सोमवार, 29 मई 2017

सेज अधिनियम 2005

के कहवै से सेज अधिनियम 2005 ?
सते, फते, नफे, सरिता, कविता, सविता, अर ताई भरपाई जन चेतना केंद्र मैं आगे। नफे बोल्या - नाश कर दिया इस सेज नै किसानां का। फते बोल्या सेज का बेरा बी सै अक न्योंए हांकै सै? नफे चुप। सन्नाटा सा छाग्या। अधिनियम तो पढ़े कोन्या राख्या। ना इसकी हिम्मत करनिया नै पूरा बेरा अर ना विरोध करनिया नै। बस जुट रे सैं अपने-अपने सुर मैं। सविता बोली - आज मैं ल्याई सूं इस अधिनियम की मोटी-मोटी बात थाम ध्यान तै सुणो अर सविता शुरू होगी - 1. विशेष आर्थिक क्षेत्र की स्थापना केंद्र सरकार, राज्य सरकार संयुक्त रूप तै या अलग-अलग अर कै किसे व्यक्ति द्वारा करी जा सकै सै। 2. सेज की स्थापना का इच्छुक व्यक्ति या अन्य, इलाके का चुनाव स्वतंत्रता तै करैगा अर राज्य सरकार कै सीधे बोर्ड को अपना प्रस्ताव भेज सकै सै। 3. धारा 7 के तहत सेज मैं स्थित कोए भी इकाई या डवलपर्स घरेलू शुल्क क्षेत्र के करों, ड्यूटी व अधिभार तै मुक्त होगा। 4. केंद्र सरकार भारत मैं कार्यरत उप सचिव स्तर के किसी अधिकारी को सेज का विकास आयुक्त नियुक्त करेगी, जो सेज से संबंधित मामलों का सर्वे-सर्वा होगा। 5. विशेष आर्थिक क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र खोलने की अनुमति केंद्र सरकार दे सकती है। 6. धारा 23 मैं यो प्रावधान सै कि जिस राज्य मैं सेज स्थित सै उस राज्य के उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश की सहमति तै उस राज्य की सरकार एक या अधिक न्यायालयों को सेज से उत्पन्न असैनिक प्रकृति के मुकद्दमे व अधि सूचित अपराधों की सुनवाई के लिए अधिकृत कर सके सैं। इसके अलावा कोए भी अन्य न्यायालयों मैं मुकद्दमे की सुनवाई या ट्रायल नहीं कर सकदा। 7. किसे कंपनी द्वारा किये गये अपराध के मामले मैं कंपनी के साथ-साथ उस प्रभारी या उत्तरदाई पर भी मुकद्दमा चलाया जा सकता है बशर्ते वह यह सिद्ध कर देता है कि कथित अपराध उसकी जानकारी के बिना हुआ सै। 8. धारा 26-31 तक सेज के लिए विशेष कर संबंधी प्रावधान है जिसमें स्पष्ट अंकित किया गया सै कि (8.1) सेज के अंदर अथवा उसकी इकाइयों के द्वारा आयातित सामान अथवा सेवाओं पर कस्टम अधिनियम 1962, कस्टम कर अधिनियम 1975 अर कस्टम कर टैरिफ एक्ट 1975 के तहत कस्टम शुल्क में छूट होगी। 8.2 - घरेलू कर क्षेत्र से सेज के अंदर, लाये जाने वाले सामान पर सैंट्रल एक्साइज एक्ट 1944 के तहत आबकारी शुल्क मैं छूट होगी। 8.3 - घरेलू कर क्षेत्र से सेज में या उसकी इकाइयों में लाये जाने वाले सामान, भारत के बाहर सेज क्षेत्र में लाये जाने वाले सामान व सेवाओं को वे सभी छूट मिलेंगी जो विदेशी निवेशकों को मिलती हैं। 8.4 - सेज क्षेत्र व इसकी इकाइयों की खातर सेवाकर, सिक्योरिटी ट्रांजिशन टैक्स, केंद्रीय बिक्री कर व इनकम टैक्स की छूट भी प्राप्त होगी। 