रविवार, 28 मई 2017

हरियाणा नम्बर वन

हरियाणा नम्बर वन
सते फते नफे सविता कविता सरिता नमिता संगीता अर ताई भरपाई जन चेतना केन्द्र मैं आई अर दुख-सुख की बतलाई। कविता बोली - के बात आज सरिता कमनू सी लागै सै। सरिता बोली - कमनू सी के, बातै कुछ इसी सै। कविता - बता तो सही के बात सै। चरचा करैगी तो किमै राह बी लिकड़ैगा। सरिता बोली - म्हारी रिस्तेदारी नंूह कान्ही से मेवात मैं। उड़ै गई तो बेरा लाग्या अक गाम के दो माणसां नै जिनमैं एक सरपंच का भानजा भी था एक बहू की गेल्यां खेतां में जोर जबरदस्ती कर ली। पहलम तो पुलिस नै ए रिपोर्ट लिखण मैं दिन मैं तारे दिखा दिये। बेरा ना वे कित कित घुमा दिये। महिला पुलिस का चक्कर पड़ग्या फेर। एक पुलिस आला तो बोल्या अक ताली एक हाथ तै कोन्या बाजती। सुनकै उसके घर आला बहोत दुखी हुया फेर के करै? उसका गांव तिगाव पी एच सी के तहत आवै सै। अर इस पी एच सी मैं कोए बी लेडी डाक्टर कोन्या। उड़े तै चाल कै नूंह के अस्पताल में आये तो बताया अक महिला डाक्टर एकै ए सै अर वा रक्साबन्धन पै छुट्टी लेकै जारी सै। बहू का बुरा हाल। कोए इलाज नहीं शुरू हुया अर लोगां के तान्ने वे न्यारे। घरआला बोल्या होलदार नै अक होरी सै डाक्टरी, तूं हमनै म्हारे घरां जानदे। नूंह तै चाले-चाले माण्डी खेड़ा पहोंचे। यो मेवात जिले का जिला स्तर का अस्पताल सै। उड़ै बी एक लेडी डाक्टर ठेकेदारी आले खाते मैं ला राखी। वा बोली अक म्हारे ताहिं इस तरियां के मैडीकोलीगल केस करण की इजाजत कोन्या।
बड़े हाड़े खाये फातमा के घरआले नै, फेर उस डाक्टरनी नै कति हाथ खड़े कर दिये। घरआले नै उसके पां पकड़ लिये तो वा छोह मैं आकै बोली - मेरी नौकरी मैं डांगर हांड ज्यावैंगे। मैं नहीं कोए मदद कर सकदी थारी। फेर पां पकड़ण का एक फायदा होग्या अक उस लेडी डाक्टर नै उसका केस गुड़गावां के सीएमओ कै रैफर कर दिया। रात होगी। कित जावैं? होलदार उड़े के थाने मैं लेग्या। फातमा के घर आले का दिल धक-धक करै था अक कदे और लेने के देने पड़ज्यां। फेर ओ होलदार बढ़िया माणस था। क्यूकरै रात उड़ै काटी अर आगले दिन बख्तै गुड़गामा के अस्पताल मैं पहोंचगे। उड़ै लेडी डाक्टर की घंटा भर बाट देखी। आई तो कागज देखे अर कागज देख के बोली अक यो तो मेवात जिले का केस सै इसका दूसरे जिले का डाक्टर परचा नहीं काट सकदा। फातमा के घरआले की पाहयां तले की जमीन लिकड़गी। करै तो के करै? बताओ उसनै आगै के करना चाहिए था? होलदार गुड़गामा के सीएमओ धोरै गया। सीएमओ साहब कितै बीजी थे। एक घन्टे पाछै आये। पूरी बात सुनी फेर बोले अक यह तो मेवात के जिला अस्पताल में ही होगा। के बीती होगी फातमा अर उसके घरआले के दिल पै या बात शब्दां मैं ब्यान करना बहोत मुश्किल सै। अंग्रेजां के बख्तां मैं सुन्या करदे अक भारतवासियां खातिर ना कोए दलील थी ना अपील थी। फातमा के घरआले नै इसा महसूस हुया जणो तो अंग्रेजां का राज हटकै आग्या। वे डिंग आगे नै धरैं अर पां पाछै नै जावैं। एक अखबार ले लिया उसनै। बस मैं बैठे तो पहला पेज पढ्या उसमैं लिख राख्या था हरियाणा नम्बर एक बनाना सै। प्रति व्यक्ति आय मैं हरियाणा नम्बर एक पै आ लिया।
फातमा बोली - म्हारी खातिर इन नम्बरां के के मायने सैं? खैर चाल कै फेर माण्डी खेड़ा आगे। उड़ै आये तो सिविल सर्जन साहब नहीं मिले। कित गये कोए बता कै देवै ना। छुट्टी पै सैं? ना छुट्टी पै बी कोन्या। तो कित सैं न्यों बी बेरा कोन्या। आखिर मैं दुखी होकै होलदार नै अपने मेवात के एसपी तैं बात करी अर सारी राम कहानी बताई। एसपी नै डीसी गुड़गामां तै बात करी। डीसी गुड़गामा नै सीएमओ तै बात करी। सीएमओ नै बताया अक सीएमओ गुड़गामा कोओपरेट कोनी करर्या।
डीसी बोल्या मेवात पूरे जिले में बस एक लेडी डाक्टर सै रैगुलर बेस पर? सीएमओ बोल्या - एक ही है जी और वह बी छुट्टी पर गई हुई सै। डीसी साहब नै गुड़गामा के डीसी साहब ताहिं कही अर उसनै फेर गुड़गामा के डीसी ताहिं कही अर फेर फातमा गुड़गामा गई अर उड़ै उसका मैडीकल हुया। ईब्बै आगै और के के बनैगी उसका बेरा कोन्या फातमा नै। मनै जिब या सारी बात सुनी तो मन बहोत उदास हुया। कविता बोली - बात तो उदास होण की नहीं, कुछ करण की सै। पाणी तो सिर पर कै जा लिया इस नम्बर वन हरियाणा मैं। यो एकले मेवात का रोला नहीं सै। कमोवेश पूरे हरियाणा की याहे तस्वीर सै। आई किमै समझ मैं?

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