शनिवार, 15 जुलाई 2017

अपनी मर्जी का मतलब


सत्ते, फत्ते और नफे, कविता, सविता अर सरिता धापां की बैठक मैं शनिवार की सांझ कै फेर कट्ठे होगे। नफे का मुंह किमैं उतरया उतरया सा था। सत्ते बोल्या - के बात नफे आज किमै ढीला-ढीला सा नजर आवै सै? इतना उदास तो नफे कदे बी कोण्या देख्या। बस कविता का तो न्यों कैहणा था अर नफे तो फफक-फफक कै रो पड़या। सारे हैरान अक या के बणी? फत्ते बोल्या - भाई नफे बात बता किमै तो जी हलका होवैगा। नफे बोल्या के बताऊं बूझै मतना। ओ छोटना भाई नहीं सै सज्जन, उसनै पुलिस पाकड़ लेगी अर उसकी बहोत पिटाई करी। बिना बात पुलिस नै पीट्या या तो माड़ी बात सै नफे, सरिता बोली पर बिना बात पुलिस क्यों पीट्टण लाग्गी। नफे बोल्या ओ सज्जन अपणी बुआ कै जा रया था गाछरौली। उड़ै म्हारी बुआ का छोरा सै श्यामलाल उसपै गाम आल्यां नै इल्जाम ला राख्या था अक पड़ौस की गोसाइयां की छोरी भजा लेग्या श्याम लाल। सरिता बोली - गाम की गाम मैं यू काम बहोत माड़ा करया श्याम लाल नै। नफे बोल्या फेर आगै तो इसतै बी माड़ी बात हुई। सत्ते बोल्या के बात हुई? नफे बोल्या श्यामलाल के बाबू गणेशी नै अर श्याम लाल के छोटे भाई नै अर मेरले छोटे भाई सज्जन नै पुलिस पाकड़ कै लेगी। थानेदार न्यों कहवै था अक इनकी मिलीभगत तै भजा कै लेग्या सै श्यामलाल छोरी नै। सरिता बोली, जिसकी छोरी चाली गई वो फिकर तो करैगा अर न्यों बी चाहवैगा अक या तावली सी पाज्यां। कविता बोली - श्यामलाल की उमर कितनी सै? नफे बोल्या - उसकी बी 20-21 बतावैं सैं। कविता के मुंह तै एक दम लिकड़ग्या जिब मियां बीबी राज्जी तो के करैगा काज्जी। नफे सिंह बोल्या - ले मनै राम की सूं उननै कति नहीं बेरा था उनका अक वे कित चले गये।
सविता फेर पुलिस आले उननै क्यों पाकड़ कै लेगे? नफे बोल्या - पूछताछ खातर थाणे मैं बुलावैं तो देखी जा। थानेदार नै तो म्हारा फूफा उन बालकों कै साहमी उघाड़ा करकै पुलिसिया पिटाई करी छिककै। बालक बोले तो वे दोनूं बालक बी धुन दिये। नफे सिंह बोल्या - जिब ऊपरले अफसरां धोरै गए तो उननै बी सीधे मुंह बात कोण्या करी। उननै अपणे निशान दिखाये अर थानेदार कै खिलाफ कार्यवाही की मांग करी। फेर गाम का सरपंच अर और गाम के छटैल एसपी कै जा पेश हुए थानेदार के हक मैं। एसपी बी करै तो के करै? सत्ते - एसपी नै तो सही बात की तरफदारी करनी चाहिए थी। सविता बोली - ईब पहलम आले अफसर कड़े रैहरे सैं? नफे सिंह बोल्या - उनका मैडिकल करवावण खातर बी कोर्ट की शरण मैं जाणा पड़या। डाक्टरां नै बी कई बै मसकोड़े से मार कै पर्चा काट्या। पर्चा कटग्या तो पुलिस नै केस दर्ज नहीं करया। उल्टा पुलिस नै दूसरी ढालां का दबाव और बनाना शुरू का दिया। ईब पुलिस कै खिलाफ इस्तगासां करां तो इतना फूफां का ब्योंत कोण्या पीस्यां का। ऊपर तै गाम की इज्जत कै बट्टा लावण के नाम पै रोज गाम मैं पंचायत होवण लागगी। पंचायत नै कहया अक कै तो छोरे छोरी नै इनके मां बाप पेश करैं नहीं तो इनका हुक्का पाणी बंद करांगे। कविता बोली - नफे एक दिन जनवादी महिला समिति का बी किमै ब्यान था अक बालिग छोरा छोरी सैं जे वे अपणे हिसाब तै ब्याह करकै रैहणा चाहवैं सैं तो भारत का संविधान इसकी इजाजत देवै सै तो गाम आल्यां नै बीच मैं रोड़ा नहीं बनना चाहिये।
नफे बोल्या - समिति आली बहनजीयां करकै तो उनका डाक्टरी पर्चा कट्या ना तो हमनै के राह पावै था। भला हो उनका। फेर गाम आले ये पंचायती तो उनकै बी खिलाफ होरे सैं। सते बोल्या - लुहार के छोरे नै अर गोसाई की उसे गाम की छोरी नै साथ रैहवण का मन बना लिया तो इसपै कई सवाल खड़े हों सैं। इन सवालां पै बहस होनी चाहिये अर उनकै खिलाफ पंचायत जो फतवे जारी करैं सैं उनपै प्रशासन नै हरकत मैं आणा चाहिये। पुलिस नै बेकसूरां की पिटाई करी उसपै पुलिस कै खिलाफ एक्शन हो अर छोरा छोरी ताहिं प्रशासन नै सुरक्षा देनी चाहिए ना तो ये तालिबानी दिमाग उननै फांसी दिये पावैंगे।

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