8.5 - इन क्षेत्रों में ऐसा सामान जो घरेलू कर क्षेत्रों पर ले जाया जायेगा उन पर एंटी डम्पिंग, काउंटर ब्रैलिंग, सुरक्षात्मक कर एवं सीमा शुल्क उसी दर से लगाया जायेगा, जिस दर से आयात कर लगाया जावै सै। 9. धारा 50 मैं विभिन्न राज्यों की सरकारों को यह अधिकार दिया गया सै कि वह अपने राज्य मैं टैक्स, लेवी व चंुगी तै सेज नै मुक्त कर सकैं सैं। 10. धारा 27 मैं आयकर कानून मैं 1961 मैं संशोधन किया गया सै जिसमैं स्पष्ट किया गया सै कि आयकर अधिनियम की धारा 115(0) मैं संदर्भित लाभांश को, सेज के मामले में कुल आय मैं सम्मिलित नहीं किया जावैगा।
इसे तरियां धारा 10(ए) मैं उपधारा 7(बी) जोड़ी गई सै जिसमैं 1 अप्रैल के बाद शुरू होवण आले कर निर्धारण वर्ष से 5 वर्ष तक लाभांश को 100 प्रतिशत छूट तथा आने वाले 5 वर्षों में 50 प्रतिशत छूट दी गई सै। इसे ढाल धारा 80एबी(1) मैं सेज मैं निवेश करने वाले विकासकर्ता को, व्यक्ति को आने वाले दस वर्षों तक 100 प्रतिशत छूट दी गई है। 11. सेज को अपने क्षेत्र मैं ऑफ शोर बैंक इकाइयां खोलने व संचालन करने की अनुमति दी गई सै। 12. सेज को अपने क्षेत्र मैं अपना स्वयं का सुरक्षा तंत्र चलावण की अनुमति दी गई सै। 13  धारा 49 मैं केंद्र सरकार को यो अधिकार दिया गया सै कि ‘अधिसूचना जारी करकै यह घोषित कर सकती है कि केंद्र सरकार के अन्य कानून यथा ट्रेड यूनियन एक्ट, औद्योगिक एवं श्रम विवाद, प्रोविडेंट फंड, एम्पलायर लायबलिटिज, वृद्धावस्था पेंशन, मजदूर भू-प्रसव कालीन सुविधा आदि से सेज को मुक्त कर सकै सै। कविता बोली  - ये सेज किसे खातर फूलां की सेज अर म्हारी खातर म्हारी अर्थी। कितने कमाल की बात सै अक सेज भारत की जमीन पर विकसित ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें विदेशी क्षेत्र के रूप मैं मान्यता प्राप्त होगी और भारत के समस्त देशी कानूनां तै मुक्ति होगी। न्यों कहवैं सैं अक देश मैं 403 सेजां नै मंजूरी मिल चुकी सै अर कमेटी कै साहमी 2700 प्रस्ताव विचाराधीन सैं। सते बोल्या - जब भारत आजाद हुआ था तो देश मैं 450-500 रियासत हुआ करती। फेर जब सेज पूरी तरियां लागू हो ज्यागा तो पूरे देश मैं 3000 तै फालतू इसी रियासत होंगी अर उनके किले होंगे। ज्यूंकर अंग्रेजी का पिट्ठू उन बख्ता मैं थे न्योंए सेज आल्यां के टीक्कड़ तोड़ सेज के विरोध नै खुंडा करण लागरे सैं। सवाल यू सै अक सेज किस कीमत पै? किसान, मजदूरां नै उजाड़ कै अक उनका बसेबा बी गैल की गैल करकै? या सोच्चण की बात सै। हरेक जनचेतना केंद्र पै, हरेक महिला समूह मैं, होक्के पै, चौपाड़ मैं, सारे कै, अर हां ताश खेलती हाण, इस सेज पै चरचा जरूर होनी चाहिये। पूरा सोच विचार करना चाहिये। इसकी खामियां के खिलाफ आवाज़ बुलंद करनी चाहिये।

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