शनिवार, 15 जुलाई 2017

जिसकी लाठी उसकी भैंस

जिसकी लाठी उसकी भैंस
जिब तै या सृष्टि रची गई अर माणस नै इस धरती पै पां धरया उसे बख्त तै दुनिया की राजनीति का विधान था अक ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’। फेर सहज-सहज समाज मैं विकास हुया अर लोगां धोरै पीस्सा कट्ठा होवण लागग्या। चीजां के आदान-प्रदान की जगां जिब पीस्से (पूंजी) नै ले ली तो पूंजी किसकै धोरै कितनी से योहे योग्यता का पैमाना शुरू होग्या। या पूंजी सहज-सहज उन लोगां के हाथां मैं कट्ठी होन्ती गई जो औरां की मेहनत का शोषण करकै, औरां नै धोखा दे कै यू पीस्सा कमावण लागे। इसके साथ-साथ एक बात और होन्ती गई अक जिस धोरै पीस्से की ताकत फालतू होगी उसे का राजनीति पै भी कब्जा होन्ता चाल्या गया। राजनीति की चाबी भी पीस्से आले माणसां की गोज में चाली गई। इन पीस्से आल्यां मैं भौतिक संसाधनां नै अपने कब्जे मैं राखण की ताकत बी आगी अर ये पहलवानी ताकत की खरीद भी जितनी चाहवैं उतनी कर सकैं थे। जड़ सौ की बात या सै अक इन सारी बातां का नतीजा यू हुया अक इस पूंजी के राज मैं माणस के मुकाबले मैं माणस के हाथां तैं बणाई औड़ इस पूंजी की ताकत बढ़ती ए चाली गई।
इस पूंजी के राज मैं माणस की कीमत घटगी अर पूंजी की कीमत बढ़गी। अर नतीजे के तौर पै माणसां की रोटी, लते अर मकान की बुनियादी जरूरत भी पूरी नहीं करी जा सकी। पूंजी के राज मैं धनी वर्ग एकला माणस के मूल्यां मैं गिरावट कोण्या ल्यावन्ता, बल्कि मानवाधिकारां की कोताही भी बरते सै। पूंजी के राज के इस चरित्र नै इस दुनिया मैं एक नये राज के विचार को जनम दिया। कार्ल मार्क्स नै मानव-इतिहास का वैज्ञानिक सिद्धान्त बनाया। एक इसे राज का सपना लिया जिसमैं माणस की समता अर गरिमा की पक्की गारंटी करी जा सकै। पूंजी के राज के मुकाबले जनता का राज हो, पूंजी के राज मैं जड़ै भौतिक संसाधनां, परिसंपत्तियां अर धन का इस्तेमाल मुट्ठी भर धनी लोगां की खातर हो सै, वो ना रहै। कई रमलू बरगे न्यों कैहदें सैं अक ये के होवण की बात सैं। फेर इस बात मैं शक नहीं अक जड़ै बी जनता का राज असल मैं आया उड़ै उसकी भोजन, लत्ते, कपड़े, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, वृद्धावस्था संरक्षण आदि जरूरत का पूरा करण का काम खूब हुया। जनता के इस राज मैं इन पूंजी के राज आल्यां नै प्रपंच रचकै अर जनता की कमजोरियां का फायदा ठाकै, जनता का राज चलावण आल्यां मैं भ्रम पैदा करकै, उन देशां मां तै जनता का राज खत्म करकै फेर हटकै पूंजी का राज चला दिया। पूंजी के राज आल्यां नै ठाड्डा प्रचार करया अक पूंजी के राज तै न्यारा जनता की मुक्ति का और कोए भी राह कोण्या। कई देशां के जनता के राज, साम, दाम, दंड, भेद के गुर अपणां कै पूंजी आल्यां नै ढाह दिये।
आज पूरी दुनिया मैं पूंजी के राज आल्यां की बहोतै ठाड्डी यूनियन सै। जिसका प्रधान अमरीका सै अर ये ‘जी-सेवन’ के देश पूरी दुनिया के गरीब देशां पै भी अपणे बरगे अपणे तै माड़े पूंजी आल्यां के मांह कै पूरी दुनिया मैं पूंजी के राज का घघाटा ठारे सैं। विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष अर विश्व व्यापार संगठन की त्रिमूर्ति इनका सबतै कारगर हथियार सै। इस त्रिमूर्ति का काम यो सै अक पूंजी का राज पूरी दुनिया मैं छाज्या अर जड़ै कड़ै भी जनता का राज थोड़ा-घणा बचरया सै अर कै हटकै बणण की आस सै उड़ै यू जनता का रोज मूंधा मार दिया जावै। बाणगी खातर अमरीका को बहुराष्ट्रीय कंपनी सै माइक्रोसौफट अर उसका मालिक सै विलियम गेट्स अर उसकै धोरै सै 90 बिलियन अमरीकी डालर मतलब 387000 करोड़ रपिये की कीमत की धरोहर। आज पूरी दुनिया मैं 457 अरबपति सैं जिनके हाथ मैं धरती के लगभग आधे देशां के सकल घरेलू उत्पाद के बराबर की धन दौलत सै। दुनिया के सबतै अमीर 225 लोगां धोरै लगभग एक ट्रिलियन अमरीकी डालर (42,00,000 करोड़ रपिये) की संपत्ति सै जो दुनिया के 250 करोड़ गरीब लोगां की आय के बराबर सै। भारत मैं टाटा धोरै 37510 करोड़ रपिये बिड़ला के धोरै 19345 करोड़ रपियां की परिसंपत्तियां सैं। अर अडानी अम्बानी जी के तो कहणे ए के सैं।


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