सोमवार, 29 मई 2017

जाणकै छोरी भ्रूणहत्या

जाणकै छोरी भ्रूणहत्या
हरियाणा मैं 1000 छोरयां पै 820 छोरीयां का रह जाना उन्नति अर विकास के खोखले अर अमानवीय चेहरे की तरफ चिंताजनक पहलू सै। पढ़ै लिखे लोगां मैं यू और बी कम बताया जा सै। हम अंतर्राष्ट्रीय स्तर का ‘एजुकेशन सिटी’ बनावण की बात रोज करां सां। ईब ताहिं जो शिक्षा हरियाणा मैं दी गई उसनै तो म्हारे ताहिं छांट कै महिला भ्रूणहत्या करण मैं ए पारंगत करया सै। यो केवल महिलावां की संख्या कम होवण का मामला ए कोन्या बल्कि किसे बी सभ्य समाज मैं इनसानी मूल्यों की गिरावट अर पाशविकता नै ए दिखावै सै। हरियाणा मैं पाछले कुछ सालां तै यौन अपराध, दूसरे प्रदेशां तै महिलावां का खरीद कै ल्यावणा अर उनका सामूहिक शोषण तथा बाल विवाह का चलना चिंताजनक रूप तै बढ़त पै सैं। इसकी साथ की साथ सर्वखाप पंचायतें भी जाति, गोत, संस्कृति, मर्यादा आदि के नाम पै महिलावां के नागरिक अधिकारां का भयंकर रूप तै हनन करण लागरी सैं। अपना गलबा कायम रखने की खातर एक कान्ही ये जातिवादी पंचायतें घूंघट, मार-पिटाई, शराब, नशा, लिंग पार्थक्य, जात के नाम पर अपराधियों ताहिं संरक्षण देणा आदि सबतै पिछड़े विचारां की हिमायत करैं से उड़ै ए दूसरी कान्ही ये साम्प्रदायिक ताकतां की गेल्यां मिलकै युवा लड़कियां की पहलकदमी अर रचनात्मक अभिव्यक्ति को रोकण की खातर तरां-तरां के फतवे जारी करती रहवैं सैं। युवा लड़कियां केवल बाहर ही नहीं परिवार मैं भी उनके अपने लोगां द्वारा भी यौन हिंसा अर दहेज हत्या का शिकार होवण लागरी सैं। इस बाबत दलाली, भ्रष्टाचार अर रिश्वतखोरी तै पीस्सा कमावण आले नवधनिक वर्ग अर उनके लड़के खासकर कै अपराधियां की ढालां साहमी आवण लागरे सैं। अपने मौज मजे अर दिल बहलाव की खातर छेड़खानी अर बलात्कार इनकी खातर मामूली बात सैं। अर सशक्तिकरण की सजावटी बात बहोत होवण लागगी फेर सच्चाई या सै अक ताकत अर गैर बराबरी पै टिक्या म्हारा समाज आज भी महिलावां नै नीची नजर तै देखै सै अर उननै पूरे इनसान अर कै स्वतंत्र नागरिक का दर्जा कोनी देता। आज मीडिया अर बाजार मैं भले ही औरत के शरीर का मूल्य बधग्या हो फेर उसके काम, उसके बौद्धिक विकास अर रचनात्मक क्षमताओं की आज भी भारी अनदेखी सै। कितै बी अपने श्रम का उचित मूल्य उननै नहीं मिलता। दुनिया का 70 फीसदी काम औरत करैं सैं फेर दुनिया की आमदनी का सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्सा उन ताहिं पहोंचै सै अर पूरी दुनिया मैं औरत सिर्फ एक फीसदी संपत्ति की हिस्सेदार सैं। काम अर संसाधनां के इस असमान बंटवारे अर दोयम दर्जे की सामाजिक हैसियत के कारण महिलाएं सामाजिक रूप तै असुरक्षित सैं अर उनपै हिंसा बढ़ती जावण लागरी सै।
दुनिया के स्तर पै शुरू होई वैश्वीकरण की प्रक्रिया नै आर्थिक, राजनीतिक अर सामाजिक असमानता की एक भयंकर खाई पूरी दुनिया मैं पैदा कर दी सै, जिसके चालते अमीर देश गरीब देशां पै अर अमीर तबके गरीब तबक्यां पै कहर ढावण लागरे सैं। गरीबी, बेरोजगारी, हिंसा अर असमानता के अराजक ढंग तै बधते चले जावण का कारण यहि असमानता सै। असल मैं या नाबराबरी जितनी बढ़ती जावै सै विकास उतना ए असंतुलित अर विकृत होन्ता जावै सै। इस विकृत विकास की सबतै फालतू मार महिलावां नै झेलनी पड़ै सै। खेती, कारखाने अर कुटीर उद्योगां के चौपट होवण करकै लाखां महिलावां की जीविका छिनगी अर ईबै औरां की बी छिनैगी। कृषि अर उद्योग मैं नई तकनीक अर नई मशीनां के इस्तेमाल तै महिलाएं विशेष रूप तै छंटनी की शिकार हुई सैं। आए दिन बढ़ती महंगाई अर आर्थिक तंगी के कारण महिलावां नै बहोत कम दामों पै अर बहोत असुरक्षित हालातां मैं काम करण पै मजबूर होवणा पड़रया सै। इन आर्थिक नीतियां की गेल्यां वाहे गली सड़ी संस्कृति आई सै जो महिलावां के शरीर के भद्दे प्रदर्शन, नशे अर हिंसा पै टिकी सै। भारतीय संस्कृति की दुहाई देन्ती हुई साम्प्रदायिक ताकतें भी इसे अन्ध उपभोग्तावादी संस्कृति तै हाथ मिलावण लागरी सैं। दहेज हत्याएं, छेड़खानी, अपहरण, बलात्कार, अर यौन उत्पीड़न का महामारी की तरियां फैलना इस संस्कृति का अभिन्न हिस्सा सै। इस ढालां आर्थिक क्षेत्र में गरीबी करण अर सामाजिक क्षेत्र मैं वस्तुकरण तै महिलावां की स्थिति और खराब होन्ती आवै सै। छांट के महिला भ्रूण हत्या महिलावां के इसी अवमूल्यन का सूचक सै। यो हरियाणा का दुर्भाग्य ए कहया जावैगा अक जडै महिलावां के संदर्भ मैं परम्परा अर आधुनिकता दोनां के सबतै पिछड़े अर सबतै बर्बर रूप एक होगे। सौंदर्य प्रतियोगिता अर दहेज हत्याएं गैल-गैल चाल रही सैं। एक कान्ही महिला सशक्तिकरण का डंका बाजै सै। दूजी कान्ही अनेक पुरात्नपंथी धारणावां अर धार्मिक अनुष्ठानां का बड़े पैमाने पै महिमा मंडन करया जाण लागरया सै। अंध उपभोग्तावाद के साथ सबसे पिछड़े विचारां को समाज का और राज्य का पूरा समर्थन हासिल सै। पितृ-सत्ता के साथ नई तकनीक के नापाक गठबंधन नै जिस प्रकार लड़कियों को खत्म करने के ‘सुसभ्य’ और ‘साफ-सुथरे’ तरीके निकाले हैं उससे ही लिंग अनुपात खतरनाक ढंग से बिगड़ चुका है। महिलाओं के प्रश्न असल मैं सभ्य अर नागरिक समाज बणावण के प्रश्न सैं। हरियाणा आर्थिक स्तर पै विकसित होग्या फेर नागरिक समाज तो कोनी बनाया हमनै। सोचां किमै। गेर रै गेर पत्ता गेर।

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