सोमवार, 29 मई 2017

मनोज बबली जिंदाबाद

मनोज बबली जिंदाबाद, नहीं दबैगी थारी आवाज
सते, फते, नफे और सविता, कविता, सरिता, और ताई भरपाई सही सांझ के पांच बजे पहोंचगे जनचेतना केंद्र मैं। सरिता बोली - मनोज अर बबली के कत्ल की खबर सुणकै बहोत दर्द हुया दिल मैं। फत्ते छूटता ए बोल्या - दर्द क्यूं हुया? गाम की गाम मैं ब्याह करकै कितना गल्त काम करया सै उननै। सरिता बोली - कूणसे कानून का उल्लंघन कर दिया फत्ते उननै। कौनसी धारा तोड़ दी उननै? फत्ते बोल्या - कानून-वानून का तो मनै बेरा ना फेर करया बहोत माड़ा काम। न्यों भाण-भाई का ब्याह करना म्हारा हरियाणा का समाज कोन्या मानै। यो काम म्हारी परम्परा की संगत मैं कोन्या। सरिता बोली - कौन सी परम्परा की बात करै सै फत्ते? नल-दमयन्ती की परम्परा मैं तो दमयन्ती नै उन बख्तां मैं स्वयंबर रचया था अर अपने मनपसंद के माणस के गल मैं माला पहराई थी। आज अपनी मर्जी तै ब्याह करनियां गेल्यां ये खाप पंचायत के करैं सैं पूरा संसार जानै सै अर थू-थू करै सै इनपै। फते बोल्या - जिब नल दम्यन्ती के एक गाम के थे? सरिता बोली - दो गाम आल्यां की लव मैरिज नै स्वीकार करलें सै ये थारी तालिबानी पंचायत तो बड़ी आच्छी बात। दूसरी बात परम्परा की सै, वा या सै अक पूरे भारत मैं हर इस हरियाणा आले इलाके मैं भी कदे इसे बख्त थे जिब परिवार की मुखिया औरत हुया करती। फते बोल्या - सरिता बे सिर-पैर की बात करकै के मनोज अर बबली की हिमायत कराई जा सकै सै। औरत कद हुया करती घर की चौधरी।
सरिता बोली - घर की चौधरी तो थी ए थी वे छोरे नै ब्याह कै अपणे घर मैं ल्याया करती। इसे परम्परावादी सो तै इन परम्परावां नै ये तालिबानी क्यों भूलगे फत्ते। ये परम्परा का साहरा ले कै म्हारी भावनावां तै खिलवाड़ करैं सैं ये पंचायती। अर इन पंचायतियां की हिस्ट्री खोल कै धरदी तो भीड़ी धरती हो ज्यागी इननै। दूसरी बात या सै अक एक मिनट आपां इस बात नै न्यारी करकै देखां अक यू ब्याह गल्त था अक ठीक। मैं कहूं सूं अक मनोज बबली नै ठीक करया था फत्ते कहवै गल्त करया। फेर जो बी हो कानून अपने हाथ मैं लेवण का हक किसनै सै? जिननै कोए कानून नहीं तोड़या भारत के संविधान का उननै तो इतनी कसूती निर्मम हत्या बख्शी इन पंचातियां नै अर जिननै सरासर सबकै साहमी दिन धौली भारत के संविधान की, भारत के कानून की धज्जियां उड़ा दी उनकी मेर मैं आण खड़ी थी ये तालिबानी पंचायत। म्हारी सरकार कै अर म्हारे नेतावां कै बी सांप सूंघग्या। सन्नपात सा मारग्या, कुछ बोलते कोन्या। मान लिया एक मिनट की खातर उन नौजवान युवक-युवती नै गल्ती कर दी (असल मैं बहुत वीरता का काम करया) तो इसका यो मतलब कड़ै सै अक ये तालिबानी पंचायत कानून अपने हाथ मैं ले कै जंगल का राज चलावैं। मनोज के मां-बापां का के कसूर। चंद्रपति विधवा औरत सै उसकी बेटी सीमा सै उनतै या पंचायत बहिष्कार करकै के बताना चाहवै सै समाज नै? फत्ते धोरै कोए जवाब नहीं था इन बातां का। न्यौं बोल्या यो बहिष्कार का दबाव तो इस खातर बनाया सै अक समझौता होज्या। कातिलां के खिलाफ दर्ज केस वापस ले ले चंद्रपति अर उसका परिवार। इसतै घटिया अर अनैतिक बात और कोए नहीं हो सकती।
