बल्ले बल्ले रेशनलाइजेशन
कई दिनांतै एक शब्द पढ़ण अर सुणन मैं आ वै सै - रेशनलाइजेशन। बेरा सै के मतलब सै इसका? शिक्षा के जगत मैं इसका मतलब सै शिक्षा जगत का सुधारीकरण। स्कूली शिक्षा मैं जितने बिगाड़ पैदा होगे उन सबकी एकै राम बाण दवाई सै अर वा सै शिक्षा का सुधारीकरण अर सुधारीकरण का मतलब सै शिक्षा का निजीकरण। कहवण नै कहया जा सै अक शिक्षा मैं सुधार करया जागा अर गुणवत्ता ल्याई जावैगी। बालकां की पढ़ाई लिखाई अर उनका ठीक-ठ्याक सा रोजगार येहे दो चिंता सैं घणखरे मां-बापां की। शिक्षा का गिरता स्तर, आपाधापी अर नकल, पेपर लीकेज, प्रमाण पत्र अर डिग्रीयां की बिक्री स्कूल स्तर तै ले करके उच्च स्तर ताहिं की प्रतियोगी परीक्षावां के परीक्षा परिणामां में हेराफेरी अर और बेरा ना के-के होवण लागरया सै। एक बर की बात सै अक रमलू ताई की चाक्की राहवण चाल्या गया। घरां ताई एकली थी। पानी ल्यावण का बख्त होरया था। ताई ने सोच्ची अक इतनै रमलू चाक्की राहवै इतनै पाणी की दोघड़ भर ल्याऊं। ताई पाणी नै चाली गई। रमलू नै भूख लागरी थी। भूख-भूख मैं जोर की चोट लागगी अर चाक्की के पाट के तीन टूक होगे। सोची ले रोटी खा ल्यूं। बोइहया मैं तै रोटी ले ली तो ऊपर नै उठ्या तो ऊपर घीलड़ी लटकै थी उसकै सिर लाग्या अर वा पड़कै फूटगी। फेर सोच्ची अक कढावणी मां तै मलाई तारके उसकी गेल्यां रोटी खाल्यूं। कढावणी मैं तै मलाई तारण लाग्या तो कढ़ावणी लुढकगी अर सारा दूध गया हारे मैं। इतनै बाहर ताई की आवाज सुणी रमलू नै तो उसनै सोच्ची चाल भाजले आली ताई। भाजते-भाजते रमलू ताई की गेल्यां देहलियां पै भिड़ग्या। ताई की दोघड़ पड़कै फूटगी। तो ताई माथै हाथ मारकै बोली - रे रमलू तनै रोल्यूं। तो रमलू छुटद्या ए बोल्या - ताई ईब्बै कैसे ज्यूं-ज्यूं भीतर बड़ैगी त्यूं त्यूं रोवैगी। फेर बात थी म्हारी स्कूली शिक्षा की हालत की तो जितना गहराई मैं जावांगे जितना भीत्तर बड़कै देखांगे उतना ए रोवणा बी फालतू आवैगा।
सवाल यू है सै अक करया के जावै? हाथ पै हाथ धरकै बैठे रहवां। हाथ-पां हिलावां तो किन मुद्या पै हिलावां? गैलयां बात या बी सै अक आपां सबतै पहलम इस समस्या नै ठीक-ठीक जागां तै समझल्यां। हां तै इस रेशनलाईजेशन के नाम पै अध्यापक छात्र अनुपात 1ः60 कर दिया अर इस ढालां अध्यापकां का भी वर्क लोड बढ़ा दिया। एक और तरीका सै। मान लिया प्लस टू के स्कूल जिनमैं साइंस बी सै सौ स्कूल सैं। इनमैं 55 बायोलोजी के, चालीस कैमिस्ट्री के अर 35 फिजिक्स के लैक्चरर सैं। इसमैं होना तो यू चाहिये था अक कम तै कम 25 स्कूलां मैं तो तीनों सबजैक्टां के टीचर लाये जात्ते। उलटा ये सौ टीचर सौ स्कूलां मैं न्यारे-न्यारे ला दिये। जिस स्कूल मैं कैमिस्ट्री का टीचर कोन्या। तो बालक क्यूं दाखला लेंगे $2 मैं साइंस मैं। जिब बालकां नै दाखिला नहीं लिया तो उस स्कूल मैं वो फिजिक्स आला टीचर बी सरप्लस होग्या।
