बेटियां खरल गांव की
सते, फते, नफे, सविता, कविता, सरिता और ताई भरपाई शनिवार की शाम को फिर इकट्ठे हो जाते हैं। फते कहता है - गाम मैं तो लड़कियों का जीना मुहाल होग्या। गली में आती-जाती लड़कियों पर बहोत छींटाकसी करते हैं लोग। कोए किसे म्हां कै बोल मारदे अर कोए किसे के म्हां कै बोल मारदे। किसे का ब्योंत नहीं रह्या अक इननै कोए किमै कहदे। ऊपर ताहिं पहोंच सै इनकी। मनै तो गाम के घणखरे लोग मानसिक बीमारी का मरीज दिखाई देवैं सैं। ना छोटी बच्ची सुरक्षित अर ना सत्तर अस्सी साल की बुजुर्ग औरत। कोए रिस्ता इसा नहीं बचरया जो कलंकित ना हुया हो अर गम्भीर बात या सै अक लड़कियां उन्हीं के द्वारा धोखेबाजी की शिकार हुई जिन पर उननै सबतै ज्यादा विश्वास करया।
सरिता बोली - बूझो मत ना! महिला ना तो घर के बाहर सुरक्षित और ना ही घर के अन्दर। किसे घर मैं चाचा का छोरा तो किसे घर मैं ताऊ का तो कितै जीजा तो कितै पड़ौसी जवान होती लड़कियों से जोर-जबरदस्ती करके या बहला-फसला कर कुकर्म करते हैं। परिवार वालों को जब पता लगता है तो सारी बातां पै माट्टी गेरण खातर डाक्टर के पास लेकर जाना पड़ता है।
सते कहता है - क्या करैं? पूरा माहौल ही खराब हो लिया। सविता ने कहा - माहौल खराब तो करनिया तम अर इसनै ठीक कौन करैगा? माहौल ठीक तो जब होगा जब थामनै ताश खेलण तै फुरसत हो। इस जन चेतना केन्द्र मैं भी हफ्ते मैं एक दिन हाड़े खवा कै आओ सो। ज्ञान-विज्ञान आले बतावैं थे अक युवतियां नै ग्रामीण जीवन मैं चौबीस घण्टे मैं एक भी मिनट का मौका किसे काम के करण के बख्त इसा कोन्या अक वे आध-पौण घण्टा आपस मैं कठ्ठी होलें अर दुख-सुख की बतलालें।
सते बोल्या - या बात तो सविता की सही सै अक बाकी तबके तो किसे-ना-किसे बाहणै कठ्ठे होलें सैं फेर इन नौजवान छोरियां नै तो इसा कोए मौका नहीं।
सविता बोली - जै किमै सुधार करना सै गाम मैं तो इन युवक-युवतियां ताहिं कोए तो इसा काम टोहवणा पड़ैगा जिसके करण तै इनकी ऊर्जा का, ताकत का सही-सकारात्मक इस्तेमाल हो।
फते बोल्या - इनने न्यारे न्यारे राहण द्यो क्यों भिरड़ां के छत्ते कै हाथ लाओ सो।
सरिता बोली - इस न्यारपन करकै तो घणा नाश होवण लागरया सै। घर मैं जो बिगाड़ सै वो किस ढाल के न्यारपन तै ठीक होवैगा? इसमैं कोए दो राय नहीं अक युवक-युवती कठ्ठे होकै अपना रास्ता जिब ताहिं नहीं खोजैंगे बात कोन्या बणै। न्यारे करकै के काढोगे या तो घर मैं बी सुरक्षित कोन्या। यो म्हारी नजर का खोट सै। हम औरत नै भोग की वस्तु अर बालक बणावण की मशीन तै न्यारा कुछ समझते ए कोन्या। यो अपने पड़ौस मैं खरल गाम नहीं सै उड़ै पाछले साल तै ज्ञान-विज्ञान आल्यां नै लड़कियां की हाकी की टीम खड़ी करी सै। ब्लॉक मैं जीती वा टीम फेर जिले में जीत हासिल करी अर स्टेट मैं पांचमा स्थान हासिल करया। म्हारे गाम मैं क्यों नहीं खड़ी हो सकदी छोरियां की हाकी की टीम अर कबड्डी की टीम? नफे बोल्या - बिल्ली के घण्टी कौण बान्धै? बेरा ना के के बात बणावैंगे लोग। सरिता बोली - खरल गाम की छोरियां नै के कुछ नहीं सुनना पड़या? घरक्यां नै रोक लानी चाही, मोहल्ले आल्यां नै बेरा ना के-के सुनाई। खेल की ड्रैस पै नाक चढ़ाई। सांझ नै वार करकै घरां आवैं इसपै वे धमकाई। कई पेज भरे जा सकैं सैं उन मुसीबतां के जो इन लड़कियां नै ठाई। पर उननै भी एक समझ बनाई। आत्म विश्वास दिखाया। अर एक खास बात मैं बताना चाहूं सूं वा या सै अक वे कती नहीं घबराई। लड़के लड़कियां मैं साझली प्रेक्टिस करकै दिखाई। इस साल उननै अपना निशाना स्टेट के कप पै ला राख्या सै। शाहबाद की लड़कियां की हाकी की टीम तै टक्कर लेवण की पूरी तैयारी करण लागरी सैं। खरल गुरुकुल की लड़कियां नै हाकी टीम मैं शामिल होण की हां करदी बताई। इतना कुछ चुटकी बजान्ते नहीं होग्या। घर के समझाये, मोहल्ले आले समझाये अर गाम आले समझाये। इजाजत तो दे दी फेर कई सवाल हवा मैं ईब बी घूमें जावैं सैं। फेर लड़कियां का जोश देखण जोगा सै। लड़के बी पाछै कोन्या। उनकी बी टीम खूब मेहनत करण लागरी सै। यो सिर्फ हाकी का मामला नहीं सै। वे युवक-युवती मिलकै एक नई स्वस्थ संस्कृति की नई शुरूआत करण लागरे सैं।
सते बोल्या - तो म्हारे जन चेतना केन्द्र नै एक काम करना चाहिये अक हाम गाम की लड़कियां की साइकिल रेस करावां अर जो फर्स्ट, सैकण्ड, थर्ड आवैं उननै इनाम देवां। नफे बोल्या - इसमैं तो शहर मैं साइकिल पै पढ़ण जावण आली छोरी बाजी मार लेज्यांगी। कविता बोली - लड़कियां की न्यारी दौड़ अर बहुआं की न्यारी दौड़ करवाद्यांगे। फते बोल्या - कूण आवै सै थारी साइकिल रेस मैं। सते बोल्या - तेरे बरगे फांच्चर ठोक हरेक गली मैं एक-दो, एक-दो पाज्यांगे। फेर खरल आली बेटियां की हिम्मत देख कै हम पाछै कदम कोनी हटावैं। या बात सही सै अक नौजवानां नै किमै ढंग का काम करण का मौका नहीं मिलैगा तो फेर वे उल्टे कामां मैं लागैंगे। और लोगां नै कोस्सण की जागां आपां नै कुछ सकारात्मक कामां खातर पहलकदमी करण की जरूरत सै।
खरल मैं के लड़कियां की हाकी की टीम इतनी आसानी तै बनी होगी? खूब हांगा लाया होगा हाकी सिखावणिया पी टी आई नै अर ज्ञान विज्ञान आल्यां नै। ये छोटी-छोटी पहलकदमी हरियाणा मैं समाज सुधार आन्दोलन की नींव की ईंट सैं, इसतै ए नवजागरण का आन्दोलन अपनी रफतार पकड़ैगा। महिला, पुरुष, नौजवान, कमजोर तबके - सारे मिलकै एक माहौल पैदा करैंगे तो बुराइयां तै लड़या जा सकैगा।
सते, फते, नफे, सविता, कविता, सरिता और ताई भरपाई शनिवार की शाम को फिर इकट्ठे हो जाते हैं। फते कहता है - गाम मैं तो लड़कियों का जीना मुहाल होग्या। गली में आती-जाती लड़कियों पर बहोत छींटाकसी करते हैं लोग। कोए किसे म्हां कै बोल मारदे अर कोए किसे के म्हां कै बोल मारदे। किसे का ब्योंत नहीं रह्या अक इननै कोए किमै कहदे। ऊपर ताहिं पहोंच सै इनकी। मनै तो गाम के घणखरे लोग मानसिक बीमारी का मरीज दिखाई देवैं सैं। ना छोटी बच्ची सुरक्षित अर ना सत्तर अस्सी साल की बुजुर्ग औरत। कोए रिस्ता इसा नहीं बचरया जो कलंकित ना हुया हो अर गम्भीर बात या सै अक लड़कियां उन्हीं के द्वारा धोखेबाजी की शिकार हुई जिन पर उननै सबतै ज्यादा विश्वास करया।
सरिता बोली - बूझो मत ना! महिला ना तो घर के बाहर सुरक्षित और ना ही घर के अन्दर। किसे घर मैं चाचा का छोरा तो किसे घर मैं ताऊ का तो कितै जीजा तो कितै पड़ौसी जवान होती लड़कियों से जोर-जबरदस्ती करके या बहला-फसला कर कुकर्म करते हैं। परिवार वालों को जब पता लगता है तो सारी बातां पै माट्टी गेरण खातर डाक्टर के पास लेकर जाना पड़ता है।
सते कहता है - क्या करैं? पूरा माहौल ही खराब हो लिया। सविता ने कहा - माहौल खराब तो करनिया तम अर इसनै ठीक कौन करैगा? माहौल ठीक तो जब होगा जब थामनै ताश खेलण तै फुरसत हो। इस जन चेतना केन्द्र मैं भी हफ्ते मैं एक दिन हाड़े खवा कै आओ सो। ज्ञान-विज्ञान आले बतावैं थे अक युवतियां नै ग्रामीण जीवन मैं चौबीस घण्टे मैं एक भी मिनट का मौका किसे काम के करण के बख्त इसा कोन्या अक वे आध-पौण घण्टा आपस मैं कठ्ठी होलें अर दुख-सुख की बतलालें।
सते बोल्या - या बात तो सविता की सही सै अक बाकी तबके तो किसे-ना-किसे बाहणै कठ्ठे होलें सैं फेर इन नौजवान छोरियां नै तो इसा कोए मौका नहीं।
सविता बोली - जै किमै सुधार करना सै गाम मैं तो इन युवक-युवतियां ताहिं कोए तो इसा काम टोहवणा पड़ैगा जिसके करण तै इनकी ऊर्जा का, ताकत का सही-सकारात्मक इस्तेमाल हो।
फते बोल्या - इनने न्यारे न्यारे राहण द्यो क्यों भिरड़ां के छत्ते कै हाथ लाओ सो।
सरिता बोली - इस न्यारपन करकै तो घणा नाश होवण लागरया सै। घर मैं जो बिगाड़ सै वो किस ढाल के न्यारपन तै ठीक होवैगा? इसमैं कोए दो राय नहीं अक युवक-युवती कठ्ठे होकै अपना रास्ता जिब ताहिं नहीं खोजैंगे बात कोन्या बणै। न्यारे करकै के काढोगे या तो घर मैं बी सुरक्षित कोन्या। यो म्हारी नजर का खोट सै। हम औरत नै भोग की वस्तु अर बालक बणावण की मशीन तै न्यारा कुछ समझते ए कोन्या। यो अपने पड़ौस मैं खरल गाम नहीं सै उड़ै पाछले साल तै ज्ञान-विज्ञान आल्यां नै लड़कियां की हाकी की टीम खड़ी करी सै। ब्लॉक मैं जीती वा टीम फेर जिले