फते बोल्या - सरिता तूं इन ज्ञान विज्ञान आल्यां कै हत्थै तो नहीं चढ़गी सै। वे गोत की गोत मैं अर गाम की गाम मैं ब्याह करवात्ते हांडैं सैं। सरिता बोली - उनतै पहलम तो अपणा ताऊ देवीलाल चौटाला गाम की गाम मैं ब्याह बेरा नी कितने अक करवाग्या। अर और भी घणे गाम सैं जित गाम की गाम मैं ब्याह होज्यां सैं। दूसरे एक गाम मैं मान लिया जाटां के 16 गोत सैं इनमैं एक गोत खेड़े का सै। तो इस गोत के लोग तो बाकी 15 गोतां की छोरी ब्याह कै ल्या सकैं सैं, फेर इन 15 गोतां के लोग उस खेड़े आले गोत की छोरी ब्याह कै नहीं ल्या सकते। फत्ते बोल्या - जै उनके गोत की छोरी बहू बणकै आ ज्यागी तो के कहवैंगे वे उसनै? सरिता बोली - जिब ये खेड़े गोत के लोग इन 15 गोतां की छोरियां नै ब्याह कै उस गाम मैं ल्यावैं सैं तो ये के कहवैंगे उस छोरी नै? फत्ते चुप होग्या। फेर नफे बोल्या - देख सरिता या गाम की गाम मैं ब्याह की बात बी देखी जा, फेर उसे गोत मैं ब्याह की बात तो गलै कोन्या उतरती। सरिता बोली - भाई-बहन का ब्याह तो यो सै कोन्या कुनबे तो न्यारे-न्यारे थे इनके। बाकी ब्राह्मण समुदाय मैं उस गोत मैं ब्याह होवण लागरे। जै वशिष्ठ का आपस मैं सूत बैठज्या तो ये शास्वत बदल कै ब्याह करण का राह बना लें सैं इसा सुन्या सै। अर न्योंए बनिया समुदाय मैं भी, जै सिंघल के छोरा-छोरी ब्याह करना चाहवैं तो फांसी के तालिबानी फैंसले कोन्या बनाये जात्ते। फत्ते बोल्या - के वे उसे गोत-नात मैं ब्याह कर लेवण देवैं सैं? सरिता बोली - हाथ कंगण नै आरसी के अर पढ़े लिखे नै फारसी के। बूझले चाल इैबै बनियां के घरां चालकै। सरिता और फत्ते बनिया के यहां चले जाते हैं।
ताई राम प्यारी कहती है - देखो, बेबे उन बालकां नै चाहे जो कुछ बी करया हो फेर उनकी हत्या तो किसे तरियां बी गलै कोन्या उतरती। इतनी वार मैं सरिता अर फत्ते बी आगे। नफे बोल्या - के बताई लाला जी नै। फत्ते तो चुप रहया। उसकी तो नानी सी मररी थी। सरिता बोली - जै सिंघल छोरा हो अर छोरी बी सिंघल हो तो छोरी अपना गोत छोड़ कै मां का गोत अपना ले सै अर उनकी मर्जी का ब्याह होज्या सै। कोए तालिबानी फैसला नहीं होता इन समुदायां मैं। सविता बोली - ईब बताओ? तालिबानी पंचातियो थारी वा हिंदू संस्कृति कौन सी सै जो उन मानसां नै जिननै प्यार के रिश्ते को अंजाम दिया उननै फांसी देयो कै नहर में फैंक कै मार दयो। ब्राह्मण अर बनिया तै बड्डा हिंदू कौन सै हरियाणा के समाज मैं? देखना यो है सै अक मनोज अर बबली की शहादत नै कितने लोग शहादत के रूप मैं देखैं सैं अर कातिलां नै सबक सिखावण की खातर इनकी साथ खड़े होवैं सैं। बख्त माफ नहीं करैगा।

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