सोमवार, 29 मई 2017

हिसाब कद मांगोगे

हिसाब कद मांगोगे
पीडीएस मतलब पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम। जिब हरियाणा बन्या तो 1518 फेयर प्राइस शॉप थीं, 988 ग्रामीण अर 530 शहरी। 15 लाख राशनकार्ड आले थे। ईब हरियाणा के कोने-कोने पे फेयर प्राइस शॉप उपलब्ध सैं। 31 3 2005 के आंकड़े बतावैं सै अक ईब 7571 फेयर प्राइस शॉप सैं हरियाणा मैं। 5189 ग्रामीण अर 2382 शहरी। 45 लाख कार्डधारकां की जरूरत पूरी करती बताई। कितनी करैं सै अक नहीं करैं सैं ये तो उपभोग्ता बता सकैं सैं। हाल में टारगेटिड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम स्कीम के तहत 35 किलोग्राम गेहूं हर म्हीने गरीबी की रेखा से नीचे के परिवारां को 4.65 रुपये प्रति किलो के हिसाब तै दिया जा रह्या सै। क्लेम कर्या जावै सै अक यह सिस्टम हरियाणा मैं आच्छी तरिया संगठित सै। हरियाणा मैं गरीबी दूर करने वाली तथा सेवा की दूसरी स्कीमें भी लागू की जारी सैं। गरीबां मैं भी और गरीब परिवारों को चयनित किया जा रहा है और उन्हें अंतोदय अन्न योजना के तहत गुलाबी कार्ड दिये जावण लागरे सैं। ये कार्ड क्यूकर बणै सैं। अर किसके बणै सैं या बतावण की बात कोन्या। यह केंद्र की स्कीम सै अर हरियाणा मैं 2001-2002 में लागू करी गई थी। इस स्कीम के तहत गुलाबी कार्ड आले परिवार नै हर म्हीने 2 रुपये किलो के हिसाब तै 35 किलो गेहूं दिया जावै सै। दिया जावै सै अक नहीं। जिस परिवार नै नहीं मिलदा ओ दैनिक ट्रिब्यून के संपादक के नाम एक चिट्ठी लिखण का कष्ट तो करियो। इस गेहूं के ल्यावण का खर्चा अर डीलर का खर्चा 50 पैसे प्रति किलो के हिसाब तै हरियाणा सरकार द्वारा किया जावै सै। इस स्कीम के तहत केंद्र सरकार 6353 मीट्रिक टन गेहूं हर म्हीने हरियाणा को देवै सै। गुलाबी कार्ड 192008 अंतोदय परिवारां को दिये जा चुके सैं। इनके हिसाब तै 6720280 कि.ग्रा. गेहूं हर म्हीने इन परिवारां ताहिं दिया जावण लागर्या सै। अपने इलाके के डिपो धोरै सूचना के अधिकार के तहत न्यों बूझ्या जाना चाहिए अक यू नाज किस किस नै मिल्या? यो आंकड़ा मार्च 2005 का सै। इसके अलावा स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत 1715.83 लाख रुपइये 2004-05 में बजट मैं दिये गये जिनमां तै 14132 स्वरोजगारियां को 1595.25 लाख रुपइये उपलब्ध करवाये गये। 2005-06 में इस स्कीम में 16 करोड़ खर्च करने की योजना थी। 14000 गरीब परिवारां पै खर्च कर्या जागा यू पीस्सा। इंदिरा आवास योजना के तहत 8845 घर बनाये गये अर 651 बणण लागरे थे 2004-05 मैं। 2215.56 लाख रुपइये खर्च करे गये। 2005-06 में 29.8 करोड़ से 11930 नये घर बणावण खातर और खर्च करे जाणे थे। असल मैं जमीनी हकीकत के सैं इसका क्यूकर बेरा लागै। साक्षर महिला समूह सै हरेक गांव में उननै बेरा पाड़ण की कोशिश करनी चाहिए। बहोत से गामां में साक्षरता आल्यां नै जनचेतना केंद्र खोले सैं उननै बी इस बारे में कुछ ना कुछ तो करना ए चाहिए नहीं तो यू पीडीएस का गेहूं न्योंए मंडियां में बिकदा रहवैगा।
एक स्कीम और सै संपूर्ण ग्रामीण योजना। इस योजना के तहत काम करने वाले को 10 किलो गेहूं 5.50 रुपये प्रति कि.ग्रा. के हिसाब तै अर 35 रुपइये नगद मजदूरी के दिये जावैं सैं। 2004-05 में कुल इस स्कीम पै 6794.28 लाख की राशि खर्च हुई। अर 70.12 लाख काम के दिवस उपलब्ध करवाये गये। ये कागजों मैं दिखा दिये अक असल में लोग काम पै लाकै उनपै काम करवाकै दिये गये। यू बड्डा सवाल था। महेन्द्रगढ़ जिले में ‘नेशनल फूड फार वर्क प्रोग्राम’ 2004-05 से लागू हुया सै। इसके तहत 600.00 करोड़ रुपये 2005-06 में खर्च करे जाने थे। इसे ढाल एक बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट इनिशिएटिव के तहत एक योजना सिरसा में शुरू करी गई। यो 3 साल का प्रोजेक्ट सै। 45 करोड़ की सहायता 3 साल मैं दी जावैगी। इसके अलावा लोकल एरिया स्कीम के तहत स्थानीय एमपी को 2 करोड़ रुपये प्रति वर्ष दिये जावैं सैं।
फेर असली सवाल यू सै अक गाम ताहिं ये स्कीम कितनी पहोंचै सै? अखबारां में खबर थी अक एक बै राजीव गांधी नै संसद मैं कह्या था अक गाम के विकास की खातर दिल्ली तै जै एक रुपइये चाल्लै सै तो 15 पीस्से पहोंचै सैं बाकी 85 पीस्से बीच मैं रैहज्यां सैं। कई साल पहलम की बात होली उस पाछै तौ घणा ए पानी सिर ऊपर कै जा लिया। ग्राम का बड़ा हिस्सा जनता का निराश सै निष्क्रिय सै। 85 पीस्से आल्यां कै जनता की निष्क्रियता बहोत सूत आरी सै। जो सक्रिय सैं वे आपस में एक-दूसरे का सिर फोड़ण लागरे सैं। 15 पीस्से बी ढंग तै गाम के विकास मैं कोन्या लागण देत्ते। गेर रै गेर पत्ता गेर। म्हारा अर इन बातां का के काम। हम राजनीति कोन्या करते। ताश खेलण तै फुरसत कोन्या। जै फुरसत लागै सै तो खाप पंचायत की चौधर तै फुरसत कोन्या। अंतर्जातीय ब्याहां पै फतवे जारी करण तै फुरसत कोन्या। इन असली बातां पै गाम कद चरचा करनी शुरू करैगा? चरचा बिना कोए राह बी कोन्या पावै। राह बी तो हमनें ए टोहवणा पड़ैगा। म्हारे गाम का संकट और कोए आकै क्यूं दूर करैगा। हमनै ऐ करना पड़ैगा। गेरद्यो ताशां नै करल्यो माड़ी घणी चरचा।

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