सोमवार, 26 सितंबर 2016

किस्सा लाडली

किस्सा लाडली
सत्ते, फत्ते, नफे, सविता, कविता, सरिता, ताई भरपाई सारे इकट्ठे हो जाते हैं शनिवार के दिन। इतनी देर में नमिता आती है और कहती है कि आज तो गाम में जन साक्षरता समिति वाले आये हैं। वे सांग दिखा रहे हैं आज वहां चलना चाहिये। नफे बोल्या - नमिता तूं बहू सै इस गाम की, तनै इसका इतिहास कोनी बेरा। नमिता बोली - क्यूं बेरा क्यूं नी। इस गाम मैं पाछले सौ साल मैं सांग नहीं हुआ कदे। यू आर्य समाज का गढ़ बताया जावै सै। फेर यू सांग न्यारा ए सांग सै। नफे बोल्या - किम्मै कहै नमिता। सांग तो सांगै हो सै। नमिता बोली - मनै अखबारां मैं पढ़ी थी बोहर गाम मैं हुआ अर और कई गामां मैं हो लिया। न्यों बी लिख राखी थी अक घणी ए औरत आवैं सै इस सांग नै देखण। नफे बोल्या - ये साक्षरता आले नाश करैंगे गामां के परिवारां का। सांग का अर लुगाई का के काम? आज काल के माहौल का बेरा कोणी के। नमिता बोली - मैं तो देखण जाऊंगी बाकी थारी मरजी। खैर वे इस बात पै सांग देखण गये अक आकै इसपै चर्चा करैंगे। उड़ै स्टेज पै जन साक्षरता समिति के कोओरडिनेटर नै बताया अक यू सांग रामफल जख्मी नै लिख्या सै। रामफल जख्मी अनपढ़ था। साक्षरता अभियान मैं पढ़या अर खाण्ड-कसार सांग की रचना करी जिसमैं अनपढ़ के जीवन संकट का मसला छाया था। ईब इसनै हरियाणा की सबतै गंभीर समस्या छांट कै महिला भू्रण हत्या कै ऊपर यू सांग रच्या सै। सांग कहो इसनै किस्सा कहो या हरियाणा की हरेक बहू की, हरेक छोरी की, हरेक घर-घर की कहानी सै। एक गाम मैं एक राममेहर नाम का किसान रहता था। उसकी पत्नी का नाम रजनी था। राममेहर के ब्याह को 5 साल होगे थे। इस बीच रजनी नै दो लड़कियों को जन्म दिया।
इसके बाद परिवार ने उस पर ताने कसने शुरू कर दिये। राममेहर की मां ने तो साफ-साफ कह दिया अक जै इस बार भी लड़की होगी तो म्हारा तो सत्यानाश हो ज्यागा। कुछ समय के बाद रजनी का अल्ट्रासाउंड करवाते हैं जिसमें पता चलता है कि रजनी के पेट में जो बच्चा पल रहा है वह लड़की है। रजनी के सुसरे नै तो सुणकै गश-सी आज्या सै। परिवार के सभी लोग कहते हैं कि एक छोरा तो होना ए चाहिये। परिवार रजनी का गर्भपात करवाने का मन बना लेता है। रजनी रोते-रोते मना करती है मगर उसके परिवारवाले कहते हैं कि यदि अबोरशन नहीं करवावोगी तो तेरे को घर से निकाल देंगे। रजनी मजबूर होकर अबोरशन के लिए तैयार हो जाती है। रजनी को चलते-चलते विचार आता है कि गर्भ में जो लड़की है वह क्या सोचती होगी? उसकी तरफ से रजनी सोचती है - मत मरवावै मेरी मां, मन्नै दुनिया देखण का चा। तूं सै मेरी मातारी, क्यूं जुलम करै हत्यारी, म्हारी कौन सी होई खता, मनै दुनियां देखण का चा। नफे सिंह पूरी रागनी सुनकर गंभीर हो जाता है। बेटी के विचार जानकर रजनी बतौर मां के क्या सोचती है - सौ सौ मन की झाल बोच रही सूं मन मैं। पूरी रागनी सुनकर नफे सिंह गायक को 50 रुपये देकर आता है। रजनी उस दिन से फैसला कर लेती है कि वह तीसरी लड़की को भी दुनिया में जरूर लायेगी चाहे उसे कितने दुःख झेलने पड़ैं।
