अकबर बीरबल के किस्से
अकबर अर बीरबल के बहोत किस्से म्हारे बीच मैं सैं। एक बर की बात सै अक अकबर अर बीरबल सैर करण लागरे जंगल मैं। इतनी वार मैं उननै देख्या अक औरत एक झाड़ी की आड़ मैं गई अर एक बालक नै जन्म दे कै बालक नै गोद मैं लेकै चाल पड़ी। अकबर बीरबल नै यू सब कुछ देख्या फेर बोले कुछ भी नहीं। रानी को भी बच्चा होने वाला था। राजा नै महल में जाकर रानी की सेवा मैं लगे सभी नौकर चाकरों व दासियों को हटा दिया। दो दिन में ही रानी परेशान हो गई कि क्या कारण है कि राजा अकबर ने यह सब मेरे साथ किया। बहुत सोच विचार के बावजूद राजा का यो व्योवहार रानी नहीं समझ पाई। रानी नै बीरबल धौरे संदेश भेज्या। बीरबल राजमहल में पहोंच ग्या। उड़ै पहोंच कै देख्या तो एक बर तो उसकै बी कोन्या समझ मैं आई बात। फेर उस दिन जंगल आला सीन घूमग्या बीरबल के दिमाग मैं। बीरबल नै रानी तै कहया अक बाग बगीचे के सारे मालियां नै बुलाओ अर कहो अक कल तै वो काम पै नहीं आवेंगे। माली हैरान! फेर रानी का हुकम। टालै क्यूकर। तीन चार दिन मैं बाग बगीचे के पौधे अर फूल सारे मुर्झागे। राजा अकबर नै देख्या तो दरबारी बुलाकै बुझया अक इन फूलां कै के होग्या? ये मुर्झा क्यूं गये?
दरबारी बोल्या - महाराज रानी साहिबा नै हुकम दिया था माली हटावण का अर बीरबल की सलाह पै रानी नै ये सब हटाये सैं। और दो च्यार बात न्यून-न्यून की लादी दरबारी नै बीरबल के बारे मैं। राजा अकबर नै रानी तै बूझया ये माली क्यों हटा दिये इन फूलां का ख्याल कूण करैगा? रानी नै जवाब देवण की जागां सवाल दाग दिया - थामनै महाराज मेरे नौकर-नौकरानी क्यूं हटा दिये। मेरी देखभाल इसे बख्त मैं कूण करैगा? अकबर नै जंगल का पूरा किस्सा सुनाया रानी ताहिं अर बोल्या जिब वा महिला झाड़ी के पाछै जाके जाप्पा कर सकै सै तो रानी क्यों नहीं? इतनी सुविधा रानी नै क्यूं चाहिये? रानी नै कोए जवाब कोनी सूझया अर वा बीरबल की कान्ही लखाई। बिना बोले बात होगी उनकी। बीरबल बोल्या - राजा धिराजा। जंगल मैं जितने पेड़ सैं, कीकर सैं, इननै कौनसे माली सींचैं सैं? वे तो आप पलैं बढ़ैं सैं। तो फेर आड़े के बाग बगिच्यां मैं मालियां की के जरूरत सै? राजा अकबर कै अपनी गल्ती समझ मैं आगी अर उसनै रानी को नौकर चाक्कर हटकै ला दिये अर बाग बगिच्यां के माली बी हटकै आगे।
अकबर राजा बीरबल नै अपना दोस्त मान्या करदे। योहे कारण था अक बाकी के दरबारी बीरबल तै बहोत घणा जल्या करदे। हर बख्त इस टोह मैं रहया करदे अक कद मौका मिले अर बीरबल के बारे में राजा आगै शिकायत ला सकैं। बख्त बख्त पै अकबर नै बीरबल के खिलाफ भड़कान्ते रहया करते। इसे ए किसे मौके पै अकबर नै बीरबल पै गुस्सा आग्या अर अकबर बोल्या - बीरबल आजकाल थाम बहोत चर्चा मैं सो। बहोत शिकायत आवण लागरी सैं थारी। काहल तै दरबार मैं मतना आइयो। बीरबल बोल्या - आपका हुकम सिर आंख्यां पै। इतना कहकै बीरबल राजदरबारां तै गायब होग्या। थोड़े दिन पाछै अकबर नै बीरबल की याद आवण लागगी। उसकी कमी खलण लागगी। दरबार मैं भी राजा अकबर का मन लागना बंद होग्या। राजा अकबर नै बीरबल बहोत ढूंढयां फेर भाई तो पाकै ए कोन्या दिया। थक हार कै अकबर नै बीरबल नै टोहवण की एक तरकीब काढ़ी। राजा नै ऐलान करवा दिया - म्हारे राज के लोग अपने साथ आधी धूप अर आधी छांव लेकर कै राज महल मैं पहोंचैं।
