आओ आपणे मांह बी झांक कै देखलें
म्हारा गाम, म्हारा भाईचारा, म्हारी इज्जत, म्हारे बालक, म्हारा गुहांड, म्हारे बेटा-बेटी, म्हारी बहु, म्हारे बाहण अर भाई। इन रिश्तयां का खोखलापन कति सबकै साहमी आ लिया। पर चाला तो योह सै अक हाम फेर बी इन रिश्तयां की कोली भरे बैठे सां। फेर गाम की इज्जत के बारे मैं म्हारी समझ के सै, इसतैं भी कई बात जुड़ै सैं। गाम की इज्जत के मायने के सैं, इस पर चर्चा अर बहस की जरूरत सै। आज गामां का के हाल हो लिया, इसपै चर्चा करण की जरूरत सै।
इतना बुरा हाल क्यों हो लिया इस पर भी बहस चलावणी चाहिए। म्हारे मन तो साफ सैं फेर क्यों इतनी गंदगी फैलगी? म्हारी नजर मैं तो कोए खोट नहीं फेर बलात्कार करण आले लोगां की हिम्मायत मैं एसपी अर डीसी कै ट्रॉली भर भर कै कूण ले ज्यावैं सैं? दारू पीवणीयां, पीस्से खावणिया, लड़की गेल्यां छेड़खानी करणियां नै सरपंच कूण बणावै सै? गाम मैं सुलफा, दारू अर स्मैक कूण बिकवावै सै? गाम मैं वेश्यावृत्ति कूण फैलावै सै? गाम की छोरियां अर बहुआं की गेल्यां भद्दे मजाक कर टोंट कौण कसै सै? बाहण की गेल्यां चाचा कै मामा कै पड़ोस का छोरा अवैध संबंध क्यूं बणावै सै? बहू की गेल्यां सुसरा क्यों गिरकावै सै? एकली देख कै बहू की इज्जत पै हाथ क्यों उठावै सै?
खेत-क्यार मैं कमजोर तबक्यां की औरतां गेल्या जोर-जबरदस्ती कौण करता पावै सै? नामर्दी नौजवानां मैं क्यों बढ़ती जावै सै? बाहण-भाई के रिश्ते बच कड़ै रहैं सैं? आज ताहिं किसे ऊंची जाति के खाते-पीते परिवार ताहिं फांसी का फतवा म्हारी पंचायतां नै उसके छोरे ताहिं क्यंू नहीं सुनाया? बिगाड़ करण मैं सबतै आगै सै यू छोरा। सबनै बेरा। फेर तलै ए तलै सब किमै चालै सै। ऊपर दिखाई नहीं देवणा चाहिए। जै इतनी ए चिंता सै इन पंचायतां नै गाम की इज्जत की तो इनपै क्यूं ना फांसी का हुकम? इतनी खामी आगी गामां मैं उन पर तो कदे पंचायत नहीं अर जो बालक नौजवान अपनी मर्जी तै ब्याह करकै घर बसाना चाहवैं सैं वे समाज मैं बिगाड़ करते दीखैं सैं इन असली गाम बिगाडुआं नै। एक हरिजन का छोरा अर किसी बड़ी जात की छोरी उसै गाम की आपस मैं ब्याह करलें सैं तो उन ताहिं मौत का फतवा दे दिया जावै सै। जहर दे कै मार दिये जावैं सैं। छोरी नै मामा कै खन्दा देंगे अर दस पन्दरा दिन पाछै कै म्हिने पाछै बेरा आवैगा गाम मैं, अक बिमला के पेट मैं चाणचक दर्द हुया अर वा मरगी। सारा गाम जाणै सै अक वा मारी गई सै? उसके मारण आल्यां नै उस ताहिं मारण का हक किसनै दिया? अन्तरजातीय ब्याह करया, दोनूं 18 साल तै फालतू उमर के तो गाम तीसरा तेली कूण? कानून कहवै सै अक 18 साल तै ऊपर के दो व्यस्क आपस मैं ब्याह कर सकैं सैं तो फेर ये पंचायत क्यूं रोज मौत के फतवे देवण लागरी सैं इन नौजवानां नै? म्हारा कानून, म्हारे अफसर, म्हारी पुलिस अर म्हारे नेता क्यूं इन फांसी का हुकम सुणावण आले सफेद पोश बदमाशां का विरोध नहीं करते? क्यूं इन पर कानूनी शिकंजा नहीं कस्या जान्ता? आपस मैं ब्याह करणा जुल्म कड़ै सै? जै जुल्म नहीं तो फेर ये ब्याह करणिये रोज क्यूं फांसी तोड़े जावण लागरे सैं? क्यूं हम चुप्पी साधरे सां? हमनै के हक सै किसे की ज्याण लेवण का? बहोत हो लिया। ईब तो इस बर्बरता का खात्मा होणा ए चाहिए। किसे नै किसे नै तो आगै इन नौजवानां की हिम्मायत मैं आणा पड़ैगा। खूंटा ठोक तो लिया आ बाकी थारा थामनै बेरा होगा।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें