रमलू: पहलम जो रिश्वत लेवणिया माणस था उसनै म्हारा समाज अर म्हारा शहर अर गाम बहोतै खराब माणस मान्या करता। सहज रिश्वत नै जोर पकड़या तो समाज मैं फजीहत होई। रिश्वत का नाम बदनाम होगा।
ठमलू: इस बदनामी तै बचण का राह मिनटां मैं टोह लिया होगा बट्या नै। घणै कसूते बटमार होरे सैं।
रमलू: रिश्वत के इन ठेकेदारां नैं एक सभा बुलाई।
ठमलू: के बात इनकी भी यूनियन सै के कोए। ये म्हारी यूनियन कै तो हाथ धोकै पीछै पड़े रहवैं सैं।
रमलू: इनकी यूनियन घणे गजब की सै वा रजिस्टर करवावण की भी जरूरत कोन्या। वा नम्बर दो के खात्यां मैं चलती बताई। हां तै इननै फैंसला कर लिया अक रिश्वत नै म्हारा समाज खोखला कर दिया इसका जड़ तै खात्मा कर देना चाहिए।
ठमलू: या बात उननै कही जो सोवन्ते बी अर खान्ते बी रिश्वत के सपने लेवैं सैं।
रमलू: हां अर म्हारी या आडू. जनता भी बहौत राजी होरी थी अक रिश्वत का साच माच मैं खात्मा होवण आला सै। (सभा का सीन)
सभा मैं सबतै बड्डा रिश्वतखोर खड़या होकै बोल्या - हम कसम खावां सां अक हम रिश्वत नहीं लिया करांगे आज तैं पाछै।
दूसरे दो तीन जणे बोले: तो खा कमा लिये हमतो अर कसम तोड़ी तो मुसीबत।
बड्डा रिश्वतखोर: फेर हम रिश्वत कोनी लेवां आज तै हम कमीशन लिया करांगे। तो रिश्वत तो आपै ए खत्म हो ज्यागी।
(सबनै तालियां तै स्वागत करया)
चार पांच साल मैं रिश्वत का नाम लेणा भूलगे लोग। कमीशन छाग्या सारे कै।
एक कमीशन एजेंट: आज काल कमीशन पै काम करवाणा बहोत आसान होग्या।
दूसरा: और के यार इस रिश्वत नै तो किते कै बैठण जोगे नहीं छोड्डे थे समाज मैं ईब तै ठाठ तै दुकान पै लिखवा कै काम करां सां कमीशन एजेंट फलाणा फलाणा।
तीसरा: फेर इन पाछले दस सालां मैं इस कमीशन की बी घिस काढ़ कै धरदी म्हारे यारां नैं। राव साहब, चौधरी साहब, मेहता साहब, यादव साहब, स्वामी जी तै लेकै खुराना जी ताहिं किस किस का नाम गिनाया जा सब कमीशनदार होगे।
दूसरा: यो कमीशन भी बहोत बदनाम हो लिया भाई।
पहला: तो ईब के करया जा। लोग बात तै म्हारे म्हां कै चलावैंगे अर फेर सीधी बात जा करैं सैं। हमनै फेर इसे ढाल बिचाले तै काढ़ बगावैं सैं जिसी दूध मां तै माक्खी।
तीसरा: इस कमीशन का बी किमै सोचना पड़ैगा। हमने अपने भाइयां की एक पंचायत बुलानी पड़ैगी। उसमैं फेर कोए सर्व सम्मति से फैसला करणा पड़ैगा।
(पंचायत सीन)
एक: सोचो भाइयो पाछली पंचायत के बाद दस साल म्हारे बड़े सुख तै गुजरे। ईब फेर सोचो अक इस कमीशन एजेंटी तै क्यूंकर पैंडा छूटै म्हारा।
दो: कुछ ना होरया थाम ऊंए घबरारे सो। कमीशन तै बड़े-बड़े तोपां के अर हवाई जहाजां के सौद्यां मैं बी लिया जा सै। हम तै मामूली सा कमीशन लेवां सां।
तीन: वा बात तै सही सै फेर समाज मैं कमीशन एजेंटां की इज्जत तै दो आने की बी कोन्या रहरी। बद तै बदनाम भूण्डा आली बात होरी सै म्हारी गैल्यां।
एक: वा तो बात ठीक सै हम तो मेहनत करकै या कमीशन कमावां सां। ऊपर तै बिना हाथ पां हिलाए उनके हिस्से का कमीशन उनके धोरै पहोंच ज्या सै।
दो: ईबै इतनी तावल मतना करो थाम। और सोचल्यो थोड़ा बहोता।
तीन: वा बात सै ना अक काल करे सो आज कर, आज करे सो अब। पल मैं परले होयेगी बहुरि करैगा कब।
एक: रै न्यों करो भाई इस कमीशन नै सर्विस चार्जिच का लत्ता उढ़ा द्यो। दस बीस साल इसमैं लिकड़ ज्यांगे। आगे की आगै देखी जागी।
तीन: सही बात कही भाई ईब तै आगै सर्विस चार्जिज नाम होग्या। एजेंटी सब खत्म। कमीशन की टांग ईस पंचायत मैं तोड़ दी सै।
