बुधवार, 4 दिसंबर 2019

या के बणी

या के बणी
दिल्ली मैं इन दिनां मैं खूब उठा-पटक होई सै। भाजपा नै सारे नियम, कायदे कानून, सिद्धान्त ताक पै धर दिये अपणी कुर्सी बचावण की खात्तर। तलै ए तलै कई पार्टियां मैं पाड़ ला लिया। पाड़ लावण के तरीके भी सारे ए इस्तेमाल कर के गेर दिये। साम दाम दण्ड भेद सब क्यांएका सहारा लिया ज्याहे तैं तै वोट पड़ण तै पहलम् ताहिं भाजपा न्यों दंगालै थी अक वोटां का गणित उसके हक मैं सै अर घणखरे लोगां कै या बात जंचै भी थी अक एम पी खरीद खराद कै भाजपा अपणी गिणती पूरी कर लेगी।
म्हारले नेता जी भी बहोतै स्याणे बणकै दिखावैं थे इबकै फेर भाजपा नै बता दिया अक तम डाल डाल सो तै हम पात-पात सां। पहलम तै म्हारे नेता जी नै भाजपा तै समर्थन उल्टा लेवण का सांग करया अक क्यूकरै ममता कै जयललिता की ढालां उसके भी भा बध ज्यां। कई बै घर मैं कोए माणस रूस ज्या अर रोटी ना खावै अर घरके उस नै मनावैं नहीं तै दो बखत पास करने मुश्किल हो जाया करैं इसे माणस नै। वाहे बणगी म्हारे नेता जी गेल्यां अर हार फिर कै अखबारां मैं खबर दी अक समर्थन उल्टा ले लिया फेर जै कोए करड़ा बखत आया तै वोट हम भाजपा ताहिं ए देवांगे। नेता जी तै कोए बूझै अक जै न्योंए करनी थी तै समर्थन उल्टा क्यों लिया था? खैर आड़े ताहिं बी देखी गई। हरियाणे की जनता और थोड़ी फालतू उदास होगी। फेर यो विश्वास मत थोंप दिया जयललिता नै भाजपा पै तै म्हारे नेता जी का सारा कुण्बा कुकाया अक ईब बेरा पड़वा द्यांगे भाजपा नै अक तीन च्यार एम पी आली पार्टियां की कितनी औकात सै। टी.वी. मैं अखबारां मैं, दिल्ली मैं, चंडीगढ़ मैं सारे कै काटकड़ तार दिया अक हम भाजपा के विश्वास मत के विरोध मैं मतदान करांगे। टी.वी. आल्यां नै दो दो तीन-तीन बै बूझया अक यो आखिरी फैसला सै थारा? म्हारा नेता बोल्या अक यो पक्का फैंसला सै म्हारा। हरियाणे की जनता कै थोड़ा सांस में सांस आया अक नेता नै म्हारी लाज का थोड़ा घणा ख्याल तै ले आखिर मैं करे लिया। आज के जमाने मैं कूण लिहाज शर्म जिसी चीजां का ख्याल राखै सै ऊंतै पर म्हारे नेता जी की मेहरबानी अक उसनै म्हारी लिहाज शर्म राखण की सोची।
फेर खुराना जी पहोंचे म्हारे नेता जी धोरै। बेरा ना कूणसी दुखती रग का बेरा सै खुराना साहब नै अक म्हारे नेता तै बातचीत करण की जिम्मेवारी उसे ताहिं दी भाजपा नै। फेर किमै ढीले से पड़ते दीखे म्हारे नेता जी। आगले दिन फेर किमै करड़े से होगे। लोगां नै फेर राहत की सांस ली।
चाणचक दे सी प्रकाश सिंह बादल अर उसके छोरे कै बीच मैं बैठकै म्हारे नेता जी ने फेर पास्सा पलट लिया अक हम भाजपा के प्रस्ताव के हक मैं वोट गेरांगे। किसान नेता प्रधानमंत्री बणावण की सोचां थे ओ बणता कोण्या दिखाई दिया ज्यां करकै भाजपा का समर्थन करांगे। कोए बूझणिया हो अक वाजपेई नै किसानां की घणी झोली भरदी जो म्हारे नेता जी उसकी मदद मैं तिसाये होगे? बखत की करनी अक भाजपा फेर बी मूंधे मुंह पड़ी जाकै। सबतै पहलम म्हारे ताऊ जी के बख्ता मैं एक दो एम एल ऐ करकै यो आया राम गया राम का सेहरा म्हारे हरियाणा के सिर पै बंध्धा था। फेर भजनलाल जी तैं पूरी ए पाल्टी नै लेकै कांग्रेस मैं कूद गे थे। इन सारे सौद्यां मैं एक खास बात थी अक सौदेबाज नेता मगर बलि के बकरे थे उनके पाछै लागे औड़ एम.एल.ए.। पर इबकी बरियां एक औरै नजारा साहमी आया सै अर ओ सै अक नेता नै छोडकै उसके एम.पी. भाजगे। क्यूं भाजगे? कितने मैं भाजगे? किसके कहे तैं भाजगे? के सोच कै भाजगे? इन पै न्यारी-न्यारी अटकल लाई जावण लागरी सैं। फेर एक बात तै साफ होगी अक वे भाजगे थे अर म्हारे नेता जी नै तै बस अपनी लाज बचावण खातर समर्थन का दिखवाया ए कर्या, समर्थन तै भीतरै-भीतर हो लिया था। ईब हटकै फेर यूनाइटिड फ्रंट की बात कही सै। फेर कोए यकीन ना करै। हरियाणा की जनता मायूस बहोत होई सै। जो माणस म्हारे नेता के म्हां कै म्हारे ताऊ नै देख्या करते उनमैं तै और बी निराशा आई सै। इस निराशा के कारण जनता और कोए नेता टोहण की सोचै सै फेर कोए ठह्या सा नेता ए ना दीखता हरियाणे की जनता नै। या जनता करै तो के करै?

नया साल किसा हो

नया साल किसा हो
इस बात मैं कोए शक की गुंजाइश कोन्या अक बीसवीं सदी मैं विज्ञान नै ताबड़तोड़ तरक्की करली। फेर आज महत्वपूर्ण सवाल यौ सै अक इस दुनिया के दुख-दर्द कम करण मैं कितना काम आया विज्ञान? उल्टा यू दुख-दर्द बधा तो नहीं दिया इस विज्ञान नै? आज दुनिया के 100 करोड़ के लगभग लोग (महिला-पुरुष) बुनियादी जरूरतों ज्यूकर रोटी, कपड़ा अर मकान तै महरूम सैं। आए साल दुनिया के लगभग 80 लाख बालकां की मौत, भूख, कुपोषण, पीने के साफ पानी की कमी, उचित आवास की कमी बख्त पै मामूली चिकित्सा सेवा ना मिलने के कारण होज्या सै। जो ये परिवार इतने गरीब न होन्ते अर उनकी बुनियादी जरूरतें पूर हो जान्ती तो इन मौतां पर काबू पाया जा सकै था। आई किमै समझ मैं अक ‘किस्मत म्हारी’ कैहकै पार बोलोगे।
आए साल मैं लगभग 4 लाख महिलावां की मृत्यु बालक होवण के बख्त होज्या सै। कारण सै अक ठीक खाणा नहीं, खून की कमी होज्या अर जच्चा-बच्चा को वांछित स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलती। फेर के कर्या जा? इसपै ढंग तै सोच्या जा आण आले नये साल मैं अक बेहतर दुनिया क्यूकर बनाई जा। या बेहतर दुनिया क्यूकर बनाई जा सकै सै? दुनिया मैं सारे महिला-पुरुषां की जरूरतां नै पूरा करण की खातर प्रतिवर्ष 40 अरब डालर और चाहिए। फेर किततैं आवै इतना पीस्सा? सोच्ची सै कदे अक ताश खेलण तै फुरसत कोन्या अर कै इन छुटभैये सफेदपोशां के बस्ते ठावण के बोझ तलै सांस चढ़े रहवैं सैं? बेरा सै केवल यूरोप मैं शराब पर एक साल मैं 105 अरब डालर खर्च होज्यां सैं। म्हारे देश के आंकड़े तो कोन्या फेर हरियाणा मैं दारू तै घर तो कोए बच नहीं रह्या फेर कोए माणस बचर्या हो तै बैरा ना? तो फेर के कर्या जा? पहलम तो पूरी समस्या आच्छे ढाल जान ली जावै अर फेर सोच्या जावै अक हम के चाहवां सां अर के करना चाहिए हमनै? हम नहीं चाहते किसे की आजीविका खोसना।
एक इन्सान का दूसरे इन्सान को लूटणा गल्त सै। दौलत की खातर दरिद्र का कूटणा गल्त सै। लूटमान अत्याचार हम कोन्या चाहते। हां, हम जरूर चाहवां सां मजदूर का मुस्कराना, किसानां का अपनी फसल देख कै खिलजाणा, हर झोंपड़ी, हर गांव मैं बालकां का खिलखिलाणा, इस नाबराबरी का दुनिया तै खात्मा जरूर करना चाहवां सां। हम कोन्या चाहते नये साल मैं ये जातिभेद अर रंगभेद। कोन्या चाहिये बेटियों के जन्म पै प्रकट होन्ता दुख-खेद, इस तरियां के भेद भाव जो करदें समाज मैं छेद, इन्सानियत का इसा अपमान कोन्या चाहिये। हां, आज हमनै चाहिये उनकी समानता जो तलछट मैं पड़े सैं, बेटी नै मौका मिलै अर वा तय कर सकै हर रास्ता, शूद्र भी शिखर छू सकै उसनै मिलै या मान्यता, काले रंग नै कृष्ण आला सम्मान मिलै या हम चाहवां सां। हम नहीं चाहते पड़ौसियों तैं रूठणा, एक ही परिवार मैं दीवारों का खींचणा, मजहबों के नाम पर किसी के घरों को रोंदणा, किसी के दिल नै तोड़णा हम कोन्या चाहन्दे।
हां, हम जरूर चाहवां सां टूटे दिलां नै जोड़णा, बहम अर बैर की हर दीवार नै तोड़णा, भटके औड़ हर कारवां नै प्यार की गली मैं मोड़णा, भजनां मैं कव्वाली की मिठास घोलणा चाहवां सां। हम नहीं चाहन्दे अक घरां पै गिरै कोए कहर, देखो हवा पानी मैं फैल रहे कितने जहर, बीमारियों, आपदाओं की या बढ़ती लहर, आबो हवा का यो प्रदूषण कोन्या चाहिये। हां हम जरूर चाहवां सां कोयलां का कूकणा, मृग शावक का विचरना वन बालिका तै खेलणा, चरवाहों की बांसुरी पै टहनियां का झूमणा, मुक्त नदी की खेल ठिठोली देखणा हम चाहवां सां। हम नहीं चाहन्दे मूक प्राणियों पै अत्याचार, विलासिता इसी करे जो पशुओं मैं हाहाकार, वो कैसा विकास जहां इन्सानों से हो मारामार, ताकत का दुरुपयोग हमनै कोनी चाहिये। हम नहीं चाहन्दे कि युद्ध तै हो ईब विनाश, अणु बम की गर्जना जो पुकारै बस नाश-नाश, धरती पै सन्नाटा हो अर रोवै आकास, ना ना इसी तबाही नहीं चाहन्दे। एक छोटा सा चमन हो, हर इंसान को अमन हो, बहै जड़ै सच्चाई का पवन हो, इसी दुनिया हम चाहवां। नया साल मुबारक।
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सांच्ची बात कटारी लाग्गै

सांच्ची बात कटारी लाग्गै
हिन्दुओं के इतिहास मैं राम का बहोत ऊचा स्थान रहया सै। आजकाल भी राम राज्य का खूबै जिकरा रहवै सै। वो राम राज्य कीसा होगा जिसमैं एक शूद्र शम्बूक का बस योहे अपराध था अक ओ धर्म कमावण की खात्तर तपस्या करण लागरया था अर इस कारण राम जीसे अवतार राजा नै उसकी नाड़ काट ली। ओ राम राज्य कीसा रहया होगा जिसमैं किसे आदमी के कहे तै राम नै गर्भवती सीता ताहिं जंगल मैं छोड़ दिया? राम राज्य मैं दास दासियां का कति तोड़ा नहीं था। ठारवीं और उन्नीसवीं शताब्दी ताहिं दुनिया मैं दास प्रथा कितनी क्रूरता के साथ प्रचलित रही सै इसका हमनै पूरा ग्यान सै। उन बख्तां मैं (राम राज मैं) स्वेच्छा पूर्वक अपने आप नै अर अपनी संतान नै सिर्फ बेच्या ए नहीं जाया करता। बल्कि समुद्र अर बड्डी नदियां के कांठ्यां पै बसे गामां मैं तो आदमियां नै पकड़ कै ले जावण की खात्तर बाकायदा हमले हुया करदे। डाकू गाम पै छापा मारया करते अर धन-माल की साथ-साथ उड़े के काम करण जोगे आदमियां नै पाकड़ के ले जाया करते। हर साल इस तरियां के गुलाम पोर्त्तुगीज पकड़ कै बर्मा के अराकन देश मैं बेच्या करते। राम राज्य मैं जै इस ढाल की लूट अर डाकेबाजी नहीं बी होगी तो भी दास प्रथा तो जरूरै थी। मिथिला मैं ईब बी कितने ए घरां मैं वे कागज सैं जिनमैं बहिया (दास) की खरीद-फरोख्त दर्ज सै। दरभंगा जिले के तरौनी गांम मैं दिगंबर झा के परदादा नै कुल्ली मंडर के दादा को किसे दूसरे मालिक तैं खरीदया था अर दिगंबर झा के दादा नै पचास रुपइये के फायदे के साथ ओ आगै बेच दिया। इैबै तीन पीढ़ी पहलम अंग्रेजी राज तक मैं या प्रथा मौजूद थी। साच्ये धार्मिक हिंदू हों चाहे मुसलमान, दोनूं जब अपनी मनुस्मृतियों और हदीसों मैं दासां के ऊपर मालिकां के हक के बारे पढ़ैं सैं तो उनके मुंह मैं पाणी आये बिना नहीं रैहन्ता।
आवां राम राज्य की दास प्रथा की एक झांकी देखां। एक साधारण सा बाजार सै जिसमैं निखालस दास-दासियां की बिक्री होवै सै। लाखां पेडां का बाग सै। खाण-पीण की दुकान सजरी सैं। भेड़-बकरियों अर शिकार करे जानवरां तै न्यारा उच्च वर्ग के माणसां के भोजन की खात्तर मांस बेच्चा जावण लागरया सै। जागां-जागां पै सफेद दाढ़ी आले ऋषि अर दूसरे ब्राह्मण, क्षत्रिय अर वैश्य अपणे पड़ाव घालें पड़े सैं। कोए नया दास कै दासी खरीदण आया सै। किसे के दिन बिगड़ गे ज्यां करकै ओ अपणे दास-दासी बेच कै कुछ पीस्से का जुगाड़ करण आरया सै। कुछ पुराने दास बेच कै नये दास लेवण आरे सैं। म्हिने पहलम दास-दासियां की सेवा शुरू होज्या सै अक बढ़िया दामां मैं बिक ज्यावैं। उनके सफेद बाल काले रंग दिये। बढ़िया लत्ते कपड़े पहरा के बिठावैं सैं। कितै-कितै सौ-सौ दास सैं कितै एकाध दास आले मालिक सैं। खरीदण आले कहवैं सैं, ईबकै तो बाजार बहुत म्हंगा गया। पाछले साल अठारा बरस की हट्टी-कट्टी सुंदर दासी दस रुपइए मैं मिल जाया करती, ईबकै तो तीस मैं बी हाथ कोन्या धरण देन्ते। दान्त ताहिं देख्या करदे। कोए चालीस बरस की नै बीस बरस की बतावै। कोए कहवै म्हंगी कित सै। महाराज रामचंद्र के यज्ञ मैं दक्षिणा मैं हरेक ऋषि ताहिं एक-एक तरुण दासी दी जावैं सैं। कितनी दासियां के बालक उनतै कोसां दूर चाले जावैं सैं, कितनी दासियां के प्रेमी उनतै बिछड़ ज्यावैं सैं इसकी उड़ै किसनै चिंता नहीं थी। यो सै राम राज्य मैं आदमी के एक भाग का जीवन। अर यो सै राम राज्य मैं मरद-औरत का मोल। इसे पर हमनै नाज सै। ईब ताहिं तो हमनै आदमी की ढालां रैहना भी नहीं सीख लिया सै। पास पड़ौस मैं सफाई की अवहेलना मैं तो हम जानवरां तै भी गये बीते सां। म्हारे गामां जीसे गंदे गाम दुनिया के किसे देश मैं दीवा लेकै बी टोहे कोन्या पावैं। या म्हारे गांम की ए खूबी सै अक एक आन्धा माणस बी एक मील पहलमै म्हारे गाम नै पिछाण लेवै सै क्योंकि उसकी नाक बदबू नै पिछाण ले सै। तो म्हारा इतिहास कई ढाल की यादां तै भरया पड़या सै। हमनै देखना पड़ैगा अक कौन सी आज के हिसाब मैं ठीक बात सै अर कौन सी गलत सै। अन्धभगत हो कै अपने पुराने इतिहास की झोल्ली भरकै काम कोन्या चालै। आई किमैं समझ मैं?

फलाणे की बहू बहोत नेक सै भाई

फलाणे की बहू बहोत नेक सै भाई
म्हारे हरियाणा मैं घूंघट बिना बहू की मूर्त पूरी कोण्या मानी जान्दी। पुराणे बख्तां मैं घूंघट की जकड़ बहोतै कसूती थी। यो घूंघट कद सुरू हुया, क्यों सुरू हुया इन बातां पर भी बिचार करण की जरूरत सै। मेरे हिसाब तै लुगाई नै काबू मैं राखण खातर घूंघट का सांग रच्या गया। औरत नै अपणे परिवार, अपणे गाम अर अपणे देस की तरक्की मैं फैसले करण तै रोकण खातर घूंघट का हथियार बणाया गया। 1893 मैं एक अंग्रेज नै लिख्या सै अक इस इलाके मैं घूंघट ना करण का मतलब सै अक वा औरत बदकार है, वा नैतिकता की सीमा पार करगी ज्यां करकै इसनै घर तै बाहर कर द्यो। नैतिकता मैं लपेट के घूंघट पहरा दिया म्हारे बड़े बडेरयां नै।
आज इसी बात तो कोण्या रही पर ईब बी बिना घूंघट आली बहू का नाम नंगी काढ़ दिया जा सै। बिना घूंघट अर बेसरम औरत मैं कोए फरक नहीं रैहन्ता। कई माणस तो उसनै बदमास बी समझण लागज्यां सैं। उसपै न्यों बोल मारैंगे अक रै फलान्यां की बहू तै छाती दिखान्ती हांडै सै। जै कोए औरत हिम्मत सी करकै पर्दा हटाणा बी चाहवै तै मर्द माणस छोह मैं आज्यां अर जै वा जिद करले तै उसकी पिटाई बी जम कै होज्या। बालकां अर माणसां की मौजूदगी मैं अपणे पति तै घूंघट करना, रिस्ते मैं अर उमर मैं गाम के बड्डे ठेर्यां तै घूंघट करना अर कुछ बुजरग औरतां तै घूंघट करना जरूरी मान्या जा सै।
हरियाणे मैं घर की कलह की जड़ बहू मानी जावै सै अर कै पूरी इस लुगाई जात कै यो दोष लाया जा सै। न्यों मानकै चाल्या जा सै अक इस कलह पै काबू राखण खातर बी यो घूंघट जरूरी है। एक सर्वे के हिसाब तै हरियाणा की 72 61 प्रतिशत महिला घूंघट की सिकार सैं। कमाल की बात सै अक हरियाणा मैं ना तै आर्य समाज नै अर ना पढ़े लिखे बुद्धिजीवियां नै अर ना दूसरे समाज सेवियां नै बड्डे पैमाने पै घूंघट कै खिलाफ जनअभियान चलाया। घूंघट छोटा होग्या, घूंघट ऊपर नै सरकग्या फेर घूंघट आज बी खत्म नहीं हो लिया।
घूंघट हरियाणा मैं आज्ञाकारिता का, सुद्ध चरित्र का, औरत की पवितरता का, उसकी सालीनता का एक सामाजिक पैमाना बणा कै उढ़ा दिया गया। लुगाइयां कै बी इसकी चतुराई अर इसका काइयांपन समझ मैं नहीं आया। लुगाइयां भी घूंघट के ये हे मतलब मान बैठी अर पल्ले कै गांठ मारली। पढ़ी लिखी औरत बी गाम मैं जावैंगी तो पर्दा करैंगी अक सासू उसकी बड़ाई करै अक देख इतना पढ़ लिख कै बी पर्दा करै। जिब सुसरा, ज्येठ के और कोए गाम का माणस सहर मैं आज्या तै भी पर्दा करै। जो पर्दा करैगी उसने गाम आले कैहंगे - फलाणे की बहू बहोत नेक सै भाई। गाम मैं रैहवण आली इसी औरतों नै कोए साबासी कोण्या देवै। गाम मैं तै मान के चाल्या जा सै अक बहू पर्दा करै ए करैगी।
पढ़े लिख्यां नै बी इसका विरोध क्यों ना करया या सोच्चण की बात तै सै ए। महिला की लिहाज (मोडैस्टी) उसकी आंख की सरम मानी जावै सै अर ज्यां करकै घूंघट तारकै बात करण की बात तै दूर रही उस ताहिं तै माणस तै आंख तै आंख मिलाकै बात करण की बी इजाजत कोण्या। और तै और चपाड़ के धोरे कै जागी तो बी घूंघट करैगी अर चपाड़ मैं चढ़ण की बी इजाजत कोण्या। कोए मरज्या तै उसकी अर्थी गेल्यां समसान घाट मैं बी जाण की मनाही सै। घूंघट की जागां ढाठा मारण की छूट बी बालक चिलक आली बड्डी उम्र की लुगाइयां खात्तर सै। घूंघट इस बात नै तय करदे सै अक घर मैं, गाम मैं, अर बाहर किसकी बात ऊपर रैहगी। घूंघट औरत कै बेड़ी सै। साफ दिखण लागरी सै अक उसके हक उसनै ना मिल सकैं ज्यां तै बहू ताहिं घूंघट पहरा दिया। यो इतना ए गुणकारी सै तै बतौर लड़की या बाहन के उस ताहिं घूंघट क्यों नहीं पहराया गया? उसके घूंघट की बेड़ी काटण की जागां उसनै घर मैं कैद करण की त्यारी होण लागरी सैं। बचियो! किमै करियो!!



गंठे की आत्मकथा

गंठे की आत्मकथा
मनै गंठा कैहदे कोए प्याज़ कैहदे अर कोए अनियन कैहदे। मनै लेकै पाछले एक साल तै सबके पासने पाटरे सैं अर भाजपा आल्यां के तो कैहने ए के सैं। इननै आठ म्हिने हो लिए राज करते। आठे म्हिने मैं सबकी म्यां बुलां दी इननै। जनता की चूल हिला कै धरदी। मनै सोच्ची अक सरकार ताहिं सबक तो सिखाणा ए चाहिए। मेरा सीधम सीध तो ब्यौंत नहीं था किमै करण का तो मनै बैरी का हथियार बैरी पै चला दिया। घोड़े के तनाल लागती देखकै मिंडक नै बी पां ठाया। मतलब मेरी गेल्यां आलू, टमाटर, धनिया अर मिर्च ये सारे के सारे स्पीड पकड़गे। बाजपेई जी नै अपणी सफाई देवण मैं कसर नहीं घाली अर मेरे दाम तले नै ल्यावण की खातर बहोतै ताने तुड़वाये फेर कोण्या बात बणी अर जनता नै मध्य प्रदेश, राजस्थान अर दिल्ली मैं भाजपा की सफाई करदी।
बात न्यों बणी अक पाछले दिसम्बर की मेरी जितनी फसल होनी चाहिये थी उतनी कोन्या हुई। जिब मार्च मैं मेरी दूसरी फसल आई तै वा भी उम्मीद तै कम थी। यो इसा मौका था जित भाजपा सरकार चूकगी अर मेरा एक्सपोर्ट बन्द कोनी कर्या। मेरी पैदावार 15 प्रतिशत कम थी पर फेर बी सरकार ने अपने मुंह लागते ब्यौपारियों का भोभा भरण की खातिर मेरा 250,000 टन का (फसल का 8 प्रतिशत) एक्सपोर्ट कर दिया। सारे देस मैं हा हा कार माचग्या। हाय गंठा! हाय गंठा! सोमपाल जी बोल्या अक गंठे के भा बधवा के किसानां नै फायदा होगा। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री बोले अक म्हारे प्राचीन ग्रन्थां मैं लिख्या सै अक प्याज खाये तै गुर्दे की पत्थरी होज्या सै ज्या करकै जनता नै प्याज नहीं खाणा चाहिये।
जून के म्हिने मैं सरकार के एक विभाग ने मेरे एक्सपोर्ट पै बैन लावण की सिफारिस बी करदी थी। फेर बाजार मार्किट दुनिया की का अपणे चहेत्यां ताहिं मजा दिवाण खातर सरकार नै कोण्या गोली या बात। सोमपाल जी के ब्यान मैं भी थोथ पाई। किसान कै भा बधण का फायदा कोण्या हुआ पर ब्यौपारी काच्ची काटगे। अर मेरी कीमत पचास पै पहोंचगी। करोड़ां करोड़ के वारे न्यारे होगे। जनता की जीभ बाहर लिकड़याई।
जित मेरी आत्मकथा नै जनता के ढीड ल्यादी उड़ै जनता नै भाजपा कै कील ठोक दी। फेर जनता ताहिं इस गंठाराम की एक अपील और सै अक जनता की ठुकाई ईबै पूरी नहीं होली सै। सब्जी मंडी नै देख कै ईब नाज मंडी बी रंग बदलती आवै सै। एक बै मुनाफा जिसके मुंह लागज्यागा फेर उसनै चैन तै कोनी बैठण देवै। पंजाब मैं जीरी की फसल बी कम होई सै। अक्तूबर मैं कुल सरकारी खरीद का 30 प्रतिशत लिया जाया करै फेर ईबकै यो कोटा घणा कम सै। ब्यौपारियां नै अपणे गोदाम भर लिये जीरी गेल्यां। क्यों भर लिये? इननै बेरा ला लिया अक इन्डोनेशिया अर बंगला देश मैं जीरी की फसल बहोत खराब गई सै। फिलीपीन की चावल की मांग घणी सै। पहलम थाइलैंड इन देशां नै चावल भेज्या करता पर ईबकै उसकी फसल की हालत बी आच्छी नहीं बतान्ते।
म्हारले देस के ब्यौपारी नै म्हारी चिन्ता कोण्या उसनै अपणे मुनाफे की चिन्ता फालतू सै ज्यां करकै चावल खरीद के गोदाम भर लिये। चावल भाजपा सरकार की आवण आले दिनां मैं ‘अग्नि परीक्षा’ लेगा। चावलां के भा मेरे भा तै भी ऊंची छलांग मारैंगे। दखे मेरे खाये बिना तै लोगां की सधगी थी पर चावलां बिना तै लोग एक दूसरे नै बुड़कम बुड़क्यां खावण लागज्यांगे।
1960 के जमाने में महंगाई का कारण था अक सूखा पड़ग्या था। पर ईब की महंगाई सै म्हारे ब्यौपारियों के मुनाफे की भूख करकै अर सरकार की नीति करकै। बस मेरा तै इतना ए कैहणा सै अक मैं जनता का था, जनता का सूं, अर जनता का रहूंगा।