राममेहर रजनी को खूब खरी खोटी सुनाता है। घर से निकालने की धमकी देता है। रजनी एक गीत के द्वारा उसे समझाने की कोशिश करती है। मगर राममेहर पंचायत बुला लेता है और रजनी को घर से बाहर निकाल दिया जाता है। रजनी घर से चल पड़ती है और क्या सोचती है - हुए जुल्म कती वा राजपती थी गर्भवती तंग होकै चाल पड़ी। यह रागनी सुनकर वहां बैठी कई औरतें रोनी लगती हैं। कविता भी आंसूं नहीं रोक पाती। रजनी को रास्ते में एक नशेड़ी मिलता है जो छेड़छाड़ करने की कोशिश करता है तो रजनी क्या कहती है - हटज्या छोरे पाछे नै ना तो पिटूंगी जी भरकै। सविता को बड़ा अच्छा लगता है रजनी का शराबी को धमकाना और वह 100 रुपये देकर आती है गायक को। चलते-चलते रजनी को एक बुजुर्ग महिला मिल जाती है और रजनी से इतनी रात में चलने का कारण पूछती है। रजनी एक रागनी के द्वारा अपनी व्यथा सुनाती है। वह बुढ़िया स्कूल में चपरासी का काम करती है। वह एक रागनी के द्वारा अपनी बात रखती है और रजनी को अपने साथ ले जाती है और स्कूल में अपनी जगह रखवा देती है। रजनी के गुम होने के मामले में राममेहर को दस साल के मुकदमे के बाद 7 साल की सजा हो जाती है। सज़ा के दौरान दोनों लड़कियां मर जाती हैं। रजनी तीसरी लड़की को जन्म देती है और लाडली नाम रखती है। लाडली दसवीं पास करके नर्स के कोर्स में दाखिला लेती है और अस्पताल में नर्स की नौकरी करने लगती है। राममेहर सज़ा काट कर आ जाता है मगर टीबी से पीड़ित हो जाता है। वह लाडली वाले अस्पताल में भर्ती होता है। बुजुर्ग महिला बीमार हो जाती है तो रजनी उसे लाडली के पास लाती है। और यहां संयोग से राममेहर और रजनी की मुलाकात होती है। आंसू आ जाते हैं उसकी आंखों में और क्या कहता है - हाथ जोड़ तेरे पांव पड़ज्यां मैं ठावण जोगा कोन्या। सब तरिया तै गिरर्या आंख मिलावण जोगा कोन्या। यह रागनी रजनी को भावुक बना देती है और जनता को भी। लाडली राममेहर के बारे पूछती है तो राममेहर पूछता है - रजनी यह अपनी बेटी है क्या? रजनी कहती है - अपनी नहीं सिर्फ मेरी बेटी सै। यह अपनी बेटी जब होती जब तुम इसे जन्म से पहले खत्म करने की नहीं सोचते। राममेहर इतना सुणकै रोने लग जाता है और अपनी गलती कबूलता है एवं रजनी से माफी मांगता है। तीनों बुजुर्ग महिला के साथ उसी कस्बे में अमन चैन से रहने लगते हैं। सांग खत्म हो जाता है। तीन-चार घंटे क्यूंकर बीतगे सत्ते हर नै बेरा ए कोन्या लाग्या। नमिता बोली - नफे आर्यसमाजी जी आई किमै समझ मैं अक नहीं? नफे सिंह बोल्या - चाला पाड़ दिया नमिता। मनै के बेरा था इसा सांग सै। फेर एक राय सै जै इन साक्षरता आल्यां ताहिं पहौंचा दे तै। नमिता बोली - बता के बात सै। नफे बोल्या - सांग लाडली की जागां किस्सा लाडली करलें तो म्हारे बरगे खामखा सांग के नाम पै सींग नहीं फंसावैंगे। नमिता बोली - ले साक्षरता आल्यां धोरै तो तेरी बात पहोंचै गई होगी। फेर तूं सांग का विरोध जरूर छोड़ दिये।
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