दो: ठीक सै जो कमीशन एजेंट रैहणा चाहवैं सैं इबै उसनै जात बाहर मतना करियो। (फैसला होग्या सब चले जाते हैं)
रमलू: सुण्या सै इन रिश्वत खोरां की भी कोए पंचायत हुई थी।
ठमलू: रिश्वत खोर नहीं कमीशन एजेंट बोल कमीशन एजेंट।
रमलू: हां वोहे कमीशन एजेंटों के फर्क पड़ै सै।
ठमलू: फरक तो पड़ै ऐ सै भाई। एक तै एक माणस नै न्यों कहवैं अक तेरे पिता जी आए थे अर एक न्यों कहवैं अक तेरी मां का लोग आया था। बात तो वाहे सै पर फरक तो घणा ए सै ना।
रमलू: चलो तूं अपणी बात मनवाएं बिना के मानै सै। फेर इन्हें बातां करकै चोर अर साह मैं फरक कर पाणा बहोतै घणा मुश्किल होरया सै।
ठमलू: या तो मैने बी लागै सै। चोरां नै आजकल यो प्रचार बड़े जोर शोर तै चला राख्या सै अक आज की दुनिया मैं कोण ईमानदार रहरैया सै।
रमलू: म्हारे दफ्तर मैं जो धापकै पीस्से खावै सै ना ओ बी एक दिन न्यों बोल्या अक हमाम मैं सब उघाड़े हो लिए।
ठमलू: मनै लागै या बात सही कोण्या। असल बात या सै अक उघाड़े माणस अपणा उघाड़ापन लहकोवण खातर सबनै उघाड़ा बतादें सैं अर आप्पां बी इसे आडू. सां अक सैड़ दे सी दो सेर का सिर हां मैं हिलाद्या सां।
रमलू: दिमाग तै काम लेणा तो आप्पा नै कई बरस तै छोड्डै राख्या सै। झूठ साच का भेद करण का म्हारा ब्यौंत कोण्या बचरया आज।
ठमलू: और के जिब घोटाल्यां का जिकर चालै सै तो न्यो कहया जा सै अक कौन बचरया सै इनतै?
अर म्हारी फेर हां मैं हां। हम न्यों सोचण का माड़ा सा बी कष्ट नहीं करदे अक कौण बचरे सैं इनतैं। कौण जनता के मैं सै अर कोण खिलाफ सैं?
रमलू: फेर एक बात सै ठमलू चोर कूण सै अर साह कूण सै इसका बेरा लाणा भी तो मुश्किल होंता आवै सै।
ठमलू: सही बात सै अर म्हारे बरगी मोटी बुद्धि आल्यां के तो बसका कतिए कोण्या। म्हारे बरगे कई बार मार खाज्यां सैं।
एक बै म्हिने की पहली तारीख नै रलदू नै तनखा मिली थी। रलदू सोचदा जावै था। डीटीसी की बस मैं चढ़ लिया। भीड़ चौखी थी। सोचदा चाल पड़या अक ब्याह होए नै तीन साल हो लिए पर घर आली ताहिं कुछ बी खरीद कै नहीं लेग्या। आज एक बढ़िया सी साड़ी खरीद कै ले ज्यांगा। कन्डक्टर नै टोक दिया अक टिकट? रलदू बोल्या अक एक शाहदरा की। कन्डक्टर टिकट पकड़ा कै बोल्या अक तीन रुपये। रमलू नै पाछली गोज पै हाथ मारा अर भाई कै पसीना आग्या।
रमलू: क्यों पसीना क्यों आग्या हार्ट अटैक तै नहीं होग्या था उसकै।
ठमलू: कन्डक्टर बोल्या - अक पीस्से दे था। गौज कटगी भाई। रलदू मरियल सी आवाज मैं बोल्या। कन्डक्टर बोल्या रै मैं जाणूं सूं थारी बाहणे बाजी। तीन सौ साठ देखूं सूं तेरे बरगे रोज।
रमलू: कन्डक्टर बी के करै?
ठमलू: रलदू नै कटी औड़ गोज दिखाई पर कन्डक्टर बोल्या के बेरा घर तै काट कै ल्यारया हो। तबै एक आदमी कंडक्टर तै बोल्या अक कितने पिस्से। कन्डक्टर बोल्या तीन रुपये। उसनै पांच का नोट दिया अर बोल्या मार सिट्टी।
रमलू: देख्या मैं कहूं था ना अक ईबी इन्सानियत बचरी सै। भला हो उसका। औरां का बी बखत बरबाद होण तै बचा लिया उसनै। बड़ा देवता माणस था ओ तै।
ठमलू: घणखरी सवारी भी उसके गुण गावण लागगी। फेर बेरा सै असल मैं ओ कूण था।
रमलू: कोए हो, था भला माणस।
ठमलू: ओ ओए जेब कतरा था जिसनै रलदू की गौज काटी थी। अर रमलू इतना स्याणा होकै तूं भी गच्चा खाग्या। तो भाई इन देवता किसम के जेब कतरयां तै बचियो लैक्शनां मैं।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें