मंगलवार, 18 जुलाई 2017

मरने आले मर गए नेक दिखायी राह


पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के देवराडा गांम का जिकरा सै। घटना बेसक थोड़ी पुराणी सै, पर दांव साच्ची सै। यो गाम एक ईसी सड़क के बगल मैं बसरया सै जो नदी के कान्ठै जाकै खतम होज्या सै। इस नदी पै कोए पुल नहीं सै अर नदी के दोनूं कान्हीं के लोग पाछले कई सालां तैं नदी पै पुल बणावन की मांग नै लेकै आंदोलन करते रहे सैं। नदी पार के उन ग्रामीण लोगां की जिन्दगी और बी मुश्किल होज्या सै जिब उननै किसे बी सड़क पै पहोंचण की खातर मीलां चालणा पड़ै सै। इसके बादै कितै जाकै 150 किलोमीटर दूर गोरखपुर पहोंच पावैं सैं जो इस एरिया का मेन रेलवे जंक्शन सै। पाछले छह साल तै लाल जी मिश्र नामक ग्रामीण अर उसके साथी पुल की मांग तै जोर लारे सैं। हर मौके पै प्रशासन झूठे वायदे करकै दबाव बणाकै बाबा जी की भूख हड़ताल खतम करवान्ता रहया। बीते साल खासतौर पै ठाड्डी बरसात होवण के कारण ग्रामीणां की मुसीबत और घणी बधगी। इस करकै उननै 28 सितम्बर 2003 नै नदी के कान्ठे पै एक मंच बणाया अर हटकै भूख हड़ताल शुरू कर दी। मंच पै एक बैनर लाया था जिसपै लिख राख्या था - ‘जन सेवा समिति’।
च्यार अक्टूबर नै रात नै आठ बजे पाछै जिला मजिस्ट्रेट अर पुलिस अधीक्षक पुलिस बल की साथ उड़ै पहोंचगे अर फेर डोरे गेरे लालजी मिश्र भूख हड़ताल खतम कर दयो। जिब बाबाजी नहीं मान्ने तो प्रशासन अर पुलिस अपणे असली रंग मैं आ गए अर बल प्रयोग करणा शुरु कर दिया। इस क्षेत्र मैं बिजली नहीं पहोंचली ईब ताहिं। नदी के कान्ठे पै एक दुर्ग पंडाल बण्या औड़ सै जड़ै जेनरेटर तै रोशनी का इंतजाम कर राख्या था अर पंडाल धोरै आच्छी खासी भीड़ थी। पुलिस नै जेनरेटर बंद कर दिया अर अंधेरे मैं ऐ लाल जी मिश्र नै जोर जबरदस्ती उड़ै तै ठावण की हरकत करण लागे। उड़ै जो युवक हाजिर थे उननै इसका विरोध करया। पुलिस हरकत मैं आगी। लाट्ठी बरसण लाग्गी। इस भगदड़ मैं पुलिस नै एक दम नजदीक तै च्यार फायर करे। एक 12 साल का बालक जो उड़ै मूंगफली बेच्चण लागरया था कै गोली लाग्गी अर उसनै उड़ै ए दम तोड़ दिया। एक दूसरा युवक जो अपणी बाहण तै मिल्लण फेट्टण आया था, कै बी गोली लाग्गी। उस ताहिं घायल अवस्था मैं तड़फण की खातर सड़क पै छोड़ दिया गया। थोड़ी सी हाण तड़प कै उसनै बी दम तोड़ दिया उड़ैए। एक तीसरा युवक भी इसे ढालां मरग्या। चौथा माणस जिसकै गोली लाग्गी थी ओ लहूलुहान हालत मैं घर नै ठाकै लेगे फेर देर रात नै उसनै भी दम तोड़ दिया। पुराना राज गया था अर नया राज आया था। उड़े के सांसद जो बीजेपी का सै, नै इब संसद फंड तै पुल निर्माण का वायदा करया सै। सीएम नै बी सख्ती तै कार्रवाई करकै जिला मजिस्ट्रेट अर जिला पुलिस अधीक्षक सस्पैंड कर दिये अर गोली चलावण के जिम्मेदार कांस्टेबल की गिरफ्तारी करवाई सै।
रेशमा अपणे पति खजांची गेल्यां एक झोंपड़ी मैं रहवैं सैं। रेशमा की बीमारी की खबर सुणकै उसका भाई राम मिलन कुछ मिनट पहलम रेशमां के घरां आया था। रेशमा की विधवा मां उड़ैए थी। वे बहोत गरीब सैं अर डोम अनुसूचित जाति के सैं। उन धोरै कोए जमीन नहीं सै अर वे बांस की टोकरी बणा-बणा कै अपणा गुजारा करैं सैं। उन धोरै किसे का बी राशन कार्ड नहीं सै अर अपणे पीहर मैं ए सै। युवावस्था मैं पहोंचण तै पहलमै वा विधवा होगी। जो 12 साल का बालक नंदू गुप्ता मारया गया वोहे था। मूंगफली बेच्चण बरगे छोटे मोटे काम करकै घर के साहरा लारया था। और भी जितने लोग इस गोली कांड मैं मारे गए वे अर उनके परिवार का कोए बी दूसरा जन पढ़या लिख्या नहीं सै।
ईब सवाल यूं सै अक वे म्हारे सांसद जी अपणे सांसद फंड मां तै इस काण्ड तै पहलम ओ पुल नहीं बणवा सकैं थे के? मजिस्ट्रेट अर पुलिस अफसर नै उड़ै रात नै जावण की के एमरजैंसी आगी थी? के उन लोगां की पुल की मांग करणा गलत मांग थी? उनपै गोली क्यूं चलाई गई? फेर बी एक बात तो तय सै कि जो काम ये च्यारों माणस जिन्दा जी नहीं करवा पाये, अपणी शहादत दे कै जरूर करवा पावैंगे अर उस गुहांड की जनता इननै ताउमर याद राखैगी।








थम कदसिक सोच्चोगे मेरे बीरा!


विश्व व्यापार संगठन की दाब मैं म्हारे देश मैं लागू करी गई कृषि नीतियां के कारण हरियाणा के किसान बर्बाद होवण लागरे सैं। फांसी खाकै, सल्फास की गोली खाकै, भूख अर बीमारी करकै ज्याण खपावण लागरे सैं। जिब कर्जा उल्टा नहीं हुया तो बैंकां नै किसानां की जमीन की खुली नीलामी का एलान कर दिया। पाकिस्तान तै 12 लाख टन का आयात करया गया जिस करकै भारत का चीनी उद्योग चरमरा गया अर सरकार का ब्यौंत गण्डे की कीमत का भुगतान करण का बी कोण्या रहया।
खेती जगत मैं सार्वजनिक निवेश पाछले एक दशक मैं 33 प्रतिशत घट कै 23 प्रतिशत रैहग्या अर पहली पंच वर्षीय योजना मैं कृषि क्षेत्र का 34.5 प्रतिशत अलाटमैंट का हिसाब ईब बस 18 प्रतिशत रहग्या। डंकल प्रस्ताव पाछै अमीर देशां की दाब मैं भारत मैं सब्सिडियां मैं भारी कमी कर दी गई। सरकार किसानां नैं न्यूनतम समर्थन मूल्य देवण तै अर इस कीमत पै सरकारी खरीद करण तै भी मोक मारगी। इसकी साथ-साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली का भी भट्ठा बिठा दिया। साल 2000 मैं जड़ै जापान मैं 72.5 प्रतिशत, कोलम्बिया मैं 54 प्रतिशत, दक्षिणी कोरिया मैं 61 प्रतिशत, यूरोप मैं 37 प्रतिशत, चीन मैं 34 प्रतिशत, अमरीका मैं 29 प्रतिशत, पाकिस्तान मैं 26 प्रतिशत कृषि क्षेत्र ताहिं सब्सिडियां दी गई उड़ै भारत मैं सबतै कम 3 प्रतिशत सब्सिडी दी गई। म्हारी किसानां की हितैषी सरकार। कृषि उत्पादन पै इस असमान लागत के चालते दुनियां के बाजार मैं भारत का निर्यात 1996 मैं 6.83 अरब डालर प्रति वर्ष तै घटकै 1999 मैं 5.97 अरब डालर रैहग्या। 64 प्रतिशत लोगां नै रोजगार देवण आले कृषि क्षेत्र का देश के सकल घरेलू उत्पाद का हिस्सा 34.5 प्रतिशत तै घटकै 18 प्रतिशत रैहग्या। सौका जोड़ यो सै कि आयात करकै फसलां के भाव गिरगे, कृषि मैं उत्पादन लागत बधगी, कृषि मैं बचत घटगी अर इस करकै किसानां पै करज का बोझ बढ़ता जावण लागरया सै। खाद, डीजल, कीड़े मार दवाई, बीज, बिजली अर सिंचाई के रेटां मैं बिना लगाम की बढ़ोतरी अर प्राकृतिक आपदावां के कारण किसानां की आर्थिक हालत तेजी तै बिगड़ती जावण लागरी सै। वी.पी. सिंह की सरकार के बख्त का डी.ए.पी. का कट्टा 180 रुपइये की जागां 450 रुपइये, यूरिया का भा 117 रुपइये की जागा 250 रुपइये अर 5 रुपइये प्रति लीटर आला डीजल 20 रुपइये लीटर हो लिया। दूसरे कान्हीं कपास, गण्डा, बाजरा, ग्वार अर सरसों के भा पाछले के मुकाबले मैं कम होगे। 1990 मैं 10 हजार रुपइये ताहिं के कर्जदार किसानां ताहिं 13 हजार करोड़ रुपइये के कर्ज का अन्दाजा लाया गया। ये कर्जे माफ कोण्या करे। दूजे कान्ही पाछले साल यू.टी.आई. घोटाले मैं लूट्या गया 11,500 करोड़ रुपइया म्हारे प्यारे बाजपेई जी की सरकार नै ओट लिया। गन्डे का बकाया देवण मैं भी हांगा लागै सै। सरकारी अर सहकारी बैंकां की किसानां ताहिं कर्ज देवण तै इन्कारी के चालते मझोला अर गरीब किसान, खेत मजदूर अर ग्रामीण कारीगर सूदखोरां ताहिं 24 रु. तै 60 प्रतिशत तक का वार्षिक ब्याज पै कर्जा लेवण नै मजबूर सैं। इननै उल्टा करण का ब्यौंत किसका सै? जमीन नीलाम करण के फैसले होगे थे पाछै सी। वारंट तो बहोतै किसानां के कट लिए। सिरसा मैं 400 किसान गिरफ्तार करे गये थे कर्जा उल्टा ना करण के कारण अर फूलका गाम का 72 साल का किसान बीरबल 31 दिन जेल मैं रैहकै दम तोड़ग्या बताया। सिरसा जिले के तखतमल गाम के 25 बरस के नौजवान किसान जसपाल सिंह नै इसे कर्जे करकै आत्महत्या करनी पड़ी बताई। हरियाणा को-आप्रेटिव सोसायटीज एक्ट की धारा 184 मैं सै यो प्रावधान कि जो कर्जा वापसी नहीं करै, उसनै ठाकै जेल भेज द्यो। टाटा बिड़ला बरगे अमीरां नै बैंका धोरै 65000 करोड़ रुपइये का कर्ज लिया अर ईब देन्ते ना। उनके खिलाफ तो कदे वारन्ट जारी नहीं करे गये। क्यूं? इस क्यूं का जवाब टोहवण खातर थोड़ा सोचना पड़ैगा। सोचण मैं थामने परहेज सै मेरे बीरा।
---







देखियो के होगा ?


आजकाल पूरी दुनिया आर्थिक मंदी के दौर म्हं सै। दो हजार म्हं विकास की वृद्धि की दर 4.2 फीसद थी। फेर अनुमान सै अक दो हजार एक म्हं या वृद्धि दर 2.4 रहवैगी। आर्थिक सहयोग तथा विकास संगठन (ओईसीडी) के 29 देशां म्हं या वृद्धि दर एक फीसद रैहन्ती बताई। गैल की गैल विश्व व्यापार की वृद्धि दर म्हं भारी गिरावट आई सै। सन् 2000 म्हं या दर 13.4 फीसदी थी फेर 2001 म्हं या सिर्फ 3.5 फीसदी रैहगी। ग्यारह सितंबर की घटनावां पाछै तो यो मंदी का दौर और भी गहरा होन्ता दीखै सै। अर ये अमीर देश गरीब देशां पै बोझ गेरण की पूरी तैयारी म्हं दीखै सै। इन गरीब देशां की जनता की फिरकी पहलम्हं बणरी सै फेर आण आले बख्तां म्हं तो और भी बुरा हाल हो ज्यागा। या बात इन गरीब देशां की गरीब जनता कै तो समझ मैं आगी फेर इन गरीब देशां की अमीर जमात कै या बात घाट जंचै सै अक उनके महलां पै भी ये अमीर देश बाज की ढालां झपटा जरूर मारैंगे। पूरी दुनिया म्हं जो लोग इन अमीर देशां के अमीर मालकां की पैंतरेबाजी नै समझगे वे इनकै खिलाफ लड़ण की त्यारी म्हं भी जुटरे सैं। टीना अर टीपा का जंग जारी सै। टीना का मतलब सै देयर इज नो आल्टरनेटिव मतलब कोए विकल्प नहीं सै अर टीपा का मतलब सै देयर इज पीपुल्स आल्टरनेटिव मतलब लोगां धोरै इस क्रूर दुनिया का विकल्प सै।
आज की दुनिया म्हं विकास का जो तरीका इस्तेमाल होरया सै उसतैं अमीर और अमीर होन्ता जावण लागरया सै अर गरीब और बी गरीब होवण लागरया सै अर कुछ निरभाग बीच म्हं ए हिचकौले खावण लागरे सैं। अमरीका के विकास के मॉडल की दो खास बात सैं। विकास की तासीर इसी सै अक इसतै बेरोजगारी बधै सै। जितणा विकास फालतू जितनी तरक्की फालतू उतनी बेरोजगारी फालतू। दूसरी खास बात इस मॉडल की या सै अक एक देश बेरोजगारी की दर 3.9 फीसदी थी फेर दिसंबर के आन्ते आन्ते या 5.8 फीसदी पै पहोंचगी। मानव विकास रिपोर्ट 2001 के हिसाब तै दुनिया की आबादी के दस फीसदी सबतै गरीब तबके की आमदनी सबतैं धनी दस फीसदी की आमदनी के सिर्फ 1.6 फीसद के हिस्से जितनी सै। अमरीका के दस फीसदी हिस्से लोगां की कुल आमदनी दुनिया की सबसे गरीब 43 फीसदी आबादी (करीब दो अरब लोग) की कुल आमदनी तै भी फालतू सै। दुनिया के बीस तै फालतू देशां का 1999 का मानव विकास सूचकांक, 1995 के सूचकांक तै भी तले चाल्या गया। इन मां तै दस देसां के मामले मैं तो यो सूचकांक 1985 के सूचकांक तै भी तलै चाल्या गया। इस करकै तीसरी दुनिया म्हं रहवण आली घणखरी जनता बढ़ती गरीबी अर बदहाली के बोझ तलै पिस्सण लागरी सै। विज्ञान अर प्रौद्योगिकी नै इतनी तरक्की करली अक पूरी दुनिया की घणखरी जनता की जीवन स्तर ऊपर ठाया जा सके सै फेर इस पूंजीवादी समाज व्यवस्था के उत्पादन के संबंध विज्ञान की इस सच्चाई के साहमी दीवार बणकै खड़े सैं। इतना ए नहीं ये समाज के संबंध मुनाफे की अपनी लुटेरी तलाश म्हं म्हारी इंसानियत नै हैवानियत म्हं बदलण लागरे सैं। म्हारे विकास की इस अमानवीय प्रकृति अर बाजार व्यवस्था करकै दुनिया पै संकट के बादल छावण लागरे सैं अर उनके दुख दरद बधण लागरे सैं अर लोग राधा स्वामी, चन्द्रा स्वामी, मुरारी बापू के चरणां म्हं अपणे दुख दरदां के खातमे की खातर लागरे सैं। फेर उन धोरै इस क्रूर समाज व्यवस्था का इलाज कोण्या। वे तो इसका जिकरा बी कोण्या करदे। इस विकास के ढांचे म्हं गड़बड़ के कारण विकसित अमीर देसां अर तीसरी दुनिया के विकासशील गरीब देसां के बीच का संकट दिन ब दिन गहरा होन्ता जावण लागरया सै। इन अमीर देसां का यो हमला म्हारी आजादी अर आत्मनिर्भरता पै कसूती चोट करण लागरया सै। विश्व पर्यावरण की ताहिं कसूते खतरे पैदा कर दिये इसनै। ये देश अपनी सेना के ताकत के दम पै अर अपनी तकनीक के दम पै तीसरी दुनिया के देसां का गल घोटण लागरे सैं अपणी अपनी ऐश की खात्तर। इन देसां के माल खजाने भरे जावें सैं अर गरीब देसां के खजाने खाली होन्ते जावैं सैं। देखियो के होगा?
---






तावल़ा सो बावल़ा मेरे बीरा!

