जोंधन खुर्द में जो कुछ हुआ उससे सभी पढ़ा लिखा वर्ग वाकिफ है। इससे घटिया और पिछड़ी मानसिकता का प्रतीक शायद ही पिछले बीस साल मैं हरियाणा में देखने को मिलता हो। बहुत से गांव में महिलाएं जागरूक हुई हैं और अपनी बातें कहने के लिए मुंह खोला है उन्होंने। जोंधन खुर्द की इस घटना को पिछड़ी विचार व सोच वालों ने तो खत्म सी ही मान लिया। परन्तु यह खत्म होने वाली घटना या बात नहीं है। यह पिछड़े और अगाड़ी विचारों का संघर्ष है जो पहले भी समाज में चला है, आज भी चल रहा है और आगे भी जारी रहेगा। एक महिला गांव के एक पंचाती से कुछ सवाल जवाब इस बारे में करती है और क्या कहती है भला -
सन्तरा -
जोंधन खुर्द मैं के हौया मनै खोल बतादे सारी आज
पंचाती -
रिवाज तोड़ कै घणी पुराणी जात तारली म्हारी आज। (टेक)
वार्ता - दो गोतों में पांच सौ साल पहले यदि भाईचारे की कोई बात हुई थी तो इसका मतलब यह तो नहीं की वह पत्थर की लकीर हो गई। पहले बहुत सी बातें हम अज्ञानवश करते थे मगर अब ज्ञान का फैलाव होने के कारण हम उन्हें छोड़ रहे हैं। पहले दूसरी जात में शादी करना बहुत बुरा माना जाता था मगर अब हम कर रहे हैं। क्या ऐसा करने से कोई पहाड़ टूट पड़ा? सन्तरा गांव के पंचाती से पूछती है कि गांव में रोजाना बलात्कार हो रहे हैं तो इन पंचायतियों को सांप क्यूं सूंघ जाता है? तब गांव की इज्जत का सवाल क्यूं पीछे चला जाता है? गांव में सबसे ज्यादा जमीन पर कब्जा करने वाला जात बाहर क्यों नहीं किया जाता? गांव पंचायत का सारा पैसा हड़प कर जाने वाले लोगां का सामाजिक बहिष्कार ये पंचायतें क्यों नहीं करती? क्या कहती है भला -
दो गोतां का किमै जिकरया होया
खोल कै मनै बात बता
गामां के मां बलात्कार रोज़ाना
क्यों ना होती पंचात बता
पंचात होज्या तो छोरी नै
दाबैं करैं ठाडडे की हिमात बता
जमीनां पै नाजायज कब्जे
इनकी ऊंची क्यों जात बता
बीर मरद के रिश्ते पै ढाया
जुल्म कितना भारी आज
उनके हक मैं मत ना बोलै
बणकै सेठ कुठारी आज
पंचाती
वार्ता - सन्तरा के सवाल सुनकर पंचाती गांव की इज्जत की दुहाई देने लगता है और कहता है कि एक ही गांव में यदि शादियां होने लगेंगी तो गांव उजड़ जायेंगे तबाह हो जायेंगे। हमें गोत नात का ध्यान तो रखना ही पड़ेगा ना। इस अधर्म के होते हुए कोई भी सच्चा इंसान कैसे चुप रह सकता है। यह पूरे जाट समुदाय का मामला था और दो गोतों के भाईचारे का सवाल था।
वह पंचाती क्या कहने लगा भला:
पुराने रूढ़िवादी विचार बता
क्यों मखौल उड़ावै म्हारा
म्हारे साहमी मत ना पड़ो
तम हौ ज्याओ नौ दो ग्यारहा
पाणी मैं बैर मगरमच्छ तै
थमनै पटज्या बेरा सारा
पांच सौ साल पुराणा इन
दो गोतां का यो भाइचारा
आपस मैं ब्याह रचा लिया क्यूं
अकल मारगी थारी आज
सही और नई-नई बातां की
जनता लेरी सै उडारी आज
सन्तरा -
वार्ता: सन्तरा पंचाती की बात सुणकर पूछती है कि तुम्हें अपनी कौम के गोत नातों की इतनी चिन्ता क्यों है? हमारे ही हरियाणा में जिस कौम में चाची और बुआ की लड़की से शादी करना गौरव समझा जाता है उस कौम का सामाजिक सम्मान पिछले पचास साल में बढ़ा है कम नहीं हुआ है। हमारी ही जाटों की कौम में गाम की गाम में बसने वाले गोतों में आज शादियों का रिवाज है जिसका जीता जागता उदाहरण चौटाला गांव है। इस जोंधन गांव के मामले पर ताऊ की चुप्पी बहुत अखरने वाली है। हमारी ही जाटों की कौम में पंद्रह बीस साल पहले तक नानी का गोत भी ऊकाया जाता था। मगर आज नहीं क्यों? नये बास में कुछ घर दहिया के हैं मगर वहां के मुख्य गोत के लोगों की शादियां दहिया में होती थी और हो रही हैं। भाई और बहिन दहिया में ब्याहे जाते रहे हैं वहां तो फिर जोंधन खुर्द में यह बवाल क्यों? सन्तरा पूछती है कि नानी का गोत ना ऊकाने का फैसला करने के लिए कौणसी पंचायत हुई थी? क्या कहती है भला-
