शनिवार, 15 जुलाई 2017

हमनै तो ताश खेल्लण तैए फुर्सत कोन्या


            हरियाणा मैं आज के दिन महिलावां की जिंदगी तनाव, असुरक्षा, अभाव अर असहायता मतलब लाचारी मैं डूबती जावण लागरी सै। कोए कैह सकै सै महिलावां नै खेलां मैं खूब खंबे गाड़ दिये। पर वे इस करकै नहीं गाड़ पाई अक हमनै गामां मैं खेलण कूदण का उन ताहिं कोए माहौल बणा कै दिया हो, वे अपणी खुबात तै जीत ल्याई मैडल। औरत पै तो शिंकजा और मजबूत होन्ता आवै सै। स्त्री भ्रूण हत्या, दहेज हत्या, इज्जत के नाम पै हत्या का ग्राफ ऊपर नै जावण लागरया सै। यौन उत्पीड़न, बलात्कार, डराना, धमकाना, घरेलू हिंसा, औरतां का अपमान, असुरक्षा अर घुटन इस हद ताहिं बधगी कि लोगां नै न्यूं मान लिया अक ये तो आम बात सैं। आर्थिक संकट दरवाजे पै आण खड़या हुया अर परिवार टूटते जावण लागरे सैं। जीवन के साधन बचे नहीं तो खुली-छुपी वेश्यावृत्ति कान्हीं भी औरत अकेली जावण लागरी सैं। ईब गामां मैं भी इस वेश्यावृत्ति नै तेजी तै अपणे करतब दिखाने शुरू कर दिये।
अराजकता अर मनमानेपन का जो माहौल आड़ै बण्या सै उसमैं महिलावां नै ‘सस्ते मैं उपलब्ध’ अर ‘आसानी तै उपलब्ध शिकार’ की शक्ल मैं देख्या जावै सै। इस आर्थिक असमानता और सामाजिक असमानता के चालते ताकतवर तबके महिलावां की गेल्यां कुछ बी कर सकैं सैं। कुल मिला कै सौ का तोड़ यू सै अक महिलावां का अवमूल्यन हुया सै। गरीब तै गरीब तबक्यां मैं भी अपणे समुदाय अर परिवार के बीच मैं इन महिलावां पै अत्याचार बढ़ै सैं। औरतां नै ‘क्षणिक मजे’ की चीज की ढालां देखना अर इस मजे की खातर इन औरतां ने मौका लागते की साथ घेर लेना बड़ी आसान बात होगी। पाछले दिनां मैं हरियाणा मैं परित्यक्ताओं अर औरतां की साथ संबंधां मैं धोखाधड़ी बहोत बधी सै। ब्याह के दो दिन पाछै के कुछ दिन बाद लड़कियां नै छोड़ देवण की घटना बधण लागरी सैं।
दूजै कान्हीं लिंग अनुपात मैं विषमता के कारण, लड़कियाँ दूर-दूर तै खरीद कै ल्याई औरत पसंद नहीं आई तो उसनै उल्टी छोड़ आये अर उसकी बाहण नै लियाये उसकी जागां। ईब तै औरतां की खरीद फरोख्त के धंधे मैं दलाल बी पैदा होगे। या खरीद फरोख्त तेजी तै रफ्तार पकड़ण लागरी सै। जिब औरतां के हक मैं बोलणिया माणस कै संस्था दीवा लेकै टोहें भी पावणे मुश्किल सैं। हरियाणा के समाज मैं संघर्ष करण आली महिलावां की खातर ‘सपोर्ट सिस्टम’ की जरूरत सै। परित्यक्ताओं, एकल मांओं, अविवाहित महिलाओं, यौन उत्पीड़न की शिकार उजड़ी औड़ महिलाओं, बच्चियों की जरूरतों नै ध्यान मै राख कै समझ कै समाज मैं उनका स्थान बनाना बहोत जरूरी होग्या सै। शार्ट स्टे होम, कामकाजी महिला होस्टल, लड़कियों के होस्टल, मुफ्त जच्चा बच्चा केन्द्र, कानूनी सहायता केंद्र, सलाह केंद्र, तनाव मुक्ति केंद्र, मनोचिकित्सा केंद्र, कौशल विकसित करण आले कार्यक्रम, एकल मांओं के बच्चों की शिक्षा के लिए अनुदान और कर्ज की सुविधा, महिला स्वास्थ्य केंद्र, व्यायामशालाएं, सामूहिक रसोईघर, हिंसा की शिकार महिलावां की खातर कानून अर स्वास्थ्य से संबंधित आपातकालिक व जल्द सेवाओं की मांग समाज मैं ठावणी बहोत जरूरी होगी। ज्योण बी जड़ै सै उसनै इसे सपोर्ट सिस्टम के खड़या करण मैं आपणी मदद जरूर करनी चाहिए अर सरकार पै भी दबाव बढ़ाणा चाहिए इस सपोर्ट सिस्टम के विकास की खातर।
हरियाणा मैं पढ़े लिखे लोगां मैं लिंग अनुपात एक हजार पुरुषों मैं छह सौ सतरह महिलावां का पहोंच लिया था एकबै। या खतरे की घंटी बाज ली हरियाणा मैं, पर लोगों नै ताश खेलण तै फुरसत कोण्या, कै गाल की दो फुट जमीन पै कब्जा करण की जुगाड़ बाजी मैं सैं। इन सारी बातां पर गाम अर शहर के लोगां नै अर महिलावां नै गंभीरता तै सोच्चण की जरूरत सै।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें