कीसी हो केंद्र की सरकार
सत्ते फत्ते अर नफे सत्ते हर कै घरां बैठे बतलावण लागरे थे। सते की बहू सविता अर नफे की भाभी कमला भी उड़ै आगी। नफे अर उसकी घर आली खजानी राजस्थान मैं तीन चार दिन ला कै आये थे खजानी के पीहर मैं। सत्ते बोल्या - सुणा कमला के हाल चाल सैं? कमला बोली - लैक्शनां का चर्चा जोरां पै था इबकै तो।
राजस्थान के लोग कीसी सरकार चाहवैं सैं? कमला बोली - राजस्थान आल्यां का तै मनै ना बेरा वे कीसी सरकार चाहवैं सैं फेर सविता अर गाम की कई और लुगाई एक दिन बैठ के जरूर बतलाई थी अक म्हारे देश की कीसी सरकार होणी चाहिए?
सत्ते बोल्या तो आज थाम अपनी भड़ास काढ़ल्यो। फत्ते बोल्या - या तो आच्छी बात सै, हमनै तो ताश खेलण तै फुरसत ना ईसी बातां पै विचार करण की। हां बोलो। कमला अर सविता बोली - हमतै ईसी सरकार चाहवां सां जो -
अमरीका कै आगै गोडे ना टेकै
इराक मैं सेना नहीं भेजै
आजाद अर गुटनिरपेक्ष बिदेशी नीति अपनावै
पूरे देश के हितां की रुखाली हो
धार्मिक कट्टरवाद फैला कै लोगां नै ना जलवावै
दुलीना कांड ना होवण दे। जाति-विद्वेष ना पैदा करै
भाषा के नाम पै लोगां नै ना लड़वावै
गरीबी का पक्का इलाज करण की गारंटी करै
भूख तैं मरण आल्यां का पूरा हांगा लाकै राह टोहवै
बेरोजगार छोरे-छोरियां ताहिं बेरोजगारी भत्ता देवै
भ्रष्टाचार नै जड़ तै पाड़ बगावै
देश के कानून बिदेशियां के हक मैं ना बदलै अर देश की आम जनता के हकां की रुखाली करै
सार्वजनिक क्षेत्र के मुनाफे मैं चालण आले कारखाण्यां नै कति ना बेचै
काला बाजारियां नै जेल मैं ठोक दे
खेती मै सरकारी निवेश ताहिं बढ़ावा देवै
सिंचाई सूखा राहत का इंतजाम करै अर गाम मैं रहणियों के रोजगार का इंतजाम करै
फसल की ठीक कीमत तय करै
डब्ल्यू टी ओ की दाब मैं ना आवै
खेत मजदूरां खात्तर संसद मैं कानून पास करै
भूमि-सुधार कानून का सही इस्तेमाल करै
जन-वितरण प्रणाली नै ठीक तै हटकै चालू करै
सबके स्वास्थ्य की गारंटी दे
बारहवीं ताहिं की शिक्षा सबनै मुफत देवै
संसद मैं अर विधानसभा मैं महिलावां खातिर एक तिहाई सीट रिजर्व करवावै
हड़ताल का अधिकार बरकरार राखै
बिजली का निजीकरण रोकै
नदी का कटाव रोकण की खात्तर पूरा ध्यान देवै। अर दूरगामी योजना बनावै।
फत्ते बोल्या - ईसी सरकार के न्योंए थोड़े बणज्यागी? इसकी खात्तर तो कसूते पापड़ बेलने पड़ैंगे। सविता बोली - हम तो त्यार सैं थाम आपणी बताओ? नफे कै गलै नहीं उतरी ये सारी बात। उसकी पार्टी का ब्योंत नहीं था इन बातां मां तै दो बी पूरी करण का। बात नै घुमा कै बोल्या - कड़ै सै ईसा राज? कमला सहज दे सी बोली - जिब देखण का मन बणावैगा तो ईसा राज कड़ै सै इस बात का बी बेरा तो लाए लेगा। सते बोल्या - जो इसी सरकार कितै नहीं बी सै तो के होग्या। सोच्चण मैं अर बिचार करण मैं के हरजा सै। देश आजाद करावण की बात भी तो पहलम बिचार मैं आई होगी उसतै पाच्छै अमल शुरू हुया होगा?
सविता बोली - आज नहीं तो काल इन बातां पै गौर तो करणा ए पड़ैगा। ये जो सोच्चण के नाम पै दिमागां कै ताले ला राक्खे सैं ये खोलने तो जरूरी सैं। नफे बोल्या - के धिंगताने खुलवावैगी? कमला बोली - पहलम तै मिलकै सोच विचार करांगे अर फेर सबनै साथ ले कै चाल्लांगे। कोए एतराज? नफे बोल्या - फेर कीसा एतराज।
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