बिहारी बहू
एक दिन मैडीकल की ओपीडी में एक मरीज पहोंच्या। उसके बारे मैं कहया जा सकता है कि वह ‘चहणिया मैं जावण नै होरया था। उसका नाम था रिसाल सिंह। उम्र लगभग 70 साल रही होगी। जिब उसका नंबर आया तो बोल्या - ‘डाक्टर साहब शरीर मैं तेजी कम आवै सै।’ डाक्टर उसकी बात सुनकर बहोत हैरान हुआ। डाक्टर रिसाल सिंह को अंदर मरीज देखने वाले कमरे में ले गया। उसकी बीमारी की पूरी जानकारी लई कुछ सवाल भी पूछे। करीब-करीब आधा घंटा दोनों की बातचीत हुई। डाक्टर नै उसका पूरा मुआयना किया। डाक्टर की हैरानी बेचैनी मैं बदलगी। डाक्टर सोच रहा था कि पहलम उसकी कौन सी बीमारी का इलाज करै। लम्बा पर पतला सा बुजुर्ग था रिसाल सिंह। वह ‘डोगे’ के सहारे चल पा रहा था। डाक्टर को पता लग्या अक उसके छह लड़कियां पैदा हुई। सभी लड़कियों की शादी हो चुकी। छोटी लड़की की उम्र 17 साल सै। रिसाल सिंह की दिली इच्छा सै अक एक छोरा तो होना ए चाहिये। ‘पुत्र लालसा’ बहोत जबरदस्त देखी उसमैं डाक्टर नै। रिसाल सिंह डाक्टर नै बात-बातां मैं बताता है - मेरे पास पंदरह एकड़ जमीन सै। उसका वारिस कौन होगा डाक्टर साहब। मेरी पत्नी नै कहया भी था अक दो-दो एकड़ लड़कियां मैं बांट दे अर तीन एकड़ अपने पास राख ले। बताओ डाक्टर साहब जो उन छोरियां मैं जमीन बांट दी तो छहों गाम मैं आकै बसैंगी। जै वे आई तो छह गोत और ले करके आवैंगी अपनी साथ। गाम का ढांचा ए बदल जागा। दो तीन साल मैं बहोत परेशान रहया अर आखिर कार अपनी परेशानी का रास्ता मनै काढ़े लिया। मनै गाम मैं एक बिचौलिया पकड़ लिया अर बिहार के जहानाबाद जिले से एक चौदह-पंदरह साल की लड़की खरीद कै लियाया। मैं गाम का बड्डा पंचायती ठहरया इसे करकै गाम का कोए आदमी नहीं बोल्या कुछ बी। मेरा भाई सै करतार सिंह साठ-पैंसेठ साल का ओ भी साझी कर लिया मनै। उसनै बी रोटी पानी का सुख होग्या। पहली बर जिब मैं बिहारी बहू नै थारे पास लेकै आया था तो आपनै उसको कहया था - बेटा अपने दादा की सेहत का ख्याल राख्या करो। मेरै बहोत हंसी आई थी थारी बात पै डाक्टर साहब। मनै बी ब्याह पाछै पता लग्या अक बिहारी बहू का दलित परिवार सै अर उसके मां-बाप इस दुनिया मैं कोन्या आज के दिन। मनै सोच्ची ले इस बहानै एक दुखिया छोरी नै साहरा मिल ज्यागा। एक खास बात बताऊं डाक्टर साहब अक हमनै फैसला कर लिया अक बिहारी बहू के कमरे के आगै जो मेरी जूती लिकड़ी पावै तो करतारा नहीं आवैगा उस कमरे मैं अर जै उसकी जूती लिकड़ी पाज्यां तो मैं नहीं जाऊंगा। यो रिवाज तो पहलम भी था म्हारे कई गामां मैं। एक तगड़ा सा माणस छांट लिया करते अर उसकी जूती जिस घर के बारणै लिकड़ी पा ज्यांती उस घर के मरद माणस घर मैं नहीं जाया करदे।
दूसरे किसे दिन बिहारी बहू मैडीकल गई और रिसाल सिंह के घरू डाक्टर से मिली। बिहारी बहू नै डाक्टर को बताया अक रिसाल सिंह नै कल उसकी खूब पिटाई करी। सारे शरीर मैं नील पड़रे सैं डाक्टर साहब। रोवण लागगी डाक्टर के आगै अर बोली - दो दो मरद। सारा घर का काम धंधा, खेत का काम अर ऊपर तै या पिटाई। शादी के बख्त तो कहा था घबराओ मत तुम तो रानी बन कर रहोगी म्हारे घर मैं। डाक्टर साहब कुछ करो। डाक्टर साहब नै ध्यान तै बात सुनी और दवाई लिख दी। डाक्टर नै बड़ा बेबस अर लाचार महसूस करया। सोच्या उसनै अक मैं कुछ करना बी चाहूं तो के कर सकूं सूं? उसने पूछा - रिसाल ने तुम्हें क्यों पीटा? बिहारी बहू ने बताया - इनके पड़ौस में एक लड़का है वह कभी-कभी इनके घर भी आ जाता है। मैंने भी दो चार बात उससे करली तो मेरी पिटाई। खैर दो साल के बाद बिहारी बहू ने एक लड़के को जन्म दिया। बिहारी बहू दो दिन मैडीकल में रही। वहां उसके बेटे के खून का ग्रुप टैस्ट करने पर ‘बी’ था और बिहारी बहू का अपना ग्रुप भी ‘बी’ था। डाक्टर ने टेक्नीशियन को कह कर रिसाल और करतार सिंह के खून का ग्रुप भी टैस्ट करवा दिया। टेक्नीशियन ने आके बताया - सर उन दोनों का ग्रुप तो ‘ओ’ है। डाक्टर सुनकर बहुत हैरान हुआ। एक पल तो समझ ही नहीं पाया। रिसाल सिंह बहुत खुश था क्योंकि उसका वंश चलाने वाला आ गया था। कैसे आया कहां से आया यह जानते हुए भी रिसाल सिंह अनजान बना रहना चाहवै था। फेर बिहारी बहू की मुसीबत दिन ब दिन बधती गई। वंश चलावण आला जिब दो साल का होग्या तो बिहारी बहू रिसाल सिंह नै तीस हजार मैं बेच दी। ब्याज समेत मूल वसूल कर लिया। गाम मैं चरचा याहे थी अक बिहारी बहू तो चरित्रहीन लिकड़ी। वा अपने प्रेमी के संग भाजगी। अखबारां मैं बी सुरखियां मैं याहे खबर छपी थी अक बिहारी बहू प्रेमी संग रिसाल सिंह को छोड़कर भाग गई। रिसाल सिंह डाक्टर कै गया अर बोल्या - चलो कुल का वंश चलावणिया बी मिलग्या अर उस बिहारी बहू तै बी पैंडा छूटग्या। रिसाल सिंह को कोई पछतावा नहीं था अपने किये पर। डाक्टर बहोत बेचैन हुआ रिसाल सिंह की बात सुनकर। हरियाणा के इस बदलते और विकृत होते सामाजिक सांस्कृतिक माहौल पर बहोत गुस्सा-सा आया। सारा हरियाणा महिला सशक्तिकरण - महिला सशक्तिकरण पुकारता नहीं थकता अर असल मैं महिला का स्थान तो और तले नै जान्ता जावण लागरया सै। ‘उडीसी बहू’, ‘बंगाली बहू’, ‘आसामी बहू’, ‘बिहारी बहू’ ये महज शब्द नहीं सैं ये हरियाणा के सामाजिक सांस्कृतिक परिदृश्य पै उभरते वे शब्द सैं जिनके पाछै म्हारी संस्कृति की विकृति साफ-साफ दिखाई देवै सै। फेर इस सच्चाई नै देखण की, इसका सामना करण की हिम्मत करणिया कितने सैं हरियाणा मैं? रिसाल सिंह की अनैतिकता नै समझणिया चुप क्यों सै? या चुप्पी हरियाणा नै और बी पाछै खींचण लागरी सै एक तरां तै अर येहे अनैतिक के नाम पै महिला पै अंकुश लावन्ते वार नहीं लावन्ते। दूजी कान्ही बाजार व्यवस्था नै भी इस रिसाल सिंह की अनैतिकता तै हाथ मिला लिया दीखै सै।
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