एक बर की बात सै अक एक महावत एक राजा कै एक हथणी पै नौकर था। फेर ओ सारी हाण हथणी की देखभाल मैं लाग्या रहन्ता अर हथनी नै इसे ढाल राखता जणों तै वा हथणी उसकी अपणी औलाद हो। कई लोग अर लुगाई उसका यू जनून देखकै उसनै जनूनी बी कहया करदे अर नफे, सत्ते अर फत्ते तो उसनै पागल बी कह दिया करदे।
एक दिन के हुया अक वा हथणी क्यूकरै खुलगी अर भाजदी गई अर बण मैं भीतर चाली गई। महावत नै तो तड़कैं ए उठकै देख्या तो हथणी कोण्या दीखी। न्यून देखी, भीतर देखी, बाहर देखी, बाग मैं देखी, जड़ कितै नहीं पाई। बहोत दुखी हुया महावत। गैल्यां उसनै चिंता होई कि मालिक खाल तारैगा वा न्यारी।
महावत नै डरते डरते से नै मालिक ताहिं बताया कि हथणी तो भाजगी बणां मैं। सुनते की साथ मालिक का पारा तो सातमें आसमान मैं गया। महावत नै भतेरे हाथ पां जोड़े कि इसमैं मेरा कोए दोष नहीं सै। फेर मालिक तो आखिर मालिक ठहरया। ओ उसकी बात क्यां नै सुणै था। उल्टा उसनै महावत पै इल्जाम ला दिया कि उसनै हथणी बेच खाई अर ईब बात बणावै सै। न्यों भाज कै आज ताहिं नहीं गई हथणी। महावत कै और भीतरले मैं जा कै लागी। मालिक फेर बोल्या - थारे बरगे गरीब गुरबा लोग अमीरां के न्योंए कान काट्या करैं। पर मैं अपणे कान कति नहीं कटवाऊं तेरे पै। मालिक नै आगा पाछा कुछ बी ना देख्या अर महावत तै बिचारा पढ़ण बिठा दिया। उस ताहिं घणा जबर दंड सुणा दिया।
इन बातां नै बारां साल बीतगे। एक दिन महावत नै किसे काम तै बण मैं जाणां पड़ग्या। उसकी गेल्या और बी कई लोग लुगाई थे। उड़े उननै हाथियां का झुण्ड देख्या। उन हाथियां मैं वा हथणी बी थी। महावत नै वा हथणी सैड़ दे सी पिछाण ली। उसनै उसकै धोरै जाणा चाहया पर उसके साथियां नै ओ रोकणा चाहया फेर महावत कड़ै सुणै था उनकी। सीधा हथणी के धोरै चाल्या गया। महावत नै हथणी का नाम ले कै जोर तै रुक्का मारया। सुणण की वार थी हथणी नै महावत की आवाज पिछाण ली। वो झट भाज कै उसके धोरै आगी अर आकै बैठगी। महावत बी सैड़ दे सी उसपै जा बैठया। हथणी महावत नै जंगल मैं लेगी। उसनै अपणे बालक बुला लिये। महावत उन सबनै ले कै मालिक धोरै घर नै आग्या। मालिक नै देख्या तो जणों उसपै कई घड़े पाणी पड़ग्या। उसनै अपणी गलती का अहसास होग्या। उसनै महावत धोरै माफी मांगी अर बोल्या तूं तो बेकसूर था। मालिक नै अपणे मन मैं सोच्या अक तावला सो बावला। उसनै कसम खाई कि आज पाछै कदे तावल नहीं करया करैगा।
फेर आजकाल तो आपां चट मंगनी अर पट ब्याह करण की सोचां सां। म्हारे देश म्हं आजकाल सब क्यांहे नै बड़ी रफ्तार पाकड़ राखी सै। सारी ऊंचनीच सोच कै काम करण की आदतै कोण्या रही माणस मैं। यो तुरत फुरत आला मामला म्हारे देश का कदे ना कदे एक्सीडैंट करवा कै मानैगा। सोच समझ कै, झाड़ पूंछ कै, देखभाल कै, वोट दियो। भैंस खरीदां जिब धार काढ़ कै देखां, बुलध खरीदां तो खूड काढ़ कै देखां, हल खरीदां तो चांड कै देखां फेर वोट गेरण के बख्त या परख करकै गुण दोष के आधार पै चीज लेवण की आदत म्हारी कड़ै चाली जा सै? हमनै जो खूब बरत कै देख लिये, कति माठे, खूड मैं बैसकण आले बुलध घरां बांध कै के करांगे। देखिये कदे तावल तावल मैं इसे लोगां नै वोट दे दयो जो हमनै तमनै सबकै बेच कै खाज्यां अर फेर हम न्यों कहवां कि ओहले भाई। हमनै के बेरा था अक न्यों बणज्यागी?
---





इस भारत का हाल देखियो के होगा ?


महात्मा गांधी नै कहया था अक भारत गांमां मैं बसै सै। आज के भारत मैं जड़ै पीस्से आले कसूती ढाल जगमगावण लागरे सैं, उड़ै असली भारत, भारत के गामां की के हालत सै? बेरा सै के? आज कै दिन ताहिं 20,000 तै फालतू किसान आत्महत्या करण नै मजबूर हो लिए अर 20,000 तै फालतू गामां के लोग भूख तै मरण लागरे सैं। 50 लाख तै फालतू छोटे अर हाशिये के किसान अपनी खेती की जोतां नै खोकै बेरोजगारों की जमात मैं शामिल हो लिये सैं। सैंकड़ों किसानां नै अपणा कर्ज चुकावण की खातर अपणे गुर्दे बेचने पड़े सैं। इन गरीब किसानां अर खेतिहरां ताहिं क्रेडिट (उधार) की उपलब्धता के बिना क्रेडिट कार्ड की व्यवस्था पूरे जोर शोर तै जारी सै। न्योंए वितरण प्रणाली के बिना राशन कार्ड बांटे जावण लागरे सैं। ईब ताहिं जो चीज म्हारे किसान बहुतायत मैं उपजाया करते उन चीजां का भी हम आज आयात करण लागरे सां। म्हारे गोदामां मैं करोड़ा टन अनाज न्योंए सड़ण लागरया सै पर देश की भूख मिटावणियां भूख तै मरण लागरे सैं। सोने पै सुहागा यो सै अक हम फेर बी इस अनाज का बहोतै रियायती दरां पै निर्यात करण लागरे सां। गिहूं अर चावल के निर्यातकां ताहिं हाल मैं 800 करोड़ रुपइयां तै फालतू की सब्सिडी हमनै दी सै। दूजे कान्हीं आये दिन 5000 बालक कुपोषण तै मरण लागरे सैं। खास बात या सै अक दुनिया भर के भूखे लोगां का एक तिहाई हिस्सा लगभग 84 करोड़ लोग म्हारे प्यारे भारत मैं रहवैं सैं।
1998 तै ईब ताहिं डीजल की कीमत दोगणी बधगी, यूरिया की कीमत 3,680 करोड़ प्रति टन तै बध कै 4,830 करोड़ रुपइये प्रति टन होगी, डी.ए.पी. की कीमत 8,300 रुपइये प्रति टन तै बधकै 9350 रुपइये प्रति टन होगी, एन.पी.के. के दाम 7,500 रुपइये प्रति टन तै बढ़कै 8,060 रुपइये प्रतिटन होंगे। 2000-2001 मैं कृषि क्षेत्र मैं बिजली की खपत 1721.8 करोड़ किलो वाट थी अर इसपै 27,000 करोड़ रुपइयां की सब्सिडी दी गई थी। नये अधिनियम के कारण या सब्सिडी खत्म कर दी जागी। 1991-1992 मैं किसानां ताहिं बिजली 12 पीस्से प्रति कि.वाट घंटे की दर तै दी जावै थी जो 2000-2001 मैं बधाकै 28.5 पीस्से प्रति कि.वाट घंटे कर दी गई। सब्सिडी हटाये पाछै कृषि क्षेत्र मैं बिजली का किराया कई गुणा बधैगा। इसतै पाणी खींचण आले 125.1 लाख पम्प सैटां पै असर पड़ैगा। दूसरे कान्ही उपज की कम कीमत मिलै सै किसान नै। 2002-03 मैं गिहूं का समर्थन न्यूनतम मूल्य 620 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करया जबकि उत्तर प्रदेश के किसानों नै मात्र 530 रुपइये प्रति क्विंटल के दाम मिले थे। इस तरियां फसलां के भावां के चक्कर मैं आये साल किसानां नै 1,16,000 करोड़ रुपइयां का घाटा होवण लागरया सै। स्रोत: रिसर्च फाउंडेशन फॉर टेकनोलॉजी एंड इकोलॉजी।
रही सही कसर विश्व व्यापार संगठन की दाब मैं पूरी होगी। दुग्ध क्षेत्र तै नियन्त्रण हटा लिया गया। यो 10 हजार लीटर तै फालतू प्रसंस्कृत अर रख रखाव करण आली डेरियां पै लाइसैंस की बाध्यता खत्म करण तै अर उननै मिल्क शेड क्षेत्र मुहैय्या करवावण तै शुरू हुया। दूध की सहकारी संस्थावां नै इस नीति के चालते गम्भीर संकट झेलना पड़रया सै। दूजे कान्ही बहुराष्ट्रीय निगमां की डेरियां नै भारत के बाजार मैं पैर पसारने शुरू कर दिये। कृषि क्षेत्र में 1996 मैं आवंटित निधि 8 प्रतिशत थी जो ईब घट कै 5.2 प्रतिशत रैहगी। हाल मैं कृषि अर ग्रामीण क्षेत्र के विकास खातर ‘लोकनायक जयप्रकाश नारायण फंड’ जारी किया गया फेर बजट मैं इस फंड की खातर एक बी पीस्सा नहीं दिया गया। लालची बहुराष्ट्रीय निगम म्हारे प्राकृतिक संसाधनां पै नजर गाडरे सैं। नीम, बासमती, हल्दी, भारतीय गिहूं की किस्म आदि तै बने उत्पादां पै, पेटन्ट की कोशिशें इसका जीता जागता उदाहरण सैं।
हरियाणा के गामां का नजारा बी कमोबेश इसा ए सा सै। देखियो आगै के बणैगी? आई किमै समझ मैं? गेर रै पत्ता गेर, हमनै के लेणा इन बातां तै।




औरत नै ‘चिज्जो’ कहै...

औरत नै ‘चिज्जो’ कहै.. 
आज थोड़े से बी पीस्से आला अपणी पत्नी नै उत्पादन के औजार तै सिवा और कुछ बी नहीं मान कै चालदा। उस खातर तो वा इसी ए चीज सै ज्यूकर गुलाब जाम्मण कै संतरा। इस्तेमाल करण की चीज़ अपणी वासना मिटावण की चीज अर बालक पैदा करण की मशीन तै फालतू कुछ नहीं औरत उसकी नजरां मैं। उसतै थोड़े से फालतू पीस्से आले की मानसिकता और बी घटिया स्तर पै चाली जावै सै। अपणे खेत क्यार मैं अर घरां मैं अर कारखान्यां मैं अर कै भट्ठयां पै मजदूरी करणियां की बहूबेटियां का इस्तेमाल ओ अपणी मनमर्जी तै करना चाहवै सै। यू किसे चरित्र का माणस सै। असल मैं व्यक्तिगत संपत्ति की नींव पै टिके औड़ म्हारे समाज मैं लैंगिक अर वैवाहिक प्रश्न समाज की हरेक तबके की औरतां कै आगे बहोत घणी समस्याएं, उलझण अर परेशानी पैदा कर रे सैं। पुराने सामाजिक बंधन टूटण लागरे सैं। नये आदमी की साथ आदमी के नए आदर्शवादी संबंधां की मांग भी उभरती दीखै सै। असल मैं ये लैंगिक अर वैवाहिक समस्याएं पूरी सामाजिक समस्या के रूप मैं देखी जाणी चाहियें। यो औरत मरदां की नाबराबरी पै टिक्या समाज औरत नै उपभोग की वस्तु तै फालतू कुछ भी माणण नै तैयार कोण्या। असल मैं इस अन्यायकारी समाज की जागा न्यायकारी समाज, एक समतावादी समाज की खातर जो संघर्ष लड़या जागा वो संघर्ष ही वैवाहिक अर लैंगिक संबंधां के उद्धार की नींव सही सही ढंग की तैयार करैगा। इसकी खातर सार्वजनिक जीवन मैं औरतां की हरेक जागृति अर काम ताहिं खूबै होंसला हफजाई मिलणी चाहिये। सामाजिक जीवन के भांत-भांत के कामां मैं हिस्सेदारी करकै उनका घर के भीतर का कोल्हू के बुलध आला जीवन खत्म होवण की राही पड़ैगी। आज कै दिन देखण मैं आवै सै कि दुनिया के सबतै फालतू अमीर देशां मैं चहुंमुखी संकट पैर पसारता जावण लागरया सै, पुराने ढंग की शासन प्रणालियां खतम होवण लागरी सैं अर पूरा का पूरा सामाजिक ढांचा खतम होवण लागरया हो तै लैंगिक अर विवाह के संबंधां मैं विकृति भी जरूर पैदा होवैंगी अर मौज मस्ती की इस ढाल की इच्छाएं अर प्रेरणाएं बड़ी आसानी तै निरंकुश हो सकैं सैं। तो सवाल यू सै कि इसकी काट के सै? या जो अपसंस्कृति पूरे समाज मैं घुण करण लागरी सै इसका के राह लिकड़ै? असल मैं एक चाल्ला और होवण लागरया सै। औरत नै उसको असली आजादी कोण्या मिली सै। यो पीस्से आला हिस्सा चाहवै सै कि औरत नै आजादी मिलै अक वा उसकी इच्छापूर्ति करण नै आजाद हो। मतलब उसका ‘चिज्जो’ के रूप मैं इस्तेमाल करण मैं जो अड़चन आवैं सैं उनतै आजादी मिलजै। एक औरत की एक इन्सान के रूप मैं आजादी की बात कोए नहीं करदा। असल के प्रेम मैं व्यापक लैंगिक प्रेरणा का वैयक्तिक प्रेम के रूप मैं विकसित अर परिष्कृत होणा बहुत जरूरी पक्ष सै। प्रेम मैं दो जीवां का अर नये पैदा होवण आले एक तीसरे जीव का भी रिश्ता सै। इसे करकै उसका एक सामाजिक महत्व बी सै अर उसमैं समाज के प्रति एक कर्त्तव्य बी सै। म्हारे हरियाणे के अर किसे बी जागां के नौजवानां नै अपनी जिंदगी मैं आनंद अर स्फूर्ति की जरूरत सै। यू आनंद अर स्फूर्ति उसनै टी.वी. के लटके झटके अर इंटरनैट की पोरनोग्राफी नहीं दे सकदी। इनकी जागां जरूरत सै स्वास्थ्यप्रद खेलकूद की, तैरण की, बहोत ढाल के शारीरिक अर बौद्धिक कामां मैं युवा लड़के लड़की जितनी घणी हिस्सेदारी करैंगे, साथ मिल जुलकै पढ़ैंगे लिखैंगे इसतै जितना कुछ इन युवावां नै मिलैगा उसका हजारवां हिस्सा भी उननै इन लैंगिक समस्यावां पै बात करकै कै पोरनोग्राफी देखकै कोण्या मिलै। म्हारे बड़े बुजुर्गों नै कोषण की जागां उनकी स्थगित ऊर्जा का सकारात्मक इस्तेमाल करण मैं अपनी ऐतिहासिक भूमिका निभाणी चाहिए ना तो ईब्बी नाश होवण मैं तो कसर नहीं रैहरी बाकी आगै बी और नाशै होवैगा/

योह के बणी मेरे राम !

योह के बणी मेरे राम !
आदरयोग वेंकैया जी! सादर संवेदना। न अत्र कुशलम् न तत्रास्तु। इन लैक्शनां मैं म्हारी जो गत बणी सै उसनै थाम नहीं जाणोगे तो कौन जाणैगा। जोर का झटका लाग्या अर ओ बी सहज दे सी। फेर बी अभूतपूर्व तै भूतपूर्व बणण के बख्त मैं, म्हारे प्यारे अटल जी नै बहोत पते की बात कही सै कि हार जीत तो होन्ती ए रहवै सै। ऊपर आले नै बी कहवैं सैं हरेक बीज की जोड़ी बनाई सै ज्यूकर दिन की गेल्यां रात सै, खुशी की गेल्यां गम सै, अंधेरे की साथ रोशनी सै। हार की गेल्यां जीत सै। सही बात सै, उदय की अस्त बी सै। फेर इंडिया शाइनिंग की गेल्यां के सै? अर फील गुड का जोड़ीदार के होगा? खैर फीलगुड बेशक फेल होग्या हो फेर हम फेल थोड़े ना हुये सां। थामनै टायर्ड कै रिटायर्ड होवण की कोए जरूरत नहीं सै। ढाल ढाल की बात करैंगे लोग। अपणी पार्टी आले बी बेरा ना के-के कहवैंगे पर काल्ली माणण की कोए जरूरत नहीं सै।
हम गाम मैं हुक्के पै बैट्ठे बतलावां थे अक एक बात म्हारी समझ मैं कोण्या आई। आखिर यो जहाज क्यूं डूब्या? के कसर कड़ै सी रैहगी थी? आपां नै तो जुगाड़ करण मैं कोए कसर नहीं छोड्डी थी। इकलौते नेता का जुगाड़ बनाया, चुनाव तै पहलम का अर चुनाव तै बाद के गठबंधन का जुगाड़ था, मीडिया का जुगाड़ था, सर्वेक्षणां का जुगाड़ बठाया, साड़ियां का जुगाड़ अर गाड़ियां का जुगाड़ था, नेतावां अर अभिनेतावां का जुगाड़ करया, सास का जुगाड़ था बहु का जुगाड़ था। हैलीकाप्टरां, हवाई जहाजां, रेलगाड़ियां, कंप्यूटर, टेलीफोन, वीडियो सब क्याहें का कसूता नेगजोग बठाया था। असली अर नकली नामां तै विज्ञापनां का जुगाड़ बी था। विदेशी मूल के मुद्दे का पूरा का पूरा जुगाड़ भिड़ाया था। देश मैं स्थिरता चाहिए इस बात का पूरा प्रबंध करया। विकास की गेल्या मोदीत्व के योग का, त्रिशूल की गेल्यां तुर्की टोपी का, मंदिर की गेल्यां शाही इमाम के फतवे का जुगाड़ करया। बुश बरगे खिलाड़ियां गेल्यां बी जुगाड़ बिठाया था, महाजन बरगे महारथी म्हारी साथ थे।
इसी के कसर रहगी कि खड़े-खड़े कुर्सी खाली करणी पड़गी? किसे दावे, मुकदमें, शिकायत कै बहस की बी नौबत कोण्या आई। मनै इसा लागै सै अक म्हारे आंडी खिलाड़ी म्हारी पब्लिक गेल्यां जुगाड़ बिठाणा भूलगे। कमाल की बात सै म्हारे देश के ठेठ देशी नेता म्हारे देश की जनता गेल्यां जुगाड़ नहीं बिठा पाये अर गच्या खागे। या बात तो जग जाहिर सै अक या भोली सूरत आली पब्लिक घणा सा भरोसा करण लायक कोण्या। या शक्ल तै भोली दीखै सै पर सै परले दरजे की घाघ।
जितना कहणा होगा उड़ै हां कहवैगी अर हां कहणा होगा उड़ै ना कहवैगी। चुपचाप आंख मूंद कै दड़ मारकै पड़ी रहवैगी जणू तो कसूती नींद मैं सै। कार मैं किसे की मैं बैठेगी, दोफारे का भोजन किसे और के भंडारे मैं करैगी अर आखिर मैं वोट किसे और कै गेर देगी। बड़ी धोखेबाज जनता सै। म्हारी रैलियां मैं खूब आई, नाड़ हिला हिला कै हां भरी, म्हारे नारे लाये। फेर म्हारी खातर एक छोटी सी वोट देवण नै सिर कट्या उसका। एक वोट देवण मैं इतने नखरे दिखाये कि बूझो मतना। सरकार नै हरावण के खेल मैं बेरा ना इसनै के मजा आवै सै। आगली बरिया इन धोखेबाज जनता की खातर बी जुगाड़ बिठाणा पड़ैगा ज्यूकर एक बै अयोध्या का जुगाड़ बिठाया था अर दूसरी बरियां कारगिल का जुगाड़ बिठाया था। बिना कुर्सी रहया कोण्या जावै ईब। तावले से किमै जुगाड़ करो कि यूपीए मैं लठ बाज ज्यां अर म्हारे सूत आज्या। थोड़े लिखेनै ज्यादा समझियो। बाकी थाम खुद बहोत समझदार सो। कांग्रेस की गेल्यां यू लेफ्ट बी आग्या इसका खास जुगाड़ करणा पड़ैगा।

तमनै बेरा सै के ?

तमनै बेरा सै के ?
एक दिन नत्थे सिंह कै घरां फत्ते अर सत्ते बैठे बात करैं थे। सरला नत्थे की पत्नी अर कमला नत्थे की बाहण भी बातचीत मैं शामिल थी। बात मुसलमानां पै चाल पड़ी। नत्थे सिंह बोल्या - आज हिंदू-मुसलमान मैं दूरी बहोत घणी बढ़गी। या आच्छी बात कोण्या। सत्ते बोल्या - इन मुसलमानां नै तो पाकिस्तान के बाडर तै परले कान्हीं छोड़ कै आवणा पड़ैगा। नत्थे सिंह बोल्या - सत्ते या तेरी बात ठीक कोण्या। जो म्हारे देश के दूसरे देशां मैं जाकै बसरे सैं जै उनकै कोए धक्का मारण लागै तो तनै किस्सा लागै? अर ये मुसलमान तो कई पीढ़ियां तै म्हारे देश मैं बसरे सैं। सरला बोली - सत्ते तूं तै मेहर सिंह फौजी का फैन सै फेर उसकी बी मुसलमानां मैं गहरी दोस्ती बताई अर उसनै एक सांग हिंदु मुसलमान छोरा छोरी के ब्याह पै भी लिख्या था जिसमैं उसनै दोनुआं के ब्याह की हिम्मात करी थी। सत्ते बिफर पड़या। ना या बात झूठी सै। सरला बी करड़ी होकै बोली - झूठी क्यूंकर सै? एक बर मेहर सिंह फौजी की भाभी फेटी थी मनै उसनै बताई थी ये बात अर फेर फौजी मेहर सिंह स्मारक समिति बरौना नै एक किताब मैं या बात छापी। सत्ते बोल्या - मेहर सिंह तो हिंदू बिचारां का माणस था। कमला बोली - फेर हिंदू अर मुसलमान मैं यारी दोस्ती नहीं हो सकदी के? उनमैं ब्याह शादी नहीं हो सकदे के? अर मेहर सिंह नै जो गीत रागनी इस किस्से के बणावण मैं लिखे वे भी झूठे सैं के?
सरला नै एक बै फेर चोंहटकी भरी सत्ते कै अर बोली - फौजी की भाभी तो न्यों भी बतावैं थी अक ओ कसूता होक्का बिगाड़ था। जिसकै जान्दा उसका ए हुक्का पी लिया करदा। सत्ते तै ईब नहीं रहया गया अर बोल्या - भाभी इतनी गलत बात फौजी के बारे मैं कहना बहोतै गलत बात सै। वो इसा कति नहीं था। वो तै ठेठ जाटराम था। वो हरिजनां का हुक्का क्यूंकर पी सकै था? नत्थे बोल्या - या सरला बेरा ना उल्टी-उल्टी बात कड़े तै टोह ल्यावै सै। सत्ते बोल्या - ये बात तो चाहे साच्ची भी हो तो भी जंचण की कोण्या। कमला बोली - ईब थारे बरगे आडु.आं का कोए के कर सकै सै जो साच्ची बात नै भी मानण नै त्यार कोण्या। फत्ते बोल्या - विश्वास भी तै कोए चीज हो सै। म्हारे या साच्ची बात बी गलै कोण्या उतरै अक मेहर सिंह छुआछूत मैं यकीन नहीं कर्या करदा। म्हारा विश्वास तै यो सै अक ओ पक्का जाट था। सरला - तो ओ छुआछात के खिलाफ कोण्या हो सकता? जित ताहिं मनै बेरा सै चौधरी देवीलाल नै तो मुजायरां के हक मैं पूरा आंदोलन लड़या था। अर चौधरी चरण सिंह जिसनै जाटां का मसीहा कहवैं सैं उसके बालकां के ब्याह दूसरी जात्यां मैं हुए थे। फत्ते बोल्या - क्यूं झूठ भकाओ सो म्हारा चौधरी इस ढाल के काम होवण दे था के? सरला बोली - हाथ कंगण नै आरसी के अर पढ़े लिखे नै फारसी के। चौधरी अजीत सिंह नै एक चिट्ठी लिख कै बूझ ले अक उसकी बाहणा के ब्याह कित कित हुए थे सारा बेरा लाग ज्यागा। फते बोल्या - चिट्ठी के परसों रोहतक आवैंगे जिब बूझूंगा। अर जै ये बात झूठ पाई तो थारा जलूस काढूँगा। सरला बोली - बात तो म्हारी साच्ची सै बाकी हरियाणे के चौधरी औरतां का जलूस तै बेरा ना कद अर किस बात पै काढ़ कै खड़े होज्यां या बात न्यारी सै। यो जलूस तो तम म्हारा ऊं भी काढण लागरे सो। फेर एक बै बेरा जरूर पाड़ लिए। फत्ते कै बड़ा झटका लाग्या। उसके दिमाग मैं मेहर सिंह फौजी की जो छवि थी निखालस जाट की वा खिंड-भिंड होगी अर एक छत्तीस जात का हिमायती साहसी आ खड्या हुया जो मजहब मैं भी विश्वास नहीं करै था। इसे ढाल उसके दिमाग मैं चौधरी चरण सिंह की छवि मैं भी हलचल होगी अक उनके बालकां के दूसरी जात्यां मैं ब्याह क्यूंकर होण दिये।
हो सकै सै म्हारे थारे मां तै भी कइयां कै झटका लाग्या हो इन बातां के बेरा लागे पाछै। पर इस बात पै विचार जरूर करियो अक फौजी की पहली छवि बढ़िया थी अक दूसरी छवि बढ़िया सै? अर चौधरी देवीलाल म्हारा ताऊ भी मुजारयां के हकां खात्तर खूब लड़या था इसमैं भी कति झूठ कोण्या। ये तीनों व्यक्तित्व फौजी, ताऊ अर चौधरी चरण सिंह ये जात तै ऊपर उठे औड़ व्यक्ति थे तम चाहे मानो अर चाहे मत मानो।


पोटो काम खोटो

पोटो काम खोटो
वोटां का टोटा हो तै पोटो लियाओ। जिसनै भी यो मन्तर करया सै उसनै चाला पाड़ दिया। म्हारे आडवाणी जी तै न्यारा इसा चाले पाड़ माणस और कौण हो सकै था। इसे मन्तरां के वे सिद्ध सैं। अयोध्या आंदोलन का मन्तर भी आडवाणी जी टोहकै ल्याये थे। जन संघ की स्वर्ण जयंती पै उननै अयोध्या आले मन्तर का कितना गुणगाण करया अर बोले - यो म्हारे, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की पहचान बण्या अर इसनै भाजपा ताहिं कुर्सी दिवाई। आडवाणी जी नै बताया सै अक इस पोटो के बी कई फायदे सैं। पोटो होगा तै जनता नै लागैगा अक सरकार काम्मल ढाल आतंकवाद का मुकाबला मंडकै करण लागरी सै। इबै जनता के विश्वास कोनी हो लिया अक म्हारी सरकार आतंकवाद कै खिलाफ साचम साच लड़ै भी सै अक नहीं। ईब ताहिं तै जनता नै योहे देख्या सै अक आतंकवादी म्हारे विमान का अपहरण करकै कंधार मैं ले ज्यावैं सैं अर बदले मैं आतंकवादियां नै छड़वालें सैं। खुद म्हारा विदेश मन्तरी कंधार ताहिं जावै सै। जिस मौलाना मसूद अजहर नै जसवंत सिंह जी कंधार ताहिं छोड्डण गये थे ओहे ईब कश्मीर मैं आतंकवाद फलावण लागरया सै। कश्मीर के जिस आतंकवाद के बारे में भाजपा कह्या करदी अक एक बै कुर्सी थ्याज्या तो चुटकी बजाकै इस आतंकवाद नै खत्म कर देगी। सारे पाप्पड़ बेल कै देख लिए - लाहौर की यात्रा कर ली बस मैं बैठ कै, घाटी मैं युद्ध विराम करकै देख लिया, मुशर्रफ साहब को आगरे मैं न्योंत कै देख लिया, बुश ताहिं शिकायत की चिट्ठी लिख कै देख ली। फेर आतंकवाद टस तै मस नहीं हुआ। पोटो के साहरै भाजपा आपणा मर्द पना दिखाणा चाहवै सै। पोटो का विरोध करण आले विपक्ष नै आतंकवादियां का हिम्माती ठहराया जा सकै सै, जिस पै जी आज्या उस ताहिं देशद्रोही करार दिया जा सकै सै। जै विरोधियां ने देशद्रोह के कलंक तै बचणा सै तो पोटो का समर्थन तो करणा ए पड़ैगा। भाजपा कहवै सै अक पोटो मैं लोटो ना तो हम तमनै बदनाम कर द्यांगे। यो आच्छा तरीका?
इस पोटो के और बी कई फायदे सैं। जै यो पोटो होगा तो अयोध्या की जरूरत कोण्या रहवै फेर। अयोध्या विश्वहिंदू परिषद ताहिं छोड़ दिया भाजपा नै। भाजपा नै अयोध्या की जागां पोटो की कोली भरली दीखै सै उत्तर प्रदेश के चुनाव जीतण खात्तर। ज्यूकर अयोध्या के मुद्दे पै हिंदू वोट बटोरे थे न्योंए इस पोटो पै हटकै हमनै धोखा देवण की तैयारी से अर हम इतने आडू. सां अक धोखे मैं आवण ताहिं त्यार बैठे रहवां सां। पोटो पै भी जनता नै बांटण की पूरी त्यारी सै। उत्तर प्रदेश के चुनाव खात्तर भाजपा धोरै कोए मुद्दा नहीं सै। राजनाथ सिंह आरक्षण मां तै आरक्षण काढ़ के ल्याये सैं फेर ओ भी मुद्दा होन्ता जावण लागरया सै। विश्वहिंदू परिषद के नेता अयोध्या के विवादित परिसर मैं बड़गे थे बवाल खड्या करण खात्तर फेर वाजपेयी जी बोल पड़े अक इस ढालां तो वोट बधण की जागां घट ज्यांगी। वोटां का जबरदस्त टोटा सै ईबकै भाजपा मैं। ज्याहें करकै वोटां का टोटा दूर करण नै पोटो का लंगोटा थाम लिया दीखै सै आडवाणी जी नै।
इस पोटो के और बी कई फायदे सैं। मुसलमानां की इसके साहरै खूब खबर ली जा सकै सै। किसे भी संगठन का मैम्बर बता कै धरद्यो धार पै, कोए बूझनिया नहीं फेर। सिमी पै प्रतिबंध ला दिया अर इब रही सही कसर पोटो पूरी कर देगा। पहलम टाडा मैं भी अल्पसंख्यक ज्यादा धरे गये थे। पाछले नेगजोग तै इसे बात का इशारा करै सैं अक पोटो का शिकार भी मुसलमान फालतू होंगे। इस पोटो के तहत इन प्रैस आल्यां की भी नाड़ सीधी करी जा सकैगी। ये किसे नै गोलते ए कोण्या। इसे ढाल ये ट्रेड यूनियनां आले सैं जो घणी भों-भों करदे हांडैं सैं। देश बेच दिया निजीकरण का विरोध करो। पोटो मैं इनका भी सही इलाज करण का इंतजाम बताया। इन सारी ढाल के नमून्या ताहिं जेल के दरवाजे दिखाये जा सकैं सैं पोटो मैं। ईबकै तै आडवाणी जी इसी मन्तर ल्याये सैं जिसके फायदे ए फायदे सैं नुकसान तो एक बी कोण्या।

ईब तो जाग जाओ मेरे भाण-भाइयो!


गाम में सत्ते, फत्ते, नफे, सविता, कविता अर धापां ताई। बीते लैक्शनां म्हं नेतावां की झूठी साच्ची बातां नै सुणकै बहोत दुखी हुए अर आपस मैं बतलाये कि एक बर सारी दुनिया के, शिक्षा के, म्हारी आर्थिक हालत के, इस वैश्वीकरण के बाद के म्हारे विकास के, विदेश ब्यौपार के, मानव विकास सूचकांक, महिलावां की हालत, स्वास्थ्य रोजगार, कीमतां की बढ़ोतरी, ग्रामीण विकास आदि पै आंकड़े कट्ठे करकै ल्यावैंगे अर ग्राम सभा करकै उनके साहमी धरैंगे? सबनै अपणी अपणी जिम्मेदारी ले ली। ग्रामसभा हुई। चौपाड़ न्यूं खचाखच भरी थी। सबतै पहलम सत्ते बोल्या - सारी दुनिया नै मिलाकै सालाना आय सै 5120 डालर अर भारत मैं प्रति व्यक्ति सालाना आय सै 560 डालर। दुनिया मैं भारत का स्थान 162वां (29 देश भारत तै तलै सैं)। सुरता बोल्या - तूं ये आंकड़े कड़ै तै ल्याया? ये तो कोरी बकवास सै। सत्ते बोल्या - ये आंकड़े वर्ल्ड डैवलपमैंट इंडीकेटर-2003 तै ल्याया सूं। अर और सुणले सुरते - सबतै गरीब 20 प्रतिशत का राष्ट्रीय आय मैं हिस्सा सिर्फ 8.1 फीसद सै अर सबतै अमीर 20 प्रतिशत का राष्ट्रीय आय मैं हिस्सा 46.1 फीसद सै अर ये आंकड़े मानव विकास रिपोर्ट 2003 के सैं। कहवै तो रिपोर्ट बी ल्या कै दिखाऊं।
सरिता नै अपणी बात शिक्षा पर कही अर वा न्यों बोली - भारत मैं दुनिया की आबादी का 16.8 फीसद रहता है पर दुनिया के वयस्क निरक्षरां मैं तै 34 फीसदी भारत मैं सैं। 94 विकासशील देशां के शिक्षा सूचकांक मैं भारत का स्थान 76वां सै। तृतीयक (टरसरी) स्तर की शिक्षा मैं प्रवेश का अनुपात दुनिया भर मैं 23 फीसद सै अर भारत मैं यो 10.5 फीसद सै। सुरते फेर बोल्या - तूं कित तै ल्याई सै ये आकड़े? सरिता बोली - यूनेस्को की रिपोर्ट, एजूकेशन फार आल 2003-2004 मैं तै ल्याई सूं मेहनत करकै नै। अर सुणल्यो भ्रष्टाचार सूचकांक के हिसाब तै दुनिया के 102 देशां मैं भारत 71वें स्थान पै सै। सिर्फ 31 देश सैं जो भ्रष्टाचार मैं भारत तै भी आगे सैं? यू आंकड़ा ट्रांस्पेरैंसी इन्टरनेशनल की रिपोर्ट 2003 तै लिया गया सै। ईबी कोए शक सै कि सूरत सिंह जी इन आंकड़यां के बारे मैं?
कविता की बारी आई अर वो बोली - विदेशी ऋण का बोझ भारत पै 1998-99 मैं 9823 करोड़ डालर था जो 2003 जून ताहिं बधकै 10,960 करोड़ डालर पै पहोंच लिया। 1998 मैं 31 मार्च ताहिं देश के धनवानां पै बकाया कर 47,444 करोड़ रुपये था जो 2002 के 21 मार्च ताहिं बधकै 86,342 करोड़ रुपइये होग्या। ये सारे आंकड़े मनै आािर्थक सर्वे 2002-03 तैं कट्ठे करे सैं। कम तै कम म्हारे नेता जिब गाम मैं आवैं तो इन बातां पै उनका के कैहणा सै, हमनै बूझणा तो चाहिए। फत्ते कई बार का मसकोड़े मारै था, उसका नम्बर आया तो उसनै बताणा सरू करया - म्हारे बरगे 62 देशां के सूचकांक के आधार पै विश्वीकरण की कटारी चाले पाछे के विकास का जिकरा सुणल्यो। इन देशां मैं दुनिया की 84 फीसदी आबादी रहवै सै। 2001 मैं भारत का स्थान 49वां था अर 2002 मैं यो 57वां होग्या अर 2003 मैं यो 61वां होग्या। सुरते कै बेरा ना आज के होर्या था फेर बोल्या - सारी काट करोगे अक किमै अच्छी बात बी बताओगे? फत्ते बोल्या - पहलम म्हारी सुणले अर फेर तूं अपणी काम्मल बात भी बता लिये। हां तो भारत का विदेश व्यापार घाटा - 1885 करोड़ डालर सै अर यू एशिया का सबतै फालतू घाटा सै। मानव विकास सूचकांक के हिसाब तै 2001 मैं भारत का स्थान 173 देशां मैं 115वां था, 2003 मैं यू 127वां होग्या। देख्या म्हारे भारत की तरक्की का दौर।
फेर सविता का नंबर आया तो वा बोली - हो तो तमनै बहोत वार हो गई ये बात सुणतें फेर दो च्यार बात मेरी बी सुण ल्यो। हर 54 मिनट मैं एक महिला की साथ बलात्कार होवै सै, हर 26 मिनट मैं एक महिला की गेल्या जोर जबरदस्ती करी जावै सैं। जचगी मैं महिलावां की मृत्यु दर हर एक लाख जिंदा प्रसवां पै दुनिया भर मैं 400 अर भारत मैं 540 सै। म्हारे कम वजन के बालक जनमैं सैं 26 प्रतिशत पर दुनिया मैं ये 14 फीसद सैं। अपणे गाम मैं बी देख सकां सां महिलावां की जो हालत सै। आई ग्राम सभा कै किमैं बात समझ मैं कि नहीं? जिब ताहिं हर बैठक मैं हर हुक्के पै, हर घर मैं, हर पनघट पै इन बातां पै चरचा नहीं होगी इतनै म्हारी न्योंए खाल तारी जागी। इन बातां नै सब ताहिं पढ़कै सुणाइयो मेरे भाण अर भाइयों।
---

