शनिवार, 15 जुलाई 2017

सर्वनाश करने वाले अब निर्माण करेंगे इराक में


अमरीका ने अपनी फौजों द्वारा इराक पर एक तरफा हमला किया। इसको इसमें ब्रिटिश सरकार का समर्थन व सहयोग भी प्राप्त था। इस हमले और कब्जे का सबब यह था कि अमरीका और ब्रिटेन इस अरब देश इराक से बहुत खतरा महसूस करते रहे हैं। यह एक ऐसा झूठ व मनगढंत दावा है जैसा कि मालदीप से हमला होने के डर के बहाने भारत मालदीप पर हमला करदे। नोम चोमस्को ने कहा है कि चुनाव में बुश के प्रशासन को अमरीकी जनता धाराशायी कर देती यदि सामाजिक और आर्थिक मुद्दे चुनाव में प्राथमिकता पर रहते तो, मगर बुश की सरकार ने इन मुद्दों को पीछे धकेल दिया और सुरक्षा के मुद्दों को उभारकर लोगों को प्रभावित किया। लोग ताकत की छतरी के नीचे खींच लिए गए।
महज एक सामाजिक मुद्दे को विस्तार से विश्लेषित करने पर ही बुश के प्रशासन की चाल की पोल स्पष्ट रूप से खुलकर सामने आ जाती है। उदाहरण के लिए यदि शिक्षा के मुद्दे को ही लें, तो इसी से काफी कुछ तोड़ खुलासा हो जाता है। दुनिया के इस सबसे अमीर देश में यह एक शर्मनाक सच्चाई है कि 280 मिलियन की जनसंख्या में से 40 मिलियन से ज्यादा लोग नहीं पढ़ सकते, वे मुश्किल से अपना नाम अटक-अटक कर पढ़ सकते हैं, 50 मिलियन लोग पांचवीं की किताब ही पढ़ सकते हैं और 60 मिलियन लोग ऐसे हैं जो आठवीं से आगे की किताब नहीं पढ़ सकते। वहां की शिक्षा प्रणाली ने इतना गलत माहौल बना दिया है कि 96 प्रतिशत लोगों में अपना दिमाग लगाकर इस प्रकार के गंभीर मुद्दों पर दिमाग लगाकर, सोच कर सही नतीजों पर पहुंचने की क्षमता ही नहीं विकसित हो सकी है।
काले अमरीकनों को, जो कि 15 प्रतिशत हैं उचित शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं जिसके कारण इनमें से 44 प्रतिशत अनपढ़ हैं। भूख, आवास, इलाज आदि पर सोचकर समाधान ढूंढने का काम लोगों को सौंप दिया जाए तो इन मुद्दों के समाधान के लिए निष्कर्षों पर नहीं पहुंचा जा सकता। ऊपर से खास ढंग से लोगों का ध्यान असली मुद्दों से हटाने की बुश की यह सोची समझी चाल थी। जिसका शिकार अमरीकी जनता हुई। सन् 1980 के दौर में भी रीगन व सीनियर बुश ने ऐसी नीतियों का पालन किया जो आम अमरीकी नागरिक के खिलाफ जाती थीं। मगर लोगों में भय पैदा करके उन्होंने अमरीकी नागरिकों को नियंत्रण में रखा। अमरीकनों को बताया गया कि निकारगुआ की फौजों को टैक्सास से चलकर अमरीका पर कब्जा करने के लिए दो दिन का समय काफी है। प्रशासन द्वारा अमरीकनों को यह बताकर भी डराया गया, कि ग्रेनेडा के एयर बेस से रशियन उन पर हमले करेंगे।
इराक पर हमले का एक और कारण यह भी है और वह है अपने आप में पूंजीवाद। चीजों के उत्पादन की क्षमता तथा लोगों की चीजों का इस्तेमान कर पाने की क्षमताओं के बीच गहरा अंतर्विरोध है। इस अंतर्विरोध के चलते इस व्यवस्था में आर्थिक संकट से उभरने के लिए युद्धों व इस प्रकार के एकतरफा हमलों का सहारा लेना एक अनिवार्य पहलू है। जब बड़े और ज्यादा कीमत वाले मिल्ट्री के उपकरणों का इस्तेमाल युद्धों में होता है तो व्यापक पैमाने पर ये हथियार व उपकरण युद्ध में नष्ट होते हैं। तभी तो इन उपकरणों व हथियारों के बनाने वाले कारखानों को और अधिक सामरिक हथियार व उपकरण बनाने का अवसर मिलता है। इसी प्रकार जब हजारों इमारतें तथा आवासीय स्थान तबाह होते हैं तो इनसे पूंजीवाद के ठेकेदारों को कंस्ट्रक्शन करने और ठेके मिलने का रास्ता साफ हो जाता है। इसलिए जब सैकड़ों हजारों इराकी इराक में मारे गये तो सभी पूंजीवादी देशों में पूंजीपति अपने हाथ इस उम्मीद में रगड़ रहे हैं कि उन्हें बहुत से ठेके मिलेंगे। इस सबके बावजूद इस हमले ने पूरी दुनिया में लोगों ने भारी प्रदर्शनों के माध्यम से दबाव बनाकर अपने देशों की सरकारों को बुश और ब्लेयर के खिलाफ पोजीशन लेने पर मजबूर किया है। यही वह दूसरा ध्रुव (पोल) है जो सोवियत यूनियन के ढहने के बाद उभर कर आया है। यह एक सच्चाई है कि यदि हम चुंबक की छड़ी को तोड़कर दो हिस्से कर देते हैं तो उनकी पोलेरिटी खत्म नहीं हो जाती। दोनों टुकड़ों में नये पोलों का निर्माण हो जाता है। यह डायलैक्टिस का सिद्धांत है। इराक पर अमरीका और ब्रिटेन के द्वारा किए गए हमले ने एक नई संभावना को जन्म दिया है, फासीवादी पूंजीवादी विश्व में इसके वर्चस्व के खिलाफ दुनिया के लोगों की एकता।
एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात और है वह यह है कि अमरीका की कुछ संस्थाओं ने अनुमान लगाये हैं कि इराक पर हुए इस हमले में 100 अरब डालर से लेकर 200 अरब डालर तक का खर्च होने के अनुमान लगाए हैं। यदि हम सबसे नीचे के आंकड़े को भी लेकर चलें तो यह 100 अरब डालर की रकम बराबर है - जर्मनी के कुल संघीय बजट के 40 फीसदी हिस्से के सौ-सौ डालर के नोट एक के ऊपर एक रखें तो 100 किलोमीटर ऊँची गड्ढी बने। के-12 शिक्षा पर अमरीकी संघीय सरकार के कुल खर्च से तीन गुणा के1 अमरीका के अंतरराष्ट्रीय मामलों से संबंधित बजट के चार गुणा से ऊपर के। अमरीका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ई.पी.ए.) के बजट से 12 गुणा के1 या यों भी कहा जा सकता है कि इस सौ अरब डालर से अमरीका या ब्रिटेन में बनाए जा सकते हैं एक लाख पैंतालीस हजार किंडर गार्डन इस समय जर्मनी में 2 लाख बच्चों के लिए किंडर गार्डन सुविधा की कमी है।
अमरीका में तमाम एक करोड़ दस लाख गैरबीमित बच्चों के लिए पांच वर्ष के लिए स्वास्थ्य बीमा, अमरीका में एक करोड़ 40 लाख से ज्यादा बच्चों के लिए स्कूल-पूर्व तैयारी स्तर का प्रबंध, अमरीका में जितने स्कूलों के निर्माण की जरूरत है उनमें से लगभग हरेक का पुनर्निर्माण। अमरीका के चार लाख छात्रों के लिए एक सौ तेईस वर्ष की फीस का इंतजाम। निम्न आयु वर्ग परिवारों के इतने ही बच्चे हैं जो आर्थिक असमर्थता के चलते स्कूल नहीं जा पाते हैं। अमरीका में ही चौदह लाख 30 हजार परिवारों के लिए ऐसी आवास व्यवस्था जिसका वे खर्च उठा सकते हों। अमरीका में उन्नीस लाख एलीमेंटरी शिक्षकों के लिए एक वर्ष की तनख्वाह। जाहिर है कि गरीब देशों में इससे 20 से 50 गुणा तक लोगों की तनख्वाह बनती है।
अमरीका में तैंतीस लाख नर्सों, वृद्ध जनसेवकों या समाजसेवियों की एक साल की तनख्वाह। 35 लाख रोजगार प्रशिक्षण स्थलों के लिए या रोजगार निर्माण योजनाओं के लिए तीन वर्ष का खर्चा। या फिर इसी राशि से दुनिया के पैमाने पर, यूनिसेफ के अनुसार सभी बच्चों के लिए सवा तीन वर्ष के लिए पर्याप्त भोजन, बुनियादी स्वास्थ्य रक्षा, प्राइमरी शिक्षा तथा पीने के स्वच्छ पानी की व्यवस्था की जा सकती है। संयुक्त राष्ट्र संघ के समूचे बजट की 13 वर्ष तक भरपाई की जा सकती है और इसमें शांति का पालन कराने की तथा अन्य विशेषीकृत संस्थाओं के खर्चे भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के तमाम शांति रक्षा मिशनों (1966 के पैमाने से) का 80 वर्ष का खर्चा दिया जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के 250 वर्ष के खर्चे की भरपाई की जा सकती है। यूरोपीय सुरक्षा व सहयोग संगठन (ओएससीई) का 540 वर्ष का खर्चा दिया जा सकता है। ग्रीनपीस इंटरनेशनल के 700 वर्ष के काम के लिए साधन जुटाए जा सकते हैं।
गरीब देशों में एक बच्चे को बचाए रखने के लिए कितनी मदद की जरूरत होगी? 100 डालर प्रति वर्ष। इसलिए अगर इस हमले पर 100 अरब डालर ही खर्च खर्च होते हैं तब भी इतनी रकम से एक अरब बच्चों को एक वर्ष तक बचाए रखने का इंतजाम तो किया ही जा सकता था। इस हमले के गंभीर परिणाम महज इराक तक ही सीमित नहीं रहेंगे, इस साम्राज्यवादी हमले की मार पूरी दुनिया को झेलनी पड़ेगी। बुश ने दुश्मनों की अपनी लंबी सूची को स्पष्ट करने में देर नहीं की और ‘पाप की धुरी’ का ऐलान कर दिया। याद रहे कि 1999 से 2003 के बीच यानी चार वर्ष के इस अर्से में ही, यह चौथा युद्ध है जो एक स्वतंत्र देश के खिलाफ अमरीका ने लड़ा है।

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