अधखबड़ा माणस - म्हारा खरना

अधखबड़ा माणस - म्हारा खरना
कई बै जिब बात चालै तै बुद्धिमान माणस हरियाणे के बारे मैं न्यों कहवैं सैं अक आड़ै गिहूं की अर चावल की पैदावार तै बधगी अर लोगां धोरै रातू रात पीस्सा (काला धन घणा अर धोला धन थोड़ा) बी बधग्या पर सांस्कृतिक स्तर पै तो विकास कोण्या हुआ अर या बात सुणकै कई आडू न्यों कहवैंगे अक या झूठी बात सै। हरियाणा तै संस्कृति के मामले मैं पूरे भारत का पथ प्रदर्शक रह्या सै अर वे गिणवा देंगे कुरुक्षेत्र का कर्मक्षेत्र जड़ै महाभारत खेल्या गया अर गीता रची गई अर और बेरा ना के के। फेर झकोई आज के हिसाब मै कदे नहीं दिमाग पै जोर देकै सोच्चण की कोशिस करैं अक आज का हरियाणा के सै? न्यों तै कदे देश मैं नालन्दा अर तक्षिला मैं दूसरे देसां के लोग पढ़ण आया करदे फेर आज कड़ै सै ओ नालन्दा? आज का बिहार कित खड्या सै? हरियाणे मैं मनै दीखै सै अक आड़ै जुबान की भाषा का विकास तै होए नहीं लिया सै। आड़ै तै ईब ताहिं लठ की भाषा चालती आई सै, आज बी चालै सै अर बेरा ना और कितने दिन चालैगी? सुरड़ेपन तै, फुहड़पन तै जै कोए नेता कै अफसर रहवै तै न्यों कहवैंगे अक भाई कति ऑरिजनल सै। अपने पुराने रीति रिवाजां पै न्यों का न्यों टिकरया सै। हरियाणवी शिक्षा नै नौकरी तै दिवादी पर शिक्षित अर सभ्य माणस तै कोण्या पैदा करया। इसनै पैदा कर्या अधखबड़ा माणस। ये अधखबड़े माणस कई नेता होगे अर अफसर बणगे। काम चलाऊ, लंगड़ी लूली अर अधखबड़ी शिक्षा पनपी हरियाणा मैं। माणस नै माणस बणावण आली अर सूहर सिखावण आली, तर्क शक्ति बढ़ावण आली शिक्षा तै दूर-दूर ताहिं बी ना टोही पावन्ती आड़ै।
इसी कल्चरल बैकवर्डनैस का जीता जागता सबूत सै महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय। जिस दिन तै इसकी नींव धरी गई है उसे दिन तै यो पहलवानां का खाड़ा बणाकै छोड़ दिया। या लाइफ साइंसिज बणती बणती आज की बिचारी यूनिवर्सिटी बणा दी शेरां नै। आड़ै च्यार पांच पोस्ट सैं - पीएटू वायस चान्सलर, इस्टेबलिस्मैंट की शाखा का ए.आर., सीक्रेसी का ए.आर. अर दो एक और। इन पांच छै पोस्टां पै हर कौम के भाइयां नै कब्जा करकै अपनी अपनी कौम का अर यूनिवर्सिटी का सुधार करण के सपने देखे पर पूरे नहीं होए। फेर बी शेर जात्यां की कोली भरे बैठे सैं। आड़ै पहला वायस-चान्सलर आया बतरा साहब फेर सरकार नै उसकी टर्म पूरी नहीं होण दी। फेर डा. जे.डी. सिंह पी.वी.सी. बणकै आया। उसनै अपणा लठ पूरी यूनिवर्सिटी पै घुमाया अर बखत आवण तै पहलमै सरकार नै उसपै अपना लठ घुमा दिया। भाई नै बी टांडा टीरा ठाकै जाणा पड्या। फेर हरद्वारी लाल जी पधारे। उननै लोग खूब नचाये। सरकार नै ओ खूब नचाया अर सरकार अर हरद्वारी लाल दोनूं कचहरी नै नचाए। बीच मैं जे.डी. गुप्ता जी आये। उननै अपने करतब दिखाये। एस.एन. राव जी बी किमै सेवा कर पाये। हटकै हरद्वारी लाल जी नै फेर आकै पैर जमाये। राम गोपाल जी बी साल डेढ मैं तार बगाये। फेर कमान ले. जे.सी. अग्रवाल ताहिं दी अर अधम बिचालै खोस ली। फेर ब्रिगेडियर साहब का नम्बर आया इननै बी जमकै गुल खिलाया। एकाध टीचर इसा लाया जिसनै आज ताहिं नहीं पढ़ाया। तीसरे साल मैं बान्ध इनकै बी ला दिया था सरकार नै। फेर विवेक शर्मा जी आये। उस ताहिं ताहवण खातर छात्र बी भड़काये अर दूसरे तीर बी चलाये। कोर्ट कचहरी मैं जाकै पैंडा छुटवाया। फेर कौशिक साहब नै लगाम सम्भाली अर अपणा फौजी डण्डा घुमा दिया। अधम बिचालै सरकार नै फेर खूंटा गाड दिया अर खेमका साहब रजिस्ट्रार बणा दिये। जंग जारी सै।
सवाल यू सै अक चाहे कोए बी सरकार रही हो; सारी सरकारों का एकै सा ब्यौहार क्यों सै? चाहे किसा कसूता बुद्धिमान माणस इस वायस चान्सलर की कुर्सी पै आ बैठै उसका तौर तरीका एकै ढाल का क्यों रहया? उसनै अपणा लठ खूब घुमाया अर जिब सरकार नै लठ घुमाया तै चिल्लाया। दोनूआं की लठ की भाषा क्यों? आड़ै आकै जुड़ै सै ओ कल्चर अखरने का सवाल। हरियाणा नै तरक्की तै करली आर्थिक स्तर पै पर कल्चरल स्तर पै तै न्यों का न्यों पुराना खरना सै। अधखबड़े माणस, लठमार भाषा, झोटे आली गस, राज की ताकत का नसा ये सारी मिलकै आज का नजारा पेस करैं सैं। जै यूनिवर्सिटी मैं अर हरियाणा मैं बदलाव ल्याणा सै तै पहलम इस पुराने खरने नै बदल के आधुनिक, उदारवादी, प्रगतिशील खरने का विकास करना होगा। पर करैगा कूण?
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लड़ाई ही लड़ाई

लड़ाई ही लड़ाई
थामनै कई ढाल की लड़ाईयां के बारे में पढ्या होगा, सुण्या होगा अर देख्या होगा। घर मैं लड़ाई किसे ना किसे बात पै आपां रोजै करां सां। कितै मां बेटे की तकरार, किते भाई भाईयां मैं मारममार, कितै मुसलमानां पै होन्ते वार, कितै देवर भाभी मैं पड़ै सै दरार। बस बुझो मतना। फेर हिन्दुस्तान मैं एक न्यारे नमूने की लड़ाई शुरू होती दीखै सै। या किसी लड़ाई सै बेरा ना? संसद तै बाहर तै कांग्रेस अर भाजपा एक दूसरे के खून की प्यासी दीखै सै, एक दूसरे की खाट खड़ी करण मैं कसर नहीं छोड़ती फेर संसद मैं दोनूआं की एकै भाषा, एकै राग लागै सै। एक पाछै एक आवण आले विधेयकां - बीमा विधेयक, महिला आरक्षण विधेयक, पेटैंट विधेयक पै तै इन दोनू पार्टियां की गजलोट हुई दीखै सै। पर बीमा आले विधेयक पै भाजपा अर आर.एस.एस. मैं लड़ाई छिड़गी। बेरा ना या दिखावटी सै अक या असली सै? दूसरे कान्हीं अकाली दल मैं बादल अर टोहरा नै हथियार पिना लिये। छूट छुटावण करवाणिये अपने नम्बर बणावते हांडैं सैं। इनका यो बी नकली सौदा सै अक असली सै बेरा ना? एक और चाला देख्या लोगां नै तै बाट थी अक जयललिता वाजपेयी का धुम्मा ठावैगी फेर उसनै तै आपणा ए मोर्चा तोड़ कै धर दिया। ईब डण्ड बैठक काढ़ण लागरी सै बेरा ना किसनै तोड़ैगी अर किसनै बणावैगी? मुलायम सिंह यादव नै कांग्रेस कै खिलाफ तलवार खींच ली अर कांग्रेस नै राबड़ी देवी पै तीर कमाण कर राख्या सै तीर बेरा ना कद कमान मां तै छूटज्या। बीजू जनता दल वाले आपस मैं ए कब्ड्डी घालरे सैं। बेरा ना चाण चक दे सी यो के होग्या? ये नये-नये पाले खींचगे। किसके पाले मैं कौण जा खड़या होगा कुछ नहीं कह्या जा सकदा। गिरगिट की ढालां रंग बदलते वारै कोण्या लान्ते। पहलम आली सारी कतार बन्दियां बदलती दीखै सैं।
इलैक्शनां की जंग कांग्रेस अर भाजपा बिचालै लड़ी गई। कांग्रेस नै राजस्थान, मध्यप्रदेश अर दिल्ली मैं फेर पैर जमा लिये। कैहवणिया तो न्यों बी कहवैं सैं अक या लड़ाई गंठे अर बम्ब के बीच लड़ी गई। पर असल मैं या लड़ाई महंगाई अर जनता के बिचालै लड़ी गई। भाजपा तै महंगाई के रथ पै असवारी होरी थी अर कांग्रेस नै जनता अपणे कान्ध्या पै ठारी थी। तुलसीदास नै भी कह्या सै अक रावण रथी था ज्यां करकै ओ रथ पै सवार था अर रघुवीरा विरथ थे। ऊंह धोरै किसे रथ थे। रघुवीरा तै बांदरां के अर भालुआं के दम पै लड़या था। पर उस लड़ाई मैं तै रथी हारया था अर विरथी जीतया था। म्हारे प्राचीन संस्कृति के वाहक तै बिना रथ के कोए बी लड़ाई कोन्या लड़ते। बेशक वे रघुवीरा के भक्त सै फेर लैक्शन की पाछली लड़ाई तै उननै रथ यात्रा की बदोलतै जीती थी। जै आडवाणी जी रथ पै सवार नहीं होन्ते तो दो सांसद आला यो सीमित सुखी परिवार इतना बड्डा कुणबा क्यूकर बणता? ईब या न्यारी बात सै अक इसतै म्हारी पुराणी संस्कृति गैल्यां खिलवाड़ हुया अक नहीं हुया? इबकै भी आडवाणी जी महंगाई के रथ पै सवार हो लिए। रथ तो रथै हो सै या बात न्यारी सै अक यो पहलड़े रथ बरगा टोयटा आला रथ नहीं था जिसकी तामझाम तै सौ कोस तै बी दीखै थी। पर इबके रथ मैं महंगाई भव्य थी। जिसी आडवाणी जी के रथ नै हा हा मचाई थी कुछ उसे ए ढाल की हालत इस महंगाई नै बणादी। फेर उस हा हाकार नै तो आडवाणी जी पै वोटां की बरसात करदी थी अर इस बर की नै चुनावी हार का तमगा दे दिया।
इस चुनावी लड़ाई पाछै इसा लागण लाग्या था अक ईब साचली लड़ाई शुरू होवैगी। महाभारत का युद्ध जणो तै हटकै नै लड़या जागा। पाले बंदी बदलैगी। नये मोर्चे बनैंगे। सरकारी मोर्चा टूटैगा अर नया मोर्चा सरकार बणावैगा। फेर सरकारी मोर्चा तै न्यों का न्यों सै हां बिचारी जयललिता का मोर्चा जरूर टूटग्या। लोग बाट देखैं थे अक वाजपेई जी आज गया कै काल गया। जयललिता जी तै न्यारा भला और कोण तोड़ सकै सै सरकारी मोर्चे नै? जार्ज साहब तै-समता बेशक टूटो पर भाजपा की सरकार बच ज्याओ - इस अभियान पै जोर तै मंडरे सैं। काम जार्ज ताहिं देश की रक्षा का सौंप राख्या फेर आण्डी रक्षा वाजपेई की सरकार की करण लागरया सै। समता पार्टी मैं कई जणे मंत्री बणन के नाम पै सिंगरे हांडैं सैं फेर नम्बर कोन्या आ लिया सै भाइयां का। वे बड़े दुखी सैं अक जार्ज अर नीतिश कुमार तै मंत्री होगे अर हम सूके के सूके राख राखे सां।
उननै दुख इस बात का भी सै अक वाजपेई जी आपणे तै तीन मंत्री बणा लिये अर बाकी सबनै भूलगे। बड़ा चाला कर दिया। साहब सिंह जी वर्मा नै भूलगे उस तांहि तै उननै अपणें हाथ तै चिट्ठी लिखकै मंत्री बणण का न्यौता दिया था। जै वाजपेई जी न्यों न्यौते निधारां मैं गड़बड़ करैगा तै जनता बिगड़े बिना नहीं मानैगी। फेर वाजपेई जी बी किस किस नै याद राखैं?
एक चीज समझ मैं कोण्या आई इस लड़ाई की अक लड़णा तै भाजपा अर कांग्रेस आई नै चाहिये था। पर ये दोनूं तै नेड़े नेड़े नै आवंते दीखैं अर भाजपा गैल्यां जिननै घी खिचड़ी रैहना चाहिए था वे भाजपा तै दूर होन्ते जावैं सैं, इसकै खिलाफ बोलैं सैं। 11 दिसम्बर की हड़ताल मैं कांग्रेस नै समर्थन करणा चाहिये था पर कोनी करया। जयललिता नै समर्थन करया अर बीजू जनता दल नै करया। संघ परिवार भी इन विधेयकां नै ले कै भाजपा सरकार कै खिलाफ आण डट्या मैदान मैं। इननै तो कठ्ठा रहणा चाहिये था आपणी परंपरा निभाणी चाहिये थी। पर ये आपस मैं लड़ण लागरे सैं। बीजेपी तै अनुशासन आली पार्टी बताई जा थी तो यो चौड़े सड़क पै ईब के होण लागरया सै? यो हो के रहया सै? या किसी लड़ाई सै? न्यों कहया करैं अक झोटे-झोटे लड़ै अर झाड़ां का खोह। इन राजनेतावां नै या जनता ईब झाड़ बोझड़े समझनी छोड़ लेनी चाहिये। जनता रैफरी बण कै इस सारी लड़ाई नै देखण लागरी सै। जनता की रैफरसिप बड़े बड़यां नै रैफरसिप सिखा दे सै फेर भाजपा, कांग्रेस, मुलायम, कांशी अकाली, लालू अर जयललिता किस खेत की मूली सैं? देश की जनता अपणे अनुभव तै सीखण लागरी सै अर एक बख्त इसा जरूर आवैगा जिब जनता की राजनीति करणियां की जीत जरूर होगी।

मंगलवार, 18 जुलाई 2017

मरने आले मर गए नेक दिखायी राह


पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के देवराडा गांम का जिकरा सै। घटना बेसक थोड़ी पुराणी सै, पर दांव साच्ची सै। यो गाम एक ईसी सड़क के बगल मैं बसरया सै जो नदी के कान्ठै जाकै खतम होज्या सै। इस नदी पै कोए पुल नहीं सै अर नदी के दोनूं कान्हीं के लोग पाछले कई सालां तैं नदी पै पुल बणावन की मांग नै लेकै आंदोलन करते रहे सैं। नदी पार के उन ग्रामीण लोगां की जिन्दगी और बी मुश्किल होज्या सै जिब उननै किसे बी सड़क पै पहोंचण की खातर मीलां चालणा पड़ै सै। इसके बादै कितै जाकै 150 किलोमीटर दूर गोरखपुर पहोंच पावैं सैं जो इस एरिया का मेन रेलवे जंक्शन सै। पाछले छह साल तै लाल जी मिश्र नामक ग्रामीण अर उसके साथी पुल की मांग तै जोर लारे सैं। हर मौके पै प्रशासन झूठे वायदे करकै दबाव बणाकै बाबा जी की भूख हड़ताल खतम करवान्ता रहया। बीते साल खासतौर पै ठाड्डी बरसात होवण के कारण ग्रामीणां की मुसीबत और घणी बधगी। इस करकै उननै 28 सितम्बर 2003 नै नदी के कान्ठे पै एक मंच बणाया अर हटकै भूख हड़ताल शुरू कर दी। मंच पै एक बैनर लाया था जिसपै लिख राख्या था - ‘जन सेवा समिति’।
च्यार अक्टूबर नै रात नै आठ बजे पाछै जिला मजिस्ट्रेट अर पुलिस अधीक्षक पुलिस बल की साथ उड़ै पहोंचगे अर फेर डोरे गेरे लालजी मिश्र भूख हड़ताल खतम कर दयो। जिब बाबाजी नहीं मान्ने तो प्रशासन अर पुलिस अपणे असली रंग मैं आ गए अर बल प्रयोग करणा शुरु कर दिया। इस क्षेत्र मैं बिजली नहीं पहोंचली ईब ताहिं। नदी के कान्ठे पै एक दुर्ग पंडाल बण्या औड़ सै जड़ै जेनरेटर तै रोशनी का इंतजाम कर राख्या था अर पंडाल धोरै आच्छी खासी भीड़ थी। पुलिस नै जेनरेटर बंद कर दिया अर अंधेरे मैं ऐ लाल जी मिश्र नै जोर जबरदस्ती उड़ै तै ठावण की हरकत करण लागे। उड़ै जो युवक हाजिर थे उननै इसका विरोध करया। पुलिस हरकत मैं आगी। लाट्ठी बरसण लाग्गी। इस भगदड़ मैं पुलिस नै एक दम नजदीक तै च्यार फायर करे। एक 12 साल का बालक जो उड़ै मूंगफली बेच्चण लागरया था कै गोली लाग्गी अर उसनै उड़ै ए दम तोड़ दिया। एक दूसरा युवक जो अपणी बाहण तै मिल्लण फेट्टण आया था, कै बी गोली लाग्गी। उस ताहिं घायल अवस्था मैं तड़फण की खातर सड़क पै छोड़ दिया गया। थोड़ी सी हाण तड़प कै उसनै बी दम तोड़ दिया उड़ैए। एक तीसरा युवक भी इसे ढालां मरग्या। चौथा माणस जिसकै गोली लाग्गी थी ओ लहूलुहान हालत मैं घर नै ठाकै लेगे फेर देर रात नै उसनै भी दम तोड़ दिया। पुराना राज गया था अर नया राज आया था। उड़े के सांसद जो बीजेपी का सै, नै इब संसद फंड तै पुल निर्माण का वायदा करया सै। सीएम नै बी सख्ती तै कार्रवाई करकै जिला मजिस्ट्रेट अर जिला पुलिस अधीक्षक सस्पैंड कर दिये अर गोली चलावण के जिम्मेदार कांस्टेबल की गिरफ्तारी करवाई सै।
रेशमा अपणे पति खजांची गेल्यां एक झोंपड़ी मैं रहवैं सैं। रेशमा की बीमारी की खबर सुणकै उसका भाई राम मिलन कुछ मिनट पहलम रेशमां के घरां आया था। रेशमा की विधवा मां उड़ैए थी। वे बहोत गरीब सैं अर डोम अनुसूचित जाति के सैं। उन धोरै कोए जमीन नहीं सै अर वे बांस की टोकरी बणा-बणा कै अपणा गुजारा करैं सैं। उन धोरै किसे का बी राशन कार्ड नहीं सै अर अपणे पीहर मैं ए सै। युवावस्था मैं पहोंचण तै पहलमै वा विधवा होगी। जो 12 साल का बालक नंदू गुप्ता मारया गया वोहे था। मूंगफली बेच्चण बरगे छोटे मोटे काम करकै घर के साहरा लारया था। और भी जितने लोग इस गोली कांड मैं मारे गए वे अर उनके परिवार का कोए बी दूसरा जन पढ़या लिख्या नहीं सै।
ईब सवाल यूं सै अक वे म्हारे सांसद जी अपणे सांसद फंड मां तै इस काण्ड तै पहलम ओ पुल नहीं बणवा सकैं थे के? मजिस्ट्रेट अर पुलिस अफसर नै उड़ै रात नै जावण की के एमरजैंसी आगी थी? के उन लोगां की पुल की मांग करणा गलत मांग थी? उनपै गोली क्यूं चलाई गई? फेर बी एक बात तो तय सै कि जो काम ये च्यारों माणस जिन्दा जी नहीं करवा पाये, अपणी शहादत दे कै जरूर करवा पावैंगे अर उस गुहांड की जनता इननै ताउमर याद राखैगी।








थम कदसिक सोच्चोगे मेरे बीरा!


विश्व व्यापार संगठन की दाब मैं म्हारे देश मैं लागू करी गई कृषि नीतियां के कारण हरियाणा के किसान बर्बाद होवण लागरे सैं। फांसी खाकै, सल्फास की गोली खाकै, भूख अर बीमारी करकै ज्याण खपावण लागरे सैं। जिब कर्जा उल्टा नहीं हुया तो बैंकां नै किसानां की जमीन की खुली नीलामी का एलान कर दिया। पाकिस्तान तै 12 लाख टन का आयात करया गया जिस करकै भारत का चीनी उद्योग चरमरा गया अर सरकार का ब्यौंत गण्डे की कीमत का भुगतान करण का बी कोण्या रहया।
खेती जगत मैं सार्वजनिक निवेश पाछले एक दशक मैं 33 प्रतिशत घट कै 23 प्रतिशत रैहग्या अर पहली पंच वर्षीय योजना मैं कृषि क्षेत्र का 34.5 प्रतिशत अलाटमैंट का हिसाब ईब बस 18 प्रतिशत रहग्या। डंकल प्रस्ताव पाछै अमीर देशां की दाब मैं भारत मैं सब्सिडियां मैं भारी कमी कर दी गई। सरकार किसानां नैं न्यूनतम समर्थन मूल्य देवण तै अर इस कीमत पै सरकारी खरीद करण तै भी मोक मारगी। इसकी साथ-साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली का भी भट्ठा बिठा दिया। साल 2000 मैं जड़ै जापान मैं 72.5 प्रतिशत, कोलम्बिया मैं 54 प्रतिशत, दक्षिणी कोरिया मैं 61 प्रतिशत, यूरोप मैं 37 प्रतिशत, चीन मैं 34 प्रतिशत, अमरीका मैं 29 प्रतिशत, पाकिस्तान मैं 26 प्रतिशत कृषि क्षेत्र ताहिं सब्सिडियां दी गई उड़ै भारत मैं सबतै कम 3 प्रतिशत सब्सिडी दी गई। म्हारी किसानां की हितैषी सरकार। कृषि उत्पादन पै इस असमान लागत के चालते दुनियां के बाजार मैं भारत का निर्यात 1996 मैं 6.83 अरब डालर प्रति वर्ष तै घटकै 1999 मैं 5.97 अरब डालर रैहग्या। 64 प्रतिशत लोगां नै रोजगार देवण आले कृषि क्षेत्र का देश के सकल घरेलू उत्पाद का हिस्सा 34.5 प्रतिशत तै घटकै 18 प्रतिशत रैहग्या। सौका जोड़ यो सै कि आयात करकै फसलां के भाव गिरगे, कृषि मैं उत्पादन लागत बधगी, कृषि मैं बचत घटगी अर इस करकै किसानां पै करज का बोझ बढ़ता जावण लागरया सै। खाद, डीजल, कीड़े मार दवाई, बीज, बिजली अर सिंचाई के रेटां मैं बिना लगाम की बढ़ोतरी अर प्राकृतिक आपदावां के कारण किसानां की आर्थिक हालत तेजी तै बिगड़ती जावण लागरी सै। वी.पी. सिंह की सरकार के बख्त का डी.ए.पी. का कट्टा 180 रुपइये की जागां 450 रुपइये, यूरिया का भा 117 रुपइये की जागा 250 रुपइये अर 5 रुपइये प्रति लीटर आला डीजल 20 रुपइये लीटर हो लिया। दूसरे कान्हीं कपास, गण्डा, बाजरा, ग्वार अर सरसों के भा पाछले के मुकाबले मैं कम होगे। 1990 मैं 10 हजार रुपइये ताहिं के कर्जदार किसानां ताहिं 13 हजार करोड़ रुपइये के कर्ज का अन्दाजा लाया गया। ये कर्जे माफ कोण्या करे। दूजे कान्ही पाछले साल यू.टी.आई. घोटाले मैं लूट्या गया 11,500 करोड़ रुपइया म्हारे प्यारे बाजपेई जी की सरकार नै ओट लिया। गन्डे का बकाया देवण मैं भी हांगा लागै सै। सरकारी अर सहकारी बैंकां की किसानां ताहिं कर्ज देवण तै इन्कारी के चालते मझोला अर गरीब किसान, खेत मजदूर अर ग्रामीण कारीगर सूदखोरां ताहिं 24 रु. तै 60 प्रतिशत तक का वार्षिक ब्याज पै कर्जा लेवण नै मजबूर सैं। इननै उल्टा करण का ब्यौंत किसका सै? जमीन नीलाम करण के फैसले होगे थे पाछै सी। वारंट तो बहोतै किसानां के कट लिए। सिरसा मैं 400 किसान गिरफ्तार करे गये थे कर्जा उल्टा ना करण के कारण अर फूलका गाम का 72 साल का किसान बीरबल 31 दिन जेल मैं रैहकै दम तोड़ग्या बताया। सिरसा जिले के तखतमल गाम के 25 बरस के नौजवान किसान जसपाल सिंह नै इसे कर्जे करकै आत्महत्या करनी पड़ी बताई। हरियाणा को-आप्रेटिव सोसायटीज एक्ट की धारा 184 मैं सै यो प्रावधान कि जो कर्जा वापसी नहीं करै, उसनै ठाकै जेल भेज द्यो। टाटा बिड़ला बरगे अमीरां नै बैंका धोरै 65000 करोड़ रुपइये का कर्ज लिया अर ईब देन्ते ना। उनके खिलाफ तो कदे वारन्ट जारी नहीं करे गये। क्यूं? इस क्यूं का जवाब टोहवण खातर थोड़ा सोचना पड़ैगा। सोचण मैं थामने परहेज सै मेरे बीरा।
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देखियो के होगा ?


आजकाल पूरी दुनिया आर्थिक मंदी के दौर म्हं सै। दो हजार म्हं विकास की वृद्धि की दर 4.2 फीसद थी। फेर अनुमान सै अक दो हजार एक म्हं या वृद्धि दर 2.4 रहवैगी। आर्थिक सहयोग तथा विकास संगठन (ओईसीडी) के 29 देशां म्हं या वृद्धि दर एक फीसद रैहन्ती बताई। गैल की गैल विश्व व्यापार की वृद्धि दर म्हं भारी गिरावट आई सै। सन् 2000 म्हं या दर 13.4 फीसदी थी फेर 2001 म्हं या सिर्फ 3.5 फीसदी रैहगी। ग्यारह सितंबर की घटनावां पाछै तो यो मंदी का दौर और भी गहरा होन्ता दीखै सै। अर ये अमीर देश गरीब देशां पै बोझ गेरण की पूरी तैयारी म्हं दीखै सै। इन गरीब देशां की जनता की फिरकी पहलम्हं बणरी सै फेर आण आले बख्तां म्हं तो और भी बुरा हाल हो ज्यागा। या बात इन गरीब देशां की गरीब जनता कै तो समझ मैं आगी फेर इन गरीब देशां की अमीर जमात कै या बात घाट जंचै सै अक उनके महलां पै भी ये अमीर देश बाज की ढालां झपटा जरूर मारैंगे। पूरी दुनिया म्हं जो लोग इन अमीर देशां के अमीर मालकां की पैंतरेबाजी नै समझगे वे इनकै खिलाफ लड़ण की त्यारी म्हं भी जुटरे सैं। टीना अर टीपा का जंग जारी सै। टीना का मतलब सै देयर इज नो आल्टरनेटिव मतलब कोए विकल्प नहीं सै अर टीपा का मतलब सै देयर इज पीपुल्स आल्टरनेटिव मतलब लोगां धोरै इस क्रूर दुनिया का विकल्प सै।
आज की दुनिया म्हं विकास का जो तरीका इस्तेमाल होरया सै उसतैं अमीर और अमीर होन्ता जावण लागरया सै अर गरीब और बी गरीब होवण लागरया सै अर कुछ निरभाग बीच म्हं ए हिचकौले खावण लागरे सैं। अमरीका के विकास के मॉडल की दो खास बात सैं। विकास की तासीर इसी सै अक इसतै बेरोजगारी बधै सै। जितणा विकास फालतू जितनी तरक्की फालतू उतनी बेरोजगारी फालतू। दूसरी खास बात इस मॉडल की या सै अक एक देश बेरोजगारी की दर 3.9 फीसदी थी फेर दिसंबर के आन्ते आन्ते या 5.8 फीसदी पै पहोंचगी। मानव विकास रिपोर्ट 2001 के हिसाब तै दुनिया की आबादी के दस फीसदी सबतै गरीब तबके की आमदनी सबतैं धनी दस फीसदी की आमदनी के सिर्फ 1.6 फीसद के हिस्से जितनी सै। अमरीका के दस फीसदी हिस्से लोगां की कुल आमदनी दुनिया की सबसे गरीब 43 फीसदी आबादी (करीब दो अरब लोग) की कुल आमदनी तै भी फालतू सै। दुनिया के बीस तै फालतू देशां का 1999 का मानव विकास सूचकांक, 1995 के सूचकांक तै भी तले चाल्या गया। इन मां तै दस देसां के मामले मैं तो यो सूचकांक 1985 के सूचकांक तै भी तलै चाल्या गया। इस करकै तीसरी दुनिया म्हं रहवण आली घणखरी जनता बढ़ती गरीबी अर बदहाली के बोझ तलै पिस्सण लागरी सै। विज्ञान अर प्रौद्योगिकी नै इतनी तरक्की करली अक पूरी दुनिया की घणखरी जनता की जीवन स्तर ऊपर ठाया जा सके सै फेर इस पूंजीवादी समाज व्यवस्था के उत्पादन के संबंध विज्ञान की इस सच्चाई के साहमी दीवार बणकै खड़े सैं। इतना ए नहीं ये समाज के संबंध मुनाफे की अपनी लुटेरी तलाश म्हं म्हारी इंसानियत नै हैवानियत म्हं बदलण लागरे सैं। म्हारे विकास की इस अमानवीय प्रकृति अर बाजार व्यवस्था करकै दुनिया पै संकट के बादल छावण लागरे सैं अर उनके दुख दरद बधण लागरे सैं अर लोग राधा स्वामी, चन्द्रा स्वामी, मुरारी बापू के चरणां म्हं अपणे दुख दरदां के खातमे की खातर लागरे सैं। फेर उन धोरै इस क्रूर समाज व्यवस्था का इलाज कोण्या। वे तो इसका जिकरा बी कोण्या करदे। इस विकास के ढांचे म्हं गड़बड़ के कारण विकसित अमीर देसां अर तीसरी दुनिया के विकासशील गरीब देसां के बीच का संकट दिन ब दिन गहरा होन्ता जावण लागरया सै। इन अमीर देसां का यो हमला म्हारी आजादी अर आत्मनिर्भरता पै कसूती चोट करण लागरया सै। विश्व पर्यावरण की ताहिं कसूते खतरे पैदा कर दिये इसनै। ये देश अपनी सेना के ताकत के दम पै अर अपनी तकनीक के दम पै तीसरी दुनिया के देसां का गल घोटण लागरे सैं अपणी अपनी ऐश की खात्तर। इन देसां के माल खजाने भरे जावें सैं अर गरीब देसां के खजाने खाली होन्ते जावैं सैं। देखियो के होगा?
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तावल़ा सो बावल़ा मेरे बीरा!

एक बर की बात सै अक एक महावत एक राजा कै एक हथणी पै नौकर था। फेर ओ सारी हाण हथणी की देखभाल मैं लाग्या रहन्ता अर हथनी नै इसे ढाल राखता जणों तै वा हथणी उसकी अपणी औलाद हो। कई लोग अर लुगाई उसका यू जनून देखकै उसनै जनूनी बी कहया करदे अर नफे, सत्ते अर फत्ते तो उसनै पागल बी कह दिया करदे।
एक दिन के हुया अक वा हथणी क्यूकरै खुलगी अर भाजदी गई अर बण मैं भीतर चाली गई। महावत नै तो तड़कैं ए उठकै देख्या तो हथणी कोण्या दीखी। न्यून देखी, भीतर देखी, बाहर देखी, बाग मैं देखी, जड़ कितै नहीं पाई। बहोत दुखी हुया महावत। गैल्यां उसनै चिंता होई कि मालिक खाल तारैगा वा न्यारी।
महावत नै डरते डरते से नै मालिक ताहिं बताया कि हथणी तो भाजगी बणां मैं। सुनते की साथ मालिक का पारा तो सातमें आसमान मैं गया। महावत नै भतेरे हाथ पां जोड़े कि इसमैं मेरा कोए दोष नहीं सै। फेर मालिक तो आखिर मालिक ठहरया। ओ उसकी बात क्यां नै सुणै था। उल्टा उसनै महावत पै इल्जाम ला दिया कि उसनै हथणी बेच खाई अर ईब बात बणावै सै। न्यों भाज कै आज ताहिं नहीं गई हथणी। महावत कै और भीतरले मैं जा कै लागी। मालिक फेर बोल्या - थारे बरगे गरीब गुरबा लोग अमीरां के न्योंए कान काट्या करैं। पर मैं अपणे कान कति नहीं कटवाऊं तेरे पै। मालिक नै आगा पाछा कुछ बी ना देख्या अर महावत तै बिचारा पढ़ण बिठा दिया। उस ताहिं घणा जबर दंड सुणा दिया।
इन बातां नै बारां साल बीतगे। एक दिन महावत नै किसे काम तै बण मैं जाणां पड़ग्या। उसकी गेल्या और बी कई लोग लुगाई थे। उड़े उननै हाथियां का झुण्ड देख्या। उन हाथियां मैं वा हथणी बी थी। महावत नै वा हथणी सैड़ दे सी पिछाण ली। उसनै उसकै धोरै जाणा चाहया पर उसके साथियां नै ओ रोकणा चाहया फेर महावत कड़ै सुणै था उनकी। सीधा हथणी के धोरै चाल्या गया। महावत नै हथणी का नाम ले कै जोर तै रुक्का मारया। सुणण की वार थी हथणी नै महावत की आवाज पिछाण ली। वो झट भाज कै उसके धोरै आगी अर आकै बैठगी। महावत बी सैड़ दे सी उसपै जा बैठया। हथणी महावत नै जंगल मैं लेगी। उसनै अपणे बालक बुला लिये। महावत उन सबनै ले कै मालिक धोरै घर नै आग्या। मालिक नै देख्या तो जणों उसपै कई घड़े पाणी पड़ग्या। उसनै अपणी गलती का अहसास होग्या। उसनै महावत धोरै माफी मांगी अर बोल्या तूं तो बेकसूर था। मालिक नै अपणे मन मैं सोच्या अक तावला सो बावला। उसनै कसम खाई कि आज पाछै कदे तावल नहीं करया करैगा।
फेर आजकाल तो आपां चट मंगनी अर पट ब्याह करण की सोचां सां। म्हारे देश म्हं आजकाल सब क्यांहे नै बड़ी रफ्तार पाकड़ राखी सै। सारी ऊंचनीच सोच कै काम करण की आदतै कोण्या रही माणस मैं। यो तुरत फुरत आला मामला म्हारे देश का कदे ना कदे एक्सीडैंट करवा कै मानैगा। सोच समझ कै, झाड़ पूंछ कै, देखभाल कै, वोट दियो। भैंस खरीदां जिब धार काढ़ कै देखां, बुलध खरीदां तो खूड काढ़ कै देखां, हल खरीदां तो चांड कै देखां फेर वोट गेरण के बख्त या परख करकै गुण दोष के आधार पै चीज लेवण की आदत म्हारी कड़ै चाली जा सै? हमनै जो खूब बरत कै देख लिये, कति माठे, खूड मैं बैसकण आले बुलध घरां बांध कै के करांगे। देखिये कदे तावल तावल मैं इसे लोगां नै वोट दे दयो जो हमनै तमनै सबकै बेच कै खाज्यां अर फेर हम न्यों कहवां कि ओहले भाई। हमनै के बेरा था अक न्यों बणज्यागी?
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इस भारत का हाल देखियो के होगा ?


महात्मा गांधी नै कहया था अक भारत गांमां मैं बसै सै। आज के भारत मैं जड़ै पीस्से आले कसूती ढाल जगमगावण लागरे सैं, उड़ै असली भारत, भारत के गामां की के हालत सै? बेरा सै के? आज कै दिन ताहिं 20,000 तै फालतू किसान आत्महत्या करण नै मजबूर हो लिए अर 20,000 तै फालतू गामां के लोग भूख तै मरण लागरे सैं। 50 लाख तै फालतू छोटे अर हाशिये के किसान अपनी खेती की जोतां नै खोकै बेरोजगारों की जमात मैं शामिल हो लिये सैं। सैंकड़ों किसानां नै अपणा कर्ज चुकावण की खातर अपणे गुर्दे बेचने पड़े सैं। इन गरीब किसानां अर खेतिहरां ताहिं क्रेडिट (उधार) की उपलब्धता के बिना क्रेडिट कार्ड की व्यवस्था पूरे जोर शोर तै जारी सै। न्योंए वितरण प्रणाली के बिना राशन कार्ड बांटे जावण लागरे सैं। ईब ताहिं जो चीज म्हारे किसान बहुतायत मैं उपजाया करते उन चीजां का भी हम आज आयात करण लागरे सां। म्हारे गोदामां मैं करोड़ा टन अनाज न्योंए सड़ण लागरया सै पर देश की भूख मिटावणियां भूख तै मरण लागरे सैं। सोने पै सुहागा यो सै अक हम फेर बी इस अनाज का बहोतै रियायती दरां पै निर्यात करण लागरे सां। गिहूं अर चावल के निर्यातकां ताहिं हाल मैं 800 करोड़ रुपइयां तै फालतू की सब्सिडी हमनै दी सै। दूजे कान्हीं आये दिन 5000 बालक कुपोषण तै मरण लागरे सैं। खास बात या सै अक दुनिया भर के भूखे लोगां का एक तिहाई हिस्सा लगभग 84 करोड़ लोग म्हारे प्यारे भारत मैं रहवैं सैं।
1998 तै ईब ताहिं डीजल की कीमत दोगणी बधगी, यूरिया की कीमत 3,680 करोड़ प्रति टन तै बध कै 4,830 करोड़ रुपइये प्रति टन होगी, डी.ए.पी. की कीमत 8,300 रुपइये प्रति टन तै बधकै 9350 रुपइये प्रति टन होगी, एन.पी.के. के दाम 7,500 रुपइये प्रति टन तै बढ़कै 8,060 रुपइये प्रतिटन होंगे। 2000-2001 मैं कृषि क्षेत्र मैं बिजली की खपत 1721.8 करोड़ किलो वाट थी अर इसपै 27,000 करोड़ रुपइयां की सब्सिडी दी गई थी। नये अधिनियम के कारण या सब्सिडी खत्म कर दी जागी। 1991-1992 मैं किसानां ताहिं बिजली 12 पीस्से प्रति कि.वाट घंटे की दर तै दी जावै थी जो 2000-2001 मैं बधाकै 28.5 पीस्से प्रति कि.वाट घंटे कर दी गई। सब्सिडी हटाये पाछै कृषि क्षेत्र मैं बिजली का किराया कई गुणा बधैगा। इसतै पाणी खींचण आले 125.1 लाख पम्प सैटां पै असर पड़ैगा। दूसरे कान्ही उपज की कम कीमत मिलै सै किसान नै। 2002-03 मैं गिहूं का समर्थन न्यूनतम मूल्य 620 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करया जबकि उत्तर प्रदेश के किसानों नै मात्र 530 रुपइये प्रति क्विंटल के दाम मिले थे। इस तरियां फसलां के भावां के चक्कर मैं आये साल किसानां नै 1,16,000 करोड़ रुपइयां का घाटा होवण लागरया सै। स्रोत: रिसर्च फाउंडेशन फॉर टेकनोलॉजी एंड इकोलॉजी।
रही सही कसर विश्व व्यापार संगठन की दाब मैं पूरी होगी। दुग्ध क्षेत्र तै नियन्त्रण हटा लिया गया। यो 10 हजार लीटर तै फालतू प्रसंस्कृत अर रख रखाव करण आली डेरियां पै लाइसैंस की बाध्यता खत्म करण तै अर उननै मिल्क शेड क्षेत्र मुहैय्या करवावण तै शुरू हुया। दूध की सहकारी संस्थावां नै इस नीति के चालते गम्भीर संकट झेलना पड़रया सै। दूजे कान्ही बहुराष्ट्रीय निगमां की डेरियां नै भारत के बाजार मैं पैर पसारने शुरू कर दिये। कृषि क्षेत्र में 1996 मैं आवंटित निधि 8 प्रतिशत थी जो ईब घट कै 5.2 प्रतिशत रैहगी। हाल मैं कृषि अर ग्रामीण क्षेत्र के विकास खातर ‘लोकनायक जयप्रकाश नारायण फंड’ जारी किया गया फेर बजट मैं इस फंड की खातर एक बी पीस्सा नहीं दिया गया। लालची बहुराष्ट्रीय निगम म्हारे प्राकृतिक संसाधनां पै नजर गाडरे सैं। नीम, बासमती, हल्दी, भारतीय गिहूं की किस्म आदि तै बने उत्पादां पै, पेटन्ट की कोशिशें इसका जीता जागता उदाहरण सैं।
हरियाणा के गामां का नजारा बी कमोबेश इसा ए सा सै। देखियो आगै के बणैगी? आई किमै समझ मैं? गेर रै पत्ता गेर, हमनै के लेणा इन बातां तै।
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औरत नै ‘चिज्जो’ कहै...

औरत नै ‘चिज्जो’ कहै.. 
आज थोड़े से बी पीस्से आला अपणी पत्नी नै उत्पादन के औजार तै सिवा और कुछ बी नहीं मान कै चालदा। उस खातर तो वा इसी ए चीज सै ज्यूकर गुलाब जाम्मण कै संतरा। इस्तेमाल करण की चीज़ अपणी वासना मिटावण की चीज अर बालक पैदा करण की मशीन तै फालतू कुछ नहीं औरत उसकी नजरां मैं। उसतै थोड़े से फालतू पीस्से आले की मानसिकता और बी घटिया स्तर पै चाली जावै सै। अपणे खेत क्यार मैं अर घरां मैं अर कारखान्यां मैं अर कै भट्ठयां पै मजदूरी करणियां की बहूबेटियां का इस्तेमाल ओ अपणी मनमर्जी तै करना चाहवै सै। यू किसे चरित्र का माणस सै। असल मैं व्यक्तिगत संपत्ति की नींव पै टिके औड़ म्हारे समाज मैं लैंगिक अर वैवाहिक प्रश्न समाज की हरेक तबके की औरतां कै आगे बहोत घणी समस्याएं, उलझण अर परेशानी पैदा कर रे सैं। पुराने सामाजिक बंधन टूटण लागरे सैं। नये आदमी की साथ आदमी के नए आदर्शवादी संबंधां की मांग भी उभरती दीखै सै। असल मैं ये लैंगिक अर वैवाहिक समस्याएं पूरी सामाजिक समस्या के रूप मैं देखी जाणी चाहियें। यो औरत मरदां की नाबराबरी पै टिक्या समाज औरत नै उपभोग की वस्तु तै फालतू कुछ भी माणण नै तैयार कोण्या। असल मैं इस अन्यायकारी समाज की जागा न्यायकारी समाज, एक समतावादी समाज की खातर जो संघर्ष लड़या जागा वो संघर्ष ही वैवाहिक अर लैंगिक संबंधां के उद्धार की नींव सही सही ढंग की तैयार करैगा। इसकी खातर सार्वजनिक जीवन मैं औरतां की हरेक जागृति अर काम ताहिं खूबै होंसला हफजाई मिलणी चाहिये। सामाजिक जीवन के भांत-भांत के कामां मैं हिस्सेदारी करकै उनका घर के भीतर का कोल्हू के बुलध आला जीवन खत्म होवण की राही पड़ैगी। आज कै दिन देखण मैं आवै सै कि दुनिया के सबतै फालतू अमीर देशां मैं चहुंमुखी संकट पैर पसारता जावण लागरया सै, पुराने ढंग की शासन प्रणालियां खतम होवण लागरी सैं अर पूरा का पूरा सामाजिक ढांचा खतम होवण लागरया हो तै लैंगिक अर विवाह के संबंधां मैं विकृति भी जरूर पैदा होवैंगी अर मौज मस्ती की इस ढाल की इच्छाएं अर प्रेरणाएं बड़ी आसानी तै निरंकुश हो सकैं सैं। तो सवाल यू सै कि इसकी काट के सै? या जो अपसंस्कृति पूरे समाज मैं घुण करण लागरी सै इसका के राह लिकड़ै? असल मैं एक चाल्ला और होवण लागरया सै। औरत नै उसको असली आजादी कोण्या मिली सै। यो पीस्से आला हिस्सा चाहवै सै कि औरत नै आजादी मिलै अक वा उसकी इच्छापूर्ति करण नै आजाद हो। मतलब उसका ‘चिज्जो’ के रूप मैं इस्तेमाल करण मैं जो अड़चन आवैं सैं उनतै आजादी मिलजै। एक औरत की एक इन्सान के रूप मैं आजादी की बात कोए नहीं करदा। असल के प्रेम मैं व्यापक लैंगिक प्रेरणा का वैयक्तिक प्रेम के रूप मैं विकसित अर परिष्कृत होणा बहुत जरूरी पक्ष सै। प्रेम मैं दो जीवां का अर नये पैदा होवण आले एक तीसरे जीव का भी रिश्ता सै। इसे करकै उसका एक सामाजिक महत्व बी सै अर उसमैं समाज के प्रति एक कर्त्तव्य बी सै। म्हारे हरियाणे के अर किसे बी जागां के नौजवानां नै अपनी जिंदगी मैं आनंद अर स्फूर्ति की जरूरत सै। यू आनंद अर स्फूर्ति उसनै टी.वी. के लटके झटके अर इंटरनैट की पोरनोग्राफी नहीं दे सकदी। इनकी जागां जरूरत सै स्वास्थ्यप्रद खेलकूद की, तैरण की, बहोत ढाल के शारीरिक अर बौद्धिक कामां मैं युवा लड़के लड़की जितनी घणी हिस्सेदारी करैंगे, साथ मिल जुलकै पढ़ैंगे लिखैंगे इसतै जितना कुछ इन युवावां नै मिलैगा उसका हजारवां हिस्सा भी उननै इन लैंगिक समस्यावां पै बात करकै कै पोरनोग्राफी देखकै कोण्या मिलै। म्हारे बड़े बुजुर्गों नै कोषण की जागां उनकी स्थगित ऊर्जा का सकारात्मक इस्तेमाल करण मैं अपनी ऐतिहासिक भूमिका निभाणी चाहिए ना तो ईब्बी नाश होवण मैं तो कसर नहीं रैहरी बाकी आगै बी और नाशै होवैगा/

योह के बणी मेरे राम !

