सते, फत्ते, नफे, कविता, सरिता, सविता, आये शनिवार की ढालां ईबकै बी धापां की बैठक में कट्ठे होगे। बात सत्ते नै शुरू करी अर बोल्या - नफे सिंह भाई के रहया थारे उस मामले का। नफे बोल्या - के रहया छोरा छोरी का तो बेरा नहीं पाट लिया अर पंचायत नै दोनूं घरां का होक्का पाणी बंद कर दिया अर पिटाई करी। दोनूं घर-गाम छोड़गे। सरिता बोली - फेर न्यूं गाम की गाम मैं क्यूंकर काम चालैगा? सविता बोली - चौटाला गाम के गाम मैं जिब ब्याह होवण लागरे तो म्हारे गामां मैं क्यूं नहीं हो सकदे? फत्ते बोल्या - बात तो बिचार करण की सै। जिस बात नै आपां इतनी घटिया मानां सां उसे बात नै करणिया गाम नै हरियाणा ताहिं दो मुख्यमंत्री अर एक डिप्टी प्राइम मिनिस्टिर दिया सै। पुरानी परंपरावां नै बी आज एक बै हटकै सोच्चण का अर उनपै बिचार करण का बख्त तो आ ए गया। सविता बोली - याहे तो कमजोरी सै म्हारी। सत्ते बोल्या - आर्यभट्ट प्राचीन भारत का पहला गणितज्ञ-ज्योतिषी था जिसनै पूरी दुनिया ताहिं जीरो का ज्ञान दिया। आर्यभट की सबतै बड्डी बात या थी अक उसनै भूभ्रमण का सिद्धांत सबतै पहलम भारत मैं दिया। नफे बोल्या - होगा इसका म्हारे तै के लेना देना?
सत्ते बोल्या - यू ए तो रोला सै। हम प्राचीन संस्कृति, प्राचीन परंपरा की बात करां अर उसके बारे मैं जानकारी जीरो हो तै हमनै कोए बी भका सकै सै इस पुरानी परंपरा के नाम पै। अर सबतै दिलचस्प बात आर्यभट के बारे मैं या सै अक जो कुछ आर्यभट नै अपणी किताब मैं कहया उसनै तोड़-मरोड़ कै पेश करण की बहोत कोशिश करी। आर्यभट के ग्रंथ मैं जड़ै-जड़ै भूः अर कु (पृथ्वी) शब्द थे उड़ै-उड़ै वे भं (तारामंडल) मैं बदल दिया गया। दूसरी बात या सै अक उसके ग्रंथ की हस्त लिपियां देश के अधिकतर भागां मैं तै गायब कर दी। उसकी बातां का जिकरा दूसरे बुद्धिजीवियां नै भी करना बंद कर दिया। लोकभय के कारण भास्कर प्रथम (समकालीन या बाद के बुद्धिजीवी) अर दूसरयां नै भी आर्यभट के नये सिद्धांतों की व्याख्या भिन्न प्रकार तै करी।
सोच्चण की बात सै अक यू लोकभय किन लोगां का था? यू भय समाज के उस हिस्से का था जिसके हित साधन मैं आर्यभट का भू-भ्रमण का सिद्धांत बाधक बनकै खड़या होग्या था। यू वर्ग था पुरोहित वर्ग, जिसका हित वेदां, धर्म शास्त्रां अर आर्यभट के एक दो सदी पहलम तैं लिखी जावण लागरी नयी नयी पुराण पोथियों के वचनां की रक्षा के साथ जुड़या औड़ था। आर्यभट का नया भूभ्रमण का सिद्धांत पुरानी मान्यताओं का खंडन करै था। वेदां के अर धर्मशास्त्र के हवाले दे कै ‘अचला’ मतलब ‘पृथ्वी’ का जो लोक विश्वास कायम करया गया था उसनै टिकाए राखण मैं सबतै फालतू हित पुरोहित वर्ग का था। इसे करकै समाज के इस प्रभावशाली वर्ग नै आर्यभट के भू-भ्रमण के सिद्धांत का हर तरियां तै विरोध करया। फेर आर्यभट के सिद्धांत का यूरोप मैं भी प्रसार हुया अर उड़ै कोपर्निकस का सूर्य केंद्र सिद्धांत भी उभर कै आया अर ब्रूनो नाम के बुद्धिजीवी नै घूम-घूम कै यूरोप के नगरां मैं इसका प्रचार करया। रोम के ईसाई धर्माचार्यां के हुकम तै 1600 मैं ब्रूनो को जिन्दा जला दिया गया। आर्यभट के सिद्धांत का भारत मैं विरोध अर यूरोप मैं ब्रूनो का जलाया जाना एकै बात सैं। फत्ते बोल्या - सरिता आई किमै समझ मैं सत्ते की बात अक नहीं? सरिता बोली - समझ मैं आवण की हो तै आवै। सविता बोली - आर्यभट का उदाहरण दे कै सत्ते न्यूं कहणा चाहवै सै अक नये विचार का विरोध हमारे समाज की पुरानी परम्परा मैं भी था चाहे आगै चाल कै उस नये विचार नै कितनाए समाज का भला करया हो। आज यू जो अंतरजातीय ब्याह का मामला सै यू एक नया विचार सै। इसे तरयां गाम की गाम मैं ब्याह का मामला सै। सत्ते का कहवण का मतलब सै कि ये आज के छोरा छोरी तो आर्यभट सैं अर ज्यूकर आर्यभट का विरोध पुरोहितां नै करया वेदां का हवाला दे कै, न्यौए ईसे ब्याहयां का विरोध ये तथाकथित सामन्ती सोच के माणस वेदां कै, पुरानी परंपरा के हवाले दे कै करण लागरे सैं इस पर।
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