सोमवार, 17 जुलाई 2017

जनता कर के सकै सै


रमलू अर सरिता घरां बैठके बात करैं थे सांझ कै। सरिता बोली राजस्थान के बारां जिले म्हं सुण्या सै कई बालक अर कई लोग-लुगाई भूख के कारण मरगे। रमलू बोल्या - ये झूठी बात सै। भूख तै भी कोए मरया करै। बीमार होकै तै दुनिया मरती देखी। सरिता बोली - ज्ञान-विज्ञान आल्यां की मीटिंग म्हं जिकरा था इस बात का। रमलू बोल्या - ये ज्ञान-विज्ञान आले बेरा ना कित-कित तै खोद कै काढ़ ल्यावैं सैं बातां नै। सरिता बोली - सुप्रीम कोर्ट का आदेश सै कि गरीबी की रेखा तै नीचे जीवण आले घरां की पहचान करी जा अर उन ताहिं कार्ड अर नाज दिया जा। सिर्फ अच्छे गुणवत्ता आले अनाज का ए वितरण करया जाना चाहिए। राष्ट्रीय वृद्धा पेंशन तै लाभ ठावण आले लोग लुगाइयां की पहचान करी जा अर हर म्हिने की सात तारीख तक भुगतान कर दिया जाना चाहिए। अन्नपूर्णा योजना तै लाभ प्राप्त करण आले व्यक्तियां की पहचान करी जा अर उन म्हं अनाज बाट्या जावै। आंगनवाड़ी (आई सी डी एस) योजना, राष्ट्रीय मातृत्व लाभ योजना अर राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना अर राष्ट्रीय लाभ योजना पूरी ढालां लागू करी जावै। सुप्रीम कोर्ट के आदेश अर लाभ प्राप्त करण आल्यां की सूची का अनुवाद राज्यों की स्थानीय भाषावां म्हं किया जावै। अर उनको ग्राम पंचायतां, विद्यालयां अर राशन की दुकानां पै प्रदर्शित करया जावै (ताकि सारे लोग यो सुनिश्चित कर सकैं कि उनका नाम सूची म्हं सै अक कोण्या)।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश नै दूरदर्शन अर आल इंडिया रेडियो के जरिये प्रचारित करया जाना चाहिए। ग्राम पंचायत काम के बदले अनाज योजना बनावै अर मजदूरी का भुगतान हर हफ्ते करया जावै। खेतिहर मजदूर, छोटे किसान, अनुसूचित जाति-जनजाति के लोग लुगाइयां ताहिं प्राथमिकता दी जाणी चाहिए। रमलू बोल्या - भागवान थोड़ा-सा सांस तै ले ले। एकै सांस म्हं मंडरी सै इसी-इसी भारया अर काम्मल बात बतावण। ये बात म्हारे गाम आल्यां ताहिं तो आज ताहिं नहीं पहोंची अक सुप्रीम कोर्ट का कोए इसा बी आदेश सै। सरिता बोली याहे तै कमी सै म्हारे गाम म्हं। हम न्यों सोचां सां कि म्हारे बांटे के कामां नै भी कोए और आकै करज्या। दिमाग पै जोर दे कै तो कति राज्जी कोण्या हम। हां तै म्हं न्यों कहूं थी कि यो सारा अनाज के बदले काम का प्रोग्राम ठेकेदारां के मार्फत कति नहीं करवाना सै। ग्राम सभा योजनावां की निरीक्षण अर सामाजिक जांच करैं। ग्राम सभा रिकाट की जांच करै अर भ्रष्टाचार के मामले रिपोर्ट करैं। रमलू तै फेर नहीं डट्या गया अर बोल्या - पंचायत कै साहमी ग्राम सभा का कूण आदमी बोलैगा?
सरिता नै चुटकी ली अर बोली - गाम आल्यां नै क्यों कोसै सै। पहलम तो तू अपणा ब्योंत देखै नै। सरपंच का याड़ी सै तों तो फेर उसकी सारी भूंड पै तेरै लकवा सा क्यूं मारज्या सै। सरिता बोली - पहलम सारी बात तै आच्छे ढालां समझ ले। सारी बात नहीं समझ म्हं आई तेरै तो तेरा सरपंच फेर झूठ बोल कै तेरी बोलती बंद करवा देगा। रमलू बोल्या - आज तै तों अपणी पूरी कसर काढ़ ले। सरिता बोली - सरकार ताहिं स्पष्ट निर्देश दिया गया सै अक वा गरीबी की रेखा तै नीचै रैहवण आले परिवारां की पहचान करण के स्पष्ट दिशा निर्देश तैयार करै। डॉ. एन.सी. सक्सेना को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करया गया।
जै वे या रिपोर्ट देवैं सै अक भुखमरी हुई सै तो मुख्य सचिव प्रशासन नै जिम्मेदार ठहरा सकै सै। रमलू बोल्या - जै कोए पंचायत अर कै सरकार यू कानून लागू ना करै तो जनता के कर सकै सै? सरिता बोली - जनता बहोत कुछ कर सकै सै। जै जनता कट्ठी होकै आवाज़ ठावैगी तो सुणाई जरूरी होवैगी। रमलू बोल्या - या जनता कट्ठी होवै ना अर यू कानून भी धरया रैहज्यागा।
पहलमे तो यू कानून समझाणा कड़ै आसान सै मेरे जिसे कम पढ़े लिखां पै। समझ बी आज्या तो आगै के करणां सै इसका बेरा ना। तनै बेरा हो तै बता दे। सरिता बोली - यो गाम के लोगां का अैहदीपना जिब ताहिं नहीं जावैगा इतनै के ये कानून तोड़निये काबू आकै देवैं सैं। सरिता उठ कै काम करण लागगी अर रमलू उठकै ताश खेलण चाल पड़या।




जानलेवा ‘ग्रेड फोर’

जानलेवा ‘ग्रेड फोर’ सत्ते, फत्ते, नफे, सविता अर कमला शनिवार नै फेर कट्ठे होगे। इतने मैं आईसीडीएस की बहन जी कमलजीत आगी। कमलजीत का मुंह सा उतररया था, होंठ सूकरे थे। कमला नै पहलम तो बहन जी ताहिं पानी प्याया फेर सते बोल्या - आज क्यूंकर उदास सी घूमण लागरी सो बहन जी? कमलजीत बोली - के बताऊं! वो नहीं सै धन्नू गडरिया। सते बोल्या - हां औ दूसरे पान्ने मैं। के होग्या उसकै। कमलजीत उसकै तो किमै ना हुया फेर उसके बालकां की बहोत बुरी हालत सै। कमला - हां एक छोरी जो सबतैं छोटी सै वा तै मरकै बच्ची सै। कसूते दस्त लागरे थे उसकै। वा मनै सेठी डाक्टर के फेटी थी। कमलजीत - पीस्से थे कोण्या अर लियाई उसनै। नफे - क्यूं ईब तै च्यार पांच भेड़ बी लोन ले कै पाली सै उसनै। ईबी इतना हाथ तंग क्यूं सै उसका? च्यार बालक सैं दो छोरी पांच साल तै बड्डी सैं अर एक छोरा एक छोरी पांच साल तै कम सैं। च्यारों बालकां कै कुपोषण सै। खाण नै सै कोण्या फेर भूख उननै सहज-सहज खावण लागरी सै। फते - जिब बहन जी थाम इसमैं के हाथ अड़ा ल्योगे? थाम तो बताए सको सो ना अक बालकां नै पौष्टिक खुराक द्यो। ईब उनके मां बाप देवैं ना देवैं या उनकी मरजी। इन ग्रेड फोर बालकां की सेहत ठीक करण ताहिं म्हारै धोरै कुछ बी कोण्या। उनके परिवार आल्यां की हालत खराब। तो इस सारे झंझट तै पैंडा छुटावण खातर म्हारी सीडीपीओबी न्यों कहदे सैं अक ग्रेड फोर मैं किसे बी बालक नै मतना दिखाओ। ईब मैं के करूं? दिखाऊं तो नौकरी मैं डांगर हांडैं अर ना दिखाऊं तो आत्मा कोण्या मानती। सविता - बात तो सही सै बहन जी। जै ऊक चूक होगी तो मर तो आंगनबाड़ी आली की आवैगी। फेर यू ग्रेड फोर के बला सै इसका मतलब तै हमनै समझा दयो। कमलजीत - जिब बालक नै पूरा खाणा नहीं मिलै तो उसका शरीर कमजोर होज्या सै, अर वो बीमारियां का मुकाबला भी नहीं कर पान्ता। इस कमजोर शरीर के च्यार ग्रेड सैं। ग्रेड एक, ग्रेड दो, ग्रेड तीन अर ग्रेड च्यार। जो बालक ग्रेड फोर मैं चाल्या जा सै उसका जिंदा बचना बहोत मुश्किल होज्या सै। सारे के सारे एक बै बोले - बहन जी जै ईसी बात सै तो हमनै बता हम के कर सकां सां। सरकार अर सरपंच तो पाछै देखांगे पहलम ओ ग्रेड फोर आला बालक क्यूंकर बचाया जा? कमलजीत - उस एक नै तो हम बचाल्यांगे फेर बाकी सात-आठ और सैं। उनका के बणैगा? सत्ते - उनका बी सोचांगे फेर पहलमै तै उस गडरिए आले बालक की ज्यान क्यूंकर बचै न्यों बता। कमलजीत - ग्रेड फोर आले नै तो अस्पताल मैं भरती करवावां अर एक-एक कट्टा गिहूं थाम पांचों उसनै दे दयो ना तो वे बाकी तीन बालक बी ग्रेड फोर मैं पहोंच ज्यांगे। पांचों मानगे गिहूं देवण खातर अर 50-50 रुपये कट्ठे करकै उननै उसके अस्पताल के खरचे ताहिं दिये। कमलजीत बहोतै राज्जी हुई। वा ग्रेड फोर आले बालक नै अस्पताल मैं लेगी उसका इलाज करवाया अर बाकी बालकां का कुपोषण भी चार-पांच म्हिने मैं ठीक होग्या। फेर कमलजीत कै चिंता थी अक ईब तो गिहूं दे दिये सत्ते हर नै फेर आगै? कमलजीत नै सरपंच तै बात करी अर पूरा किस्सा बताया अर कहया अक जै इन आठों बालकां नै ग्रेड फोर तै ग्रेड दो मैं लियावांगे तो थारे गाम का नाम होवैगा। सरपंच कै बी समझ आगी। उसने काम के बदले नाज स्कीम के तहत उन आठ घरां के लोगां ताहिं काम दिया जिसतै दो बख्त का चुल्हा उन घरां मैं ढंग तै जलण लाग्या। ईब सवाल सै अक कड़ै सैं सत्ते, फत्ते, नफे, सविता अर कमला बरगे लोग? अर कड़ै सै कमलजीत बरगी आईसीडीएस को सुपरवाइजर बहन जी? यो जो ग्रेड फोर नै ल्हकोवण का धंधा सै इसका भंडा फोड़ कूण करैगा? इस कुपोषण की बीमारी नै जड़ तै खोवण खातर के करना पड़ैगा? जिब ताहिं इन बातां पै गंभीरता तै बिचार नहीं करया जागा जिब ताहिं यू ग्रेड फोर का भय आईसीडीएस के महकमे नै खायें जागा अर बालक ग्रेड फोर का शिकार होन्ते रहवैंगे। सोचो मेरे बीरा इस ग्रेड फोर तै क्यूंकर छुटकारा मिल सकै सै? पुनश्चः देख लिया सरकार नै आईसीडीएस का बजट घटा दिया।

खूब कमाया, फेर भी भूखे

खूब कमाया, फेर भी भूखे
दो हजार साल के बीच सी मैं दुनिया मैं दो खबर अखबारां की सुर्खियां म्हं रही थी। आपां अखबार पढ़दे कोण्या ज्यां करकै म्हारे लेखै किमै बी होएं जाओ दुनिया मैं म्हारी बला तै। अर जै अखबार पढ़ां सां तो अपणी राशि देख ली अर कै कोए बलात्कार की खबर पढ़ ली। ये दोनूं खबर फिलिपाइनज की सैं। जून दो हजार म्हं एक घटना की खबर छपी थी अक कम्प्यूटर वायरस (ज्यूकर म्हारी कपास की अमरीकन सुण्डी) जिसका नाम लव बग था, दुनिया के हर देश म्हं एक साथ छाग्या अर इस ‘लव बग’ वायरस नै बहुराष्ट्रीय कंपनियां के, कई देशां की सरकारां के दफ्तरां के सिस्टमां के म्हां बड़कै तहलका मचा दिया। पैंटागन अर ब्रिटिश सरकार ताहिं हिला कै धर दिये। इस वायरस नै इन कम्प्यूटरां मैं बड़कै दुनिया के दस बिलियन डालर का झटका दे दिया था अर ज्याहें करकै या खबर सुर्खियां म्हं थी। कम्प्यूटर सुरक्षा विशेषज्ञ अर एफबीआई के एजेंट नै इस वायरस की खोज करी अक या कित तै आई थी। इस वायरस की पैदाइश मनिला टैक्नीकल कॉलेज म्हं जाकै टोही अर बेरा लाया अक ओनेल डी गुंजमैन जो चौबीस साल का था उसनै या वायरस त्यार करी थी। इसतै एक बात तो साफ होगी अक इस इंटरनेट के इतने बड्डे गुब्बारे म्हं कोए भी इसमैं सुई की नोक कोड़ छेक करके इसकी हवा किसे बख्त भी काढ सकै सै। फेर दूसरा खतरनाक मसला यो था अक यू चौबीस साल का गाभरू फिलिपाइन्स मैं आण्डी माण्या गया और देश का गौरव होग्या। इस देश के लोगां नै खुशी मनाई अक म्हारे बरगे पिछडे़ देश के गाभरू नै विश्व की सूचना व्यवस्था ताहिं धूल चटवा दी एक बै तो।
मनिला के पड़ोसी कस्बे म्हं जिसका नाम प्रोमिज्ड लैंड बताया उसमैं इस ‘लव बग’ वायरस की खबर के एक म्हीने पाछै एक और खबर सुर्खियां म्हं आई। दो हजार तै फालतू माणस एक भूस्खलन की दुर्घटना अर इस दुर्घटना पाछै इसके कारण लागी आग तै मरगे। इस दुर्घटना तै पहलम तूफान भी आया बताया। उस बख्त अखबारां नै या एक प्राकृतिक आपदा बताकै इसतै पल्ला झाड़ लिया फेर बात तो किमै औरे थी। इस कस्बे मैं कचरा डम्प करया जाया करदा अर इसमैं पचास हजार लोग रहया करदे। ज्यूकर दिल्ली के पड़ोस मैं बहादरगढ़ हो। ये लोग मनिला के खाते पीते लोग जो कचरा उडै डम्प करया करते उसमैं तै टोह टोह के बच्या ओड़ खाणा खा कै पेट भरया करदे। मतलब यो सै अक ये लोग मनिला के कचरे मैं जीया करदे। दो दिन बहोतै तगड़ा मींह बरसया तो कचरे के जो पहाड़ के पहाड़ उड़ै कट्ठे होरे थे वे ढीले पड़गे अर अचानक भूस्खलन इसका नतीजा था इस कारण घणे मकान ढहगे अर कई माणस उनमैं दबकै मरगे। इन मकानां की खस्ता हाल बिजली की फिटिंग म्हं शार्ट सरकटिंग करकै आग लागगी अर रही सही कसर इसनै पूरी करदी। दो सौ तै फालतू लोग मारे गये अर घणे लोगां पै आग कारण लिकड़े जहरी पदार्थों का बुरा असर हुया। इसतै एक बात साफ सै अक आर्थिक जगत की सफलता अर सामाजिक जगत की असफलता एकै शरीर मैं देखी जा सकैं सैं। या आज के विकास के अमरीकी मॉडल की सबतै कसूती खासियत सै। फिलिपाइन्स का मनिला शहर अर प्रोमिज्ड लैंड इस विकास के जीते जागत नमूने सैं। अर इसे नमूने दुनिया के घणखरे देशां म्हं पाये जावैं सैं। म्हारे भारत देश म्हं भी इसे कई नमूने सैं। हरियाणा प्रदेश भी इस अधखबड़े उल्टे विकास मॉडल का एक जींवता उदाहरण सै। आर्थिक जगत मैं पूरे भारत मैं आगै फेर सामाजिक जगत मैं पूरे भारत मैं सबतै पाछै। महिला पुरुष अनुपात की गिरती संख्या सबकै साहमी सै। पूरी दुनिया की आर्थिक व्यवस्था सन् 1990 म्हं 31 ट्रिलियन डालर थी अर दो हजार म्हं या बधकै 42 ट्रिलियन डालर होगी। सन् 1950 म्हं पैदावार 6.3 ट्रिलियन डालर थी। इसतै टेलीफोन, कार, फ्रीज, टीवी की संख्या बधगी। इस सबके बावजूद अमीर गरीब के बीच के खाई बधण लागरी सै। क्यों? सोचां तो सही।
---



?







कागजां म्हं दौड़ रह्या सै म्हारा गणतंत्र

कागजां म्हं दौड़ रह्या सै म्हारा गणतंत्र
सन् 1947 मैं हाम आजाद हुये। सन् 1950 मैं छब्बीस जनवरी नै हमनै अपणा संविधान बणा कै ओ लागू करया। देश नै आजाद करावण मैं लाखां महिलां पुरुषां नै अपनी ज्यान की बाजी लाई। जिब म्हारा देश गुलाम था तो अंग्रेजों के चमचे हमनै न्यों कहया करदे अक क्यों बावले होरे सों? इन अंग्रेजों के राज मैं तो सूरज छिपता ए कोण्या। इननै ताहवणा थारे बस मैं कोन्या। फेर भगत सिंह, सुभाष बोस, गांधी अर जनता की कुर्बानी रंग ल्याई अर अंग्रेजां नै जाणा पड़या पर जान्ता-जान्ता बी ओ म्हारे देश के टुकड़े करग्या अर हमनै बी टुकड़े करण ताहिं जाड़ भींच कै जोर ला दिया। जो उन बख्तां मैं अंग्रेजां की चमची मारया करते वेहे आज फेर सन 2002 मैं एक बात कैहन्ते हान्डैं सैं अक यो देश तो न्यों ए चालैगा अमीर अमीर रहवैगा अर गरीब गरीब रहवैगा। म्हारे शहीदां नै तो दूसरे भारत का सपना देख्या था। उनका सपना था अक म्हारे देश मैं कोए बी माणस अनपढ़ ना रहवै, कोए माणस बेरोजगार ना हो, कोए माणस भूखा ना सोवै, दवाई की अर इलाज की कमी कै कारण कोई बेमौत ना मारया जा, महिलावां नै बरोबर के हक मिलज्यां, जात के नाम पै अत्याचार ना होवैं, सब काम करैं अर सबनै सुख शांति तै रहवण का मौका थ्यावै। ये जो सपने म्हारे शहीदां नै देखे थे ये झूठे सपने कोण्या थे। ये सपने पूरे होवण के सपने थे। फेर उन बख्तां मैं जो अंग्रेजां के हिम्माती थे, उनके मुखबर थे, भगत सिंह हर कै खिलाफ मुकदमे मैं गवाही देवणिया थे देश आजाद हुयां पाछै सपन्यां नै पूरे करण का झांसा दे कै हम पै पाछले चौवन साल तै राज करण लागरे सैं।
एक बात याद आगी, एक परिवार मैं बालकां का बाबू रोज सांझ नै जिकरा करता अक एक बीस किलो दूध देवण आली भैंस ल्यावांगे। वा काली होगी, अक भूरी होगी, रूंढी होगी अक खूंडी होगी। जड़ बालक रोज दूध का बखौरा सा पीकै सो जान्दे। म्हीना होग्या बाबू नै बात करदे पर ओ भैंस कोण्या ल्याया। एक सांझ नै बालक बाबू नै बोले अक बाबू जिब भैंस ल्यावणी ए कोन्या तै इसका जिकरा बी क्यूं करया करै? बाबू बोल्या अक ले हम तो टाला कर देंगे जिकरा करण का। दस पन्दरा दिन मैं बालक फेर दुखी होन्ते बोले - बाबू भैंस ना भी ल्यावै अर दूध ना भी प्यावै तो कम तै कम जिकरा तो कर लिया कर।
तो भाई म्हारे नेतावां नै पहलम तो ये सपने पूरे करण की बहोत बात करी फेर ईब तो शेर बात बी कोण करदे। 1950 मैं म्हारे संविधान मैं लिख्या गया अक सन् 1960 ताहिं सबनै पांचमी तांहि की शिक्षा दे द्यांगे। साठ मैं बोले अक सत्तर ताहिं दे द्यांगे। सत्तर मैं बोले अक अस्सी ताहिं दे द्यांगे। अस्सी मैं दड़ मारगे। ईब 2001 मैं आकै बोले अक सब बालकां का पढ़ना कानूनन जरूरी सै अर जो मां-बाप अपने बालकां नै नहीं पढ़ावैगा उसपै कानूनी कार्रवाई करी जागी। न्योंए सन् 1978 मैं आल्मा अटा में कसम खाई थी इननै अक सबनै 2000 ताहिं स्वास्थ्य दे द्यांगे। सन् 2001 ताहिं कागजां मैं सेहत बणाणी बी छोड़ दी। उन ताहिं अपोलो अस्पताल आगे अर म्हारे ताहिं बणे सरकारी अस्पतालां का भी फूस सा बिठान्ते जावण लागरे सैं। इनके बालक एयर कन्डीशन्ड मकान मैं रहवैं, एयर कन्डीशन्ड कार मैं चालैं अर एयर कन्डीशंड स्कूल मैं पढ़ण जावैं अर म्हारे बालकां के स्कूलां मां तै मास्टरां की नौकरी खतम करण लागरे। देखणा पड़ैगा आज 2002 की छब्बीस जनवरी पै हमनै जो 1950 की छब्बीस जनवरी नै संविधान मैं वायदे करे थे वे कितने पूरे हुए?


?







थाम बी काल़जे पै हाथ धरकै सोचियो रै मेरे! बीरा

थाम बी काल़जे पै हाथ धरकै सोचियो रै मेरे! बीरा
लैक्शनां टैम की बात सै। सारे पार्टियां आले विकास विकास चिल्लान्ते हांडै थे। न्यों कोए नहीं बतावै था अक उनके हिसाब तै विकास का के मतलब सै? कोए कहवै था मैं रेल चलवा द्यूंगा? फेर क्यां खात्तर? लोगां नै ज्याण खपावण का रेल के तलै कटकै मरण का आसान तरीका पाज्यागा इस खात्तर रेल ल्यावांगे के आपां? दबी जबान मैं एसवाईएल का जिकरा भी होवै था। फेर इस बात का जिकरा कोए नहीं करै था अक हरियाणा नै कुल कितणा पाणी चाहिए सै? कितणा पाणी आज हरियाणा धोरै सै अर कितणा पाणी एसवाईएल तै हमनै थ्यावैगा? एक अंदाजे के हिसाब तै हरियाणा मैं 400 मिलियन एकड़ फुट पाणी की कुल जरूरत सै। हरियाणा धोरै लगभग 200 मिलियन एकड़ फुट पाणी सै। एसवाईएल जै खुद बी जावै तो उसतै 17 के 23 मिलियन एकड़ फुट पाणी और मिल ज्यागा। बाकी चाहिए 177 मिलियन एकड़ फुट पाणी । यू कित तै आवैगा? इसपै म्हारे इन नेतावां का के कहणा सै? म्हारे हरियाणा की सिरसा की स्पिनिंग मिल बंद, हांसी की मिलबंद, रोहतक की स्पिनिंग मिल बंद, सोनीपत की एटलस फैक्टरी खिंच खिंच कै सांस लेवण लागरी सै उड़ै 5000-6000 कर्मचारी थे ईब 700-800 रैहगे बताए। पानीपत का हथकरघा उद्योग तीन चौथाई बंद हो लिया तै अर बाकी बी बस। फरीदाबाद की आधे तै फालतू फैक्टरी बंद होल्ली कै बन्द होवण आली सैं। असैंबली मैं बजट पेश कर दियां नै म्हारे वित्त मंत्री जी नै स्वीकार करया कि खेती की पैदावार मैं खड़ोत सै? इस सबके चालते, बेरोजगारी कसूती ढाल बधण लागरी सै। जो म्हारे नेता विकास की बात करैं सैं वे कोए हरियाणा का खाका तो बतावैं अक या बेरोजगारी की समस्या न्यों दूर होवैगी।
हम पढ़ लिखगे फेर बी ईबै हरियाणा मैं घणे अनपढ़ लोग सैं। पढ़ लिख कै भी हम माणस बणे अक अध खबड़े माणस रहे इसका हमनै कोए अंदाजा नहीं। इस पढ़ाई लिखाई नै म्हारे ताहिं और किमै चाहे सिखायां हो चाहे ना सिखाया हो फेर कन्या हत्या करणा खूब आच्छी ढाल सिखा दिया। कहया करैं हाथ कंगन नै आरसी के अर पढ़े लिखे नै फारसी के। हरियाणा में पुरुष महिला लिंग अनुपात 865 सै (2001 की गणना के हिसाब तै) अर 820 सै जीरो तै छह साल के बीच मैं। यो लिंग अनुपात का पढ़े लिखे लोगां के बीच का आंकड़ा 1000 पुरुषों पै 617 औरतां का सै। इसतै साफ सै अक या म्हारी पढ़ाई लिखाई हमनै औरतां की दुश्मन बणावै सै अर हम उसनै गर्भ मैं ए खतम कर द्यां सां। जै इसी पढ़ाई आगै बी पढ़ाई जागी तो कोण्या चाहन्ती। हरियाणा की बहादर वीरांगनाओं! तम ईसी पढ़ाई की तरफदारी करोगी? तो फेर जै इसा ए लूला लंगड़ा विकास करणा सै जिसमैं सौ मां तै 15 तो बिना काम करैं ऐश करैं अर बाकी 85 काम कर कर कै बी छिकलें फेर बी उनका पेट कोण्या भरै। तो इसा विकास भाई खूंटा ठोक नै तो चाहिए ना बाकी जनता जनार्दन जाणै अक वा किसा विकास चाहवै सै? जनता बावली कति नहीं सै। जनता सारी बात समझै सै। एक बर एक लैक्शन मैं किलोई हल्के तै रणबीर सिंह के परिवार तै, बाबा जी मस्तनाथ मठ तै अर हरिचंद हुड्डा एमएलए का लैक्शन लड़ैं थे। तो या जनता रणबीर सिंह की गाड्डी मैं सवारी लेन्ती, बाबा जी के मठ मैं हल्वा खान्ती, अर सांझ नै गाड्डी मैं तै उतरकै कैहन्ती - गाड्डी किसे की, हलवा किसे का अर वोट किसे का। उस लैक्शन मैं हरिचंद हुड्डा जीत्या था। जड़ बात या सै अक जनता स्याणी सै या न्यारी बात सै कि कदे कदे वा बावली बात करदे सै अर फेर उसका हरजाणा बी जनता खुद भुगतै सै ये म्हारे नेता नहीं भुगतते। तो बात विकास की थी। हरियाणे का विकास ईब ताहिं किस दिशा मैं था। हरित क्रांति नै फायदा 10-15 प्रतिशत का करया नुकसान फालतू करया। धरती थोथी होगी, पाणी कई सौ फुट तलै चल्या गया, पैदावार मैं खड़ोत पर लागत कई गुणा बधगी, ये सारे विकास के मुद्दे सैं। इनपै जिब ताहिं खुलकै चरचा नहीं होवैगी, जनता नेतावां तै जात-गोत भूल कै ये सवाल विकास के नहीं करणा शुरु करैगी तो नेता विकास के नाम पै जनता नै भका-भका कै अपणा विकास करें जावैंगे अर जीते पाछै जनता नै कित का कूण बतावैंगे अर पांच साल फेर टोहे बी ना पावैंगे। बेरोजगार न्योंए धक्के खावैंगे, कर्मचारी की छंटनी बदस्तूर जारी रहवैगी। जनता इस सबनै विकास कहवैगी अक विनाश टेम बतावैगा?

ईब तो जाग जाओ मेरे भाण-भाइयो!

ईब तो जाग जाओ मेरे भाण-भाइयो!
गाम में सत्ते, फत्ते, नफे, सविता, कविता अर धापां ताई। बीते लैक्शनां म्हं नेतावां की झूठी साच्ची बातां नै सुणकै बहोत दुखी हुए अर आपस मैं बतलाये कि एक बर सारी दुनिया के, शिक्षा के, म्हारी आर्थिक हालत के, इस वैश्वीकरण के बाद के म्हारे विकास के, विदेश ब्यौपार के, मानव विकास सूचकांक, महिलावां की हालत, स्वास्थ्य रोजगार, कीमतां की बढ़ोतरी, ग्रामीण विकास आदि पै आंकड़े कट्ठे करकै ल्यावैंगे अर ग्राम सभा करकै उनके साहमी धरैंगे? सबनै अपणी अपणी जिम्मेदारी ले ली। ग्रामसभा हुई। चौपाड़ न्यूं खचाखच भरी थी। सबतै पहलम सत्ते बोल्या - सारी दुनिया नै मिलाकै सालाना आय सै 5120 डालर अर भारत मैं प्रति व्यक्ति सालाना आय सै 560 डालर। दुनिया मैं भारत का स्थान 162वां (29 देश भारत तै तलै सैं)। सुरता बोल्या - तूं ये आंकड़े कड़ै तै ल्याया? ये तो कोरी बकवास सै। सत्ते बोल्या - ये आंकड़े वर्ल्ड डैवलपमैंट इंडीकेटर-2003 तै ल्याया सूं। अर और सुणले सुरते - सबतै गरीब 20 प्रतिशत का राष्ट्रीय आय मैं हिस्सा सिर्फ 8.1 फीसद सै अर सबतै अमीर 20 प्रतिशत का राष्ट्रीय आय मैं हिस्सा 46.1 फीसद सै अर ये आंकड़े मानव विकास रिपोर्ट 2003 के सैं। कहवै तो रिपोर्ट बी ल्या कै दिखाऊं।
सरिता नै अपणी बात शिक्षा पर कही अर वा न्यों बोली - भारत मैं दुनिया की आबादी का 16.8 फीसद रहता है पर दुनिया के वयस्क निरक्षरां मैं तै 34 फीसदी भारत मैं सैं। 94 विकासशील देशां के शिक्षा सूचकांक मैं भारत का स्थान 76वां सै। तृतीयक (टरसरी) स्तर की शिक्षा मैं प्रवेश का अनुपात दुनिया भर मैं 23 फीसद सै अर भारत मैं यो 10.5 फीसद सै। सुरते फेर बोल्या - तूं कित तै ल्याई सै ये आकड़े? सरिता बोली - यूनेस्को की रिपोर्ट, एजूकेशन फार आल 2003-2004 मैं तै ल्याई सूं मेहनत करकै नै। अर सुणल्यो भ्रष्टाचार सूचकांक के हिसाब तै दुनिया के 102 देशां मैं भारत 71वें स्थान पै सै। सिर्फ 31 देश सैं जो भ्रष्टाचार मैं भारत तै भी आगे सैं? यू आंकड़ा ट्रांस्पेरैंसी इन्टरनेशनल की रिपोर्ट 2003 तै लिया गया सै। ईबी कोए शक सै कि सूरत सिंह जी इन आंकड़यां के बारे मैं?
कविता की बारी आई अर वो बोली - विदेशी ऋण का बोझ भारत पै 1998-99 मैं 9823 करोड़ डालर था जो 2003 जून ताहिं बधकै 10,960 करोड़ डालर पै पहोंच लिया। 1998 मैं 31 मार्च ताहिं देश के धनवानां पै बकाया कर 47,444 करोड़ रुपये था जो 2002 के 21 मार्च ताहिं बधकै 86,342 करोड़ रुपइये होग्या। ये सारे आंकड़े मनै आािर्थक सर्वे 2002-03 तैं कट्ठे करे सैं। कम तै कम म्हारे नेता जिब गाम मैं आवैं तो इन बातां पै उनका के कैहणा सै, हमनै बूझणा तो चाहिए। फत्ते कई बार का मसकोड़े मारै था, उसका नम्बर आया तो उसनै बताणा सरू करया - म्हारे बरगे 62 देशां के सूचकांक के आधार पै विश्वीकरण की कटारी चाले पाछे के विकास का जिकरा सुणल्यो। इन देशां मैं दुनिया की 84 फीसदी आबादी रहवै सै। 2001 मैं भारत का स्थान 49वां था अर 2002 मैं यो 57वां होग्या अर 2003 मैं यो 61वां होग्या। सुरते कै बेरा ना आज के होर्या था फेर बोल्या - सारी काट करोगे अक किमै अच्छी बात बी बताओगे? फत्ते बोल्या - पहलम म्हारी सुणले अर फेर तूं अपणी काम्मल बात भी बता लिये। हां तो भारत का विदेश व्यापार घाटा - 1885 करोड़ डालर सै अर यू एशिया का सबतै फालतू घाटा सै। मानव विकास सूचकांक के हिसाब तै 2001 मैं भारत का स्थान 173 देशां मैं 115वां था, 2003 मैं यू 127वां होग्या। देख्या म्हारे भारत की तरक्की का दौर।
फेर सविता का नंबर आया तो वा बोली - हो तो तमनै बहोत वार हो गई ये बात सुणतें फेर दो च्यार बात मेरी बी सुण ल्यो। हर 54 मिनट मैं एक महिला की साथ बलात्कार होवै सै, हर 26 मिनट मैं एक महिला की गेल्या जोर जबरदस्ती करी जावै सैं। जचगी मैं महिलावां की मृत्यु दर हर एक लाख जिंदा प्रसवां पै दुनिया भर मैं 400 अर भारत मैं 540 सै। म्हारे कम वजन के बालक जनमैं सैं 26 प्रतिशत पर दुनिया मैं ये 14 फीसद सैं। अपणे गाम मैं बी देख सकां सां महिलावां की जो हालत सै। आई ग्राम सभा कै किमैं बात समझ मैं कि नहीं? जिब ताहिं हर बैठक मैं हर हुक्के पै, हर घर मैं, हर पनघट पै इन बातां पै चरचा नहीं होगी इतनै म्हारी न्योंए खाल तारी जागी। इन बातां नै सब ताहिं पढ़कै सुणाइयो मेरे भाण अर भाइयों।
?







एन्काउंटर अक दिन धौल़ी खून

एन्काउंटर अक दिन धौल़ी खून
आज की तारीख 28 जून 2004 ताहिं इशरत जहान की गेल्यां जो बणी उसके बारे मैं कुछ सवाल सैं जिनका ईब ताहिं कोए तसल्ली बख्स जवाब नहीं आ लिया। यो गुजरात के मुख्यमंत्री पर तीसरा जानलेवा हमला बताया गया। फेर असली कहानी के सै या एक पहेली बणगी जिसके जवाब टोहवणे बहोत मुश्किल सैं। सबतै पहलम तो गुजरात की पुलिस खातर कई सवाल सैं। पहलम सवाल सै अक जै चारों मुंबई तै आवण लागरे थे तो वे हाईवे पै ए क्यों ना दबोचे पुलिस नै? वे पोटारपुर हाईवे तै 20 किलो मीटर भीतर नै क्यूंकर पहोंचे? अर क्यों पहोंचे? दूसरा सवाल सै अक आईबी की देखरेख मैं काम करणिया एंटी टेरेरिस्ट स्कवैड नै इस एन्काउंटर ताहिं क्यों नहीं अंजाम दिया। इस एनकाउंटर नै करण आली पुलिस की क्राइम ब्रांच क्यूं थी जबकि इसकी पोस्टिंग राजनैतिक स्तर पै होवैं सैं। तीसरा सवाल यू सै अक जिब इशरत के आतंकवादी होवण पै सवाल ठाये गए तो एक दम चाणचक दे सी उसकी डायरी पुलिस धोरै किततै आगी? चौथा सवाल यू सै अक आतंकवादियां तै बहोत ऊंचे के दर्जे कै हथियार थे फेर बी एक बी पुलिसियां कै खरोंच तक न आई? न्यों कहवैं सैं आतंकवादियां नै 37 राउंड करे, फेर उनकी गोली हवा मैं क्यूंकर चाल्लें गई? आतंकवादियां की कार पै साहमी तै गोली चलावण के निशान कोण्या बल्कि कार पै पाछै तै गोली चलावण के निशान सैं। दूजी कान्हीं चारों आतंकवादियां कै साहमी तै गोली चलाए जावण के निशान सैं। मोदी साहब नै गुजरात मैं इसी गोली इजाद कर ली के जो चलाई तो पाछै तै जावै फेर लागै आगै जाकै।
इसतै आगै इशरत की मां की खातर कुछ सवाल सैं। इशरत की मां शमिना नै जून 15 नै तो यू ब्यान दिया कि इशरत किसे रिश्तेदार कै जारी सै पर पाछै उसनै अपणा ब्यान क्यूं बदल दिया अक इशरत तो नौकरी के इन्टरव्यू खातर मुम्बई जारी सै। जै इशरत भाज कै जारी थी कै बिना बताए जारी थी तो उसकी मां नै इस बाबत पुलिस मैं रिपोर्ट क्यूं ना दर्ज करवाई। इशरत की मां नै या झूठ क्यूं बोली अक वा जावेद नै कोण्या जानती जबकि जावेद कई साल मुम्बई मैं उनका पड़ौसी था।
फेर नंबर आवै सै इशरत का। इशरत बार-बार दो तीन दिन खातर अपणे घर अर अपणे कालेज तै क्यूं खिसक जाया करती? दूसरी बात इशरत अहमदाबाद क्यूं गई अर जावेद शेख की गेल्यां ही क्यूं गई? इस जावेद शेख का अपराधी चरित्र सै इसका बेरा था। इशरत बरगी निचले स्तर मध्यम वर्ग की छोरी-धोरै रोज की एसटीडी फोन काल करण खातर 400-500 रुपये किततै आया करदे? इशरत अर उसकी मां जावेद खान धोरे पुणे मैं के करण गई थी। न्यों कहया गया सै अक वे उड़ै उसके धोरै ठहरी बी थी। इशरत अर जावेद इन दो और आतंकवादियों की गेल्यां क्यूं जावण लागरे थे?
आखिर मैं बचग्या जावेद शेख। जावेद शेख के तीन नाम क्यूं थे। जावेद गुलामाली शेख, पनेश कुमार पिल्ला और सैय्यद अब्दुल वहीद? उसके धोरै बाहकुला के ह्यूम स्कूल का सर्टिफिकेट मुस्लिम नाम तै क्यूंकर आया जबकि जब ताहिं तो उसनै अपना मुस्लिम नाम धारणै कोन्या करया था। एक गरीब मध्यम वर्ग परिवार के बालक धोरै नब्बे हजार की मोटर साइकिल अर अपनी इंडिका कार कड़ै तै आई? उस धोरै दो पासपोर्ट क्यूंकर आये? एक पासपोर्ट कोचीन तै ईशू करया गया अर दूसरा मुंबई तै। जै जावेद नै इस्लाम धर्म धारण कर लिया था तो उसनै पुणे के आरटीओ ताहिं मार्च 2001 मैं अपणा ड्राइविंग लाइसैंस बणवावण खातर हिंदू नाम क्यूं दिया? अर उसनै अपना झूठा पता क्यूं दिया?
एक बात तो साफ उभर कै आवण लागरी सै अक हम जै लोगां नै इतना दुखी कर दयांगे अक वे सूसाइड स्कवैड बणज्यां तो इन कोए कितना ए बड्डा नेता हो उसकी हकीकत जनता कै साहमी तो आवणी चाहिए। आई किमे बात समझ मैं? न्यों कैह देंगे जिब हम के करां? कोए नेता गाम मैं आवै तो बूझां अक उसका इन सवालां पै के कहणा सै?