कई कोमां मैं चाची बुआ के घर मैं
ब्याह कराया जावै
इसतै हटकै ब्याह होवै तो
छोरी मैं कोए खोट बताया जावै
आज किस फैसले तहत
नानी का गोत ना ऊकाया जावै
चौटाला गाम मैं आपस मैं क्यों
उड़ै ए ब्याह रचाया जावै
दुनिया चाँद पै जाली जोंधन
खुर्द पाछै जाती जारी आज
पंचाती -
वार्ता: पंचाती के पास कोई ठोस तर्क या बात नहीं मिलती संतरा के सवालों का जवाब देने के लिए। और हरियाणा का मर्द जब निरूत्तर हो जाता है तो वह मार पिटाई पर उतर जाता है। पंचाती भी जिद्द में आकर यही कहता है कि पंचात का फैसला सही है उसे अब नहीं बदला जा सकता। संतरा कहती है कि इस फैसले से वह पूरा परिवार तबाह हो जाएगा। रोजगार है नहीं, गांव से पंचायत ने निकाल दिया तो अब वह परिवार कैसे जिन्दा रहेगा? पंचाती जिद्द पे अड़ जाता है आर क्या जवाब देता है।
भाई बाहण की ढालां रहवैं
गाम नै फैसला सही सुनाया था
कुछ जात गोत बिगाड़ आगे
उननै फैसला यो उल्टाया था
बीर मरद बणे रहवैंगे
बहिष्कार का यो ठप्पा लाया था
रीत पुरानी बचा लई जिनपै
थमनै यो तीर चलाया था
सुणकै थारी बात संतरा मेरी
तबीयत होगी खारी आज
थारे इन पिछड़े विचारां नै
समाज की इज्जत तारी आज
सन्तरा
वार्ता: सन्तरा पंचाती से पूछती है कि क्या हाथ गल जाने पर मानव की जिन्दगी बचाने के लिए उसके हाथ को काट कर अलग नहीं कर दिया जाता? समाज विकास का दस्तूर है कि जो पुरानी चीजें आज प्रासंगिक नहीं हैं उनका खत्म होना लाजमी बात है उनके बारे में भावुकता से काम नहीं चल सकता। बैल की खेती थी हरियाणा में। बैल गऊ का जाया था तो कौन सी पंचायत में फैसला हुआ था कि बैल की खेती नहीं करेंगे और ट्रेक्टर की खेती किया करेंगे? यह पंचायत क्यों चुप रही उस वक्त और अब बखेड़ा खड़ा कर रही है। क्या पूछती है भला -
इतना खयाल राखिये पंचाती
पुराणा सही ना होता सारा
हाथ जै गल ज्या जा तो
पूरे शरीर नै खतरा होज्या भारया
सौला हाथ भी पड़ज्या
काटना चाहे हो कितना ए प्यारा
कानून भी म्हारा साथी सोच ले
भूंडा सै जेल का नजारा
रणबीर सिंह बरोने आले की
या कलम पुकारी आज
मनै थारी बात ठीक लागती
पर जागी रोटी मारी आज
पंचाती -
वार्ता - संतरा थारी सारी बात ठीक सै फेर भी गोत नात का मामला इबै चालैंगा। काल अखबार मैं थी अक श्योरान खाप में भी ऐसा ही कुछ हो रहा है और लोग इकट्ठे हो रहे हैं। संतरा कहती है कि ये वे जात के ठेकेदार कट्ठे हो रहे हैं जो मेडिकल में आने के बाद खून चढ़वाते हुए उन खून देने वाले की जात के बारे में कभी तहकीकात नहीं करते। ऐसे लोगों ने अपनी लीडरी चमकाने के लिए हमारी भावनाओं से खिलवाड़ करने का ओछा काम अपने हाथ में लिया हुआ है और इसमें सबसे ज्यादा उत्पीड़न महिलाओं का किया जा रहा है। देखना यही है कि हमारी राजनेता और हमारा कानून कब तक चुप्पी साधे रहता है।
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