योह के बणी मेरे राम !
आदरयोग वेंकैया जी! सादर संवेदना। न अत्र कुशलम् न तत्रास्तु। इन लैक्शनां मैं म्हारी जो गत बणी सै उसनै थाम नहीं जाणोगे तो कौन जाणैगा। जोर का झटका लाग्या अर ओ बी सहज दे सी। फेर बी अभूतपूर्व तै भूतपूर्व बणण के बख्त मैं, म्हारे प्यारे अटल जी नै बहोत पते की बात कही सै कि हार जीत तो होन्ती ए रहवै सै। ऊपर आले नै बी कहवैं सैं हरेक बीज की जोड़ी बनाई सै ज्यूकर दिन की गेल्यां रात सै, खुशी की गेल्यां गम सै, अंधेरे की साथ रोशनी सै। हार की गेल्यां जीत सै। सही बात सै, उदय की अस्त बी सै। फेर इंडिया शाइनिंग की गेल्यां के सै? अर फील गुड का जोड़ीदार के होगा? खैर फीलगुड बेशक फेल होग्या हो फेर हम फेल थोड़े ना हुये सां। थामनै टायर्ड कै रिटायर्ड होवण की कोए जरूरत नहीं सै। ढाल ढाल की बात करैंगे लोग। अपणी पार्टी आले बी बेरा ना के-के कहवैंगे पर काल्ली माणण की कोए जरूरत नहीं सै।
हम गाम मैं हुक्के पै बैट्ठे बतलावां थे अक एक बात म्हारी समझ मैं कोण्या आई। आखिर यो जहाज क्यूं डूब्या? के कसर कड़ै सी रैहगी थी? आपां नै तो जुगाड़ करण मैं कोए कसर नहीं छोड्डी थी। इकलौते नेता का जुगाड़ बनाया, चुनाव तै पहलम का अर चुनाव तै बाद के गठबंधन का जुगाड़ था, मीडिया का जुगाड़ था, सर्वेक्षणां का जुगाड़ बठाया, साड़ियां का जुगाड़ अर गाड़ियां का जुगाड़ था, नेतावां अर अभिनेतावां का जुगाड़ करया, सास का जुगाड़ था बहु का जुगाड़ था। हैलीकाप्टरां, हवाई जहाजां, रेलगाड़ियां, कंप्यूटर, टेलीफोन, वीडियो सब क्याहें का कसूता नेगजोग बठाया था। असली अर नकली नामां तै विज्ञापनां का जुगाड़ बी था। विदेशी मूल के मुद्दे का पूरा का पूरा जुगाड़ भिड़ाया था। देश मैं स्थिरता चाहिए इस बात का पूरा प्रबंध करया। विकास की गेल्या मोदीत्व के योग का, त्रिशूल की गेल्यां तुर्की टोपी का, मंदिर की गेल्यां शाही इमाम के फतवे का जुगाड़ करया। बुश बरगे खिलाड़ियां गेल्यां बी जुगाड़ बिठाया था, महाजन बरगे महारथी म्हारी साथ थे।
इसी के कसर रहगी कि खड़े-खड़े कुर्सी खाली करणी पड़गी? किसे दावे, मुकदमें, शिकायत कै बहस की बी नौबत कोण्या आई। मनै इसा लागै सै अक म्हारे आंडी खिलाड़ी म्हारी पब्लिक गेल्यां जुगाड़ बिठाणा भूलगे। कमाल की बात सै म्हारे देश के ठेठ देशी नेता म्हारे देश की जनता गेल्यां जुगाड़ नहीं बिठा पाये अर गच्या खागे। या बात तो जग जाहिर सै अक या भोली सूरत आली पब्लिक घणा सा भरोसा करण लायक कोण्या। या शक्ल तै भोली दीखै सै पर सै परले दरजे की घाघ।
जितना कहणा होगा उड़ै हां कहवैगी अर हां कहणा होगा उड़ै ना कहवैगी। चुपचाप आंख मूंद कै दड़ मारकै पड़ी रहवैगी जणू तो कसूती नींद मैं सै। कार मैं किसे की मैं बैठेगी, दोफारे का भोजन किसे और के भंडारे मैं करैगी अर आखिर मैं वोट किसे और कै गेर देगी। बड़ी धोखेबाज जनता सै। म्हारी रैलियां मैं खूब आई, नाड़ हिला हिला कै हां भरी, म्हारे नारे लाये। फेर म्हारी खातर एक छोटी सी वोट देवण नै सिर कट्या उसका। एक वोट देवण मैं इतने नखरे दिखाये कि बूझो मतना। सरकार नै हरावण के खेल मैं बेरा ना इसनै के मजा आवै सै। आगली बरिया इन धोखेबाज जनता की खातर बी जुगाड़ बिठाणा पड़ैगा ज्यूकर एक बै अयोध्या का जुगाड़ बिठाया था अर दूसरी बरियां कारगिल का जुगाड़ बिठाया था। बिना कुर्सी रहया कोण्या जावै ईब। तावले से किमै जुगाड़ करो कि यूपीए मैं लठ बाज ज्यां अर म्हारे सूत आज्या। थोड़े लिखेनै ज्यादा समझियो। बाकी थाम खुद बहोत समझदार सो। कांग्रेस की गेल्यां यू लेफ्ट बी आग्या इसका खास जुगाड़ करणा पड़ैगा।

तमनै बेरा सै के ?

तमनै बेरा सै के ?
एक दिन नत्थे सिंह कै घरां फत्ते अर सत्ते बैठे बात करैं थे। सरला नत्थे की पत्नी अर कमला नत्थे की बाहण भी बातचीत मैं शामिल थी। बात मुसलमानां पै चाल पड़ी। नत्थे सिंह बोल्या - आज हिंदू-मुसलमान मैं दूरी बहोत घणी बढ़गी। या आच्छी बात कोण्या। सत्ते बोल्या - इन मुसलमानां नै तो पाकिस्तान के बाडर तै परले कान्हीं छोड़ कै आवणा पड़ैगा। नत्थे सिंह बोल्या - सत्ते या तेरी बात ठीक कोण्या। जो म्हारे देश के दूसरे देशां मैं जाकै बसरे सैं जै उनकै कोए धक्का मारण लागै तो तनै किस्सा लागै? अर ये मुसलमान तो कई पीढ़ियां तै म्हारे देश मैं बसरे सैं। सरला बोली - सत्ते तूं तै मेहर सिंह फौजी का फैन सै फेर उसकी बी मुसलमानां मैं गहरी दोस्ती बताई अर उसनै एक सांग हिंदु मुसलमान छोरा छोरी के ब्याह पै भी लिख्या था जिसमैं उसनै दोनुआं के ब्याह की हिम्मात करी थी। सत्ते बिफर पड़या। ना या बात झूठी सै। सरला बी करड़ी होकै बोली - झूठी क्यूंकर सै? एक बर मेहर सिंह फौजी की भाभी फेटी थी मनै उसनै बताई थी ये बात अर फेर फौजी मेहर सिंह स्मारक समिति बरौना नै एक किताब मैं या बात छापी। सत्ते बोल्या - मेहर सिंह तो हिंदू बिचारां का माणस था। कमला बोली - फेर हिंदू अर मुसलमान मैं यारी दोस्ती नहीं हो सकदी के? उनमैं ब्याह शादी नहीं हो सकदे के? अर मेहर सिंह नै जो गीत रागनी इस किस्से के बणावण मैं लिखे वे भी झूठे सैं के?
सरला नै एक बै फेर चोंहटकी भरी सत्ते कै अर बोली - फौजी की भाभी तो न्यों भी बतावैं थी अक ओ कसूता होक्का बिगाड़ था। जिसकै जान्दा उसका ए हुक्का पी लिया करदा। सत्ते तै ईब नहीं रहया गया अर बोल्या - भाभी इतनी गलत बात फौजी के बारे मैं कहना बहोतै गलत बात सै। वो इसा कति नहीं था। वो तै ठेठ जाटराम था। वो हरिजनां का हुक्का क्यूंकर पी सकै था? नत्थे बोल्या - या सरला बेरा ना उल्टी-उल्टी बात कड़े तै टोह ल्यावै सै। सत्ते बोल्या - ये बात तो चाहे साच्ची भी हो तो भी जंचण की कोण्या। कमला बोली - ईब थारे बरगे आडु.आं का कोए के कर सकै सै जो साच्ची बात नै भी मानण नै त्यार कोण्या। फत्ते बोल्या - विश्वास भी तै कोए चीज हो सै। म्हारे या साच्ची बात बी गलै कोण्या उतरै अक मेहर सिंह छुआछूत मैं यकीन नहीं कर्या करदा। म्हारा विश्वास तै यो सै अक ओ पक्का जाट था। सरला - तो ओ छुआछात के खिलाफ कोण्या हो सकता? जित ताहिं मनै बेरा सै चौधरी देवीलाल नै तो मुजायरां के हक मैं पूरा आंदोलन लड़या था। अर चौधरी चरण सिंह जिसनै जाटां का मसीहा कहवैं सैं उसके बालकां के ब्याह दूसरी जात्यां मैं हुए थे। फत्ते बोल्या - क्यूं झूठ भकाओ सो म्हारा चौधरी इस ढाल के काम होवण दे था के? सरला बोली - हाथ कंगण नै आरसी के अर पढ़े लिखे नै फारसी के। चौधरी अजीत सिंह नै एक चिट्ठी लिख कै बूझ ले अक उसकी बाहणा के ब्याह कित कित हुए थे सारा बेरा लाग ज्यागा। फते बोल्या - चिट्ठी के परसों रोहतक आवैंगे जिब बूझूंगा। अर जै ये बात झूठ पाई तो थारा जलूस काढूँगा। सरला बोली - बात तो म्हारी साच्ची सै बाकी हरियाणे के चौधरी औरतां का जलूस तै बेरा ना कद अर किस बात पै काढ़ कै खड़े होज्यां या बात न्यारी सै। यो जलूस तो तम म्हारा ऊं भी काढण लागरे सो। फेर एक बै बेरा जरूर पाड़ लिए। फत्ते कै बड़ा झटका लाग्या। उसके दिमाग मैं मेहर सिंह फौजी की जो छवि थी निखालस जाट की वा खिंड-भिंड होगी अर एक छत्तीस जात का हिमायती साहसी आ खड्या हुया जो मजहब मैं भी विश्वास नहीं करै था। इसे ढाल उसके दिमाग मैं चौधरी चरण सिंह की छवि मैं भी हलचल होगी अक उनके बालकां के दूसरी जात्यां मैं ब्याह क्यूंकर होण दिये।
हो सकै सै म्हारे थारे मां तै भी कइयां कै झटका लाग्या हो इन बातां के बेरा लागे पाछै। पर इस बात पै विचार जरूर करियो अक फौजी की पहली छवि बढ़िया थी अक दूसरी छवि बढ़िया सै? अर चौधरी देवीलाल म्हारा ताऊ भी मुजारयां के हकां खात्तर खूब लड़या था इसमैं भी कति झूठ कोण्या। ये तीनों व्यक्तित्व फौजी, ताऊ अर चौधरी चरण सिंह ये जात तै ऊपर उठे औड़ व्यक्ति थे तम चाहे मानो अर चाहे मत मानो।


