हरियाणा मैं महिलाएं
हरियाणा मैं हरित क्रांति के चालते अर छोटा प्रदेश होवण करकै जो आर्थिक प्रगति हुई सै इसके चलते हरियाणा नै स्टेट के विकास के मॉडल की ढालां आज पेश करया जावै सै। फेर या तो आधी सच्चाई सै, पूरी सच्चाई कोन्या विकास की। सामाजिक क्षेत्र का आकलन कुछ दूसरी ही तसवीर पेश करै सै। यह विरोधाभास क्यूं सै, यो जटिल अर गम्भीर मुद्दा सै। फेर हरियाणा के प्रबुद्ध बुद्धिजीवी वर्ग नै वो पक्ष देखण के कम प्रयास करे दीखैं सैं। इसे करकै हरियाणा के आर्थिक विकास का बोलबाला ए चारों कान्ही दिखाई देवै सै। समाज का बहोत बड़ा हिस्सा, समाज के वंचित तबके, दलित, महिलांए व युवा वर्ग इस विकास प्रक्रिया के दायरे मैं नहीं आ लिया बल्कि इन तब्कयां ताहिं तो और बी हाशिये पै धकेल्या जावण लागरया सै। इसे संदर्भ मैं जो हरियाणा मैं महिलावां की हालत दिखावण आले आंकड़यां पै नजर दौड़ाई जावै तो शायद तसवीर का दूसरा रूप भी थोड़ा-बहुत सामनै उभरकर आ सकै सै। एक तरफ दीखै सै अक छोरियां की संख्या मैडीकल रोहतक मैं भी बधगी, एमडीयू मैं भी पहलम तै बधगी, दूजे कान्ही तसवीर कुछ और ए सै - हरियाणा के बारे में मशहूर सै ‘हरया भरया हरियाणा जित दूध दही का खाना।’ फेर महिलावां मैं खून की कमी के आंकड़े कुछ और हकीकत बयान करैं सैं। खून की कमी काफी ज्यादा महिलावां मैं सै। शहरी महिलावां मैं खून की कमी का प्रतिशत 45.8 सै अर देहात की महिलावां मैं यू प्रतिशत 47.5 था। गुड़ महिलावां की पहुंच तै बाहर, बथुआ अर हरी सब्जियां भी इसका मतलब इननै नसीब नहीं सैं। इसे करकै और बीमारी भी घेरे रहवैं सैं। इसे ढालां बालकां के लालण-पालण मैं भी बराबरी का हक लड़की को नहीं मिल पाया।
जैविक रूप मैं बीमारी तै लड़ण की ताकत छोरियां मैं फालतू हो सै। फेर बी लड़क्यां मैं शिशु मृत्यु दर 52.9 प्रतिशत सै अर लड़कियां मैं या दर 66.0 प्रतिशत सै। ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू आबादी मैं 25.4 प्रतिशत पुरुष निरक्षर सैं अर स्त्रियां मैं या निरक्षरता 50.2 प्रतिशत सै। उच्चतर माध्यमिक शिक्षा पुरुषां मैं 7.3 प्रतिशत घरेलू आबादी मैं सै अर महिलावां मैं या दर 1.9 प्रतिशत बताई। इसे ढाल हरियाणा मैं च्यार मैं तै एक पत्नी के साथ मारपीट की कम तै कम एक वजह स्वीकार करी गई सै। पांच मैं तै दो महिलाएं मतलब 39 प्रतिशत इसी सैं जिननै पाछले 12 म्हीने मैं हिंसा का अनुभव करया कै जिनकी पिटाई हुई सै। ये सारे आकड़े एनएफएचएस द्वितीय, 1998-1999 तै लिए गए सैं। 0-6 साल की उम्र मैं 1000 लड़क्यां पै 820 लड़कियां सैं हरियाणा मैं। पूरे भारत मैं लिंग अनुपात के सबतै तरले 10 जिल्यां मैं तीन हरियाणा के सैं। कुरुक्षेत्र मैं यो अनुपात 770 सै, सोनीपत मैं 783 सै और अंबाला का 784 सै। 0-6 की उम्र के बालकां मैं 331773 छोरियां की कमी सै छोरयां के मुकाबले मैं। हरियाणा मैं पुरुष साक्षरता दर 79.25 प्रतिशत सै अर महिलावां मैं या दर 56.31 प्रतिशत सै। मतलब दोनूआं का अंतर 22.94 प्रतिशत का सै। इसमैं जै दलित महिलावां के आंकड़ों का आंकलन करया जावै तो अंतर और भी घणा होगा। दलित महिलावां मैं साक्षरता की दर 34.82 सै।