म्हारे हरियाणा मैं कितने स्कूल सैं बेरा सै के? कोनी बेरा। मास्टर जी धोरै बूझ कै देख। उसनै बी कोनी बेरा। हां तै हरियाणा मैं 8710 प्राथमिक, 1455 माध्यमिक, 1751 उच्च अर 1090 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सैं। इन मां तै बहुत से स्कूलां के मुखिया पद कई-कई बरस तै खाली पड़े सैं। मिडल स्कूल मैं 8 साल पहलम मुख्याध्यापक लाये थे। उस पाछै कोए पदोन्नति नहीं करी। प्राथमिक विद्यालयों के हैड टीचर के पद समाप्त करण की गुप्त योजना घड़ी जावण लागरी बताई। स्कूल का स्तरोन्यन (दर्जा बढ़ाई) राजनैतिक आधार पै करी जावै सै अर उड़ै अध्यापकां के पद स्वीकृत नहीं करे जान्दे। प्राध्यापक कोन्या भेजे सरकार नै इस कर कै ज्यादातर ग्रामीण विद्यालयों मैं विज्ञान अर वाणिज्य संकाय बंद करने पड़े सैं। गुणवत्ता बढ़ावण के नाम पै पहली जमात तैए अंग्रेजी पढ़ावण अर कम्प्यूटर शिक्षा देवण का काम बहोत बड़ी उपलब्धी के रूप में पेश करया जावै सै। अंग्रेजी शिक्षा शुरू करण का दावा आत्मवंचना के अलावा कुछ नहीं सै। कोरा थोथा नारा सै। सच्चाई तो या सै अक छटी तै दसवीं जमात तक अंग्रेजी अनिवार्य विषय बताया, फेर पूरे प्रदेश मैं अंग्रेजी अध्यापक का एक बी पद स्वीकृत नहीं सै, पहली तै ले के दसवीं जमात ताहिं। देख्या कमाल। दूजे कान्हीं कम्प्यूटर शिक्षा के जरिये डाटा इन्फोटेक व हाइट्रोन का धंधा जरूर जमवा दिया अर गेल्यां ए अपणा बी जमा लिया। कम्प्यूटी की फीस न दे पावण करकै निर्धन बालक पढ़ाई छोड़ देवण की खातर मजबूर करे जावैं सैं। खासकर दलित वर्ग के बालक अर लड़कियां इसके सबतै बड्डे शिकार सैं। दो बरस हो लिए फेर किसे बी नये खोले गये अर कै स्तरोन्नत करे गये। विद्यालय मैं अध्यापकां-प्राध्यापकां के पद स्वीकृत नहीं हो लिये। क्यों? इसका जवाब कौन देवै। बिल्ली के गल मैं घंटी कौन बांधै? दूसरे स्कूलां मां तै प्रतिनियुक्ति पै अध्यापक भेज राखे सैं। नतीजा यू हुया अक कौवा चल्या हंस की चाल, अपणी बी भूल बैठ्या, ना पुराने स्कूल मैं ठीक पढ़ाई चाल रही अर नये मैं तो चालै ए क्यूकर थी।
सैमस्टर प्रणाली बिना सोचे-समझे लियाये। इम्तिहान मैं आब्जैक्टिव टाइप विधि लियाये। तैयारी कोए कर नहीं राखी। डीपीईपी प्रोग्राम पढ़ण बिठा दिया, ईब सर्व शिक्षा अभियान नै पढ़ण बिठा देंगे। बेरा ना जनता इननै कद पढ़ण बिठावैगी अर पहलम की ढालां स्कूल अपनी रहनुमाई मैं चलावैगी। ओ दिन एक ना एक दिन आवैगा जरूर। मेरे बीरा ताश खेलते-खेलते इन बातां पै बी चरचा तो करे लिया करो। आम तौर पै कहया जा सै अक मास्टर पढ़ाते कोन्या स्कूलां मैं। याहे बात न्यों बी कही जा सके सै अक म्हारी सरकार अर म्हारी जनता कोन्या चाहती अक सरकारी स्कूलां मैं पढ़ाई हो। जिस दिन ये दोनूं धड़े चाहवैंगे, उस दिन स्कूलां की हालत जरूर सुधरैगी अर असल मैं असली रेशनलाइजेशन शिक्षा जगत मैं होवैगा।
