हरियाणा के मर्दों कित सो?
किंग्स्टन विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के हिसाब तै, यूके (ब्रिटेन) मैं विश्वविद्यालय की ऊंची फीस चुकावण की खातर छात्राएं बढ़ती संख्या में वेश्यावृत्ति करण नै मजबूर सैं। जै या नहीं तो सैक्स उद्योग के दूसरे धंधे करण नै मजबूर सैं। सुणकै अर पढ़कै एकबै तो रोम-रोम मैं करंट-सा दौड़ग्या, बेरा ना थारै किमै असर हुआ सै अक नहीं? लानत सै यू के सरकार पै जो लोगां नै तो फालतू तै फालतू निचोड़न लागरी सै अर लाखां करोड़ां पौंड उस सेना पै खर्च करण लागरी सै जो दुनिया भर मैं ‘सत्ता पलटन’ की अमेरिका की मुहिम मैं तहलडू पार्टनर के तौर पै काम करण लागरी सै। टोनी ब्लेयर की सरकार नै शिक्षा मैं जो सुधार लागू करे सैं उनके बुरे नतीजे साहमी आवण लाग रहे सैं। फेर म्हारे माथे की जमा फूटली जो वो सब कुछ हमनै कति दिखता ए कोन्या। जिस अध्ययन का जिकरा सै उसमैं कह्या गया सै अक यूके मैं छात्र जब तैं ओ फीस बधी सै तिब तैं कपड़े तारलें सैं, लैंप डांस करैं सैं, मसाज पार्लरों मैं अर एस्कार्ट एजेंसियां मैं काम करैं सैं। इसतै पहलम बी सुणण मैं आया था अक यूके मैं छात्राएं शिक्षा खातर लिये औड़ कर्जयां की मासिक किस्त जमा करावण कि खातर अपणे अंडाशय बेचण पै मजबूर हुई सैं। ये कर्ज उनने अपणी शिक्षा पूरी करण की खातर लिये बताये।
औड़ आ लिया धरती का। म्हारे नजदीकी दो तीन कंप्यूटर इंजीनियर जारे सैं यूके मैं। फेर वे तो यूके की बड़ाई करते ए कोन्या थकते। यूके न्यू अर यूके न्यूं। यूके मैं उनकी नाक तलै छात्राएं अपना शरीर बेच्चण लागरी सैं अर साथ मैं अपनी आत्मा बी अक ज्ञान अर डिग्री हासिल करण का वे अपना सपना पूरा कर सकैं। आई किमै समझ मैं अक नहीं? जै एक विकसित देश यूके मैं या हालत सै तो तीसरी दुनिया के देशां गेल्या के बनैगी? लाया सै कदे बिचार अक ताश ऐ खेलते रहोगे। यूके अर अमेरिका बरगे देशां के मालिक चाहवैं सैं अक तीसरी दुनिया के देश बी इस गल्त राही पै उनकी गेल्यां आ ज्यावैं। कित सैं म्हारे वे पंचाती जो एक छोरे अर छोरी के अंतर्जातीय ब्याह पै तो गैहटा तार कै धरदें, मौत के फतवे सुणादें। इसा ब्यौंत सै तो जारी करद्यो नै टोनी ब्लेयर के खिलाफ भी फतवा जो म्हारी छोरियां नै वेश्यावृत्ति की राही दिखावण लागर्या। दूसरी बात या बी तो सोच्चण की सै अक जै एक विकसित देश यूके मैं जड़ै न्यू मान्या जावै सै अक उड़ै सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली बहोतै मजबूत सै तो म्हारे बरगे देशों का के बनैगा? म्हारे देशां मैं तो कसूती ढालां शिक्षा का निजीकरण अर व्यवसायीकरण होवण लागर्या सै। भारत मैं भी इस ढाल के नतीजे आवण मैं वार कोन्या।
म्हारे देश मैं भी वाणिज्य मंत्रालय नै हाल मैं ए एक परिचर्चा पत्र जारी कर्या सै जिसमैं बार-बार फीस बढ़ावण की बात पै जोर दिया गया सै। या बढ़ी फीस पढ़निया छात्र अर छात्रावां धोरे वसूली जावणी सै। इस परिपत्र मैं या दलील दी गई सै अक ‘बाजार की पहुंच की फीस बरगी मौजूदा सीमावां का हटाया जाणा बहुत जरूरी सै जिसके चालते कैपीटीशन फीस नहीं वसूली जा सकदी या मुनाफा नहीं कमाया जा सकदा।’ जै यै सुझाव मान लिये गये तो के होगा? हरियाणा मैं इसके परिणाम इस साल बी देखण मैं आये सैं। कई डैंटल कालेज प्राइवेट सेक्टर मैं खुलगे। इनकी खातर सरकारी कालजां का पीएमटी टैस्ट हुया अर प्राइवेट कालजां का एंट्रैंस टैस्ट हुया। इनके मेरिट लिस्ट के बालकां तै बी डैंटल की सीट पूरी कोन्या हुई तो साधारण प्री मेडिकल के बालकां नै दाखिले की छूट दी गई पर इन कालेजां की सीट फेर बी कोन्या भरी गई। 30-35 सीट फेर बी खाली रैहगी। क्यों? सोच्चण की बात सै। इन प्राइवेट कालेजां मैं एक साल की फीस डैंटल छात्रां की डेढ़ लाख सै। मतलब 12500 रुपये म्हीना फीस अर होस्टल का बाकी खर्चा न्यारा। मतलब 20,000 रुपये म्हीने का खर्चा। किसका ब्यौंत सै इतना पीस्सा खर्च करण का?
हाल मैं ए म्हारे प्रधानमंत्री जी ने भी सेवाओं को विदेशी व्यापार की खातर खोल्लण की बात करीं सैं अर इसमैं शिक्षा बी शामिल सै। ग्यारहवीं पंच वर्षीय योजना के दृष्टिपत्र मैं भी फीस बढ़ावण की याहे दलील दी गई बताई सै। योजना आयोग बी शिक्षा की लागत पूरी करण की खातर आंतरिक संसाधन जुटावण की अर यथार्थवादी ढंग तै फीस बढ़ावण की बात करदा बताया। इसमैं कोए दो राय नहीं अक जै हमनै इन खून चूसण आली जोकां तैं खुली छूट दे दी तो म्हारी शिक्षा प्रणाली का नाश लाजमी सै। या पूरे देश नै अर इसके नागरिकां नै चुनौती सै अक इसी नीतियां का विरोध कर्या जा। कड़ै सैं वे हरियाणा के मर्द अर उनकी पंचायत जो गाम की इज्जत के नाम पै म्हारे गाभरूआं नै अर छोरियां नै फांसी पै लटकावण के फतवे जारी करैं सैं? इस पूरी बात पै उनका के कहना सै? यो तै पूरे हरियाणा की अर पूरे देश की इज्जत का सवाल सै। आज संबंधित आयु वर्ग के महज 8 फीसदी बालक ही विश्वविद्यालय ताहीं पहोंच पावैं सैं म्हारे देश मैं जबकि अनेक विकासशील देशां मैं यो आंकड़ा 20 तै 25 फीसदी ताहिं का सै। जै फीसां मैं और बढ़ोतरी करी जावै सै तो ये हालात और बी घणे बिगडै़ंगे। हम छात्रां मैं बढ़ती आत्महत्या पहलम ऐ देख चुके सां। ये वे छात्र सैं जो देशभर के शिक्षा संस्थानों द्वारा वसूली जावण आली अनाप-शनाप फीस चुकावण मैं असमर्थ सैं। अर जै फीस और बी बधगी तो के बनैगा यो बतावण की कड़ै जरूरत सै। तो के केरां? करांके बैठे ताश खेलते रहवां अर लाम्बी सांस भरकै कहवां फलाणे के छोरे अर छोरी की किस्मत मैं मौत इसे ढाल की लिख राखी थी। दूसरा राह सै अक इन बातां पै बिचार करां अर इस बाजारवाद का अर फीस बधण का डटकै विरोध करां। या म्हारे बालकां की लड़ाई सै इसनै म्हारे लड़ें पार पड़ैगी और दूसरा कूण लड़ैगा म्हारी लड़ाई।
