मार गई सरसों की मार
आज शहरां म्हं भीड़ तो सै फेर पहलम तै कम सै। कारण सै लामनी का। सरसों तै किसान नै काट ली अर काढ़ कै मंडी म्हं लियाया अर गिहूंआ की लामणी आधी अक होली अर आधी रैहरी सै। सरसों का भा केंद्र की सरकार नै काढ्या सतरा सौ तीस रपईये क्वींटल।
हरियाणा की सरकार नै भा गिरा दिया सतरा सौ का। किसान जिब मंडी म्हं पहोंचया तो उड़ै कोए खरीदणिया ए कोन्या पाया। सरकारी खरीद की एक दुकान अर तीन कर्मचारी वे किस किसकी सरसम खरीदें? आढ़तियां नै पन्दरा सौ तै ऊपर की बोली लाई ना। ऊपर तैं पचास रपिए आढ़त कै और मांगै किसानां पै। जाम लाया। सरकार धोरै बात पहोंची अर सरकार नै बी हुकम दे दिया फेर बात तो उड़ै की उड़ै खड़ी सै आज तेरा तारीख ताहिं। आढ़त का पीस्सा तो सरकार नै देणा चाहिए पर कूण समझावै?
अखबारां मैं खबर थी अक कन्फैड की साथ-साथ हैफेड बी खरीदैगी। किसान सुखपुरे चौक पै पहुंचे तो उड़ै बी दिखावा ए सा पाया। फेर मंडी म्हं ल्याये। कई किसान तै तीन दिन तै पड़ै सैं मंडी म्हं अर अपनी सरसों नै पन्दरा सौ म्हं अर उसतै बी तलै बेच कै जाण नै तैयार सैं फेर कोए सूंघता ए कोन्या उनकी सरसों नै अर आड़े ताहिं दुखी हो लिया अक जै कोए उनकी खात्तर आवाज बी ठावै सै तो उसनै भय लागै अक कदे या पन्दरा सौ म्हं बी ना बिकै। सुन्या सै दिल्ली का किसान बी दुखी होकै अपनी सरसों रोहतक लियाया तो और भीड़ मचगी अर अफसरां नै फरद मांगनी सुरू कर दी किसानां धोरै। एक संकट और बधा दिया।
किसान की दिक्कत या सै अक आगे पाछे की सोचना उसने बंद कर राख्या सै। करै तो के करै? एक औड़ नै कुंआ सै अर दूजे औड़ नै खाई। ताजे-ताजे लैक्सन होए थे कई-कई हजार की माला घाली थी कईयां नै तो कर्ज पै पीस्सा ठाया था। एकै म्हिने भीतर किसान ताहिं तो ट्रेलर दिखा दिया अर बाकी बी सहज सहज देख लेवांगे। किसानों नै कट्ठे होकै मिल बैठ कै सोचना पड़ैगा। यो बस सिरसम का रोला नहीं सै। गिहूं आण लागरी सै अर उसकी गेल्या बी इसी ए बणती दिखै सै। तो के करया जा? दो बात सैं।
एक तो तत्काल के करया जा अर एक लाम्बे दौर म्हं के करया जा अक किसान इस मंडी की लूट तै क्यूंकरै निजात पावै। बेरा ना वे किसानों के हितैसी यूनियनां आले कित सैं? किसान खड़या पिट्टण लागरया अर वे बेरा ना कित किसके आदर सत्कार म्हं लागरे सैं अर कै घणी कसूती योजना बनावण म्हं मसगूल सैं। एक बात तो किसान नै या समझनी पड़ैगी अक इस सारे मामले के तार डब्ल्यूटीओ तै जुड़रे सैं। क्यूंकर?
इसकी चरचा होक्यां पै बैठ कै करियो अर ईब हारे औड़ कै जीते औड़ जिब धन्यवादी दौरे पै आवैं तो इन धोरै बूझ कै देखियो अक यो डब्ल्यूटीओ किस बला का नाम सै? हमनै इसकी पहलम बी चरचा करी सै अर फेर बी करल्यांगे। सौ का तौड़ यो सै अक लड़ाई लाम्बी लड़नी पड़ैगी ये तास गेरकै।
दूसरी बात या सै अक यो जागां-जागां मंडी क्यों खोल राखी सैं सरकार नै? डीघल म्हं मंडी, बेरी म्हं मंडी, महम म्हं मंडी और तै और मदीने म्हं मंडी तो फेर किसान रोहतक क्यूं आवैं? अर कै झज्जर क्यूं जावैं? रोजगार बी बधैगा अर किसानां नै संकट तै बी छुटकारा मिलैगा। जै इन मंडियां म्हं सरसों की खरीद सरकार करले तो। तेजी तै पहलकदमी करकै कदम ठावण की जरूरत सै। इसतै हरियाणा के च्यार बालकां नै रोजगार बी मिलैगा अर किसान नै बी राहत मिलैगी।
दूसरी बात अक सरसों की खरीद की कोए पक्की रसीद किसानां ताहिं कोन्या दी जान्ती। एक परची पै लिखकै दे दें सैं। पक्की रसीद मिलनी चाहिए। फेर किसान नै या साफ समझ लेनी चाहिए अक हिम्मती का राम हिम्माती हो सै, तास खेलण आले आलसी माणस का नहीं। एक बै सोचना सुरू कर ले फेर राह गोन्डे तो आप पाज्यांगे। रै बीरा! हाम नै तै दूर के ढोल सुहावने लागते दिखाई देवैं सैं। जिब परदेस म्हं ‘चौटाला एंड संस’ की सरकार की डुगडुगी बाज रही थी अर हर किसान की नाक म्हं दम आ राक्ख्या था तै सोच्चा कर दे अक ओ सुभदिन कदसिक आवैगा जद इस ‘प्राइवेट लिमिटेड’ सरकार तै पिंड छुट्टैगा अर चैन की सांस लेवैंगे। अब जिब योह नवी सरकार आई तै किसानां नै फेर वही धक्के खाणे पड़ रये सैं। इस लियो फेर समझाऊं सूं अक -
चूची बच्चा तैयारी करल्यां यो रस्ता बिना लड़ाई कोन्या
सरसों पीट दी क्यों म्हारी ईब बची कति समाई कोन्या
खूनी कीड़े खावैं चौगरदे क्यों देता कति दिखाई कोन्या
आगली पीढ़ी गाल बकैगी जै तसबीर नई बनाई कोन्या
अपने पाह्यां चाल पड़ां क्यों टोही असली राही कोन्या
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