सोमवार, 29 मई 2017

अंधविश्वास

बोलबाला अंधविश्वास का
माणस की स्थिति का सार यो सै अक वो एक इसे वातावरण मैं जीवै सै अक जो उसके प्रति आज्ञाकारी ना होके बाधक का काम करै सै, एक ईसा वातावरण जिसपै नियंत्रण राखण की खातर माणस नै लगातार प्रयासरत रहना होवै सै। जिसपै माणस पूरा प्रभुत्व स्थापित कोन्या कर सकदा। माणस का भौतिक तथा सामाजिक स्थितियां हमेशा कार्य प्रस्तुत करती रहवैं सैं। जिसनै पूरा करण की खातर उसनै चतराई के साथ साधन जुटाने पड़ैं सैं। मानवीय विवेक अर तर्कशीलता के अभाव मैं मानवीय सभ्यता संभव कोन्या थी क्योंकि सभ्यता का विकास विश्व नै जानने एवं नियंत्रित करण के, माणस के अथक, अनवरत प्रयास तै हुआ - ईसा उसनै तर्क आधारित बिचारां अर क्रियाकलापां के साहरै करया। अरस्तू पहला विचारक था जिसने म्हारे ताहिं तर्क की विवेक की विधि बताई। विज्ञान का एक ताकत के रूप में उद्भव गैलिलियो के बख्तां मैं हुआ। विवेक अर तर्कवाद का उद्देश्य माणसां के दिमागां पै छाये अंधविश्वासां के जाले दूर करना सै। यो मांग करै सै अक सारे ढाल के विश्वास अर आस्थाएं बुद्धि अर विवेक पर आधारित होने चाहिएं अर बुद्धि अर विवेक का मतलब है अक हम सारी बातां पै विवेक अर तर्क के हिसाब तै विचार करैं। यो अंधविश्वास के बुतां नै नष्ट करै सै। अनुसन्धेय, जांच पड़ताल-रहित, पूछताछ रहित, सूफीवाद (रहस्यवाद), रूमानी भावुकतावाद, संस्कारवाद, चमत्कार आदि के बुतां का खात्मा वैज्ञानिक जीवन पद्धति करै सै। दो हरफां मैं वो सब कुछ जो खुद नै तर्क अर धैर्यपूर्ण जांच पड़ताल के साहमी असेध समझै सै उसनै वैज्ञानिक चेतना धराशायी करण का काम करै सै। इस म्हारे समाज मैं स्वार्थी तत्वां नै अंधविश्वासां ताहिं स्थाई बनाया अर नये-नये अंधविश्वासां ताहिं जन्म दिया। मानव समाज नै तब ताहिं सभ्य नहीं बनाया जा सकदा जब ताहिं, धार्मिक कट्टरता, पारम्परिक अर रूढ़िवादी विश्वासां अर आस्थावां तै उसका संबंध विच्छेद नहीं हो जान्ता। माणस नै सभ्य बणावण की खातर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अर माणस मैं जो कुछ भी उदात्त सै अर बढ़िया सै उसे अपनाना होगा।
असल मैं अंधविश्वास सै के? प्रमाण के होते होए भी विश्वास ना करना अर कै प्रमाण के ना होन्ते होएं भी विश्वास करना अंधविश्वास के खाते मैं आवै सै। दूसरी बात किसे एक रहस्य का स्पष्टीकरण किसे दूसरे रहस्य के मांह कै प्रस्तुत करना। इस बात मैं विश्वास करना कि संसार का कारोबार दैवयोग अथवा सनकी तरीके तै चालण लागरया सै। तीजी बात सै कार्य-कारण के बीच के वास्तविक संबंध की अवहेलना करना। चौथी बात विचार, आकांक्षा, उद्देश्य, रूपरेखा नै प्रकृति के अस्तित्व का कारण बनाना। पांचमी बात अक यू विश्वास करना अक बुद्धि नै पदार्थ की उत्पत्ति करी अर बुद्धि ए इसका संचालन करै सै। बल नै पदार्थ तै न्यारा मानना अथवा पदार्थ को बल तै न्यारा मानना। छठी बात चमत्कारां, मंत्र-तंत्र अर भाग्य, सपन्यां अर भविष्य वाणियां मैं विश्वास करना। सातमी बात अलौकिक मैं विश्वास करना। यू अंध विश्वास अज्ञानता की नींव पै टिक्या होवै सै, धार्मिक कट्टरवाद इसकी आधी स्वता होवै सै अर दुराशा इसका गुम्बद हो सै। अंधविश्वास अज्ञान का शिशु हो सै अर कष्टां का जन्मदाता। आम तौर पै हरेक दिमाग मैं अंधविश्वास का कुछ ना कुछ अंश पाया जावै सै। बर्तन धोन्ती हाण किसे औरत के हाथ तै बर्तन धोवण आला कपड़ा गिर जावै सै तो वा इसका मतलब काढै सै - कोए आवण आला सै। कपड़े के धरती पै गिरने अर मेहमान के आवण के बीच कोए संभव होने योग्य संबंध नहीं सै। गिरया औड़ कपड़ा उन लोगां के मन मैं जो उड़ै हाजिर कोन्या मुलाकात की इच्छा उत्पन्न नहीं कर सकता। हजारों लोग शुभ अर अशुभ दिनों, अंकां, शकुन, राशि तथा मणि एवं कीमती पत्थरां मैं विश्वास करैं सैं। बहोत से लोग शुक्रवार नै अशुभ मानैंगे तै दूसरे शनिचर नै अशुभ मानैंगे। इस ढाल अनेक लोगां का विश्वास सै अक तेरह माणसां नै कट्ठे होकै भोजन नहीं करना चाहिये। जै तेरां का अंक एक खतरनाक अंक है तो छब्बीस का अंक तो दोगुणा खतरनाक हुआ। हम अपने चारों कान्ही नजर मारकै देखां अक कितने अंधविश्वास बिखरे पड़े सैं। हम अपने मन मैं झांक कै देखां अक कितने अंधविश्वास म्हारे भीतर जगहां बनाये बैठे सैं। बिल्ली राह काटज्या तो कसौण, खाली दोघड आली फेट ज्या तो कसौण। अनेक शताब्दियां तक इसा मान्या जान्दा रह्या अक सूर्यग्रहण अर चंद्रग्रहण महामारी अर अकाल की पूर्व सूचना होते हैं। फेर आज तो इसी बात कोन्या। इसे तरियां ताबीज, तंत्र-मंत्र, भूत प्रेत मैं विश्वास करना कोरा अंधविश्वास सै। आई किमै समझ मैं। हरियाणा मैं अंधविश्वास बढ़ते जावण लागरै सैं। सोचियो किमै तो।

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