म्हारा हरियाणा महान!
एक अखबार मैं खबर पढ़ी थी जिसके हिसाब तै म्हारे भारत देश महान के मध्य प्रदेश प्रांत मैं आदिवासी कबील्यां नै एक बाईस साल की कुआंरी कन्या की बलि इस कारण दे दी अक दरिया के निर्माणाधीन बांध की शक्ति को विश्वसनीय बनाया जा सकै। पाछै सी म्हारे प्रदेश के मुख्यमंत्री जी अर उनकी धर्मपत्नी जी भी सूर्य ग्रहण आले दिन कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर मैं डुबकी लावण लागरे थे पुण कमावण की खातर। सूर्य ग्रहण पै भी बहुत से अन्ध विश्वास और भी सैं। इसे ढाल की बातां करकै ‘पुजारी श्रेणी’ अस्तित्व मैं आई लागै सै। प्राचीन मनुष्य जो अपने शिकार करे औड़ जानवरां का मांस खा कै गुजारा करया करता जिब वो किसान बनकै खेती करण लाग्या तो उसनै अधिक अन्न भी पैदा करना शुरू कर दिया। इन प्राचीन किसानां मैं ते ज्यादातर तो मानवतावादी थे, ममता थी उनके दिल मैं, निर्बला अर मासूमां की रक्षा करया करते, परोपकारी थे, सदाचारी थे, कुछ गल्त कर देते तो पश्चाताप करया करते, आत्म बलिदानी थे फेर कुछ कामचोर थे, चालाक थे, लालची थे, ईष्यालू थे, घमंडी थे, मूढ़ विश्वासी थे। इन चालाक माणसां ने परजीवियां की ढालां ज्यूकर अमर बेल जीवै न्यू रहना शुरू कर दिया। इन्नै अधिक पैदावार हड़पनी शुरू कर दी। इसका बाहना उननै यो बनाया अक उनके धोरै अलौकिक शक्ति सै अर वे किसानां की मौत पाछै उनका जीवन बढ़िया बणावण मैं उनकी सहायता कर सकैं सै। समाज मैं इस चमत्कारिक शक्ति नै इन चालाक लोगां की फालतू अन्न हड़पन की चाल ताहि ल्हकोवन का अर सामाजिक मान्यता प्रदान करण का काम करया दीखै सै। इस ढाल कल्पित देवताओं का जन्म इस संसार में हुआ। लोग पूजा, प्रार्थनावां मैं अर समाधियां मैं अपना कीमती वक्त खर्च करण लाग्गे। काम करण आले अच्छे भले पुरुष अर महिलाएं काम करण के घण्ट्या के दौरान अपने इस अध्यात्मिक अभ्यास द्वारा आये साल अनगिणत मानवीय घंटे बरबाद कर देते हैं। बुद्धिमान लोग जब अपना कोए नया काम शुरू करैं सैं तो वे वैज्ञानिकां, अनुशासनधीन अर्थशास्त्रियां, इंजीनियरां, तकनीशियनां आदि धोरै सलाह लेवैं सैं फेर म्हारे देश भारत महान मैं आज भी चाहे हम कितने ए पढ़े-लिखे क्यों ना होवां, एक ज्योतिषी की ‘हरी बत्ती’ के बिना अपने नये, उन्नति आले काम नै कति शुरू नहीं करांगे। पूजा, शुभ अवसर अर प्रार्थनाएं म्हारे विकास कार्यों की खातर विज्ञान अर टेक्नालाजी तै अधिक महत्वपूर्ण सैं।
जै सूखा पड़ज्या तो म्हारे आड़ै यज्ञ अर हवन करवाये जावैं सैं ताकि देवतावां तै आर्शिवाद प्राप्त करकै मींह बरसवाया जा सकै अर इस अन्ध विश्वास पूर्व काम मैं जो लोग तल्लीन हों सैं वे अनपढ़ लोग नहीं होन्ते बल्कि इक्कीसवीं शताब्दी मैं रहवण आले विद्वान, सभ्य अर पढ़े-लिखे लोगै हों सैं। एक प्रसिद्ध इंजीनियर की जन्म शताब्दी पै एक बार सिंचाई अर ऊर्जा मंत्री की ओर तै एक मंदिर कम्पलैक्स का नींव पत्थर धरण के प्रबंध करे जावण लागरे थे। इस मंदिर का देवता उस क्षेत्र मैं एक रक्षक के तौर पै मान्या जाया करता। नदियां के तल के ऊपर बनाये जावण आले प्रोजैक्टां की पूर्ण सफलता की खातर इसे देवता तै आशिर्वाद लिया जाना था। के वो दूरदर्शी इंजीनियर या बात सोच सकै था अक उसकी मौत पाछै ‘अन्तरिक्ष युग’ मैं भारत के कुछ लोग लोगां तै टैक्सां द्वारा वसूल करे गये धन नै मंदिर की स्थापना पै बरबाद कर देंगे इस उम्मीद मैं