शनिवार, 15 जुलाई 2017

जै याही रही चाल, देखियो के होगा

जै याही रही चाल, देखियो के होगा
म्हारे चमचमाते इंडिया मैं इस छलांग मारते माहौल मैं जै 1998 से चालते आवण आले ‘सुराज’ के बख्तां मैं जै कुछ लोग चांद पै नहीं भी पहुंचे तो भी काच्चे काटण लागरे सैं इस बात मैं झूठ कड़ै सै? एक बात तै हो सकै सै या बात म्हारे हरियाणा आले भोले भाले भाई-बाहणां कै के बेरा समझ मैं आज्या। म्हारे देश मैं जितने भी नैगम कर, तट कर आयकर अर केंद्रीय उत्पाद शुल्क भरण आले जितणे भी लोग लुगाई सैं, उनपै कर की मद मैं बकाया 31 मार्च 1998 मैं 47,888 करोड़ रुपइये था। कितना था? सैंतालीस हजार आठ सौ अठासी करोड़। यू पीस्सा 31 मार्च सन् 2002 मैं कितना होग्या बेरा सै? कोण्या बेरा? हां क्यूंकर बेरा लागै, रोटी रोजी तै फुरसत कोण्या अर कै ताश खेलण तै फुरसत कोण्या। जड़ बात या सै कि हमनै इस बात का बेरा लावण की ना तो इच्छा अर ना म्हारे धोरै बख्त इसे काम खातर। ठीक सै ना? तो ले हम बतादें इसका हिसाब। यू पीस्सा मार्च 2002 मैं 86,342 करोड़ था। देख्या च्यार साल मैं दुगणा होग्या। एक अंदाजा यू भी सै कि ईब तो यू पीस्सा 1000 अरब की रेखा पार करग्या दीखै सै। फेर कई न्यों कैहदें सैं जिब करग्या होगा इसका म्हारी सेहत पै के असर सै? इसपै भी बात हो ज्यागी फेर या बात मान तो ल्यो कि 1000 अरब म्हारे सरकार के खजाने मैं आणा चाहिए था ओ कोण्या आया।
एक सोने पै सुहागे आली बात और सै कि म्हारे देश के बड्डे बड्डे कारखानेदार बैंकां का पीस्सा डकारें बैठे सैं। बेरा सै कितना पीस्सा सै यो? ईब न्यून न्यून मतना देखै अर बता कै सोच कितना पीस्सा डकार राख्या सै इननै। के सोच्या? सौ करोड़? एक हजार करोड़? पचार हजार करोड़? इसतै फालतू तो के डकारग्या होगा न्यों मतना सोचो। पूरा एक लाख करोड़ रुपइया डकारे बैठे सैं अर ईबै तो आए साल डकाराणै लागरे सैं। फेर इसतै फालतू लूट क्यूंकर मचाई जा सकै सै? सबतै बड्डा चाला यू सै अक फेर बी गुडफील, साइनिंग इंडिया अर और बेरा ना क्यां क्यां के बाहणै म्हारे सरकारी खजाने के 500 करोड़ रपिए बहाए जावण लागरे थे। इब यू सारा पीस्सा जिन लोगां की गोज मैं गया उन ताहिं तो इंडिया कसूता चमकण लागरया सै। फेर इसमैं उस इंडियावासी का जिकरा कोण्या जो अपणा घर मिट्टी के तेल तै चलावैं सैं अर न्यूं भी नहीं बताया जान्ता कि 1998 मैं एक लीटर माट्टी के तेल का भा दो रपइये ठावन पीस्से था अर यू चमक कै जनवरी 2004 मैं दस रुपइये होग्या।
न्यूएं डीजल का भा बध गया, पैट्रोल का भा, गैस सिलेंडर एक सौ पैंतीस रुपइये ठानवैं पीस्से का था ओ दो सौ इक्तालिस रुपइये साठ पीस्से का होग्या। देख्या कैरोसीन, डीजल, पैट्रोल, अर रसोई गैस क्यूंकर चमकण लागरे सैं। के कहया नहीं चमकते? जाओ चश्मे चढ़वा कै आओ अर देखो पूरा इंडिया क्यूंकर जगमगावण लागरया सै। अर जै साइनिंग इंडिया आल्यां ताहिं जनता नै एक मौका और दे दिया तो देखियो किसा चमका देंगे पूरे इंडिया नै। पूरी दुनिया मैं इंडिया-इंडिया हो ज्यागा। यूरिया जो 98 मैं 3680 रुपइये था ओ 4830 रुपइये टन होग्या। अर लैक्सनां पाछै यूरिया की कीमत 8000 रुपइये टन हो गयी। बिजली की यूनिट की कीमत बधग्यी अर भारत का कमेरा दारू पी कै टन हो ज्यागा। दारू पीये पाछै तो इंडिया और भी चमकता दीखैगा। देखियो घणा मतना चमका दियो इंडिया नै।

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