शनिवार, 15 जुलाई 2017

रै देख लिये पंचाती पत्नी नै बाहण बणावैं

रै देख लिये पंचाती पत्नी नै बाहण बणावैं
     सविता, कविता, नीलम, भरपाई, सत्ते, फत्ते, कर्मबीर बैठे टीवी देखण लागरे थे। टीवी पै आसंडा कांड की रील चढ़ा राखी थी जी टीवी आल्यां नै। सारी बात देख-सुण कै बहोत शर्मसार हुये अक यू कीसा फैसला सुणा दिया पंचात नै? सविता बोली - या चुणी होई पंचात सै के आसंडे की? कविता बोली - ना या चुणी औड़ कोण्या या तै स्वयंभू पंचात सै। खाप पंचात का हिस्सा।
     भरपाई बोली - फेर यू सोनिया अर रामपाल का ब्याह तो कोर्ट मैं नहीं होरया के? कविता नै बताया - कोर्ट मैं दर्ज होरया सै। भरपाई बोली तो फेर या पंचात उस सोनीपत आले कोर्ट तै बड्डी होगी के? सत्ते बोल्या - वा कचहरी तो म्हारे संविधान की कचहरी सै अर धर्मसिंह, कांशीराम अर कलाधारी आली कचहरी खाप आली कचहरी सै। भरपाई फेर बोली - मैं भी तो याहे बूझूं सूं अक इस हरियाणा मैं अर इस आसंडे मैं कूणसा कानून लागू होवैगा? भारत के संविधान का कानून अक इन पंचातां का कानून? कविता बोली - योहे तो देखणा सै 22 नवंबर नै, अक भारत का संविधान जीतैगा अक इन पंचातियां के पति-पत्नी नै भाई-बाहण बणावन आले फतवे की जीत होवैगी?
     नीलम बोली - मनै अखबार मैं पढ़या था अक दिल्ली मैं निजामपुर गाम सै उड़ै राठी अर दहिया दोनू गोतां के लोग बसैं सैं अर आपस मैं ब्याह पै कोए रोक टोक नहीं। दहिया की दूसरा गाम की छोरी राठियां कै ब्याही आवैं सैं अर राठिया के दूसरे गाम की छोरी दहिया कै ब्याही आवैं सैं। भरपाई बोली - तो इस आसंडे कै पागलपन क्यूं उठग्या? सत्ते बोल्या - यू समचाणा गाम रहया। इसमैं दहिया, मलिक अर हुड्डा तीनों गोत सैं अर दूसरे गामां मां तै तीनों गोतां की छोरियां के ब्याह इसे गाम मैं होवण लागरे तो ये आसंडे आले इसे आन्डी क्यूं पाकैं सैं? कर्मबीर बोल्या - गुगाहेड़ी मैं मेरे मामा सैं। उड़ै कई गोत सैं अर खेड़े का गोत दलाल सै। फेर दूसरे गामां की दलाल गोत की छोरी म्हारे मामा के गाम के दूसरे गोतां मैं ब्याही जावण लागरी। उड़ै तो कोए बंदिश कोन्या। कविता बोली - हरेक गाम मैं 15-20 गोत आगे सैं, जै इन गोतां आले, खेड़े आले, गोत की दाब मान कै ब्याह करैंगे तो हो लिया ब्याह। एक तो छोरियां नै पेटै मैं मार-मार कै इनकी संख्या घटा दी। 1000 पुरुषां पै 861 औरत रैहगी। हरियाणा मैं अर एक कसूता चाला और कर दिया पढ़े-लिख्यां नै।
     पढ़े लिख्यां 1000 पुरुषां पै 617 औरत रैहगी बताई। पढ़ाई औरत नै पेट मैं मारण के कसूते गुर सिखावै सै। सविता बोली - ये पंचात उन लोगां नै गाम लिकाड़ा क्यूं ना देती जो इन छोरियां नै पैदा होवण तै पहलम मार दें सैं? सत्ते बोल्या - पुराणा समों बदल गया। ईब तो या गोतां की पाबंदी किसे गोत मैं नहीं रैहणी चाहिए अर किसे गाम पै नहीं रैहणी चाहिए। फत्ते बोल्या - या तो म्हारी पुरानी परंपरा सै। राठी की छोरी आसंडे मैं बहू बणकै क्यूंकर आ सकै सै? कविता बोली - म्हारी परंपरा मैं तो बुलधां की खेती कदे कदीमी तै थी। इन पंचातियां तै बूझो इननै बुलधां की खेती की परंपरा तोड़ कै ट्रैक्टर की खेती क्यूं शुरू करदी? अर पहलम रिवाज था अक बालक पैदा होवण पै ओरनाल जंग लागे औड़ चाकू तै के दरांत तै काटया करते अर टैटनस होकै घणे बालक मर जाया करदे। म्हारी परंपरावां तै इतना ए प्यार सै चौ. धर्मसिंह जी नै अर कांशी राम जी नै तो इननै अपणे घर मैं या परंपरा क्यों छोड़ दी? कविता बोली - न्यूं सुण्या सै अक रामपाल के कुनबे के एक दहिया माणस नै या आग लाई सै उल्टी सीधी बात कैहके? भरपाई बोली - तो गाम लिकाड़ा तो पंचात नै उस ताहिं देवणा चाहिए था, ये सोनिया-रामपाल भाई-बाहण किसे बणावैं थे। जे इन पंचातियां कै थोड़ी घणी बी सरम-लिहाज सै तो इननै अपणी मूछां का सवाल छोड़ कै, सोनिया नै मैडीकल मां तै बाइज्जत आसंडे मैं ल्यावैं। नहीं तो हमनै बी चंडीगढ़ के कोर्ट मैं पार्टी बणकै सोनिया का केस लड़णा चाहिए अर इन पंचातियां की एक नहीं सुणणी चाहिए।



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