ये आंकड़े असल मैं एक तसवीर पेश करै सैं। इसकी गेल्यां ए एक आंकड़ा और उभर कै आवण लागरया सै अक ज्यादातर गामां मैं दस-दस, पन्दरा-पन्दरा महिलाएं खरीद कै ल्याई जावण लागरी सैं दूसरे प्रान्तां तैं। कुल मिला कै कहया जा सकै सै अक महिला का अवमूल्यन बड़े पैमाने पै होवण लागरया सै। दूसरी तरफ कल्पना चावला, संतोष यादव अर और दो-च्यार नाम गिनवा कै कहया जावै सै अक देखो हरियाणा की महिला कितनी आगै जा ली। या बात सही सै अक इन महिलावां नै अर औरां नै भी हरियाणा का मान-सम्मान बढ़ाया सै फेर हरियाणा की सारी महिलावां का स्तर भी ऊंचा होग्या या बात ठीक नहीं लागती। यो जुमला भी खूबै सुनने मैं आवै सै अक ‘लुगाइयां नै घणा सिर पै मत चढ़ाओ।’ हकीकत मैं उनको नीचेे गिराया जा रहया सै अर कहया कुछ और जा रहया सै। कुल मिलाकै स्थिति आच्छी कोन्या। एक खास बात और सै अक आज चारों कान्ही महिला सशक्तीकरण पै जोर दिया जावण लागरया सै। ईसा लागै सै अक यू शब्द बी एक तकिया कलाम-सा बणग्या हो। जो बी सरकार आवै सै वा ‘अपनी बेटी अपना धन’ अर कै ‘लाडली’ स्कीम अर और बी कुछ स्कीम लागू करै सै। फेर ये लागू कितनी हों सैं एक बात। दूसरी बात या सै अक महिला का अवमूल्यन इस ढाल की स्कीमां तै घणा सा रुक्कण आला नहीं सै। इस सामाजिक लिंग-भेद का खातमा सामाजिक संरचनाओं मैं मूलभूत बदलाव ल्याकै अर लोगां की सोच मैं बदलाव ल्याकै ए सम्भव सै। पीस मील मैं इस ढाल की सामाजिक समस्यावां का समाधान आधा-अधूरा ए रहवैगा। आशा की बात या सै अक महिलावां नै अपना दबाव बढ़ाया सै, अपनी अभिव्यक्ति, अपने मान सम्मान अर अपनी सामाजिक सुरक्षा की खातर। फेर यू मामला सिर्फ महिलावां का मामला कोन्या, यू पूरे समाज का मामला सै। या एकली महिलावां की लड़ाई कोन्या यह पूरे समाज की लड़ाई सै। एक नये समाज सुधार आंदोलन की दरकार सै। नवजागरण का आंदोलन हरियाणा मैं कमजोर सै पर सै, उसनै तगड़ा करण की जरूरत सै। आई किमै समझ मैं अक नहीं?
हरियाणा मैं हरित क्रांति के चालते अर छोटा प्रदेश होवण करकै जो आर्थिक प्रगति हुई सै इसके चलते हरियाणा नै स्टेट के विकास के मॉडल की ढालां आज पेश करया जावै सै। फेर या तो आधी सच्चाई सै, पूरी सच्चाई कोन्या विकास की। सामाजिक क्षेत्र का आकलन कुछ दूसरी ही तसवीर पेश करै सै। यह विरोधाभास क्यूं सै, यो जटिल अर गम्भीर मुद्दा सै। फेर हरियाणा के प्रबुद्ध बुद्धिजीवी वर्ग नै वो पक्ष देखण के कम प्रयास करे दीखैं सैं। इसे करकै हरियाणा के आर्थिक विकास का बोलबाला ए चारों कान्ही दिखाई देवै सै। समाज का बहोत बड़ा हिस्सा, समाज के वंचित तबके, दलित, महिलांए व युवा वर्ग इस विकास प्रक्रिया के दायरे मैं नहीं आ लिया बल्कि इन तब्कयां ताहिं तो और बी हाशिये पै धकेल्या जावण लागरया सै। इसे संदर्भ मैं जो हरियाणा मैं महिलावां की हालत दिखावण आले आंकड़यां पै नजर दौड़ाई जावै तो शायद तसवीर का दूसरा रूप भी थोड़ा-बहुत सामनै उभरकर आ सकै सै। एक तरफ दीखै सै अक छोरियां की संख्या मैडीकल रोहतक मैं भी बधगी, एमडीयू मैं भी पहलम तै बधगी, दूजे कान्ही तसवीर कुछ और ए सै - हरियाणा के बारे में मशहूर सै ‘हरया भरया हरियाणा जित दूध दही का खाना।’ फेर महिलावां मैं खून की कमी के आंकड़े कुछ और हकीकत बयान करैं सैं। खून की कमी काफी ज्यादा महिलावां मैं सै। शहरी महिलावां मैं खून की कमी का प्रतिशत 45.8 सै अर देहात की महिलावां मैं यू प्रतिशत 47.5 था। गुड़ महिलावां की पहुंच तै बाहर, बथुआ अर हरी सब्जियां भी इसका मतलब इननै नसीब नहीं सैं। इसे करकै और बीमारी भी घेरे रहवैं सैं। इसे ढालां बालकां के लालण-पालण मैं भी बराबरी का हक लड़की को नहीं मिल पाया।