राजा अकबर नै आगले दिन देख्या अक् एक गांव के लोग खाटां नै सिर पै ठाये चाले आवण लागरे सैं। इन खाटां मैं मौजूद छेदां के म्हांकै छनकै किते धूप अर कितै छां उनपै पड़ण लागरी थी। या देखकै अकबर एक दम समझग्या अक जरूर इसे गांव मैं बीरबल रहवै सै। फेर अपने शक नै अकबर यकीन मैं बदलना चाहवै था। राजा अकबर नै खबर भिजवाई अक महल मैं गाम के सारे कुआं की दावत सै। जै गाम आले अपने कुएं दावत मैं नहीं भेजैंगे तो उन ताहि सजा दी जावैगी। उसी शाम गांव का प्रधान दरबार मैं आया अर न्यो बोल्या - बादशाह सलामत दावत मैं आवण की खातर म्हारे सारे कुएं राज्जी सैं फेर उनकी एक शर्त सै। राजा बोल्या - बताओ के शर्त सै। प्रधान बोल्या - वे जिबै दावत मैं आवैंगे जिब बुलावा देवण खुद महल का कुआं उनकै धौरे आवैगा। बिना बुलावे क्यूकर आ सकैं सैं आखिर इज्जतदार कुएं सैं। प्रधान का जवाब सुणकै राजा अकबर जोर तै हंस पड़या। उसकै पक्का यकीन होग्या अक उसे गाम मैं सै बीरबल। राजा नै पत्र भेजके बीरबल बुला लिया अर एक बै फेर दरबार की रौनक उल्टी आगी। बीरबल हमेश्या सोच समझकै, विचार करकै, विवेक तै बातां नै आछी ढालां समझ परख कै किसे बात का जवाब हाजिर जवाबी ढंग तै दिया करदा। दूसरी बात या भी थी अक उसका तर्क करण का आधार जमीनी आधार हुया करदा हवा मैं बात नहीं करया करदा बीरबल कदे।
अकबर अर बीरबल के बहोत किस्से म्हारे बीच मैं सैं। एक बर की बात सै अक अकबर अर बीरबल सैर करण लागरे जंगल मैं। इतनी वार मैं उननै देख्या अक औरत एक झाड़ी की आड़ मैं गई अर एक बालक नै जन्म दे कै बालक नै गोद मैं लेकै चाल पड़ी। अकबर बीरबल नै यू सब कुछ देख्या फेर बोले कुछ भी नहीं। रानी को भी बच्चा होने वाला था। राजा नै महल में जाकर रानी की सेवा मैं लगे सभी नौकर चाकरों व दासियों को हटा दिया। दो दिन में ही रानी परेशान हो गई कि क्या कारण है कि राजा अकबर ने यह सब मेरे साथ किया। बहुत सोच विचार के बावजूद राजा का यो व्योवहार रानी नहीं समझ पाई। रानी नै बीरबल धौरे संदेश भेज्या। बीरबल राजमहल में पहोंच ग्या। उड़ै पहोंच कै देख्या तो एक बर तो उसकै बी कोन्या समझ मैं आई बात। फेर उस दिन जंगल आला सीन घूमग्या बीरबल के दिमाग मैं। बीरबल नै रानी तै कहया अक बाग बगीचे के सारे मालियां नै बुलाओ अर कहो अक कल तै वो काम पै नहीं आवेंगे। माली हैरान! फेर रानी का हुकम। टालै क्यूकर। तीन चार दिन मैं बाग बगीचे के पौधे अर फूल सारे मुर्झागे। राजा अकबर नै देख्या तो दरबारी बुलाकै बुझया अक इन फूलां कै के होग्या? ये मुर्झा क्यूं गये?