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किंग्स्टन विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के हिसाब तै, यूके (ब्रिटेन) मैं विश्वविद्यालय की ऊंची फीस चुकावण की खातर छात्राएं बढ़ती संख्या में वेश्यावृत्ति करण नै मजबूर सैं। जै या नहीं तो सैक्स उद्योग के दूसरे धंधे करण नै मजबूर सैं। सुणकै अर पढ़कै एकबै तो रोम-रोम मैं करंट-सा दौड़ग्या, बेरा ना थारै किमै असर हुआ सै अक नहीं? लानत सै यू के सरकार पै जो लोगां नै तो फालतू तै फालतू निचोड़न लागरी सै अर लाखां करोड़ां पौंड उस सेना पै खर्च करण लागरी सै जो दुनिया भर मैं ‘सत्ता पलटन’ की अमेरिका की मुहिम मैं तहलडू पार्टनर के तौर पै काम करण लागरी सै। टोनी ब्लेयर की सरकार नै शिक्षा मैं जो सुधार लागू करे सैं उनके बुरे नतीजे साहमी आवण लाग रहे सैं। फेर म्हारे माथे की जमा फूटली जो वो सब कुछ हमनै कति दिखता ए कोन्या। जिस अध्ययन का जिकरा सै उसमैं कह्या गया सै अक यूके मैं छात्र जब तैं ओ फीस बधी सै तिब तैं कपड़े तारलें सैं, लैंप डांस करैं सैं, मसाज पार्लरों मैं अर एस्कार्ट एजेंसियां मैं काम करैं सैं। इसतै पहलम बी सुणण मैं आया था अक यूके मैं छात्राएं शिक्षा खातर लिये औड़ कर्जयां की मासिक किस्त जमा करावण कि खातर अपणे अंडाशय बेचण पै मजबूर हुई सैं। ये कर्ज उनने अपणी शिक्षा पूरी करण की खातर लिये बताये।
औड़ आ लिया धरती का। म्हारे नजदीकी दो तीन कंप्यूटर इंजीनियर जारे सैं यूके मैं। फेर वे तो यूके की बड़ाई करते ए कोन्या थकते। यूके न्यू अर यूके न्यूं। यूके मैं उनकी नाक तलै छात्राएं अपना शरीर बेच्चण लागरी सैं अर साथ मैं अपनी आत्मा बी अक ज्ञान अर डिग्री हासिल करण का वे अपना सपना पूरा कर सकैं। आई किमै समझ मैं अक नहीं? जै एक विकसित देश यूके मैं या हालत सै तो तीसरी दुनिया के देशां गेल्या के बनैगी? लाया सै कदे बिचार अक ताश ऐ खेलते रहोगे। यूके अर अमेरिका बरगे देशां के मालिक चाहवैं सैं अक तीसरी दुनिया के देश बी इस गल्त राही पै उनकी गेल्यां आ ज्यावैं। कित सैं म्हारे वे पंचाती जो एक छोरे अर छोरी के अंतर्जातीय ब्याह पै तो गैहटा तार कै धरदें, मौत के फतवे सुणादें। इसा ब्यौंत सै तो जारी करद्यो नै टोनी ब्लेयर के खिलाफ भी फतवा जो म्हारी छोरियां नै वेश्यावृत्ति की राही दिखावण लागर्या। दूसरी बात या बी तो सोच्चण की सै अक जै एक विकसित देश यूके मैं जड़ै न्यू मान्या जावै सै अक उड़ै सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली बहोतै मजबूत सै तो म्हारे बरगे देशों का के बनैगा? म्हारे देशां मैं तो कसूती ढालां शिक्षा का निजीकरण अर व्यवसायीकरण होवण लागर्या सै। भारत मैं भी इस ढाल के नतीजे आवण मैं वार कोन्या।