जैविक रूप मैं बीमारी तै लड़ण की ताकत छोरियां मैं फालतू हो सै। फेर बी लड़क्यां मैं शिशु मृत्यु दर 52.9 प्रतिशत सै अर लड़कियां मैं या दर 66.0 प्रतिशत सै। ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू आबादी मैं 25.4 प्रतिशत पुरुष निरक्षर सैं अर स्त्रियां मैं या निरक्षरता 50.2 प्रतिशत सै। उच्चतर माध्यमिक शिक्षा पुरुषां मैं 7.3 प्रतिशत घरेलू आबादी मैं सै अर महिलावां मैं या दर 1.9 प्रतिशत बताई। इसे ढाल हरियाणा मैं च्यार मैं तै एक पत्नी के साथ मारपीट की कम तै कम एक वजह स्वीकार करी गई सै। पांच मैं तै दो महिलाएं मतलब 39 प्रतिशत इसी सैं जिननै पाछले 12 म्हीने मैं हिंसा का अनुभव करया कै जिनकी पिटाई हुई सै। ये सारे आकड़े एनएफएचएस द्वितीय, 1998-1999 तै लिए गए सैं। 0-6 साल की उम्र मैं 1000 लड़क्यां पै 820 लड़कियां सैं हरियाणा मैं। पूरे भारत मैं लिंग अनुपात के सबतै तरले 10 जिल्यां मैं तीन हरियाणा के सैं। कुरुक्षेत्र मैं यो अनुपात 770 सै, सोनीपत मैं 783 सै और अंबाला का 784 सै। 0-6 की उम्र के बालकां मैं 331773 छोरियां की कमी सै छोरयां के मुकाबले मैं। हरियाणा मैं पुरुष साक्षरता दर 79.25 प्रतिशत सै अर महिलावां मैं या दर 56.31 प्रतिशत सै। मतलब दोनूआं का अंतर 22.94 प्रतिशत का सै। इसमैं जै दलित महिलावां के आंकड़ों का आंकलन करया जावै तो अंतर और भी घणा होगा। दलित महिलावां मैं साक्षरता की दर 34.82 सै।
ये आंकड़े असल मैं एक तसवीर पेश करै सैं। इसकी गेल्यां ए एक आंकड़ा और उभर कै आवण लागरया सै अक ज्यादातर गामां मैं दस-दस, पन्दरा-पन्दरा महिलाएं खरीद कै ल्याई जावण लागरी सैं दूसरे प्रान्तां तैं। कुल मिला कै कहया जा सकै सै अक महिला का अवमूल्यन बड़े पैमाने पै होवण लागरया सै। दूसरी तरफ कल्पना चावला, संतोष यादव अर और दो-च्यार नाम गिनवा कै कहया जावै सै अक देखो हरियाणा की महिला कितनी आगै जा ली। या बात सही सै अक इन महिलावां नै अर औरां नै भी हरियाणा का मान-सम्मान बढ़ाया सै फेर हरियाणा की सारी महिलावां का स्तर भी ऊंचा होग्या या बात ठीक नहीं लागती। यो जुमला भी खूबै सुनने मैं आवै सै अक ‘लुगाइयां नै घणा सिर पै मत चढ़ाओ।’ हकीकत मैं उनको नीचेे गिराया जा रहया सै अर कहया कुछ और जा रहया सै। कुल मिलाकै स्थिति आच्छी कोन्या। एक खास बात और सै अक आज चारों कान्ही महिला सशक्तीकरण पै जोर दिया जावण लागरया सै। ईसा लागै सै अक यू शब्द बी एक तकिया कलाम-सा बणग्या हो। जो बी सरकार आवै सै वा ‘अपनी बेटी अपना धन’ अर कै ‘लाडली’ स्कीम अर और बी कुछ स्कीम लागू करै सै। फेर ये लागू कितनी हों सैं एक बात। दूसरी बात या सै अक महिला का अवमूल्यन इस ढाल की स्कीमां तै घणा सा रुक्कण आला नहीं सै। इस सामाजिक लिंग-भेद का खातमा सामाजिक संरचनाओं मैं मूलभूत बदलाव ल्याकै अर लोगां की सोच मैं बदलाव ल्याकै ए सम्भव सै। पीस मील मैं इस ढाल की सामाजिक समस्यावां का समाधान आधा-अधूरा ए रहवैगा। आशा की बात या सै अक महिलावां नै अपना दबाव बढ़ाया सै, अपनी अभिव्यक्ति, अपने मान सम्मान अर अपनी सामाजिक सुरक्षा की खातर। फेर यू मामला सिर्फ महिलावां का मामला कोन्या, यू पूरे समाज का मामला सै। या एकली महिलावां की लड़ाई कोन्या यह पूरे समाज की लड़ाई सै। एक नये समाज सुधार आंदोलन की दरकार सै। नवजागरण का आंदोलन हरियाणा मैं कमजोर सै पर सै, उसनै तगड़ा करण की जरूरत सै। आई किमै समझ मैं अक नहीं?
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