दरबारी बोल्या - महाराज रानी साहिबा नै हुकम दिया था माली हटावण का अर बीरबल की सलाह पै रानी नै ये सब हटाये सैं। और दो च्यार बात न्यून-न्यून की लादी दरबारी नै बीरबल के बारे मैं। राजा अकबर नै रानी तै बूझया ये माली क्यों हटा दिये इन फूलां का ख्याल कूण करैगा? रानी नै जवाब देवण की जागां सवाल दाग दिया - थामनै महाराज मेरे नौकर-नौकरानी क्यूं हटा दिये। मेरी देखभाल इसे बख्त मैं कूण करैगा? अकबर नै जंगल का पूरा किस्सा सुनाया रानी ताहिं अर बोल्या जिब वा महिला झाड़ी के पाछै जाके जाप्पा कर सकै सै तो रानी क्यों नहीं? इतनी सुविधा रानी नै क्यूं चाहिये? रानी नै कोए जवाब कोनी सूझया अर वा बीरबल की कान्ही लखाई। बिना बोले बात होगी उनकी। बीरबल बोल्या - राजा धिराजा। जंगल मैं जितने पेड़ सैं, कीकर सैं, इननै कौनसे माली सींचैं सैं? वे तो आप पलैं बढ़ैं सैं। तो फेर आड़े के बाग बगिच्यां मैं मालियां की के जरूरत सै? राजा अकबर कै अपनी गल्ती समझ मैं आगी अर उसनै रानी को नौकर चाक्कर हटकै ला दिये अर बाग बगिच्यां के माली बी हटकै आगे।
अकबर राजा बीरबल नै अपना दोस्त मान्या करदे। योहे कारण था अक बाकी के दरबारी बीरबल तै बहोत घणा जल्या करदे। हर बख्त इस टोह मैं रहया करदे अक कद मौका मिले अर बीरबल के बारे में राजा आगै शिकायत ला सकैं। बख्त बख्त पै अकबर नै बीरबल के खिलाफ भड़कान्ते रहया करते। इसे ए किसे मौके पै अकबर नै बीरबल पै गुस्सा आग्या अर अकबर बोल्या - बीरबल आजकाल थाम बहोत चर्चा मैं सो। बहोत शिकायत आवण लागरी सैं थारी। काहल तै दरबार मैं मतना आइयो। बीरबल बोल्या - आपका हुकम सिर आंख्यां पै। इतना कहकै बीरबल राजदरबारां तै गायब होग्या। थोड़े दिन पाछै अकबर नै बीरबल की याद आवण लागगी। उसकी कमी खलण लागगी। दरबार मैं भी राजा अकबर का मन लागना बंद होग्या। राजा अकबर नै बीरबल बहोत ढूंढयां फेर भाई तो पाकै ए कोन्या दिया। थक हार कै अकबर नै बीरबल नै टोहवण की एक तरकीब काढ़ी। राजा नै ऐलान करवा दिया - म्हारे राज के लोग अपने साथ आधी धूप अर आधी छांव लेकर कै राज महल मैं पहोंचैं।
राजा अकबर नै आगले दिन देख्या अक् एक गांव के लोग खाटां नै सिर पै ठाये चाले आवण लागरे सैं। इन खाटां मैं मौजूद छेदां के म्हांकै छनकै किते धूप अर कितै छां उनपै पड़ण लागरी थी। या देखकै अकबर एक दम समझग्या अक जरूर इसे गांव मैं बीरबल रहवै सै। फेर अपने शक नै अकबर यकीन मैं बदलना चाहवै था। राजा अकबर नै खबर भिजवाई अक महल मैं गाम के सारे कुआं की दावत सै। जै गाम आले अपने कुएं दावत मैं नहीं भेजैंगे तो उन ताहि सजा दी जावैगी। उसी शाम गांव का प्रधान दरबार मैं आया अर न्यो बोल्या - बादशाह सलामत दावत मैं आवण की खातर म्हारे सारे कुएं राज्जी सैं फेर उनकी एक शर्त सै। राजा बोल्या - बताओ के शर्त सै। प्रधान बोल्या - वे जिबै दावत मैं आवैंगे जिब बुलावा देवण खुद महल का कुआं उनकै धौरे आवैगा। बिना बुलावे क्यूकर आ सकैं सैं आखिर इज्जतदार कुएं सैं। प्रधान का जवाब सुणकै राजा अकबर जोर तै हंस पड़या। उसकै पक्का यकीन होग्या अक उसे गाम मैं सै बीरबल। राजा नै पत्र भेजके बीरबल बुला लिया अर एक बै फेर दरबार की रौनक उल्टी आगी। बीरबल हमेश्या सोच समझकै, विचार करकै, विवेक तै बातां नै आछी ढालां समझ परख कै किसे बात का जवाब हाजिर जवाबी ढंग तै दिया करदा। दूसरी बात या भी थी अक उसका तर्क करण का आधार जमीनी आधार हुया करदा हवा मैं बात नहीं करया करदा बीरबल कदे।
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