शनिवार, 15 जुलाई 2017

गोदामां मैं सड़ता नाज अर भूखे मरते लोग

गोदामां मैं सड़ता नाज अर भूखे मरते लोग

एक कान्हीं देश के तीन चौथाई लोगां नै पेट भर भोजन नहीं मिलता अर दूजे कान्हीं सरकारी गोदामां मैं 630 लाख टन के लगभग नाज पड़या सै। इसमैं तै कुछ नाज तो 3-4 साल तै लेकै 16 साल ताहिं का पुराणा नाज सै अर लगभग 75 करोड़ रुपइयां का नाज सड़ लिया ईब ताहिं। हैरानी की बात या सै अक जो सरकार बड़ी मुश्किल तै संपूर्ण ग्रामीण योजना के तहत च्यार हजार च्यार सौ चालीस करोड़ रुपइये उपलब्ध करवारी सै, वाहे सरकार गोदामां मैं नाज दबाए राखण की खातर इसकी च्यार गुणा राशि 17000 करोड़ तै फालतू खर्च करण लागरी सै।
म्हारी या प्यारी सरकार रोज लगभग 48 करोड़ रुपइये बस नाज के रख रखाव पै खरच करण लागरी सै। देख्या कितनी चिंता सै म्हारी सरकार नै म्हारे नाज की। नाज धरण खातर जागां थोड़ी पड़गी अर बहोत सारा नाज खुले मैं पड़या सै। गोदामां मैं बंद नाज मां तै लगभग एक चौथाई किसे मुसीबत के बख्त ताहिं बचा कै राख्या जा अर बाकी बच्या औड़ नाज (तीन चौथाई) सस्ती दरां पै राशन की दुकानां पै अर गामां मैं रोजगार की खातर दिया जाणा चाहिए। फेर दिया तो कोण्या। उल्टा इस नाज नै ध्यान मैं राख कै जो स्कीम (सरकारी) बनाई जावण लागरी सै उनतै तो यो साफ जाण पाटै सै अक म्हारी प्यारी सरकार किसानां नै अर ग्रामीण मजदूरां नै छोड़ कै बड्डी कंपनियां अर पीस्से आले सरमायेदारां के हितां की खातर फालतू काम करण लागरी सै। सरकार नै रोला राला पड़े पाछै बड़ी मुश्किल तै थोड़ा सा नाज (50 लाख टन) संपूर्ण रोजगार योजना के तहत रोजगार मूलक कामां पै क्यूकरै खरच करण की इजाजत दी सै।
दूजे कान्ही याहे म्हारी प्यारी फील गुड सरकार इसतै दुगणा नाज सस्ते दामां पै विदेशां मैं बेचण की खातर बड्डी कंपनियां के हवाले कर चुकी सै। ईबै और कोशिश करी जावण लागरी सै अक विदेशां मैं नाज का निर्यात और बढ़ाया जा। देखो रै किसा बुरा जमाना आग्या कि गामां मैं उगाया औड़ नाज गाम नै भुखमरी तै बचावण कि जागां विदेशी व्यापार करण आली कंपनियां की मुनाफाखोरी खातर दिया जावण लागरया सै अर हम बैठे ताश खेलण लागरे सां। अर कहवां सां गेर रै गेर पत्ता गेर। सबतै कसूती बात या सै अक इन कपंनियां ताहिं गरीबी की रेखा की दर तै नाज दिया जावै सै उसे दर पै दिया जावण लागर्या सै। यो नाज बहोत दिनां ताहिं तो गरीबी रेखा की दर तै भी कम कीमत पै इन कंपनियां ताहिं दिया गया। दूजे कान्हीं सरकार नै दो साल पहलम आधे तै भी घणे गरीबां ताहिं गरीबी की रेखा तै ऊपर बता कै उन ताहिं राशन की दुकानां पै सस्ता नाज देवणा बंद कर दिया था। इसमैं सरकार का यो कहणा था कि इन गरीबां नै सस्ता नाज देवणा सरकार नै बहोत खर्चीला पड़ै सै। पर बड्डी कंपनियां द्वारा बड्डे मुनाफे पर विदेशां मैं नाज बेचण की खातर सरकार यो खर्च ठावण नै त्यार सै। इन कंपनियां ताहिं सबतै बढ़िया नाज दिया जावैगा पर इस नाज नै पैदा करण आली ग्रामीण जनता नै राशन मैं कै मजदूरी के बदले मैं कीड़े पड़े औड़ सड़या औड़ नाज दिया जावण लागरया सै। ईबै हाल मैं यू तय करया सै म्हारी सरकार नै अक बड्डी कंपनियां नै उनके अपणे गोदामां मैं 8 लाख टन नाज धरण की खातर 720 करोड़ रुपइये सालाना का ठेका दिया जावैगा।
इस नाज के रख रखाव पै सरकारी गोदामां मैं जो लागत सै उसतै तीन चौथाई फालतू इन कंपनियां ताहिं दिये जावैंगे। ऊपर तै इन कंपनियां ताहिं कई करां मैं छूट दी जागी वा न्यारी। म्हारी प्यारी फील गुड सरकार नै कंपनियां ताहिं यो भी आश्वासन दिया सै अक इन गोदामां मैं जै किसे साल नाज नहीं धरया गया तो भी सरकार उन ताहिं 20 साल ताहिं किराया अर करां मैं छूट देवैगी। आई किमै समझ मैं कि कुणसी तुरूप चाल खेली जावण लागरी सै म्हारी गेल्यां कि न्यों ए पत्ता दाब कै सीप मैं बख्त बिराण करें जाओगे?
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