पोटो काम खोटो

पोटो काम खोटो
वोटां का टोटा हो तै पोटो लियाओ। जिसनै भी यो मन्तर करया सै उसनै चाला पाड़ दिया। म्हारे आडवाणी जी तै न्यारा इसा चाले पाड़ माणस और कौण हो सकै था। इसे मन्तरां के वे सिद्ध सैं। अयोध्या आंदोलन का मन्तर भी आडवाणी जी टोहकै ल्याये थे। जन संघ की स्वर्ण जयंती पै उननै अयोध्या आले मन्तर का कितना गुणगाण करया अर बोले - यो म्हारे, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की पहचान बण्या अर इसनै भाजपा ताहिं कुर्सी दिवाई। आडवाणी जी नै बताया सै अक इस पोटो के बी कई फायदे सैं। पोटो होगा तै जनता नै लागैगा अक सरकार काम्मल ढाल आतंकवाद का मुकाबला मंडकै करण लागरी सै। इबै जनता के विश्वास कोनी हो लिया अक म्हारी सरकार आतंकवाद कै खिलाफ साचम साच लड़ै भी सै अक नहीं। ईब ताहिं तै जनता नै योहे देख्या सै अक आतंकवादी म्हारे विमान का अपहरण करकै कंधार मैं ले ज्यावैं सैं अर बदले मैं आतंकवादियां नै छड़वालें सैं। खुद म्हारा विदेश मन्तरी कंधार ताहिं जावै सै। जिस मौलाना मसूद अजहर नै जसवंत सिंह जी कंधार ताहिं छोड्डण गये थे ओहे ईब कश्मीर मैं आतंकवाद फलावण लागरया सै। कश्मीर के जिस आतंकवाद के बारे में भाजपा कह्या करदी अक एक बै कुर्सी थ्याज्या तो चुटकी बजाकै इस आतंकवाद नै खत्म कर देगी। सारे पाप्पड़ बेल कै देख लिए - लाहौर की यात्रा कर ली बस मैं बैठ कै, घाटी मैं युद्ध विराम करकै देख लिया, मुशर्रफ साहब को आगरे मैं न्योंत कै देख लिया, बुश ताहिं शिकायत की चिट्ठी लिख कै देख ली। फेर आतंकवाद टस तै मस नहीं हुआ। पोटो के साहरै भाजपा आपणा मर्द पना दिखाणा चाहवै सै। पोटो का विरोध करण आले विपक्ष नै आतंकवादियां का हिम्माती ठहराया जा सकै सै, जिस पै जी आज्या उस ताहिं देशद्रोही करार दिया जा सकै सै। जै विरोधियां ने देशद्रोह के कलंक तै बचणा सै तो पोटो का समर्थन तो करणा ए पड़ैगा। भाजपा कहवै सै अक पोटो मैं लोटो ना तो हम तमनै बदनाम कर द्यांगे। यो आच्छा तरीका?
इस पोटो के और बी कई फायदे सैं। जै यो पोटो होगा तो अयोध्या की जरूरत कोण्या रहवै फेर। अयोध्या विश्वहिंदू परिषद ताहिं छोड़ दिया भाजपा नै। भाजपा नै अयोध्या की जागां पोटो की कोली भरली दीखै सै उत्तर प्रदेश के चुनाव जीतण खात्तर। ज्यूकर अयोध्या के मुद्दे पै हिंदू वोट बटोरे थे न्योंए इस पोटो पै हटकै हमनै धोखा देवण की तैयारी से अर हम इतने आडू. सां अक धोखे मैं आवण ताहिं त्यार बैठे रहवां सां। पोटो पै भी जनता नै बांटण की पूरी त्यारी सै। उत्तर प्रदेश के चुनाव खात्तर भाजपा धोरै कोए मुद्दा नहीं सै। राजनाथ सिंह आरक्षण मां तै आरक्षण काढ़ के ल्याये सैं फेर ओ भी मुद्दा होन्ता जावण लागरया सै। विश्वहिंदू परिषद के नेता अयोध्या के विवादित परिसर मैं बड़गे थे बवाल खड्या करण खात्तर फेर वाजपेयी जी बोल पड़े अक इस ढालां तो वोट बधण की जागां घट ज्यांगी। वोटां का जबरदस्त टोटा सै ईबकै भाजपा मैं। ज्याहें करकै वोटां का टोटा दूर करण नै पोटो का लंगोटा थाम लिया दीखै सै आडवाणी जी नै।
इस पोटो के और बी कई फायदे सैं। मुसलमानां की इसके साहरै खूब खबर ली जा सकै सै। किसे भी संगठन का मैम्बर बता कै धरद्यो धार पै, कोए बूझनिया नहीं फेर। सिमी पै प्रतिबंध ला दिया अर इब रही सही कसर पोटो पूरी कर देगा। पहलम टाडा मैं भी अल्पसंख्यक ज्यादा धरे गये थे। पाछले नेगजोग तै इसे बात का इशारा करै सैं अक पोटो का शिकार भी मुसलमान फालतू होंगे। इस पोटो के तहत इन प्रैस आल्यां की भी नाड़ सीधी करी जा सकैगी। ये किसे नै गोलते ए कोण्या। इसे ढाल ये ट्रेड यूनियनां आले सैं जो घणी भों-भों करदे हांडैं सैं। देश बेच दिया निजीकरण का विरोध करो। पोटो मैं इनका भी सही इलाज करण का इंतजाम बताया। इन सारी ढाल के नमून्या ताहिं जेल के दरवाजे दिखाये जा सकैं सैं पोटो मैं। ईबकै तै आडवाणी जी इसी मन्तर ल्याये सैं जिसके फायदे ए फायदे सैं नुकसान तो एक बी कोण्या।

ईब तो जाग जाओ मेरे भाण-भाइयो!


गाम में सत्ते, फत्ते, नफे, सविता, कविता अर धापां ताई। बीते लैक्शनां म्हं नेतावां की झूठी साच्ची बातां नै सुणकै बहोत दुखी हुए अर आपस मैं बतलाये कि एक बर सारी दुनिया के, शिक्षा के, म्हारी आर्थिक हालत के, इस वैश्वीकरण के बाद के म्हारे विकास के, विदेश ब्यौपार के, मानव विकास सूचकांक, महिलावां की हालत, स्वास्थ्य रोजगार, कीमतां की बढ़ोतरी, ग्रामीण विकास आदि पै आंकड़े कट्ठे करकै ल्यावैंगे अर ग्राम सभा करकै उनके साहमी धरैंगे? सबनै अपणी अपणी जिम्मेदारी ले ली। ग्रामसभा हुई। चौपाड़ न्यूं खचाखच भरी थी। सबतै पहलम सत्ते बोल्या - सारी दुनिया नै मिलाकै सालाना आय सै 5120 डालर अर भारत मैं प्रति व्यक्ति सालाना आय सै 560 डालर। दुनिया मैं भारत का स्थान 162वां (29 देश भारत तै तलै सैं)। सुरता बोल्या - तूं ये आंकड़े कड़ै तै ल्याया? ये तो कोरी बकवास सै। सत्ते बोल्या - ये आंकड़े वर्ल्ड डैवलपमैंट इंडीकेटर-2003 तै ल्याया सूं। अर और सुणले सुरते - सबतै गरीब 20 प्रतिशत का राष्ट्रीय आय मैं हिस्सा सिर्फ 8.1 फीसद सै अर सबतै अमीर 20 प्रतिशत का राष्ट्रीय आय मैं हिस्सा 46.1 फीसद सै अर ये आंकड़े मानव विकास रिपोर्ट 2003 के सैं। कहवै तो रिपोर्ट बी ल्या कै दिखाऊं।
सरिता नै अपणी बात शिक्षा पर कही अर वा न्यों बोली - भारत मैं दुनिया की आबादी का 16.8 फीसद रहता है पर दुनिया के वयस्क निरक्षरां मैं तै 34 फीसदी भारत मैं सैं। 94 विकासशील देशां के शिक्षा सूचकांक मैं भारत का स्थान 76वां सै। तृतीयक (टरसरी) स्तर की शिक्षा मैं प्रवेश का अनुपात दुनिया भर मैं 23 फीसद सै अर भारत मैं यो 10.5 फीसद सै। सुरते फेर बोल्या - तूं कित तै ल्याई सै ये आकड़े? सरिता बोली - यूनेस्को की रिपोर्ट, एजूकेशन फार आल 2003-2004 मैं तै ल्याई सूं मेहनत करकै नै। अर सुणल्यो भ्रष्टाचार सूचकांक के हिसाब तै दुनिया के 102 देशां मैं भारत 71वें स्थान पै सै। सिर्फ 31 देश सैं जो भ्रष्टाचार मैं भारत तै भी आगे सैं? यू आंकड़ा ट्रांस्पेरैंसी इन्टरनेशनल की रिपोर्ट 2003 तै लिया गया सै। ईबी कोए शक सै कि सूरत सिंह जी इन आंकड़यां के बारे मैं?
कविता की बारी आई अर वो बोली - विदेशी ऋण का बोझ भारत पै 1998-99 मैं 9823 करोड़ डालर था जो 2003 जून ताहिं बधकै 10,960 करोड़ डालर पै पहोंच लिया। 1998 मैं 31 मार्च ताहिं देश के धनवानां पै बकाया कर 47,444 करोड़ रुपये था जो 2002 के 21 मार्च ताहिं बधकै 86,342 करोड़ रुपइये होग्या। ये सारे आंकड़े मनै आािर्थक सर्वे 2002-03 तैं कट्ठे करे सैं। कम तै कम म्हारे नेता जिब गाम मैं आवैं तो इन बातां पै उनका के कैहणा सै, हमनै बूझणा तो चाहिए। फत्ते कई बार का मसकोड़े मारै था, उसका नम्बर आया तो उसनै बताणा सरू करया - म्हारे बरगे 62 देशां के सूचकांक के आधार पै विश्वीकरण की कटारी चाले पाछे के विकास का जिकरा सुणल्यो। इन देशां मैं दुनिया की 84 फीसदी आबादी रहवै सै। 2001 मैं भारत का स्थान 49वां था अर 2002 मैं यो 57वां होग्या अर 2003 मैं यो 61वां होग्या। सुरते कै बेरा ना आज के होर्या था फेर बोल्या - सारी काट करोगे अक किमै अच्छी बात बी बताओगे? फत्ते बोल्या - पहलम म्हारी सुणले अर फेर तूं अपणी काम्मल बात भी बता लिये। हां तो भारत का विदेश व्यापार घाटा - 1885 करोड़ डालर सै अर यू एशिया का सबतै फालतू घाटा सै। मानव विकास सूचकांक के हिसाब तै 2001 मैं भारत का स्थान 173 देशां मैं 115वां था, 2003 मैं यू 127वां होग्या। देख्या म्हारे भारत की तरक्की का दौर।
फेर सविता का नंबर आया तो वा बोली - हो तो तमनै बहोत वार हो गई ये बात सुणतें फेर दो च्यार बात मेरी बी सुण ल्यो। हर 54 मिनट मैं एक महिला की साथ बलात्कार होवै सै, हर 26 मिनट मैं एक महिला की गेल्या जोर जबरदस्ती करी जावै सैं। जचगी मैं महिलावां की मृत्यु दर हर एक लाख जिंदा प्रसवां पै दुनिया भर मैं 400 अर भारत मैं 540 सै। म्हारे कम वजन के बालक जनमैं सैं 26 प्रतिशत पर दुनिया मैं ये 14 फीसद सैं। अपणे गाम मैं बी देख सकां सां महिलावां की जो हालत सै। आई ग्राम सभा कै किमैं बात समझ मैं कि नहीं? जिब ताहिं हर बैठक मैं हर हुक्के पै, हर घर मैं, हर पनघट पै इन बातां पै चरचा नहीं होगी इतनै म्हारी न्योंए खाल तारी जागी। इन बातां नै सब ताहिं पढ़कै सुणाइयो मेरे भाण अर भाइयों।
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सोमवार, 17 जुलाई 2017

जनता कर के सकै सै


रमलू अर सरिता घरां बैठके बात करैं थे सांझ कै। सरिता बोली राजस्थान के बारां जिले म्हं सुण्या सै कई बालक अर कई लोग-लुगाई भूख के कारण मरगे। रमलू बोल्या - ये झूठी बात सै। भूख तै भी कोए मरया करै। बीमार होकै तै दुनिया मरती देखी। सरिता बोली - ज्ञान-विज्ञान आल्यां की मीटिंग म्हं जिकरा था इस बात का। रमलू बोल्या - ये ज्ञान-विज्ञान आले बेरा ना कित-कित तै खोद कै काढ़ ल्यावैं सैं बातां नै। सरिता बोली - सुप्रीम कोर्ट का आदेश सै कि गरीबी की रेखा तै नीचे जीवण आले घरां की पहचान करी जा अर उन ताहिं कार्ड अर नाज दिया जा। सिर्फ अच्छे गुणवत्ता आले अनाज का ए वितरण करया जाना चाहिए। राष्ट्रीय वृद्धा पेंशन तै लाभ ठावण आले लोग लुगाइयां की पहचान करी जा अर हर म्हिने की सात तारीख तक भुगतान कर दिया जाना चाहिए। अन्नपूर्णा योजना तै लाभ प्राप्त करण आले व्यक्तियां की पहचान करी जा अर उन म्हं अनाज बाट्या जावै। आंगनवाड़ी (आई सी डी एस) योजना, राष्ट्रीय मातृत्व लाभ योजना अर राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना अर राष्ट्रीय लाभ योजना पूरी ढालां लागू करी जावै। सुप्रीम कोर्ट के आदेश अर लाभ प्राप्त करण आल्यां की सूची का अनुवाद राज्यों की स्थानीय भाषावां म्हं किया जावै। अर उनको ग्राम पंचायतां, विद्यालयां अर राशन की दुकानां पै प्रदर्शित करया जावै (ताकि सारे लोग यो सुनिश्चित कर सकैं कि उनका नाम सूची म्हं सै अक कोण्या)।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश नै दूरदर्शन अर आल इंडिया रेडियो के जरिये प्रचारित करया जाना चाहिए। ग्राम पंचायत काम के बदले अनाज योजना बनावै अर मजदूरी का भुगतान हर हफ्ते करया जावै। खेतिहर मजदूर, छोटे किसान, अनुसूचित जाति-जनजाति के लोग लुगाइयां ताहिं प्राथमिकता दी जाणी चाहिए। रमलू बोल्या - भागवान थोड़ा-सा सांस तै ले ले। एकै सांस म्हं मंडरी सै इसी-इसी भारया अर काम्मल बात बतावण। ये बात म्हारे गाम आल्यां ताहिं तो आज ताहिं नहीं पहोंची अक सुप्रीम कोर्ट का कोए इसा बी आदेश सै। सरिता बोली याहे तै कमी सै म्हारे गाम म्हं। हम न्यों सोचां सां कि म्हारे बांटे के कामां नै भी कोए और आकै करज्या। दिमाग पै जोर दे कै तो कति राज्जी कोण्या हम। हां तै म्हं न्यों कहूं थी कि यो सारा अनाज के बदले काम का प्रोग्राम ठेकेदारां के मार्फत कति नहीं करवाना सै। ग्राम सभा योजनावां की निरीक्षण अर सामाजिक जांच करैं। ग्राम सभा रिकाट की जांच करै अर भ्रष्टाचार के मामले रिपोर्ट करैं। रमलू तै फेर नहीं डट्या गया अर बोल्या - पंचायत कै साहमी ग्राम सभा का कूण आदमी बोलैगा?
सरिता नै चुटकी ली अर बोली - गाम आल्यां नै क्यों कोसै सै। पहलम तो तू अपणा ब्योंत देखै नै। सरपंच का याड़ी सै तों तो फेर उसकी सारी भूंड पै तेरै लकवा सा क्यूं मारज्या सै। सरिता बोली - पहलम सारी बात तै आच्छे ढालां समझ ले। सारी बात नहीं समझ म्हं आई तेरै तो तेरा सरपंच फेर झूठ बोल कै तेरी बोलती बंद करवा देगा। रमलू बोल्या - आज तै तों अपणी पूरी कसर काढ़ ले। सरिता बोली - सरकार ताहिं स्पष्ट निर्देश दिया गया सै अक वा गरीबी की रेखा तै नीचै रैहवण आले परिवारां की पहचान करण के स्पष्ट दिशा निर्देश तैयार करै। डॉ. एन.सी. सक्सेना को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करया गया।
जै वे या रिपोर्ट देवैं सै अक भुखमरी हुई सै तो मुख्य सचिव प्रशासन नै जिम्मेदार ठहरा सकै सै। रमलू बोल्या - जै कोए पंचायत अर कै सरकार यू कानून लागू ना करै तो जनता के कर सकै सै? सरिता बोली - जनता बहोत कुछ कर सकै सै। जै जनता कट्ठी होकै आवाज़ ठावैगी तो सुणाई जरूरी होवैगी। रमलू बोल्या - या जनता कट्ठी होवै ना अर यू कानून भी धरया रैहज्यागा।
पहलमे तो यू कानून समझाणा कड़ै आसान सै मेरे जिसे कम पढ़े लिखां पै। समझ बी आज्या तो आगै के करणां सै इसका बेरा ना। तनै बेरा हो तै बता दे। सरिता बोली - यो गाम के लोगां का अैहदीपना जिब ताहिं नहीं जावैगा इतनै के ये कानून तोड़निये काबू आकै देवैं सैं। सरिता उठ कै काम करण लागगी अर रमलू उठकै ताश खेलण चाल पड़या।