के बला सै यू ढांचागत समायोजन ?

के बला सै यू ढांचागत समायोजन ?
सांझ कैसी सत्ते, फत्ते, सविता, कविता अर सरिता बैठकै बतलावण लागगे। सरिता बोली - आज दैनिक ट्रिब्यून मैं मैंने एक खबर पढ़ी उसमैं ढांचागत समायोजन का जिकरा था। मनै तो खूबे सिर खपाया फेर इसका मतलब कोण्या समझ मैं आया। आज इसपै चर्चा होणी चाहिये। सत्ते बोल्या - सुण्या तो मनै बी सै फेर इसका असली मतलब तो कोण्या बेरा। समझ मैं कोण्या आया यू ढांचागत समायोजन का मतलब। सविता बोली - इसतै फालतू तो मनै बी कोण्या बेरा। सारे गाम मैं नजर घुमा कै देखी। सारी पार्टियां के नेतावां पै नजर मारी फेर नहीं बात समझ मैं आई। एक सर्व कर्मचारी संघ का नेता था मास्टर जी सै उसकै धोरे पहोंचगे। ओ इन सारयां नै देख कै एक बै तो भोंदल सा हो गया फेर सम्भल कै बोल्या - आओ क्यूंकर आये। सविता बोली - इस ढांचागत समायोजन पै चर्चा थी इसके बारे मैं विस्तार तै जानणा चाहवां थे। मास्टर जी बोले - ज्ञान तो मनै बी इसा ए सै फेर बातचीत तो करी ए जा सकै सै। ये जो अमीर देश सैं ये अपणे आर्थिक संकटां का बोझ गरीब विकासशील देसां कै थौपणा चाहवैं थे अर ये इस चाल मैं कामयाब बी हुए। या कहानी आड़ैए खत्म नहीं होन्ती। इस ऋण के संकट के साहमी बैंक अर दूसरी वित्तीय संस्था अपणे हितां की सुरक्षा की जरूरत महसूस कररे सैं। मतलब यू सै अक गरीब देसां ताहिं जो कर्जा इननै दे राख्या सै उसकी वापसी की गारण्टी चाहवैं सैं ये देस। ज्यूकर गाम मैं कर्ज देवण आला उसकी वापसी का इन्तजाम राखै सै न्योंए ये देस भी तीसरी दुनिया ताहिं दिये जावण आले कर्जे पै वे घणी करड़ी सर्त थोंपदें सैं इस बात की गारन्टी होज्या अक उनका कर्जा मारया ना जावै। उस कर्जे की वापसी पक्की होज्या। पहलम आले करज्यां पै सर्त थोंपी अर ईब आले करज्यां पै तो और बी करड़ी सर्त थोंपैं सैं।
यूनिसेफ का आकलन सै अक ऋण प्रेरित कटौतियां के कारण सन् 1998 मैं 5 लाख बच्यां की मौत होगी। कर्जदार देसां मैं ढांचागत समायोजन कार्यक्रम का प्रयोग अमीर देसां की खातर विश्व बैंक अर मुद्रा कोष करैं सैं। सविता बोली - जो देस इन की बात ना मानैं उसका के कर सकैं सैं? मास्टर जी बोले - जो देस इनकी बात नहीं मानते उन देसां ताहिं काली सूची मैं गेर दें सैं। तकनीकां का हस्तांतरण बी रोक दिया जावै सै। गैल्यां आयात निर्यात के करज्यां मैं अड़चन डालैं सैं। इस तरियां जो एक देस का दूसरे देसां गैल्यां ब्यौपार सै उसमैं रोड़ा अटका दे सैं। फत्ते बोल्या - कुछ कुछ बात तो समझ आगी फेर यू ढांचागत समायोजन के सै इसपै बताओ। मास्टर जी बोले - इसका दूसरा मकसद सै निजीकरण का। इसमैं सरकार के स्वामित्व आले कारखान्यां अर सेवावां नै अनिवार्य रूप तै निजी निगमां के हाथां बेच दिया जा सै। इनकी खरीददार बदेसी कम्पनी हों सैं। सरकारी कारखाने बन्द होवण कै कारण बहुत से मजदूरां की नौकरी चाली जावै सै। बिजली, परिवहन, शिक्षा स्वास्थ्य सेवाएं म्हंगी होज्यां सैं। ईबकै सत्ते बोल्या - तो म्हारे हरियाणा मैं यू सारा सांग इस ढांचागत समायोजन की नीति नै खेल राख्या सै? मास्टर जी बोले - इसका तीसरा मतलब सै स्थानीय मुद्रा का अवमूल्यन। कविता बोली - इसका के असर होसै मास्टर जी? मास्टर जी बोले - विश्व बैंक चाहवै सै अक अमेरिकी डालर के मुकाबले भारत के रूपइये की कीमत मिलै सै अर जो चीज आयात होंसैं उनकी कीमत बाधू होज्या सै। इसका एक मतलब और बी सै अक आयातां पर सीमा शुलक कम करे जावैं अर करां पै कटौती करी जावै।
इसतै बदेशी कम्पनियां नै खुला चरण की छूट मिल ज्या सै। सत्ते बोल्या - यो ढांचागत समायोजन तो बहोत भुण्डा। कविता बोली - इसा कामल होन्ता तो अमेरीका अर जापान आले अपणे धोरै ए ना राखैं हे इसनै क्यांनै भारत मैं भेजैं थे।
---







ईब सद्दाम तै आगै के होगा इराक मैं


आन्डी सद्दाम का ड्रामेटिक तरीके तै दिसम्बर 13 नै उसके अपणे शहर टिकरित के आसपास पकड़या जाणा उड़ै मौजूद बदेशी सेना का बड़ा हौंसला बढ़ावण आला हुया। बुश की सांस टूटण नै होरी थी फेर इसतै उसनै बी आक्सीजन तो मिले गई एक बै। उस पुलिस टुकड़ी का जो उननै ट्रेन करी थी उसका एक तिहाई हिस्सा तो एक दिन का काम पूरा करण तै बी पहलम उननै छोडग्या था।
पहले खाड़ी के युद्ध तै भी पहलम तै सद्दाम अमरीका की हिट लिस्ट मैं था। कई मौक्यां पै अमरीकी प्रोपगेंडा मशीनरी नै उसके मरण की घोषणा कर दी थी। सद्दाम नै सत्ता तै हटावण मैं कई सौ इराकी बिन आई मौत मार दिये बुश नै। पहले खाड़ी युद्ध के मौके पै एक बालकां के भवन पै बम्बबारी करी थी, इस मुगालते मैं कि उड़ै सद्दाम अर उसके साथी लुहकरे सैं। अमरीका के हमले के बखत बी बगदाद के आबादी आले एरिया पै कसूती बम्बबारी करी गई सद्दाम का खातमा करण की खातर। फेर सद्दाम तो नहीं था उड़ै पर बहोत से निर्दोष लोग जरूरी मारे गये थे। अरब डिप्लोमेटां के हिसाब तै सद्दाम के शासन का अन्त उस दिन शुरू होग्या था जिब इराकी सेना नै बिना लड़े बगदाद अमरीका के हवाले कराया। एक डिप्लोमैट नै तो आड़े ताहिं बी कहया बतावै था अक अमरीकन तो चाहवैंए थे उसका जाणा, कुछ इराकी बी दुखी थे उसतै। सद्दाम का पकड़या जाणा कुरद लोगां नै अर शिया लोगां नै इतना बुरा कोण्या लाग्या। इराक की कम्यूनिस्ट पार्टी बी इनकी ए गेल्यां बताई। इसका कारण यो बताया अक सद्दाम नै 20-25 साल मैं इनपै घणे जुलम ढाये थे अर 5000 तै फालतू इनके लोग मार दिये थे। जिब तै सद्दाम अन्डर ग्राउण्ड हुया, जिब तै ओ न्यून न्यून घूमें गया अर बहुत विश्वास आले साथियां पै, के घरआल्यां वै विश्वास बचरया था उसका। टिकरित के निवासी अर सुन्नी लोग उसके हक मैं थे।
सद्दाम के दो बेट्यां का मोसूल मैं छह घंटे की लड़ाई पाछै मारया जाणा बी इस घटना तै पहलम हो लिया था। उन ताहिं बी एक नजदीकी रिश्तेदार जिसके घर मैं वे ल्हुकरे थे धोखा दे दिया। सुणण मैं याहे आवै सै कि सद्दाम ताहिं बी किसे नजदीक के रिश्तेदार नै गच्चा दिया था। सद्दाम की जानकारी देवण आले की खातर बुश नै 25 मिलियन डालर के इनाम की घोषणा कर राखी थी। जयचन्द पहलम बी थे आज बी सैं। जिब सद्दाम नै अपणे दोनूं बेट्यां के मारे जावण के बारे मैं सुण्या तो उसनै कहया बतावैं सैं - जै मेरे सौ बेटे होन्तो तो वे भी लड़ते लड़ते शहीद होन्ते। पकड़े पाछै बी सद्दाम नै अपणे करे औड़ पै पिछतावा नहीं जताया उलटा उसनै कहया बतावैं सैं कि मनै जो कुछ बी करया ओ ठीक करया था अर वो इराक के हक मैं था। कटपूतली इराकी सरकार के एक मैम्बर नै बूझया अक कुवैत पै हमला क्यूं करया था? तो सद्दाम नै जवाब दिया बताया अक हरेक स्वाभिमानी इराकी न्यूं मानैं सैं कि कुवैत इराक का हिस्सा सै। सद्दाम अमरीका के खिलाफ प्रतिरोध का अरब देशां का एक सिम्बल बणग्या था। उसकी हिरासत पाछै अरब स्ट्रीट मैं सन्नाटा छाग्या था। टीवी पै सद्दाम की जो तसबीर दिखाई गई उसतै अरब के लोगां कै और चोट पहुंची। सद्दाम का अन्त पश्चिम एशिया मैं अर मुस्लिम देशां मैं एक और अरब की नामर्दी के निशान के रूप में इतिहास मैं लिख्या जागा।
कई लोगां का मानना सै कि इस पाछै इराक मैं अमरीकी सेना के खिलाफ जंग मैं ढील आज्यागी या बात जमण की कोण्या। अरब देशां के लोग चाहवैं सैं कि अमरीकी फौज ईब इराक नै छोडदे। फेर बुश के मन मैं ईबी काला सै, ओ कोण्या हटावै अपणी फौजां नै। अब बहाने टोहे जावैगा। सद्दाम इस्लामिक कट्टरवाद कै खिलाफ बी था। अरब के लोगां मैं एक आन्डी नेता के रूप मैं सद्दाम नै जागां बणा ली थी। उसनै उस जागां तै तारणा बहोत मुश्किल सै। अमरीका कितनी ए अफवाह फैलाले फेर सद्दाम अरब लोगां के दिलां तै नहीं काढ़ सकदा। इराक मैं ऊंट किस करवट बैठेगा कैहणा मुश्किल सै।
---






सच, दिमाग के मामले म्हं आपां कति पैदल सां

सच, दिमाग के मामले म्हं आपां कति पैदल सां
     28 जून नै पहले विश्व युद्ध के पाछै बरसेलिस शांति संधि 1919 मैं हुई थी। इसै दिन सन् 1954 मैं नेहरू अर चाऊ एन लाई नै मिलकै ‘पंचशील’ सिद्धान्त की घोषणा करी थी। इसी दिन पीसी महलेनोविस मशहूर स्टेटिसियन का 1972 मैं देहांत होग्या था। 29 जून नै लार्ड क्लाइव मुर्शिदाबाद मैं बड़या था अर मीर जाफर ताहिं बंगाल का नवाब बनाया था साथ मैं बिहार अर आसाम बी थे। या सन् 1757 की बात सै। आसुतोष मुखोपाध्याय का जनम 1864 मैं 29 जून के दिन हुआ था। श्री चैतन्य देव का देहान्त 1553 मैं 29 जून कै दिन हुया था। 30 जून 1997 मैं हांगकांग नै अपना उपनिवेशी जुआं फैंक कै दोबारा चीन मैं शामिल होग्या। सन्थाल विद्रोह सिधो कनाहो की रहनुमाई मैं 1854 मैं 30 जून नै शुरू हुआ। दादा भाई नारौजी का देहांत 1917 मैं इसे दिन हुया था। एक जुलाई 1997 मैं पूर्व प्रधानमंत्री आई. के. गुजराल नै कलकत्ता मैं ‘साइंस सिटी’ का मुहूर्त करया था। इस दिन 1862 मैं कलकत्ता हाईकोर्ट का उद्घाटन हुया था। डा. बीसी राय का जनम एक जुलाई 1882 नै हुया अर उसका देहांत एक जुलाई 1962 नै हुया।
     एक जुलाई नै इम्पीरियल बैंक का राष्ट्रीयकरण हुया था अर इसका नाम स्टेट बैंक आफ इंडिया धरया गया था। यू कूणसे सन् मैं हुया था यू थामनै बेरा हो तै लिख कै भेजियो हरिभूमि आल्यां पै। एक जुलाई 1879 नै भारत मैं पोस्ट कार्ड शुरू करया गया था। किसनै शुरू करया था? 2 जुलाई 1757 मैं मुहम्मद बेग नै सिराजुद्दौला मौत के घाट तारया था। 2 जुलाई 1972 मैं भारत अर पाकिस्तान नै शिमला मैं एक संधि पै साइन करे थे। ये साइन करणियां कूण-कूण थे बेरा सै के? ना बेरा सै तो थोड़ा सा बेरा पाड़ण की कोशिश करियो। तीन जुलाई 1921 नै रिवोल्यूशनरी ट्रेड यूनियनां की अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस शुरू हुई थी। चार जुलाई 1998 नै यू.एस.ए. का बनाया औड़ ‘पाथ फाइन्डर’ जिसमैं एक रोबोट बी था, मंगल ग्रह पै उतरया था। चार जुलाई 1776 नै अमरीका आजाद घोषित हुया था। चार जुलाई 1902 नै स्वामी विवेकानंद का देहान्त होग्या था। वे पैदा कद हुये थे बेरा सै के? चार जुलाई 1940 नै दादी कोमारय्या जो तेलंगाना संघर्ष की पहली शहीद थी, नै शहादत दी थी। मैडम क्यूरी का चार जुलाई 1934 मैं देहान्त होग्या था।
     मैडम क्यूरी कौन थी? बेरा सै के? नहीं बेरा। तो थोड़ा घणा किताबां नै टटोलण की आदत थाम बी गेरल्यो माड़ी सी। पांच जुलाई 1997 नै जनता दल मां तै लालू राष्ट्रीय जनता दल बणया था। पांच जुलाई 1947 नै ब्रिटिश पार्लियामैंट मैं भारत की आजादी का बिल पेश करया गया था। आर.जी. कर मैडीकल कालेज भारत का पहला प्राइवेट मैडीकल कालेज था यू पांच जुलाई 1916 तै कलकत्ता मैं शुरू हुया था। भारत का पहला सरकारी मैडीकल कालेज कद शुरु हुया इसका बेरा सै के? नहीं तो कोशिश करां किते तै बेरा पाड़ण की।
     कइयां नै तो ये बात पढ़ते-पढ़ते नींद आगी होगी। कइयां नै बीच मैं पढ़णा छोड़ दिया होगा। कइयां नै तो बस ऊपरली दो लाइन पढ़ी होंगी। कइयां नै कहया होगा खूंटा ठोक धोरै माल साप्पड़ लिया जो ईसी ईसी बात लिखण लाग लिया। फेर एक बात साफ सै अक हमनै अपणे इतिहास की अर अपने नजदीकी भूतकाल की जानकारी बहोत कम सै। न्यूं कहया जा सकै सै अक आपां कति पैदल सां इस मामले मैं। तो इस तै कुछ लोगां मैं जानकारी चाली जा अर कुछां मैं जिज्ञासा पैदा होज्या किमै और बात जाणण की, तो योहे मकसद सै इस म्हारे भूतकाल पै इस ढाल की बात लिखण का। फेर मनै बेरा सै थामणै ताश खेलण तै कड़ै फुरसत सै इसे कामां की खातर। हरेक गाम मैं हर दस घरां पाछै ए बैठक मैं ताश बाजदे पावैंगे। बेरा नां यू अैहदीपणा कित लेज्यागा हरियाणा के गामां नै। हाथ तै काम करण की आदतै कोण्या रही अर दिमाग तै काम लेण की आदत पहलमै नहीं थी। ये दो-दो गुण क्यूंकर निभैंगे समझ मैं नहीं आन्ती। देखियो, जिनकै काला धन सै उनका काम तो चाल ज्यागा पर म्हारा काम कोण्या चालै। हाथ अर दिमाग दोनूं काम मैं ल्याणे पड़ैंगे।





