कर्म सिंह नया-नया पुलिस असफसर बन्या था। उसके मन मैं देश प्रेम अर दिल मैं ईमानदारी थी। जनता की सेवा करना वो अपना धर्म समझया करता। एक दिन पड़ौस के एक गाम का लड़का भाजता भाजता आया। उसनै देख कै कर्म सिंह नै बूझया - के बात? इतना क्यूं हांफै सै बेटा? लड़का बोल्या - जल्दी चालो थानेदार साहब, मेरे घर मैं चोरी होगी। कर्म सिंह सैड़दे सी उसकी गेल्यां चाल पड़या।
कर्म सिंह गाम मैं आकै एक बूढ़े तै बूझण लाग्या - बोल्या - हां बाबा जी थारे तै बूझूं सूं चोरी कद हुई? इतनी सुणकै बूढ़ा गिड़गिड़ावण लाग्या अर बोल्या - माफ कर दयो साहब। लड़का नादान सै। इसी गलती फेर कदे नहीं करैगा। जै मैं होन्ता तो हरगिज रिपोर्ट नहीं करण देन्ता अर ना आप नै इतनी तकलीफ होन्ती। कर्म सिंह हैरान होकै बोल्या - या बी के बात कही बाबा जी? जै आप चोरी की रिपोर्ट नहीं करोगे तो हम चोर नै किस तरियां पकड़ैंगे? आप न्यों बताओ अक चोरी मैं के के गया। बूढ़ा बोल्या - छोड्डो नै साहब क्यूं खामैखा परेशान होवण लागरे सो। ल्यो दूध पीओ। दूध का गिलास बूढ़े नै हाथ मैं ले कै कहया। कर्म सिंह बोल्या - ना मैं तो ईब ड्यूटी पै सूं अर मैं कुछ नहीं ल्यूंगा। बाबा जी थाम खड़े क्यों सो बैठ जाओ। कर्म सिंह की बात सुणकै बूढ़ा आसपास के लोगां गेल्यां कुछ काना फूसी करकै अर फेर कर्म सिंह धोरै आकै हाथ जोड़ कै बोल्या - साहब कुछ रुपये राखल्यो अर इस बात नै आडैए रफा दफा करद्यो। मैं मानूं सूं थामने बहोत तकलीफ होई सै। आपका इतना कीमती बख्त बरबाद हुआ। यू उसै का हर्जाना सै। कर्म सिंह बात सुणकै चकरा ग्या फेर अपने आप नै सम्भाल सी कै बोल्या - बाबा थारी बात मेरी समझ तै बाहर सै। रुपइये क्यूं ल्यूं? हमनै सरकार तनख्वाह क्यां नाम की देवै सै। कर्म सिंह के न्यों कहवण की देर थी अर बूढ़ा चिल्लाया - क्यूं भाइयों ईब बी कोए शक की गुंजाइश सैके? पकड़ल्यो इसनै अर कसकै रस्सी गेल्यां जूड़दयो। माड़ी सी वार मैं लोगां नै कर्म सिंह जूड़ दिया। बूढ़ा बोल्या - यू कोए ठग सै। यो पुलिस का आदमी हो ए कोनी सकदा। बूढ़़े नै एक छौरे ताहिं कह्या - जा तावला सा असली पुलिस आले नै बुलाल्या। कर्म सिंह बोल्या - अरै मैं ए सूं पुलिस आला। बूढ़़ा गुस्से मैं बोल्या - बहोत हो लिया तेरा नाटक। अरै मैं तो तनै जिबै पिछाण गया था जब तनै मेरी ताहिं बाबा कहया। पुलिस आले इसे थोड़े ए ना हुआ करैं। थोड़ा सी वार मैं पुलिस आला पान चबाता हाथ मैं डंडा घुमान्ता आया अर कर्म सिंह नै रस्सी मैं बंध्या देख के गुुस्से मैं बोल्या - क्यों बे स्साले बूढ़े इन्हें क्यों बांध राख्या सै? गाली सुनते की साथ बूढ़ा बोल्या - यो सै असली पुलसिया। कितने वार तैं बाबा-बाबा करण लागरया सै। उसनै सोच्ची पुलिस की ट्रेनिंग अधूरी रैहगी लागै सै। यो सब देख कै कर्म सिंह कै तो सन्नपात सा मारग्या। उसनै सोच्ची अक पुलिस की ट्रेनिंग अधूरी रहेगी पूरी कोना हुई। उस दिन पाछे ओ एक महीने की छुट्टी पै घरां चाल्या गया। कर्म सिंह ईब रोज अपणे बड़े बुजुर्गों नै उनकी तसबीर कै साहमी बैठ कै गाली देन्ता। उसनै सोच समझ कै अपने दोस्त के घर मैं गांजा धर दिया अर दूसरे दिन पुलिस बुलवा कै उस ताहिं नशीली दवा राखण के जुर्म मैं पकड़वा दिया अर तीस हजार रिश्वत के चढ़वा कै उसका केस रफा दफा बी करवा दिया। किसे का शक उसपै नहीं गया। उस दिन कर्म सिंह नै सोच्ची अक आज मेरी पुलिस की ट्रेनिंग पूरी होई सै। जनता के सोच्चण की गड़बड़ करकै आच्छे बीच्छे माणस बी अपनी राह बदल ज्यावैं सैं। इस करकै जनता का चौकस होना बहोत जरूरी सै। यो बी जरूरी सै अक चोर लोग साह का रूप धारकै जिब आवैं तो हाम उनकी पिछाणै ना कर सकां। दूसरी बात म्हारे पुलिसिया भाइयां की बी सोच्चण की सै, अक वे असली पहलम आले कर्म सिंह नै मानैं सैं अक बाद आले कर्म सिंह नै?
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