कई दिनांतै एक शब्द पढ़ण अर सुणन मैं आ वै सै - रेशनलाइजेशन। बेरा सै के मतलब सै इसका? शिक्षा के जगत मैं इसका मतलब सै शिक्षा जगत का सुधारीकरण। स्कूली शिक्षा मैं जितने बिगाड़ पैदा होगे उन सबकी एकै राम बाण दवाई सै अर वा सै शिक्षा का सुधारीकरण अर सुधारीकरण का मतलब सै शिक्षा का निजीकरण। कहवण नै कहया जा सै अक शिक्षा मैं सुधार करया जागा अर गुणवत्ता ल्याई जावैगी। बालकां की पढ़ाई लिखाई अर उनका ठीक-ठ्याक सा रोजगार येहे दो चिंता सैं घणखरे मां-बापां की। शिक्षा का गिरता स्तर, आपाधापी अर नकल, पेपर लीकेज, प्रमाण पत्र अर डिग्रीयां की बिक्री स्कूल स्तर तै ले करके उच्च स्तर ताहिं की प्रतियोगी परीक्षावां के परीक्षा परिणामां में हेराफेरी अर और बेरा ना के-के होवण लागरया सै। एक बर की बात सै अक रमलू ताई की चाक्की राहवण चाल्या गया। घरां ताई एकली थी। पानी ल्यावण का बख्त होरया था। ताई ने सोच्ची अक इतनै रमलू चाक्की राहवै इतनै पाणी की दोघड़ भर ल्याऊं। ताई पाणी नै चाली गई। रमलू नै भूख लागरी थी। भूख-भूख मैं जोर की चोट लागगी अर चाक्की के पाट के तीन टूक होगे। सोची ले रोटी खा ल्यूं। बोइहया मैं तै रोटी ले ली तो ऊपर नै उठ्या तो ऊपर घीलड़ी लटकै थी उसकै सिर लाग्या अर वा पड़कै फूटगी। फेर सोच्ची अक कढावणी मां तै मलाई तारके उसकी गेल्यां रोटी खाल्यूं। कढावणी मैं तै मलाई तारण लाग्या तो कढ़ावणी लुढकगी अर सारा दूध गया हारे मैं। इतनै बाहर ताई की आवाज सुणी रमलू नै तो उसनै सोच्ची चाल भाजले आली ताई। भाजते-भाजते रमलू ताई की गेल्यां देहलियां पै भिड़ग्या। ताई की दोघड़ पड़कै फूटगी। तो ताई माथै हाथ मारकै बोली - रे रमलू तनै रोल्यूं। तो रमलू छुटद्या ए बोल्या - ताई ईब्बै कैसे ज्यूं-ज्यूं भीतर बड़ैगी त्यूं त्यूं रोवैगी। फेर बात थी म्हारी स्कूली शिक्षा की हालत की तो जितना गहराई मैं जावांगे जितना भीत्तर बड़कै देखांगे उतना ए रोवणा बी फालतू आवैगा।
सवाल यू है सै अक करया के जावै? हाथ पै हाथ धरकै बैठे रहवां। हाथ-पां हिलावां तो किन मुद्या पै हिलावां? गैलयां बात या बी सै अक आपां सबतै पहलम इस समस्या नै ठीक-ठीक जागां तै समझल्यां। हां तै इस रेशनलाईजेशन के नाम पै अध्यापक छात्र अनुपात 1ः60 कर दिया अर इस ढालां अध्यापकां का भी वर्क लोड बढ़ा दिया। एक और तरीका सै। मान लिया प्लस टू के स्कूल जिनमैं साइंस बी सै सौ स्कूल सैं। इनमैं 55 बायोलोजी के, चालीस कैमिस्ट्री के अर 35 फिजिक्स के लैक्चरर सैं। इसमैं होना तो यू चाहिये था अक कम तै कम 25 स्कूलां मैं तो तीनों सबजैक्टां के टीचर लाये जात्ते। उलटा ये सौ टीचर सौ स्कूलां मैं न्यारे-न्यारे ला दिये। जिस स्कूल मैं कैमिस्ट्री का टीचर कोन्या। तो बालक क्यूं दाखला लेंगे $2 मैं साइंस मैं। जिब बालकां नै दाखिला नहीं लिया तो उस स्कूल मैं वो फिजिक्स आला टीचर बी सरप्लस होग्या।