ये सैं म्हारी पंचायतां


म्हारे देश की पंचायतें विकास का महत्वपूर्ण ढांचा होने के चलते सामाजिक-सांस्कृतिक, आर्थिक राजनीतिक तौर पर समस्या ग्रस्त हैं। गामां मैं सामाजिक, सांस्कृतिक अवरोधां की जकड़न इतनी कसूती सै कि पंचायतें आर्थिक विकास की जरूरत तै एक हद ताहिं पूरी करैं सैं फेर सामाजिक सांस्कृतिक विकास तै कति कोरी सैं, इसतै कति कटरी सैं।
म्हारे आड़ै संवैधानिक पंचायतां की साथ-साथ जात गोत आधारित सर्वखाप पंचायतें भी अस्तित्व मैं सैं। चुनी औड़ पंचायतां की कोए वैधता कायम नहीं हो सकी सै जबकि खाप पंचायतां ताहिं बहोत बड़ी सामाजिक मान्यता मिलरी सैं। ये परंपरागत पंचायत कै खापां की पंचायत नागरिक अधिकारों, महिलाओं अर दलितों के खिलाफ गैर कानूनी तरीके तै फैंसले करैं सैं। खाप पंचायत औरतां नै बदला लेवण का जरिया बी बणावैं सैं। जात-गोत के नाम पै कई अपराधिक कृत्यों को ढक दिया जावै सै अर बलात्कारी तक बचा लिये जावैं सैं। जोर जबरदस्ती अर ताकत के दम पै करे औड़ अपराधां ताहिं निभावण ताहिं आगै आवैं सैं तो पिछड़े रूढ़िवादी सामाजिक मूल्यों की वाहक ये पंचायतें अपणे तौर पै संबंध विच्छेद के अर कई बार तो हत्या ताहिं के फतवे जारी कर देवैं सैं।
पिछले दिनों इन्हीं पंचायतों ने कई ऐसे फैसले सुनाए हैं जिनमैं पति पत्नी ताहिं संबंध विच्छेद खातर विवश करया गया। अर भाई-बाहण बणण ताहिं कहया गया। ये पंचायतें सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अन्याय के खिलाफ कुछ नहीं बोलती उल्टा बाल विवाह, दहेज, घूंघट और जाति प्रथा जिसी पिछड़ी सोच की व्यवस्था ताहिं प्राश्रय देवैं सैं। म्हारे समाज मैं इसी पिछड़ी औड़ ताकत मौजूद सैं जो समाज मैं अपणा गलबा कायम करण की खातर इन पंचायतां का इस्तेमाल करैं सैं।
गामां मैं इसा ए माहौल राजनीति मैं भी मौजूद सै जड़ै कोए रचनात्मक काम नहीं हो सकदा। म्हारे गाम समस्या ग्रस्त गाम सैं जड़ै मुद्यां की राजनीति का तोड़ा सै पाने-ठोले की राजनीति सै। नशाखोरी, छेड़छाड़, लड़कियों की भ्रूण हत्या, मारपीट, पर्दा, दहेज, यौन उत्पीड़न जिसी कई सामाजिक समस्यां सैं जिनपै चुनी औड़ पंचायतां नै पहल कदमी करकै अगवाही करण की जरूरत सै। हमनै इस परिवेश मैं गाम नै समझण की जरूरत सै। हरियाणा आर्थिक रूप तै तो विकसित प्रदेश होग्या फेर आड़े के सामाजिक सूचकांक पिछड़े क्यों रहगे? सोच्चण की बात तो सै। 2001 की जनगणना के हिसाब तै स्त्री पुरुष अनुपात घटकै 861 पै आ लिया। महिलावां की खातर सामाजिक आचार-व्यवहार के नाम पर घूंघट जिसे बंधन सैं।
लड़कियां पै अत्याचार बढ़ते जावैं सैं। शादी के बाद महिलावां नै बड़े पैमाने पै मारपीट, दहेज की मांग, अर लड़का पैदा करण का दबाव झेलना पड़ै सै। पुत्र इच्छा के चलते भ्रूण हत्या का चलन आम होग्या। पंचायतां नै इसे सभ्य नागरिक समाज की स्थापना जिसमैं सबकी खातर समानता हो, सबनै अपनी बात कहवण का मौका मिले, सामाजिक कामां मैं सबकी भागीदारी हो अर सब सम्मान की जिंदगी बसर कर सकैं। ग्रामीण विकास नै एजेंडे पै ल्यावण खातर सबतै जरूरी काम सै चुनी औड़ पंचायतां की वैद्यता कायम करी जावै। परंपरागत पंचायतां कै खिलाफ माहौल तैयार करया जावै। महिलावां अर दलितां की हिस्सेदारी चुनी पंचायतां मैं बढ़ाई जावै। ग्रामसभा की मीटिंग ईमानदारी तै सारा गाम कट्ठा करकै करी जावै। अर उड़ै गाम के विकास के मुद्यां पै चरचा करकै गाम के विकास की योजना बनाई जावै। पंचायत के काम करण के तौर तरीक्यां मैं सुधार ल्याये बिना गामां का विकास करना आसान कोण्या। फेर पंचायतां नै सुधारण का काम कूण करैगा? सरकार करैगी? बीडीओ कै डीसी करैगा? यो तो जनता जनार्दन नै करणा पड़ैगा, जितना तावली जनता या बात समझ ले उतना ए आच्छा सै।





रविवार, 16 जुलाई 2017

निजीकरण के नाम पै या खुली छूट


म्हारे देश की दुर्गति होण लागरी सै अर आपां हाथ पै हाथ धरे बैठे सां। म्हारे देश के आका देश की सार्वजनिक संपत्तियां नै पूरी तरां तै अन्धाधुन्ध तरीके तै लुटावण पै उतारू होरे सैं। बाल्को बेची, होटल सैरटन बेच्या अर तेल कंपनी बेचण की तैयारी करली पूरी।
या तो भला हो सुप्रीम कोर्ट का अक उसनै सरकारी तेल कंपनियां के बेचण पै रोक ला दी। पर म्हारे देश के आकावां कै या बात गलै नहीं उतरी। सरकार नै सुप्रीम कोर्ट तै फेर हटकै आग्रह करया सै कि इन भीमकाय तेल कंपनियां - बी पी सी एल. अर एच.पी.सी.एल. के विनिवेश (बेच्चण) के मामले पै दिये औड़ रोक के फैसले पै हटकै गंभीरता तै विचार करै। इसका मतलब यू बी लाया जा सकै सै कि ईब जो फैसला कोर्ट नै दिया सै ओ बिना सोचे समझे दे दिया। होणा तो याह चाहिए था कि इस मामले मैं सर्वोच्च न्यायालय का फैसला म्हारे देश के ठेकेदार सिर झुका कै स्वीकार करदे अर इन कंपनियां के विनिवेश का मामला संसद कै साहमी ल्याया जान्ता अर दूध का दूध अर पाणी का पाणी आपै हो जान्ता। फेर संसद मैं यू मामला कोण्या ल्याया गया। म्हारे देश की सरकार नै सुप्रीम कोर्ट तै हटकै अपील करी सै कि कोर्ट अपणे फैसले पै पुनर्विचार करै। नीयत साफ सै कि कोर्ट सरकार नै कंपनी बेच्चण की छूट दे दे।
म्हारी देश की देशभगत सरकार का यो कदम अपणे आप मैं बहुत किमै उजागर करण आला सै। पहली बात तो या सै कि सरकार आगले संसद के सत्र ताहिं बी इंतजार करण नै तैयार कोण्या अर सार्वजनिक क्षेत्र नै लूटण खातर बहोत जल्दी मैं दीखै सै। दूसरी बात या सै कि कोर्ट के आदेश के बावजूद इस मामले नै संसाद के साहमी ले कै जावण तै बचण की सरकार की कोशश तै योए मतलब लिकड़ै सै कि वा निजीकरण की प्रक्रिया ना तो जुम्मेवारी के तरीके तै चलाना चाहन्ती अर ना पारदर्शी तरीके तै चलाणा चाहन्ती। सुप्रीम कोर्ट की बैंच का सर्वसम्मति तै यू फैसला सै कि संसद के कानून के तहत गठित कंपनियां का संसद की इजाजत के बिना निजीकरण नहीं करया जा सकदा। इस तरियां सरकार इस फैसले का पालन करण नै मजबूर सै। फेर हद देखो म्हारी सरकार की कि इस स्पष्ट फैसले नै बी धत्ता बतावण की कोशिश करण लागरी सै। ईब जनता नै देखणा सै कि या इजाजत क्यूंकर दी जा सकै सै। कोर्ट नै बी देखणा सै कि सरकार उसनै ठेंगा ना दिखावै।
यो तै सरासर लूट अर धोखाधड़ी का मामला सै। म्हारै बी बेरा ना के लकवा सा माररया सै, हम बोल चुप्पाके सां। दो खूड खेत के कोए ले ले तो हम माणस मारण नै त्यार होज्यां। ये यूपी अर हरियाणा आले किसान रोज गोली चलावैं धरती पै फेर यू कई हजार करोड़ां का म्हारा माल बेच्या जावण लागरया इसपै म्हारै सांप सा सूंघ रहया सै। जै हमनै इस लूट का विरोध नहीं करया तो आवण आली पीढ़ी हमनै माफ नहीं करैगी। इसे प्रबंधकां के हाथां मैं तो इन संपत्तियां का प्रबंधन भी नहीं रहणा चाहिए। फेर जनता जनार्दन तो फिलहाल अन्धेरे मैं दीखै सै बेरा ना कद आंख खुलैगी जनता की।
ईब तो या बात जग जाहिर होली सै कि निजीकरण के नाम पै भारी भरकम अवैध कमाई अर भ्रष्टाचार तै भरे सौदे हुये सैं। असल मैं तो निजीकरण की ए ना तो कोए आर्थिक तुक बणती अर नाहें सामान्य ज्ञान के हिसाब तै निजीकरण फिट बैठता। ईब कूण समझावै म्हारे देश के ठेकेदारां नै? जनता नै इनका तो कोए पक्का इलाज टोहवणा पड़ैगा ना तो ये जनता की भ्यां बुलवा देंगे। पूरी दुनिया की जनता राह खोजण की तैयारी मैं सै। वे ईब समझण लाग लिए सारी बातां नै।
सुण्या सै 16 जनवरी तै ले कै 21 जनवरी ताहिं ये लोग मुंबई मैं कट्ठे होवैंगे। सौ तै फालतू देशां के लोग उड़ै आवैंगे अर विश्व सामाजिक मंच के झंडे तलै आपस मैं बैठ के बतलावैंगे। इस ढाल के मंचां तै नई उम्मीद बंधी सै कि इस खुली लूट का मुकाबला करण नै लोग खड़े जरूर होवैंगे।
---




घटना जिसनै अम्बेडकर भी हिला दिया

घटना जिसनै अम्बेडकर भी हिला दिया
घटना सन् 1935 की सै। इस घटना नै अम्बेडकर बरगे पहोंच्या औड़ बुद्धिजीवी भी हिला कै धर दिया था। उस बख्त बम्बई सरकार नै एक आदेश जारी करया था कि सार्वजनिक स्कूलां मैं अछूतां के बालकां ताहिं दाखिला दिया जावै। इस आदेश के तहत बम्बई प्रेसीडैंसी के अहमदाबाद जनपद के धोल्का तालुका मैं कबील नाम के गाम मैं 8 अगस्त 1935 नै उस गाम के अछूत अपणे च्यार बालकां नै स्कूल मैं दाखिला करवावण ले कै गए। उननै देखण की खातर सवर्ण हिंदू स्कूल के चारों कान्हीं जमा होगे। जिब दाखिला हो लिया तो आगले कुछ दिनां मैं हिंदुआं नै अपणे बालक स्कूल तै ठा लिये।
अर उसके कुछ दिन पाछै एक बाहमण नै गाम के एक अछूत पै हमला बोल दिया। इस हमले कै खिलाफ 12 अगस्त नै गाम के अछूत मजिस्ट्रेट की कचहरी मैं शिकायत करण की खातर धोल्का पहोंचे। हिंदुआं नै न्यों देख कै अक अछूता के बालिग लोग गाम मैं कोण्या, लाट्ठी, भाले अर तलवारां गेल्यां अछूतां के घरां पै हमला बोल दिया। उननै महिलावां, बूढ़याँ अर बालकां कै चोट मारी अर वे अधमरे कर दिये। धोल्का गये होए अछूत भी उसे रात नै गाम मैं उलटे आवण आले थे। हिंदू उननै मारण की खातर राह मैं घात लगा कै बैठगे।
एक बुढ़िया नै इस बात का बेरा लागग्या। उसनै उन धोरै खबर भिजवा दी ज्यां करकै वे उस रात ने कोनी आए अर एक और हादसा टलग्या। हमलावर हिंदू सारी रात उनकी बाट देखते रहे अर आगले दिन तड़कै हे वापस घर नै आए। भयभीत अछूत गांव छोड़ कै अहमदाबाद चाले गए अर उड़ै जाकै गांधी जी की संस्था ‘हरिजन सेवक संघ’ के मंत्री ताहिं सारी बात खोल कै बताई। फेर इस संस्था के मंत्री नै कोए मदद नहीं करी।
न्यून गाम मैं हिंदुआं नै अछूतां का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। उन ताहिं मजदूरी देणा बंद कर दिया। खावण पीवण की चीज बेचण ताहिं इन्कार कर दिया। जड़ असली बात या सै कि उनका घर तै बाहर लिकड़ना मुश्किल कर दिया। और तो और उनके कुंए मैं माट्टी का तेल गेर दिया। आखिर मैं 17 अक्तूबर नै अछूतां नै मजिस्ट्रेट की अदालत मैं फौजदारी का मुकद्दमा दर्ज करवाया। डा. अम्बेडकर नै लिख्या बताया कि इस मामले मैं सबतै अजीब पक्ष तो महात्मा गांधी अर उनके सहयोगी वल्लभ भाई पटेल का रहया जिननै अछूतां ताहिं याहे सलाह दी कि वे गाम छोड़ दें। दलित इस मामले मैं बहोत असहाय महसूस करैं थे।
जै आज भी देखैं तो कई जगहां मैं हालात उड़ैए सी खड़े दीखैं सैं। चाहे दुलीना कांड हो, चाहे हरसौला का मामला हो अर चाहे पहरावर के सरपंच का मामला हो। दलित उत्पीड़न की मार कसूती पड़री सै।
कबीर गाम की उस घटना नै सन 1935 मैं बाबा अम्बेडकर का दिल भीतर ताहिं हिला कै धर दिया था। अम्बेडकर जी नै मेवला मैं इस ढाल के उत्पीड़न करण आले हिंदू धर्म मैं ना रहवण की घोषणा करी बताई। उनकी इस घोषणा तै या बात साफ होज्या सै कि दलितां पर उत्पीड़न उन बख्तां मैं कितना था। आम्बेडकर जिसे बुद्धिजीवियां नै भी इसी घोषणा करणी पड़ी।
इसी घटना आज पूरे हिंदुस्तान मैं अर खास कर उत्तरी भारत मैं बहोत घणी होवण लागगी। बहुजन समाज नै बी अंगड़ाई ली सै अर इस उत्पीड़न का प्रतिरोध भी दिखाई देवण लाग्या सै या अच्छी बात सै। फेर एक बात और समझण की सै कि यू एकला दलित भाइयां के उत्पीड़न का मसला नहीं सै। यू पूरे समाज का मसला सै। यू मानवता का मसला सै अर यू नागरिक समाज के विकास का मसला सै। इस मसले तै रूबरू होवण आली बात सै। आज नहीं तो काल पूरे समाज नै सोचना पड़ैगा कि इतने साल की आजादी पाछै बी दलित उत्पीड़न क्यूं बढ़ता जावण लागरया सै अर इसका के इलाज सै?
---



म्हारा हरियाणा


     हरियाणा म्हं कुछ साल पहलम ताहिं खेतां के डोल्यां पै शीशम खड़ी पा ज्याया करती। इनकी छां भी बढ़िया अर खेती म्हं भी नुकसान ना। हलाई काढ़ कै हाली शीशम की छां म्हं बैठ कै जोटा लाया करता। इसकी लाकड़ी भी काम्मल बताई। शीशम के इतने फायदे अर फेर बी शीशम खत्म होन्ती जावण लागरी? या बात सो सोचण की सै। बेरा ना गामां म्हं इस बात कान्हीं ध्यान गया सै कि नहीं गया सै। उनका ध्यान क्यूकर जावै इसी बातां कान्हीं? गाम आल्यां नै तै ताश खेलण तै फुरसतै कोण्या। कै एक दूसरे की टांग खींचे जावैंगे। ज्यूकर पहलम बैठ कै दुख-सुख की अर ऊंच-नीच की बतला लिया करते वा बात तै ईब रही कोण्या। कौणसी बात गाम के हक म्हं सै अर कुणसी खिलाफ सै इसपै कदे कदाऊ जिकरा हो जान्ता हो तै बेरा कोण्या। गाम के स्कूल म्हं के होरया सै इननै कोए वास्ता नहीं, गाम के अस्पताल म्हं इलाज का के हाल सै इनकी चिंता ना, गाम म्हं पाणी की डिग्गी की सफाई हुई सै कि नहीं इननै कोए लेना देना नहीं। गाम म्हं छोरियां गेल्यां छेड़खानी की वारदात बधण लागरी सैं इनपै इसका कोए खाता नहीं। जड़ बात या सै कि गाम काल उजड़ता आज उजड़ जाओ फेर किसे नै चिंता नहीं दीखती। सांझ नै दो घूंट लाकै इसनै गाल दे उसने गाल दे, घरआली कै ऊपर छोह तार लें, अर फेर खायें बिना पड़कै सो जाणा। दारू की मार तै कोए घर तो बच नहीं रहया माणस बेशक बचरया हो। पहलम हुक्का आदमी ए पीया करते, ईब घणखरी लुगाई भी हुक्टी पीवण लागगी कै बीड़ी फूंकती पा ज्यांगी। कई गामां म्हं तो थोड़ी घणी बीरबानी बी दारू का सेवन करण लागली सैं। खांसी के शिकार लोग लुगाई अस्पतालां म्हं लुटते हांडैं सैं। दमे की बीमारी बधती जा सै। चमड़ी की खारिश रात नै सोवण नहीं देन्ती। चिंता करकै ब्लड प्रेसर बधगे। दिल का धड़का बधग्या। नशाखोरी की साथ-साथ सेक्स अंगां की बीमारी बधती जावैं सैं। जवानां म्हं नुपशंकता बढ़ती जा सै। दूध ढोल म्हं घलग्या। रोजगार खत्म होगे। छोरियां नै पेट म्हं खत्म करण लाग लिये। बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश की लुगाइयां नै पांच-पांच, सात-सात हजार म्हं खरीद कै ल्यावण के मामले बधगे। पहलम तै गाम म्हं एक दलाल हुया करता सरकारी महकम्यां का फेर ईब तै हरेक महकमे का एक एक दलाल होग्या। किसे का राज आल्यो इन दलालां की पांचों आंगली घी म्हं रैहणी ए रैहणी। प्राइवेट पाणी के नलके आगे। पीस्से आल्यां नै सुख होग्या बिना पीस्से आल्यां की मर आग्यी। बुलध टोहें पावैं सैं। गाल भीड़ी होन्ती होन्ती इतनी भीड़ी होगी कि मोटा-सा माणस तो लिकड़े कोनी सकै। पाणी घर-घर म्हं नलक्यां म्हं लियाए फेर इसकी निकासी का कोई इंतजाम नहीं कई घरां म्हं तो भैंस भी नलके के पाणी तै नुहाई जावैं सैं।
     नहर के पाणी के धान्ने अटे पड़े सैं। कई कई साल होगे धाने खरीदें। नहर का पानी किमै तो आवैए कम अर जो आवै भी वो धान्ना अट्या पड़्या, वो खेत म्हं क्यूकर पहोंचै। धान्ना खोदण कूण जावै? बिना बात की बात पै रोज राड़ करैं असली बातां का जिकरा ना, परिवार नाम की चीज नहीं बचरी। बूढ़े बालकां नै देख कै राजी ना अर बालक बुढ़या के मरण की बाट देखैं सैं। सास बहू की कटती करती पावै तै बहू सास नै बुरी बतावै। करियाणे की दुकान एक गाल म्हं दो-दो तीन-तीन खुलगी। इन दुकानां म्हं दारू के पाउच आगे। लोगां का राजनीति पर तै विश्वास उठ लिया फेर माला फेर बी इक्कीश इक्कीश हजार की घालैंगे नेतावां कै। नया पेटेंट के सै इसका किसे नै बेरा पावै कोण्या। यो डब्ल्यू टी ओ के बला सै इसपै होक्के पै कदे चर्चा ना।
     टी.वी. पै नशा हिंसा सैक्स का नंगा नाच क्यों होवै इसपै कोए सवाल ना। खेती की तबाही के कारण सैं इसपै जिकरा ना। ये ब्यूटी कम्पीटीशन एकदम क्यों छागे सारे भारत म्हं? इस म्हं किसकी साजिश सै? कई बात लिखण की ना होती। थोड़ी लिखी नै ज्यादा समझियो अर बिचार करियो। बिचार करांगे तो राह भी पावैगा। बिचार तै परहेज करना छोड़णा पड़ैगा।