अक देवता के आशिर्वाद तै बिजली ऊर्जा प्राप्त होवैगी, वो देवता जिस का कोए अस्तित्व असल मैं नहीं सै। यो देवी-देवतावां का खेल कदे कदीमी तै मान्य जावै सै जबकि सच्चाई या सै अक म्हारा आचरण मनुष्य अर जानवरां के क्रम विकास की सांझी उपज सै अर इस आचरण का जन्म किसे भी संगठित धर्म की उत्पति होवण तै बहोत समय पहलम हो लिया था। बाद मैं नैतिक व्यवहार के नियम आत्मावांवां मैं विश्वास, मूर्ति पूजा, देवताओं के अविष्कार की साथ जोड़ के बनाये गये। ज्यूकर कहया गया अक स्त्रियां केवल मनुष्य की काम-तृप्ति का ही साधन हैं तथा जब वे उनने संतुष्ट करना बंद कर दें तो उसे बख्त उन ताहिं त्याग देना चाहिए। धर्म अर अपराध के आपसी संबंधां के बारे मैं वकील अर लेखक फैंक स्वैनकारा नै एक खोज करी सै जिसमैं सिंगसिंम मैं 100 सालां के दौरान जिन लोगां ताहिं कत्ल के जुर्म मैं फांसी दी गई उनमैं तै 65 प्रतिशत कट्टर रोमन थे, 21 प्रतिशत प्रोटैस्टैंट थे, 6 प्रतिशत हीब्रूज थे, दो प्रतिशत मूर्ति पूजक थे अर एक प्रतिशत तै भी कम नास्तिक थे। ईब हटकै फेर अध्यात्मवाद का बोलबाला बढ़ता जावण लागरया सै। हर पांच-दस मील पै हरियाणा मैं एक मंदिर बणता पाज्यागा सड़कां के किनारे। बेरा ना इन मंदिरां खातर धरती कूण से कानून के तहत मिलज्या सै? मनै दीखै सै मंदिर बनावण खातर किसै सरकार तै, किसे पंचायत तै, किसे विभाग तै कुछ बुझण की जरूरत नहीं सै। अर इसे करकै इस बेरोजगारी के जमाने मैं दो रोटियां का जुगाड़ करण का अर फेर सुलफे दारू ताहिं पहोंचण का आसान रास्ता बणगे ये मंदिर। देखियों इन अन्ध विश्वासां तै कद सी अक पैन्डा छूटेगा म्हारे हरियाणा प्रदेश महान का।
एक अखबार मैं खबर पढ़ी थी जिसके हिसाब तै म्हारे भारत देश महान के मध्य प्रदेश प्रांत मैं आदिवासी कबील्यां नै एक बाईस साल की कुआंरी कन्या की बलि इस कारण दे दी अक दरिया के निर्माणाधीन बांध की शक्ति को विश्वसनीय बनाया जा सकै। पाछै सी म्हारे प्रदेश के मुख्यमंत्री जी अर उनकी धर्मपत्नी जी भी सूर्य ग्रहण आले दिन कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर मैं डुबकी लावण लागरे थे पुण कमावण की खातर। सूर्य ग्रहण पै भी बहुत से अन्ध विश्वास और भी सैं। इसे ढाल की बातां करकै ‘पुजारी श्रेणी’ अस्तित्व मैं आई लागै सै। प्राचीन मनुष्य जो अपने शिकार करे औड़ जानवरां का मांस खा कै गुजारा करया करता जिब वो किसान बनकै खेती करण लाग्या तो उसनै अधिक अन्न भी पैदा करना शुरू कर दिया। इन प्राचीन किसानां मैं ते ज्यादातर तो मानवतावादी थे, ममता थी उनके दिल मैं, निर्बला अर मासूमां की रक्षा करया करते, परोपकारी थे, सदाचारी थे, कुछ गल्त कर देते तो पश्चाताप करया करते, आत्म बलिदानी थे फेर कुछ कामचोर थे, चालाक थे, लालची थे, ईष्यालू थे, घमंडी थे, मूढ़ विश्वासी थे। इन चालाक माणसां ने परजीवियां की ढालां ज्यूकर अमर बेल जीवै न्यू रहना शुरू कर दिया। इन्नै अधिक पैदावार हड़पनी शुरू कर दी। इसका बाहना उननै यो बनाया अक उनके धोरै अलौकिक शक्ति सै अर वे किसानां की मौत पाछै उनका जीवन बढ़िया बणावण मैं उनकी सहायता कर सकैं सै। समाज मैं इस चमत्कारिक शक्ति नै इन चालाक लोगां की फालतू अन्न हड़पन की चाल ताहि ल्हकोवन का अर सामाजिक मान्यता प्रदान करण का काम करया दीखै सै। इस ढाल कल्पित देवताओं का जन्म इस संसार में हुआ। लोग पूजा, प्रार्थनावां मैं अर समाधियां मैं अपना कीमती वक्त खर्च करण लाग्गे। काम करण आले अच्छे भले पुरुष अर महिलाएं काम करण के घण्ट्या के दौरान अपने इस अध्यात्मिक अभ्यास द्वारा आये साल अनगिणत मानवीय घंटे बरबाद कर देते हैं। बुद्धिमान लोग जब अपना कोए नया काम शुरू करैं सैं तो वे वैज्ञानिकां, अनुशासनधीन अर्थशास्त्रियां, इंजीनियरां, तकनीशियनां आदि धोरै सलाह लेवैं सैं फेर म्हारे देश भारत महान मैं आज भी चाहे हम कितने ए पढ़े-लिखे क्यों ना होवां, एक ज्योतिषी की ‘हरी बत्ती’ के बिना अपने नये, उन्नति आले काम नै कति शुरू नहीं करांगे। पूजा, शुभ अवसर अर प्रार्थनाएं म्हारे विकास कार्यों की खातर विज्ञान अर टेक्नालाजी तै अधिक महत्वपूर्ण सैं।
जै सूखा पड़ज्या तो म्हारे आड़ै यज्ञ अर हवन करवाये जावैं सैं ताकि देवतावां तै आर्शिवाद प्राप्त करकै मींह बरसवाया जा सकै अर इस अन्ध विश्वास पूर्व काम मैं जो लोग तल्लीन हों सैं वे अनपढ़ लोग नहीं होन्ते बल्कि इक्कीसवीं शताब्दी मैं रहवण आले विद्वान, सभ्य अर पढ़े-लिखे लोगै हों सैं। एक प्रसिद्ध इंजीनियर की जन्म शताब्दी पै एक बार सिंचाई अर ऊर्जा मंत्री की ओर तै एक मंदिर कम्पलैक्स का नींव पत्थर धरण के प्रबंध करे जावण लागरे थे। इस मंदिर का देवता उस क्षेत्र मैं एक रक्षक के तौर पै मान्या जाया करता। नदियां के तल के ऊपर बनाये जावण आले प्रोजैक्टां की पूर्ण सफलता की खातर इसे देवता तै आशिर्वाद लिया जाना था। के वो दूरदर्शी इंजीनियर या बात सोच सकै था अक उसकी मौत पाछै ‘अन्तरिक्ष युग’ मैं भारत के कुछ लोग लोगां तै टैक्सां द्वारा वसूल करे गये धन नै मंदिर की स्थापना पै बरबाद कर देंगे इस उम्मीद मैं अक देवता के आशिर्वाद तै बिजली ऊर्जा प्राप्त होवैगी, वो देवता जिस का कोए अस्तित्व असल मैं नहीं सै। यो देवी-देवतावां का खेल कदे कदीमी तै मान्य जावै सै जबकि सच्चाई या सै अक म्हारा आचरण मनुष्य अर जानवरां के क्रम विकास की सांझी उपज सै अर इस आचरण का जन्म किसे भी संगठित धर्म की उत्पति होवण तै बहोत समय पहलम हो लिया था। बाद मैं नैतिक व्यवहार के नियम आत्मावांवां मैं विश्वास, मूर्ति पूजा, देवताओं के अविष्कार की साथ जोड़ के बनाये गये। ज्यूकर कहया गया अक स्त्रियां केवल मनुष्य की काम-तृप्ति का ही साधन हैं तथा जब वे उनने संतुष्ट करना बंद कर दें तो उसे बख्त उन ताहिं त्याग देना चाहिए। धर्म अर अपराध के आपसी संबंधां के बारे मैं वकील अर लेखक फैंक स्वैनकारा नै एक खोज करी सै जिसमैं सिंगसिंम मैं 100 सालां के दौरान जिन लोगां ताहिं कत्ल के जुर्म मैं फांसी दी गई उनमैं तै 65 प्रतिशत कट्टर रोमन थे, 21 प्रतिशत प्रोटैस्टैंट थे, 6 प्रतिशत हीब्रूज थे, दो प्रतिशत मूर्ति पूजक थे अर एक प्रतिशत तै भी कम नास्तिक थे। ईब हटकै फेर अध्यात्मवाद का बोलबाला बढ़ता जावण लागरया सै। हर पांच-दस मील पै हरियाणा मैं एक मंदिर बणता पाज्यागा सड़कां के किनारे। बेरा ना इन मंदिरां खातर धरती कूण से कानून के तहत मिलज्या सै? मनै दीखै सै मंदिर बनावण खातर किसै सरकार तै, किसे पंचायत तै, किसे विभाग तै कुछ बुझण की जरूरत नहीं सै। अर इसे करकै इस बेरोजगारी के जमाने मैं दो रोटियां का जुगाड़ करण का अर फेर सुलफे दारू ताहिं पहोंचण का आसान रास्ता बणगे ये मंदिर। देखियों इन अन्ध विश्वासां तै कद सी अक पैन्डा छूटेगा म्हारे हरियाणा प्रदेश महान का।
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