालात दूसरे सैं। असली बैरी पिछाण मैं ए कोन्या आंता। आज का असली अर सबतै बड्डा अर सबतै ठाड्डा बैरी सै साम्राज्यवाद का सरगना अमैरिका। फेर युवा वर्ग नै समस्याओं की गंभीरता के हिसाब तै अपणा स्वार्थी अर खुदगर्जी आला नज़रिया छोड कै समाज की व्यापक समस्याओं गेल्यां जुड़ना पड़ैगा। साथ मैं या बात जानना भी उतना ए ज़रूरी सै अक अपना जाथर कितना सै, अपनी क्षमता का के ब्यौंत सै, अपने रुझान किस ढाल के सैं अपनी के सीमा सै। इस सबका हिसाब ला लू कै बहोत समझ-बूझतै फैसला करना पड़ैगा अक आपां नै किस राह पै जाना सै। सार्थक सामाजिक बदलाव के काम मैं हमनै किस स्तर पै जुड़ना सै, किस क्षेत्र का चुनाव करना सै, अर किस संगठन मैं काम करना सै, किसका साथ देना सै, किसका साथ नहीं देना सै। इस बाबत खूब सोच विचार के फैसला लेना चाहिए। अध्ययन, चिंतन, बातचीत, सोच-समझ के फैसला लेवण के काम पै इतना जोर क्यूं दिया जावण लागरया सै? इसका कारण यो सै अक जो लोग बिना सोचे-समझे क्षणिक आवेश मैं बह सामाजिक बदलाव के क्षेत्र मैं आज्यां सैं वे आमतौर पै जल्दबाजी मैं गलत फैंसला करलें सैं अर कै कुछ गलत किस्म के लोगां की गेल्यां होलें सैं अर फेर बाद मैं अपने आसपास की विसंगतियों नै देखैं सैं तो पूरी ढालां समाज नै बेहतर बनावण के प्रयासां तै दूर हट ज्यावैं सैं। म्हारे हरियाणा में कोए गाम इसा नहीं पावैगा, जिसमैं यूथ क्लब नहीं बने। फेर दो-तीन साल तो सक्रिय रहे अर गाल साफ करी, वालीवाल का ग्राउंड बना लिया, इसे-इसे काम करे पर फेर बंद होगे अपने आप। दो बात कही जा सकैं सैं - एक तो इन कलबां मैं युवा लड़की शामिल नहीं करी किते बी अर दूसरा इसका अपना साफ परिप्रेक्ष्य नहीं था। आदर्शवाद घणी दूर कोनी चाल्या।
इन नौजवानां मैं निराशा बहोत गहरी पैदा होगी थी। कदे-कदे अर कितै-कितै तो खुद बी भटकाव के कसूते शिकार होगे। अफसोस की बात अक हरियाणा इसे आदर्शवादी युवावां की समाज सेवा तैं बहोत तावला वंचित होग्या। कितना आच्छा होन्ता जै ये नौजवान अर ये कलब उम्रभर समाज नै बेहतर बणावन के काम में लागै रैहन्ते। आज हरियाणा का समाज जटिल समस्यावां तै घिरया खड्या सै। बेरोज़गारी, छांट कै महिला भ्रूणहत्या, सामाजिक असुरक्षा, शिक्षा अर स्वास्थ्य क्षेत्र की समस्याएं मुंह बाये खड़ी सैं। इन समस्यावां का सामना करण की खातर हरियाणा नै इसे क्षणिक आवेश में आकरकै उछलकूद मचावण आले युवक-युवतियां की ज़रूरत नहीं सै बल्कि हरियाणा नै वे धीर गंभीर युवक-युवती चाहिए जो जीवनभर भरपूर मेहनत करकै सार्थक सामाजिक बदलाव के काम मैं लागे रहवैं। इसकी खातर हम कितना त्याग कर सकां सां, कितना बलिदान कर सकां सां यो किसे माणस की अपनी स्थिति, अपनी सीमावां तै तय होवैगा। हम एक साधारण गृहस्थ का जीवन जीन्ते होये भी अपने आसपास के समाज नै बेहतर बनावण के प्रयास मैं निरंतर लागे रह सकां सां। ज़रूरत सै अपनी समझ बनावण की, निरंतरता अर लगन तै काम करण की अर इस हिंसा अर नशे के पैकेज की मार तै बचण की।
युवक-युवतियां की सबते आच्छी बात या हो सै अक इन दिनां म्हारे शरीर की साथ-साथ म्हारे आदर्श भी जीवित हो सैं। जो आदर्श ऊंचा मान लिया, जो काम पवित्र मान लिया, उसकी खातर कुछ बी करने की खातर त्यार हो ज्यांगे। कसूती तड़प हो सै इस उम्र मैं। योहे कारण सै अक युवा वर्ग मैं अनुभव की कमी होते होए भी बार-बार सामाजिक बदलाव मैं उसकी महत्वपूर्ण भूमिका देखी गई सै। म्हारे अपने देश भारत मैं भी युवा वर्ग की गौरवशाली भूमिका रही सै। देश की आजादी की लड़ाई मैं तो खैर युवा वर्ग की सराहनीय भूमिका रही थी, आज़ादी के बाद भी शोषण और अन्याय के खिलाफ अनेक सार्थक जनआंदोलनां मैं युवक-युवतियां की महत्वपूर्ण भूमिका रही सै। फेर आज निशाना साफ ना होवण करकै कई बै अपन्यां पै हमला होज्या सै। दूसरी ज़रूरी बात या सै अक टेलीविजन, सिनेमा, विज्ञापनां आदि के माध्यम तै युवा वर्ग पै एक इसा सुनियोजित सांस्कृतिक हमला हो रया सै जो उननै एक अजीब किस्म की बाहर तै आकर्षक लागण आली दुनिया के मोह जाल मैं जकड़ लेना चाहवै सै। युवा वर्ग के आदर्शों को जिस दिशा की तलाश सै उसका दारोमदार इस आधार पर सै अक म्हारे समाज मैं मौजूद दुख-दर्द के मुख्य कारण कुणसे-कुणसे सैं? इन मांतै कुछ कारण तो साफतौर पै अपने आसपास देखे जा सकैं सैं पर कुछ साहमी साफ-साफ कोन्या दीखते पर वे महत्वपूर्ण बहोत सैं। म्हारे समाज मैं दुख दरद का एक मुख्य कारण संपत्ति अर संपत्ति का असमान बंटवारा साफतौर पर दिखै सै। अतः इसे आंदोलन या काम जो गरीब अर कमजोर तबक्यां के आर्थिक अर सामाजिक अधिकारां के लिए संघर्षरत सैं वे सही दिशा के प्रयास सैं। फेर ताश खेलण तै कड़ै फुर्सत सै इतनी गहरी बात परखण की।
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