मंगलवार, 30 मई 2017

हमनै तो ताश खेलण तैं फुर्सत कोण्या

हमनै तो ताश खेलण तैं फुर्सत कोण्या
खूंटा ठोक
हरियाणा मैं आज के दिन महिलावां की जिंदगी तनाव , असुरक्षा , अभाव ,अर असहायता मतलब लाचारी मैं डूबती जाण लागरी सै |  कोय कह सकै सै अक महिलावां नैं खेलां मैं तम्बू गाड़ दिए |  ठीक |  पर वे इस करकै नहीं गाड़ पाई अक हमनै गामां मैं खेलण कूदण  का उन ताहिं कोये माहौल बना कै दिया हो , वे अपनी लग्न अर खुबात  तैं जीत ल्याई मैडल |  औरत पै तो शिकंजा और मजबूत होंता आवै सै |  इस्री भ्रूण हत्या , दहेज़ हत्या , इज्जत के नाम पै हत्या का ग्राफ ऊपर नै जावण लागरया सै |  यौन उत्पीड़न ,बलात्कार , छेड़ छाड़ ,डराना -धमकाना ,घरेलू हिंसा ,औरतां का अपमान , असुरक्षा अर घुटन इस हद ताहिं बढ़गे अक नेतावां  नै और लोगां नै न्यूँ मान लिया अक ये तो आम बात सैं | आर्थिक संकट आज दरवाजे पै आकै खड़्या होग्या अर परिवार टूटते जावण लागरे सैं |  जीवन के साफ़ सुथरे साधन बचे नहीं तो खुली छिप्पी वैश्यावृति कांहीं भी औरत सारे कै धकेली जावण लागरी सैं |
    अराजकता और मनमानेपन का जो माहौल आड़ै बण्या सै उसमैं महिलावां नै 'सस्ते मैं उपलब्ध अर 'आसानी तैं उपलब्ध शिकार'  के  रूप मैं देख्या जावै सै |  इस आर्थिक असमानता अर सामजिक  असमानता के चालतें ताकतवर तबके महिलावां की गेल्याँ कुछ भी अर किसे भी हद ताहिं बेरा ना कितना घृणित काम कर सकैं सैं | के  कुल मिला कै सौ का तोड़ यूं सै अक महिलावां का अवमूल्यन हुआ सै |  गरीब तैं गरीब तबक्यां मैं भी उनके अपने समुदाय और परिवार के बीच मैं भी इन महिलावां पै अत्याचार बढ़े सैं |  औरतां नै ' क्षणिक मजे की चीज ' की ढालां देखना अर इस तथाकथित मजे खातर इन औरतां नै मौका लागते की साथ घेर लेना बड़ी आसान और आम बात होगी |  पिछले दिनों मैं हरियाणा मैं परित्यक्ताओं   और औरतों के साथ संबंधों मैं धोखाधड़ी बहोत बधी सै |  ब्याह के कुछ दिन पाछै लड़कियां पै हिंसा बढ़ी सै और क़त्ल और आत्म हत्या के केस साहमी आये सैं |   दूजे कांहीं लिंग अनुपात मैं विषमता के कारण लड़कियां दूर दूर तैं खरीद कै ल्याई औरत पसंद नहीं आयी तो उसनै उल्टा छोड़ आये अर उसकी बाहण नै  लियाये उसकी जागां  | ईब तै औरतां के खरीद फरोख्त के धंधे मैं दलाल भी पैदा होंगे |  या खरीद फरोख्त तेजी  तैं रफ़्तार पकड़ण लागरी सै अर औरतां के हक़ मैं बोलनिया मनस कै जनवादी महिला समिति बरगी संस्था बहोत थोड़ी सैं |  हरियाणा के समाज मैं संघर्ष करण आली महिलावां की खातर 'स्पोर्ट सिस्टम 'की बहोत कमी सै |  जितनी सामाजिक असुरक्षा बढ़ती जाण लागरी सै उसके हिसाब तैं यूं एक दो नारी निकेतन का मामला कोणी रेहरया  |  परित्यक्ताओं , एकल माओं ,अविवाहित महिलाओं ,यौन उत्पीड़न की शिकार उजड़ी औड़ महिलाओं ,बच्चियों की  जरूरतों नैं ध्यान राख कै समझ कै समाज मैं उनका स्थान बनाना बहोत जरूरी होग्या |  शार्ट स्टे होम , कामकाजी महिला हॉस्टल ,लड़कियों के हॉस्टल , मुफ्त जच्चा बच्चा केंद्र , कानूनी सहायता केंद्र , सलाह केंद्र, तनाव मुक्ति केंद्र , मनोचिकित्सा केंद्र, कौशल विकसित करण आले कार्यक्रम , एकल माओं के बच्चों की शिक्षा के लिए अनुदान और कर्ज की सुविधा , महिला स्वास्थ्य केंद्र , व्यायामशालायें , सामूहिक रसोईघर , की मांग जरूरी होगी | हिंसा की शिकार महिलावां की खातर कानून और स्वास्थ्य से संबंधित आपातकालिक व जल्द सेवाओं गंभीरता तैं की मांग समाज मैं ठावनी बहोत जरूरी होगी |  जौण बी जड़ै सै उसनै ईसे स्पोर्ट सिस्टम के खड़या करण मैं आपणी मदद जरूर करणी चाहिए |  इसके साथ साथ सरकार पै भी दबाव बढ़ाना चाहिए इस स्पोर्ट सिस्टम के विकास की खातर |
   हरियाणे मैं पढ़े लिखे लोगां मैं लिंग अनुपात एक हजार पुरुषां पै छह सौ सतरह महिलावां का पहोंच लिया था कुछ साल पहले |  या खतरे की घंटी बाज ली हरियाणा मैं |  पर लोगां नै ताश खेलण तैं फुर्सत कोन्या , कै गाल की दो फुट जमीन पै कब्ज़ा करण की जुगाड़ बाजी मैं सैं | इन सारी  बातां पर गाम अर शहर की महिलावां नै अर पुरुषां नै  गंभीरता तैं सोच्चण की जरूरत सै 

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