&&&

ठाडा मारै रोवण दे ना

ठाडा  मारै रोवण दे ना
उन्नीस सौ तेईस म्हं मुंबई की विधान परिषद नै यो प्रस्ताव पास करया था अक अछूत वर्गों नै सारी सार्वजनिक सुविधावां ज्यूकर तालाब, कुआं, धर्मशाला आदि बरतन की छूट दी जा सै। इसका मतलब इसतै पहलम उड़ै या छूट नहीं थी। सरकार ने हुकम जारी कर दिया। यो सरकारी हुकम महाड़ नगरपालिका धोरै पहोंच्या। उसनै भी प्रस्ताव पास कर दिया 5 जनवरी 1924 नै। फेर हिंदुआं नै इसका पालन कोण्या करया। कोण्या माण्या यो कानून। पाड़ कै रद्दी की टोकरी म्हं फैंक दिया। इसके तीन बरस पाछै महाड़ म्हं कोलाबा जनपद के अछूतां का सम्मेलन 1927 म्हं 18 मार्च तै 20 मार्च ताहिं हुया। इस सम्मेलन में डॉ. अम्बेडकर भी शामिल थे। 20 मार्च नै पच्चीस सौ अछूतां नै कट्ठे होकै जोहड़ का पाणी पीया। शहर के हिन्दु लखान्ते रैहगे। फेर उन हिन्दुआं पै पागलपन सवार होग्या अर उननै अछूतां पै कसूते जुल्म ढाये। अछूतां का कसूर योहै था अक उननै जोहड़ का पाणी भ्रष्ट कर दिया था। बात आड़ै ए कोण्या थमी। हिन्दुआं नै ओ जोहड़ निजी संपत्ति बताकै 14 दिसम्बर 1927 नै पास करया था। इसके छह दिन पाछै महाड़ म्हं अछूतां नै फेर सम्मेलन करया अर इस म्हं दो जरूरी प्रस्ताव पास करे। एक म्हं मनुस्मृति के जलावण की घोषणा करी अर दूसरे म्हं हिंदू के अधिकारां की घोषणा पै बात करी। 20 दिसम्बर 1927 नै उस सम्मेलन म्हं मनुस्मृति जलाई गई। डॉ. अम्बेडकर नै इस घटना की तुलना फ्रांस की क्रांति गेल्यां करी थी। 2 मार्च 1930 नै काला राम मंदिर म्हं जावण खात्तर पांच हजार अछूतां नै कूच कर दिया था। उड़ै हिंदुआं अर अछूतां के बीच म्हं खुल्या संघर्ष हुया अर डॉ. अम्बेडकर के सिर म्हं चोट आई अर और बी सैकड़यां लोग जखमी हुए।
एक और घटना याद आगी। बात 1935 की सै। मुंबई सरकार नै आदेश जारी करया था अक सार्वजनिक स्कूलां म्हं अछूतां के बालकां ताहिं दाखला दिया जावै। बम्बई के अहमदाबाद जनपद के धोल्का तालुका म्हं कबीर नाम के गाम म्हं आठ अगस्त 1935 नै गाम के अछूत अपने 4 बालकां नै स्कूल म्हं दाखिल करवाण ताहिं लेगे। इननै देखण खात्तर सवर्ण हिंदू स्कूल के चारों कान्हीं कट्ठे होगे थे। दाखिला होग्या तो आगले दिन कुछ हिंदुओं नै अपणे बालक स्कूल म्हं कोण्या खंदाये। इसके कुछ दिन पाछै एक बाहमण नै गाम के एक अछूत पै हमला बोल दिया। 12 अगस्त नै लोग मजिस्ट्रेट की कचहरी म्हं अछूत केस दर्ज करावण पहोंचे तो हिंदुआं नै लाठी, भाले अर तलवारां गेल्यां अछूतां के घरां हमला बोल दिया। महिलावां, बूढ़यां अर बालकां की पीट-पीट के ज्यानै काढ़ण नै होगे। रात नै धोल्का आले अछूतां नै उल्टा आणा था तो हिंदुआं नै उनपै भी घात ला लिया। औ तै शुक्र था अक गाम के एक बुढ़िया नै बेरा दे दिया अर अछूत रात नै कोण्या आये ना तो उनकी भी दुर्गति करी जावै हे। अछूत गाम छोड़ कै अहमदाबाद गांधी जी की संस्था हरिजन सेवक संघ म्हं गये अर उसके मंत्री ताहिं सारी बात बताई फेर उस मंत्री नै कुछ नहीं करया। गाम म्हं हिंदुआं नै अछूतां का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। मजदूरी देनी बंद कर दी, खावण पीवण की चीज बेचण तै इन्कार कर दिया। अछूतां का घर तै पां काढ़णा मुश्किल कर दिया। उनके कुएं म्हं माटी का तेल गेर दिया गया। 17 अक्तूबर नै मजिस्ट्रेट कै मुकदमा करया। गांधी नै अर बल्लभ भाई पटेल नै अछूतां ताहिं सलाह दी अक वे गाम छोड़ दें। अम्बेडकर कै घणा धक्का लाग्या उनकी बात सुणकै अर उसै दिन उननै सोच लिया अक हिंदू धर्म म्हं नहीं रैहणा अर 1935 म्हं मेवला म्हं हिंदू धर्म म्हं ना रहवण की घोषणा कर दी थी। आज भी देखां तो हालत घणे से नहीं बदले सैं। हरियाणा के घणखरे गामां म्हं भी दलितां का अर सवर्णां का सांझे का कुआं नहीं पावैगा। दलितां के अर सवर्णां के होक्के न्यारे पावैंगे। जड़ बात उड़ै ए सी खड़ी सै। कितनी माड़ी बात सै। कदे हमनै बैठके सोच्या बी सै?
---


पीसा बड़ा या भगवान बड़ा ?

पीसा बड़ा  या भगवान बड़ा ?
डाक्टर सैनी आज मजबूरी मैं खरखोदे शहर मैं रोंग साइड जावण लागरया था। यातायात पुलिस के माणस नै डाक्टर साहब पाकड़ लिये। बोल्या - रोंग साइड क्यों ? थाम तो पढ़े-लिखे लोग सो। डाक्टर सैनी नै अपणे बारे बताया। पुलिसिया नै सैलूट ठोक्या अर बोल्या - डॉक्टर तो भगवान का दूसरा रूप हो सै। आप गलत काम क्यूंकर कर सको सो। जल्दी जाओ साहब। डाक्टर सैनी नै खिसिया-सी कै उसका धन्यवाद करया। पुलिसिया सहज सी बोल्या - मेरे छोरे का इलाज आपकी देख-रेख मैं सै जनाब। थोड़ा-सा ख्याल राखियो।
डाक्टर बोल्या - जरूर-जरूर। नाम क्या है? पुलिसिया बोल्या सतबीर। आठ दस दिन पाछै फेर ओहे चेटक होग्या। डाक्टर सैनी फेर रोंग साइड जावण लागरे थे। यातायात पुलिस आले नै (कुदरतन ओहे पुलिसिया था) फेर टोक दिया। फेर ईबकै उसनै छोड्या नहीं। डाक्टर सैनी का चालान काट दिया। डाक्टर सैनी हैरान-सा उसके मुंह कान्हीं लखावै। ओ पुलिसिया बोल्या - उस दिन की बात न्यारी थी। मेरा लड़का थारी देख रेख मैं था आज की बात न्यारी सै। मेरा लड़का ईब दूसरे डाक्टर की देख रेख मैं सै। मैं ईब थारी सेवा किस बात खातर करूं?
फत्ते बोल्या - एक बात मनै सुणादी ईब एक बात सरिता नै सुणाणी चाहिए। सरिता सुणावण लागी - आजकाल एक जबरदस्त तकिया कलाम सै कि ‘बस पांच मिनट।’ कोए भी बात हो, कोए भी बख्त हो, यो मुहावरा आम सुणण मैं मिलज्या सै कि बस पांच मिनट रूको फेर फुरसत ए फुरसत सै। डाक्टर सैनी की बी याहे आदत थी। सारी हाण मरीजां तै घिरया रहण करकै वे हरेक माणस ताहिं न्योंए कैह दिया करते - ‘बस पांच मिनट रूको फेर आपका नंबर सै।’ एक दिन की बात सै कि डाक्टर साहब के केबिन मैं एक बूढ़े व्यक्ति नै झांक कै देख्या अर भीतर आग्या। ओ बहोत घबरारया था। आवन्ते की साथ बोल्या - थामनै लेवण आया सूं डाक्टर साहब। मेरी बिटिया सख्त बीमार सै। थाम तो भगवान सो। चाल कै बचाल्यो उसने। डाक्टर सैनी ने आदतन कैह दिया - बस, थारी गेल्यां पांच मिनट मैं चालांगे।
बीस मिनट पाछै बूढ़ा बाबा फेर बोल्या हाथ जोड़ कै - डाक्टर साहब वार होवण लागरी सै। डाक्टर सैनी फेर बोले - बस पांच मिनट मैं चालां सां। 25 मिनट पाछै जिब डाक्टर सैनी नै कहया - हां तो बाबा चालो चालां बेटी नै देखण। तो बूढ़ा बाबा कातर नजरां तै देखता हुआ फफक पड़या अर बोल्या - ईब जावण का के फायदा डाक्टर साहब! पड़ौसी इबै-इब खबर दे कै गया सै कि पांच मिनट पहलम बिटिया का स्वर्गवास हो लिया।
फेर कविता का नंबर आया तो उसनै एक बात बताई। एक बै एक बुढ़िया भिखारिन थी। भीख मांग कै उसनै पांच सात रुपइये कट्ठे कर लिए अर वा एक फलां की दुकान पै जाकै भीख मांगण लागगी - तेरा भगवान भला करैगा। बुढ़िया दो दिन तै भूखी सै। दुकानदार नै उस कान्हीं कोए ध्यान नहीं दिया। एक गावड़ी आगी। उसनै फलां कै मुंह मारणा चाहया तो दुकानदार नै एक लाठी जड़ दी उसकै। अर ग्राहकां नै चीज बेचण लागग्या। बुढ़िया नै आगै सी हो कै फेर कहया उसतै - भगवान भली करैंगे। दो फली ही दे दे। बुढ़िया दुआएं देगी। दुकानदार ने इस डर से कि कहीं ग्राहक बिदक ना जावैं एक बुस्या सा केला उस बुढ़िया के हाथ पै धर दिया। बोल्या - चाल ईब आगै चाल। बुढ़िया नै अपणे कमंडल मां तै एक रुपइये का सिक्का काढया अर बोली - ले एक केला दे दे। दुकानदार नै तो सैड़ दे सी एक बढ़िया लाम्बा, मोटा-सा केला बुढ़िया के हाथ मैं पकड़ा दिया। उसनै ऊपर नै ठाकै आसमान कान्हीं करकै बुढ़िया बोली - तेरे नाम पै तो यू केला अर एक रुपइये का यू केला। ईब तूं ही बता तनै बड्डा मानूं अक पीस्से नै बड्डा मानूं? तो आई किमै समझ मैं अक नहीं? क्यूंकर पीस्सा खून के रिश्ते भी बदल दे सै। एक हद तै ज्यादा पीस्से का लालच माणस की इन्सानियत बी खो दे सै।


फील गुड! माई डियर कंट्रीमैन!

फील गुड! माई डियर कंट्रीमैन!
मेरे देश के वासियों फील गुड। क्यूं? क्यूंकि तीन प्रदेशां मैं चुनाव जीते पाछै भाजपा गुड फील कर री सै इस खातर हम सब बी फील गुड करां। इसे फील गुड के माहौल मैं भाजपा चुनाव जीतण का सपना देखै सै। म्हारा थारा सबका इसे करकै गुड फील करना बहोत जरूरी सै। देखो म्हारा शेयर बाजार नई बुलंदियां नै छूवण लागरया सै, फील गुड! तब तक जब तक कि कोए हर्षद मेहता, कोए केतन पारेख थारे म्हारे निवेश नै लेकै उडारी ना भरज्या, तब तक फील गुड! एक नया घोटाला रंधण लागरया सै, फील गुड!
देखो बिदेशी मुद्रा भंडार एक अरब डालर नै पार करग्या, फील गुड! सेठों की तिजोरियां मैं बहोत पीस्सा सै, फेर म्हारे किसे काम का नहीं। इसे ढाल यू सरकार की तिजोरी की बिदेशी मुद्रा सै, बेरा ना म्हारे थारे के काम आवैगी भी अक नहीं फेर बी, फील गुड! तेलगी नै साठ हजार करोड़ का घोटाला कर दिया, फील गुड! बादल साहब नै हजारां एकड़ जमीन बणा ली, फील गुड! उनकी कोट्ठी मैं नब्बै ऐसी लागरे सैं, फील गुड! रंजीत डॉन नै पेपर लीक करकै सौ करोड़ बणा लिये, फील गुड! जूदेव नै मूछां पै ताव दे कै नौ लाख भीतर कर लिए अर पीस्से ताहिं खुदा का दर्जा दे दिया, फील गुड! रक्शा सौद्यां मैं दलाली का पर्दाफाश करण आल्यां का तहलका ठिकाणै ला दिया, फील गुड! सरकारी नौकरियां के थोक विक्रेता रवि सिद्धू नै जमानत मिलगी, फील गुड! असमी अर बिहारी, कितै बिहारी अर मराठी रेलवे की नौकरियां खातर लठमलठा होरैं सैं, फील गुड!
मेरे देश के जवानों अर किसानों, फील गुड! जै तमनै आत्महत्या करनी पड़री सै तो भी, फील गुड! गुड फील करते होंए आत्महत्या करण का न्यारा ए मजा सै, बेरा सै ना? खाद पै सब्सिडी खत्म होगी, फील गुड! थारे ताहिं डीजल म्हंगा कर दिया, फील गुड! नकली बीज अर नकली दवाइयां के अंबार ला दिये, फील गुड! इनके कारण फसल बर्बाद होगी, फील गुड! गिहूं अर धान नहीं बिकता, फील गुड! मंडी मैं आढ़ती थामनै दुत्कारै सैं, फील गुड! बिजली खूब म्हंगी होगी अर कदे कदे आवे सैं, फील गुड! चुनाव सिर पै आ लिए, फील गुड! किसान चैनल शुरु होवण लागरया सै, फील गुड! म्हारे वित्तमंत्री थारी खातर रेवड़ी ले कै आये सैं, फील गुड!
म्हारे देश के प्यारे आदिवासियों थाम क्यूं पाछै रहो सो। किमै तै, फील गुड! थाम भूख तै मरण लागरे सो कोए बात ना, फील गुड! थारी किस्मत बहोत आच्छी सै कि थाम अनाज के भरे औड़ भंडारयां नै देखते औड़ भूख तै मरण लागरे सो, फील गुड! पेडयां की छाल अर पत्ते खावन्ते खावन्ते, फील गुड! आम की गुठलियां नै उबाल कै खाते हुए, फील गुड! वनवासी कल्याण संघ थामनै कट्ठे करण ताहिं जोर लारया सै, फील गुड! ज्यूकर छत्तीसगढ़ मैं आदिवासियां मैं गऊ बांटी जावण लागरी सैं, थारे ताहिं भी एक-एक गावड़ी देवण का वायदा करया जा सकै सै, फील गुड! गौ सेवा करो अर फील गुड! मेरे देश के नौजवानों, छात्रों, युवकों अर युवतियों, फील गुड! म्हारे प्यारे प्रधानमंत्री पाछले पांच साल मैं एक करोड़ लोगां नै रोजगार देवण का वायदा नहीं निभा पाये। बेरोजगारी का मार सहकै बी, फील गुड! शिक्षा महंगी, फीसें बढ़गी, कर्जल्यों अर शिक्षा पाओ, फील गुड!
हड़ताल का अधिकार खोस लिया, फील गुड! डाउन साइजिंग अर छंटनी होवण लागरी, फील गुड! सारा देश बेच खाया, फील गुड! जो बचरया सै उसनै बेचण की तैयारी सै, फील गुड! भ्रष्टाचार की सारी सीमा लांघ दी, फील गुड! गुजरात के दंग्यां मैं हजारों अल्पसंख्यक मारे गए, फील गुड! ईब - फील गुड! फेर च्यार साल ताहिं फील बैड अर फेर पांचमें साल ग्रेट फील करण का एकबै मौका और दिया जागा। शाबाश मेरे देशवासियों! फील गुड!