शनिवार, 15 जुलाई 2017

खाप कितै सुणती हो तै


आजकाल खापां का खूबै रोला सै अखबारां मैं। आज फलाणी खाप नै जौन्धी मैं पत्नी-पति ताहिं राखी बान्ध कै बाहण बणकै रहवण का फतवा दे दिया। आज राठधाने मैं तथाकथित पंचातीयां नै छोरा-छोरी ताहिं फांसी लाकै मारण का फतवा दे दिया। कितै की खाप की पंचायत नै श्योरान अर काद्यान के ब्याह शादियां के मामले पै फतवे सुणा दिये। कदे खाप की पंचायत नै महिला के सासरे अर पीहर की जायदाद मैं हक कै खिलाफ फतवे जारी कर दिये। कहवण नै हो सकै सै इन खापां की हरियाणा में किसै बख्त पै कोए सकारात्मक भूमिका भी रही हो पर ईब पाछले 15-20 साल के अरसे पै नजर मारकै देखी जावै तो दिल कांप ज्या सै। मध्य युग के बर्बर समाज की याद ताजा होज्या सै। ये खाप घणखरे मामल्यां मैं महिला के हकां के विरोध मैं खड़ी दिखाई देवैं सै। बेरा ना के कारण सै। तालिबान के फतव्यां नै तो आपां सारे रोज रोवां सां पर इन खापां के 16वीं सदी के फरमाना नै आपां सराहवां सां। बात किमै जंची नहीं। कितै ना कितै किमै ना किमै खोट तो जरूरै सै। इन खापां का विकास विरोधी अर महिला विरोधी अर म्हारे नागरिक समाज के भीतर दिये म्हारे हकां का विरोध करण आली मानसिकता नै कोए भी इन्सानियत का मानवता का थोड़ा-सा भी गुर्दा राखणिया माणस क्यूंकर ठीक बता सकै सै? आपां इन खापां की तरफ तै पगड़ी बांध कै अपणी झूठी शान शौकत की गफलत तै 2001 की जनगणना की मैं पूरी दुनिया मैं उछाल ली। इनकी न्यों की न्यों कै कोली भरकै अर इननै जारी राखणा घणा घटिया काम सै अर जिब इसकी कोली पढ़े-लिखे माणस अर बुद्धिजीवी अर वायस चान्सलरां बरगे लोग भरकै खड़े हौज्यां तै समझो नागरिक समाज नै बहोतै भार्या खतरा सै।
पड़ाणा (जींद के एक गांव में) बड्डे गोत की छोरी अर छोटे गोत का छोरा कितै चले गये। बड्डे गोत आल्यां नै बदला लेवण खात्तर छोटे गोत आल्यां (छोरे की बाहण) की छोरी गेल्यां सबकै साहमी गाम बिचालै बलात्कार कर्या। इसतै नीच काम यू गोत के कर सकै था। अर ये गोत अर खाप की पंचात आले अर म्हारे नेता जो इन खापां के रूखाले सैं कति दड़ मारगे अर इस बर्बर कांड पै एक शब्द भी नहीं बोले। इस वोट की घटिया राजनीति नै उनके मुंह कै ताले ला दिये थे। आज हरियाणा मैं 2001 की जनगणना के हिसाब तै महिलावां की संख्या घटती जावण लागरी सै। अल्ट्रासाउण्ड तैं बेरा पाड़ कै छोरी नै पेट मैं ए खत्म करण का घटिया काम हरियाणा आले बड़ी श्यान तैं करैं सैं। इसपै ये गोतां की अर खापां की पंचायत क्यूं ना बोलती? ये पंचाती न्यों कहवैं सैं के होग्या ये थोड़ी होगी तै आच्छा ए सै कीमत बध ज्यागी। ईब इननै कूण समझावै अक इनपै अत्याचार बधैंगे इनकी कीमत नहीं बधै। भाली गाम मैं सुण्या सै तीन जणे मध्य प्रदेश तै पीस्से देकै बहू ल्याये सैं। औरत की भी गां-भैंस की ढालां बोली लागण लागगी इसनै कीमत बधणा मान्या जा सै तो इसे माणसां की बुद्धि का दिवाला ए पिट लिया। जो माणस हरियाणा के समाज मैं सुधार चाहवै सैं उननै सोचणा तो चाहिए अक इन गोत अर खापां की पंचातां गेल्या दो-दो हाथ करे जावैं ताकि इनकी सोच ठीक होज्या।

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