म्हारे हरियाणा मैं कितने स्कूल सैं बेरा सै के? कोनी बेरा। मास्टर जी धोरै बूझ कै देख। उसनै बी कोनी बेरा। हां तै हरियाणा मैं 8710 प्राथमिक, 1455 माध्यमिक, 1751 उच्च अर 1090 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सैं। इन मां तै बहुत से स्कूलां के मुखिया पद कई-कई बरस तै खाली पड़े सैं। मिडल स्कूल मैं 8 साल पहलम मुख्याध्यापक लाये थे। उस पाछै कोए पदोन्नति नहीं करी। प्राथमिक विद्यालयों के हैड टीचर के पद समाप्त करण की गुप्त योजना घड़ी जावण लागरी बताई। स्कूल का स्तरोन्यन (दर्जा बढ़ाई) राजनैतिक आधार पै करी जावै सै अर उड़ै अध्यापकां के पद स्वीकृत नहीं करे जान्दे। प्राध्यापक कोन्या भेजे सरकार नै इस कर कै ज्यादातर ग्रामीण विद्यालयों मैं विज्ञान अर वाणिज्य संकाय बंद करने पड़े सैं। गुणवत्ता बढ़ावण के नाम पै पहली जमात तैए अंग्रेजी पढ़ावण अर कम्प्यूटर शिक्षा देवण का काम बहोत बड़ी उपलब्धी के रूप में पेश करया जावै सै। अंग्रेजी शिक्षा शुरू करण का दावा आत्मवंचना के अलावा कुछ नहीं सै। कोरा थोथा नारा सै। सच्चाई तो या सै अक छटी तै दसवीं जमात तक अंग्रेजी अनिवार्य विषय बताया, फेर पूरे प्रदेश मैं अंग्रेजी अध्यापक का एक बी पद स्वीकृत नहीं सै, पहली तै ले के दसवीं जमात ताहिं। देख्या कमाल। दूजे कान्हीं कम्प्यूटर शिक्षा के जरिये डाटा इन्फोटेक व हाइट्रोन का धंधा जरूर जमवा दिया अर गेल्यां ए अपणा बी जमा लिया। कम्प्यूटी की फीस न दे पावण करकै निर्धन बालक पढ़ाई छोड़ देवण की खातर मजबूर करे जावैं सैं। खासकर दलित वर्ग के बालक अर लड़कियां इसके सबतै बड्डे शिकार सैं। दो बरस हो लिए फेर किसे बी नये खोले गये अर कै स्तरोन्नत करे गये। विद्यालय मैं अध्यापकां-प्राध्यापकां के पद स्वीकृत नहीं हो लिये। क्यों? इसका जवाब कौन देवै। बिल्ली के गल मैं घंटी कौन बांधै? दूसरे स्कूलां मां तै प्रतिनियुक्ति पै अध्यापक भेज राखे सैं। नतीजा यू हुया अक कौवा चल्या हंस की चाल, अपणी बी भूल बैठ्या, ना पुराने स्कूल मैं ठीक पढ़ाई चाल रही अर नये मैं तो चालै ए क्यूकर थी।
सैमस्टर प्रणाली बिना सोचे-समझे लियाये। इम्तिहान मैं आब्जैक्टिव टाइप विधि लियाये। तैयारी कोए कर नहीं राखी। डीपीईपी प्रोग्राम पढ़ण बिठा दिया, ईब सर्व शिक्षा अभियान नै पढ़ण बिठा देंगे। बेरा ना जनता इननै कद पढ़ण बिठावैगी अर पहलम की ढालां स्कूल अपनी रहनुमाई मैं चलावैगी। ओ दिन एक ना एक दिन आवैगा जरूर। मेरे बीरा ताश खेलते-खेलते इन बातां पै बी चरचा तो करे लिया करो। आम तौर पै कहया जा सै अक मास्टर पढ़ाते कोन्या स्कूलां मैं। याहे बात न्यों बी कही जा सके सै अक म्हारी सरकार अर म्हारी जनता कोन्या चाहती अक सरकारी स्कूलां मैं पढ़ाई हो। जिस दिन ये दोनूं धड़े चाहवैंगे, उस दिन स्कूलां की हालत जरूर सुधरैगी अर असल मैं असली रेशनलाइजेशन शिक्षा जगत मैं होवैगा।
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