म्हारे देश मैं भी वाणिज्य मंत्रालय नै हाल मैं ए एक परिचर्चा पत्र जारी कर्या सै जिसमैं बार-बार फीस बढ़ावण की बात पै जोर दिया गया सै। या बढ़ी फीस पढ़निया छात्र अर छात्रावां धोरे वसूली जावणी सै। इस परिपत्र मैं या दलील दी गई सै अक ‘बाजार की पहुंच की फीस बरगी मौजूदा सीमावां का हटाया जाणा बहुत जरूरी सै जिसके चालते कैपीटीशन फीस नहीं वसूली जा सकदी या मुनाफा नहीं कमाया जा सकदा।’ जै यै सुझाव मान लिये गये तो के होगा? हरियाणा मैं इसके परिणाम इस साल बी देखण मैं आये सैं। कई डैंटल कालेज प्राइवेट सेक्टर मैं खुलगे। इनकी खातर सरकारी कालजां का पीएमटी टैस्ट हुया अर प्राइवेट कालजां का एंट्रैंस टैस्ट हुया। इनके मेरिट लिस्ट के बालकां तै बी डैंटल की सीट पूरी कोन्या हुई तो साधारण प्री मेडिकल के बालकां नै दाखिले की छूट दी गई पर इन कालेजां की सीट फेर बी कोन्या भरी गई। 30-35 सीट फेर बी खाली रैहगी। क्यों? सोच्चण की बात सै। इन प्राइवेट कालेजां मैं एक साल की फीस डैंटल छात्रां की डेढ़ लाख सै। मतलब 12500 रुपये म्हीना फीस अर होस्टल का बाकी खर्चा न्यारा। मतलब 20,000 रुपये म्हीने का खर्चा। किसका ब्यौंत सै इतना पीस्सा खर्च करण का?
हाल मैं ए म्हारे प्रधानमंत्री जी ने भी सेवाओं को विदेशी व्यापार की खातर खोल्लण की बात करीं सैं अर इसमैं शिक्षा बी शामिल सै। ग्यारहवीं पंच वर्षीय योजना के दृष्टिपत्र मैं भी फीस बढ़ावण की याहे दलील दी गई बताई सै। योजना आयोग बी शिक्षा की लागत पूरी करण की खातर आंतरिक संसाधन जुटावण की अर यथार्थवादी ढंग तै फीस बढ़ावण की बात करदा बताया। इसमैं कोए दो राय नहीं अक जै हमनै इन खून चूसण आली जोकां तैं खुली छूट दे दी तो म्हारी शिक्षा प्रणाली का नाश लाजमी सै। या पूरे देश नै अर इसके नागरिकां नै चुनौती सै अक इसी नीतियां का विरोध कर्या जा। कड़ै सैं वे हरियाणा के मर्द अर उनकी पंचायत जो गाम की इज्जत के नाम पै म्हारे गाभरूआं नै अर छोरियां नै फांसी पै लटकावण के फतवे जारी करैं सैं? इस पूरी बात पै उनका के कहना सै? यो तै पूरे हरियाणा की अर पूरे देश की इज्जत का सवाल सै। आज संबंधित आयु वर्ग के महज 8 फीसदी बालक ही विश्वविद्यालय ताहीं पहोंच पावैं सैं म्हारे देश मैं जबकि अनेक विकासशील देशां मैं यो आंकड़ा 20 तै 25 फीसदी ताहिं का सै। जै फीसां मैं और बढ़ोतरी करी जावै सै तो ये हालात और बी घणे बिगडै़ंगे। हम छात्रां मैं बढ़ती आत्महत्या पहलम ऐ देख चुके सां। ये वे छात्र सैं जो देशभर के शिक्षा संस्थानों द्वारा वसूली जावण आली अनाप-शनाप फीस चुकावण मैं असमर्थ सैं। अर जै फीस और बी बधगी तो के बनैगा यो बतावण की कड़ै जरूरत सै। तो के केरां? करांके बैठे ताश खेलते रहवां अर लाम्बी सांस भरकै कहवां फलाणे के छोरे अर छोरी की किस्मत मैं मौत इसे ढाल की लिख राखी थी। दूसरा राह सै अक इन बातां पै बिचार करां अर इस बाजारवाद का अर फीस बधण का डटकै विरोध करां। या म्हारे बालकां की लड़ाई सै इसनै म्हारे लड़ें पार पड़ैगी और दूसरा कूण लड़ैगा म्हारी लड़ाई।
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