में जीत हासिल करी अर स्टेट मैं पांचमा स्थान हासिल करया। म्हारे गाम मैं क्यों नहीं खड़ी हो सकदी छोरियां की हाकी की टीम अर कबड्डी की टीम? नफे बोल्या - बिल्ली के घण्टी कौण बान्धै? बेरा ना के के बात बणावैंगे लोग। सरिता बोली - खरल गाम की छोरियां नै के कुछ नहीं सुनना पड़या? घरक्यां नै रोक लानी चाही, मोहल्ले आल्यां नै बेरा ना के-के सुनाई। खेल की ड्रैस पै नाक चढ़ाई। सांझ नै वार करकै घरां आवैं इसपै वे धमकाई। कई पेज भरे जा सकैं सैं उन मुसीबतां के जो इन लड़कियां नै ठाई। पर उननै भी एक समझ बनाई। आत्म विश्वास दिखाया। अर एक खास बात मैं बताना चाहूं सूं वा या सै अक वे कती नहीं घबराई। लड़के लड़कियां मैं साझली प्रेक्टिस करकै दिखाई। इस साल उननै अपना निशाना स्टेट के कप पै ला राख्या सै। शाहबाद की लड़कियां की हाकी की टीम तै टक्कर लेवण की पूरी तैयारी करण लागरी सैं। खरल गुरुकुल की लड़कियां नै हाकी टीम मैं शामिल होण की हां करदी बताई। इतना कुछ चुटकी बजान्ते नहीं होग्या। घर के समझाये, मोहल्ले आले समझाये अर गाम आले समझाये। इजाजत तो दे दी फेर कई सवाल हवा मैं ईब बी घूमें जावैं सैं। फेर लड़कियां का जोश देखण जोगा सै। लड़के बी पाछै कोन्या। उनकी बी टीम खूब मेहनत करण लागरी सै। यो सिर्फ हाकी का मामला नहीं सै। वे युवक-युवती मिलकै एक नई स्वस्थ संस्कृति की नई शुरूआत करण लागरे सैं।
सते बोल्या - तो म्हारे जन चेतना केन्द्र नै एक काम करना चाहिये अक हाम गाम की लड़कियां की साइकिल रेस करावां अर जो फर्स्ट, सैकण्ड, थर्ड आवैं उननै इनाम देवां। नफे बोल्या - इसमैं तो शहर मैं साइकिल पै पढ़ण जावण आली छोरी बाजी मार लेज्यांगी। कविता बोली - लड़कियां की न्यारी दौड़ अर बहुआं की न्यारी दौड़ करवाद्यांगे। फते बोल्या - कूण आवै सै थारी साइकिल रेस मैं। सते बोल्या - तेरे बरगे फांच्चर ठोक हरेक गली मैं एक-दो, एक-दो पाज्यांगे। फेर खरल आली बेटियां की हिम्मत देख कै हम पाछै कदम कोनी हटावैं। या बात सही सै अक नौजवानां नै किमै ढंग का काम करण का मौका नहीं मिलैगा तो फेर वे उल्टे कामां मैं लागैंगे। और लोगां नै कोस्सण की जागां आपां नै कुछ सकारात्मक कामां खातर पहलकदमी करण की जरूरत सै।
खरल मैं के लड़कियां की हाकी की टीम इतनी आसानी तै बनी होगी? खूब हांगा लाया होगा हाकी सिखावणिया पी टी आई नै अर ज्ञान विज्ञान आल्यां नै। ये छोटी-छोटी पहलकदमी हरियाणा मैं समाज सुधार आन्दोलन की नींव की ईंट सैं, इसतै ए नवजागरण का आन्दोलन अपनी रफतार पकड़ैगा। महिला, पुरुष, नौजवान, कमजोर तबके - सारे मिलकै एक माहौल पैदा करैंगे तो बुराइयां तै लड़या जा सकैगा।
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