जानलेवा ‘ग्रेड फोर’

जानलेवा ‘ग्रेड फोर’ सत्ते, फत्ते, नफे, सविता अर कमला शनिवार नै फेर कट्ठे होगे। इतने मैं आईसीडीएस की बहन जी कमलजीत आगी। कमलजीत का मुंह सा उतररया था, होंठ सूकरे थे। कमला नै पहलम तो बहन जी ताहिं पानी प्याया फेर सते बोल्या - आज क्यूंकर उदास सी घूमण लागरी सो बहन जी? कमलजीत बोली - के बताऊं! वो नहीं सै धन्नू गडरिया। सते बोल्या - हां औ दूसरे पान्ने मैं। के होग्या उसकै। कमलजीत उसकै तो किमै ना हुया फेर उसके बालकां की बहोत बुरी हालत सै। कमला - हां एक छोरी जो सबतैं छोटी सै वा तै मरकै बच्ची सै। कसूते दस्त लागरे थे उसकै। वा मनै सेठी डाक्टर के फेटी थी। कमलजीत - पीस्से थे कोण्या अर लियाई उसनै। नफे - क्यूं ईब तै च्यार पांच भेड़ बी लोन ले कै पाली सै उसनै। ईबी इतना हाथ तंग क्यूं सै उसका? च्यार बालक सैं दो छोरी पांच साल तै बड्डी सैं अर एक छोरा एक छोरी पांच साल तै कम सैं। च्यारों बालकां कै कुपोषण सै। खाण नै सै कोण्या फेर भूख उननै सहज-सहज खावण लागरी सै। फते - जिब बहन जी थाम इसमैं के हाथ अड़ा ल्योगे? थाम तो बताए सको सो ना अक बालकां नै पौष्टिक खुराक द्यो। ईब उनके मां बाप देवैं ना देवैं या उनकी मरजी। इन ग्रेड फोर बालकां की सेहत ठीक करण ताहिं म्हारै धोरै कुछ बी कोण्या। उनके परिवार आल्यां की हालत खराब। तो इस सारे झंझट तै पैंडा छुटावण खातर म्हारी सीडीपीओबी न्यों कहदे सैं अक ग्रेड फोर मैं किसे बी बालक नै मतना दिखाओ। ईब मैं के करूं? दिखाऊं तो नौकरी मैं डांगर हांडैं अर ना दिखाऊं तो आत्मा कोण्या मानती। सविता - बात तो सही सै बहन जी। जै ऊक चूक होगी तो मर तो आंगनबाड़ी आली की आवैगी। फेर यू ग्रेड फोर के बला सै इसका मतलब तै हमनै समझा दयो। कमलजीत - जिब बालक नै पूरा खाणा नहीं मिलै तो उसका शरीर कमजोर होज्या सै, अर वो बीमारियां का मुकाबला भी नहीं कर पान्ता। इस कमजोर शरीर के च्यार ग्रेड सैं। ग्रेड एक, ग्रेड दो, ग्रेड तीन अर ग्रेड च्यार। जो बालक ग्रेड फोर मैं चाल्या जा सै उसका जिंदा बचना बहोत मुश्किल होज्या सै। सारे के सारे एक बै बोले - बहन जी जै ईसी बात सै तो हमनै बता हम के कर सकां सां। सरकार अर सरपंच तो पाछै देखांगे पहलम ओ ग्रेड फोर आला बालक क्यूंकर बचाया जा? कमलजीत - उस एक नै तो हम बचाल्यांगे फेर बाकी सात-आठ और सैं। उनका के बणैगा? सत्ते - उनका बी सोचांगे फेर पहलमै तै उस गडरिए आले बालक की ज्यान क्यूंकर बचै न्यों बता। कमलजीत - ग्रेड फोर आले नै तो अस्पताल मैं भरती करवावां अर एक-एक कट्टा गिहूं थाम पांचों उसनै दे दयो ना तो वे बाकी तीन बालक बी ग्रेड फोर मैं पहोंच ज्यांगे। पांचों मानगे गिहूं देवण खातर अर 50-50 रुपये कट्ठे करकै उननै उसके अस्पताल के खरचे ताहिं दिये। कमलजीत बहोतै राज्जी हुई। वा ग्रेड फोर आले बालक नै अस्पताल मैं लेगी उसका इलाज करवाया अर बाकी बालकां का कुपोषण भी चार-पांच म्हिने मैं ठीक होग्या। फेर कमलजीत कै चिंता थी अक ईब तो गिहूं दे दिये सत्ते हर नै फेर आगै? कमलजीत नै सरपंच तै बात करी अर पूरा किस्सा बताया अर कहया अक जै इन आठों बालकां नै ग्रेड फोर तै ग्रेड दो मैं लियावांगे तो थारे गाम का नाम होवैगा। सरपंच कै बी समझ आगी। उसने काम के बदले नाज स्कीम के तहत उन आठ घरां के लोगां ताहिं काम दिया जिसतै दो बख्त का चुल्हा उन घरां मैं ढंग तै जलण लाग्या। ईब सवाल सै अक कड़ै सैं सत्ते, फत्ते, नफे, सविता अर कमला बरगे लोग? अर कड़ै सै कमलजीत बरगी आईसीडीएस को सुपरवाइजर बहन जी? यो जो ग्रेड फोर नै ल्हकोवण का धंधा सै इसका भंडा फोड़ कूण करैगा? इस कुपोषण की बीमारी नै जड़ तै खोवण खातर के करना पड़ैगा? जिब ताहिं इन बातां पै गंभीरता तै बिचार नहीं करया जागा जिब ताहिं यू ग्रेड फोर का भय आईसीडीएस के महकमे नै खायें जागा अर बालक ग्रेड फोर का शिकार होन्ते रहवैंगे। सोचो मेरे बीरा इस ग्रेड फोर तै क्यूंकर छुटकारा मिल सकै सै? पुनश्चः देख लिया सरकार नै आईसीडीएस का बजट घटा दिया।

खूब कमाया, फेर भी भूखे

खूब कमाया, फेर भी भूखे
दो हजार साल के बीच सी मैं दुनिया मैं दो खबर अखबारां की सुर्खियां म्हं रही थी। आपां अखबार पढ़दे कोण्या ज्यां करकै म्हारे लेखै किमै बी होएं जाओ दुनिया मैं म्हारी बला तै। अर जै अखबार पढ़ां सां तो अपणी राशि देख ली अर कै कोए बलात्कार की खबर पढ़ ली। ये दोनूं खबर फिलिपाइनज की सैं। जून दो हजार म्हं एक घटना की खबर छपी थी अक कम्प्यूटर वायरस (ज्यूकर म्हारी कपास की अमरीकन सुण्डी) जिसका नाम लव बग था, दुनिया के हर देश म्हं एक साथ छाग्या अर इस ‘लव बग’ वायरस नै बहुराष्ट्रीय कंपनियां के, कई देशां की सरकारां के दफ्तरां के सिस्टमां के म्हां बड़कै तहलका मचा दिया। पैंटागन अर ब्रिटिश सरकार ताहिं हिला कै धर दिये। इस वायरस नै इन कम्प्यूटरां मैं बड़कै दुनिया के दस बिलियन डालर का झटका दे दिया था अर ज्याहें करकै या खबर सुर्खियां म्हं थी। कम्प्यूटर सुरक्षा विशेषज्ञ अर एफबीआई के एजेंट नै इस वायरस की खोज करी अक या कित तै आई थी। इस वायरस की पैदाइश मनिला टैक्नीकल कॉलेज म्हं जाकै टोही अर बेरा लाया अक ओनेल डी गुंजमैन जो चौबीस साल का था उसनै या वायरस त्यार करी थी। इसतै एक बात तो साफ होगी अक इस इंटरनेट के इतने बड्डे गुब्बारे म्हं कोए भी इसमैं सुई की नोक कोड़ छेक करके इसकी हवा किसे बख्त भी काढ सकै सै। फेर दूसरा खतरनाक मसला यो था अक यू चौबीस साल का गाभरू फिलिपाइन्स मैं आण्डी माण्या गया और देश का गौरव होग्या। इस देश के लोगां नै खुशी मनाई अक म्हारे बरगे पिछडे़ देश के गाभरू नै विश्व की सूचना व्यवस्था ताहिं धूल चटवा दी एक बै तो।
मनिला के पड़ोसी कस्बे म्हं जिसका नाम प्रोमिज्ड लैंड बताया उसमैं इस ‘लव बग’ वायरस की खबर के एक म्हीने पाछै एक और खबर सुर्खियां म्हं आई। दो हजार तै फालतू माणस एक भूस्खलन की दुर्घटना अर इस दुर्घटना पाछै इसके कारण लागी आग तै मरगे। इस दुर्घटना तै पहलम तूफान भी आया बताया। उस बख्त अखबारां नै या एक प्राकृतिक आपदा बताकै इसतै पल्ला झाड़ लिया फेर बात तो किमै औरे थी। इस कस्बे मैं कचरा डम्प करया जाया करदा अर इसमैं पचास हजार लोग रहया करदे। ज्यूकर दिल्ली के पड़ोस मैं बहादरगढ़ हो। ये लोग मनिला के खाते पीते लोग जो कचरा उडै डम्प करया करते उसमैं तै टोह टोह के बच्या ओड़ खाणा खा कै पेट भरया करदे। मतलब यो सै अक ये लोग मनिला के कचरे मैं जीया करदे। दो दिन बहोतै तगड़ा मींह बरसया तो कचरे के जो पहाड़ के पहाड़ उड़ै कट्ठे होरे थे वे ढीले पड़गे अर अचानक भूस्खलन इसका नतीजा था इस कारण घणे मकान ढहगे अर कई माणस उनमैं दबकै मरगे। इन मकानां की खस्ता हाल बिजली की फिटिंग म्हं शार्ट सरकटिंग करकै आग लागगी अर रही सही कसर इसनै पूरी करदी। दो सौ तै फालतू लोग मारे गये अर घणे लोगां पै आग कारण लिकड़े जहरी पदार्थों का बुरा असर हुया। इसतै एक बात साफ सै अक आर्थिक जगत की सफलता अर सामाजिक जगत की असफलता एकै शरीर मैं देखी जा सकैं सैं। या आज के विकास के अमरीकी मॉडल की सबतै कसूती खासियत सै। फिलिपाइन्स का मनिला शहर अर प्रोमिज्ड लैंड इस विकास के जीते जागत नमूने सैं। अर इसे नमूने दुनिया के घणखरे देशां म्हं पाये जावैं सैं। म्हारे भारत देश म्हं भी इसे कई नमूने सैं। हरियाणा प्रदेश भी इस अधखबड़े उल्टे विकास मॉडल का एक जींवता उदाहरण सै। आर्थिक जगत मैं पूरे भारत मैं आगै फेर सामाजिक जगत मैं पूरे भारत मैं सबतै पाछै। महिला पुरुष अनुपात की गिरती संख्या सबकै साहमी सै। पूरी दुनिया की आर्थिक व्यवस्था सन् 1990 म्हं 31 ट्रिलियन डालर थी अर दो हजार म्हं या बधकै 42 ट्रिलियन डालर होगी। सन् 1950 म्हं पैदावार 6.3 ट्रिलियन डालर थी। इसतै टेलीफोन, कार, फ्रीज, टीवी की संख्या बधगी। इस सबके बावजूद अमीर गरीब के बीच के खाई बधण लागरी सै। क्यों? सोचां तो सही।
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कागजां म्हं दौड़ रह्या सै म्हारा गणतंत्र

कागजां म्हं दौड़ रह्या सै म्हारा गणतंत्र
सन् 1947 मैं हाम आजाद हुये। सन् 1950 मैं छब्बीस जनवरी नै हमनै अपणा संविधान बणा कै ओ लागू करया। देश नै आजाद करावण मैं लाखां महिलां पुरुषां नै अपनी ज्यान की बाजी लाई। जिब म्हारा देश गुलाम था तो अंग्रेजों के चमचे हमनै न्यों कहया करदे अक क्यों बावले होरे सों? इन अंग्रेजों के राज मैं तो सूरज छिपता ए कोण्या। इननै ताहवणा थारे बस मैं कोन्या। फेर भगत सिंह, सुभाष बोस, गांधी अर जनता की कुर्बानी रंग ल्याई अर अंग्रेजां नै जाणा पड़या पर जान्ता-जान्ता बी ओ म्हारे देश के टुकड़े करग्या अर हमनै बी टुकड़े करण ताहिं जाड़ भींच कै जोर ला दिया। जो उन बख्तां मैं अंग्रेजां की चमची मारया करते वेहे आज फेर सन 2002 मैं एक बात कैहन्ते हान्डैं सैं अक यो देश तो न्यों ए चालैगा अमीर अमीर रहवैगा अर गरीब गरीब रहवैगा। म्हारे शहीदां नै तो दूसरे भारत का सपना देख्या था। उनका सपना था अक म्हारे देश मैं कोए बी माणस अनपढ़ ना रहवै, कोए माणस बेरोजगार ना हो, कोए माणस भूखा ना सोवै, दवाई की अर इलाज की कमी कै कारण कोई बेमौत ना मारया जा, महिलावां नै बरोबर के हक मिलज्यां, जात के नाम पै अत्याचार ना होवैं, सब काम करैं अर सबनै सुख शांति तै रहवण का मौका थ्यावै। ये जो सपने म्हारे शहीदां नै देखे थे ये झूठे सपने कोण्या थे। ये सपने पूरे होवण के सपने थे। फेर उन बख्तां मैं जो अंग्रेजां के हिम्माती थे, उनके मुखबर थे, भगत सिंह हर कै खिलाफ मुकदमे मैं गवाही देवणिया थे देश आजाद हुयां पाछै सपन्यां नै पूरे करण का झांसा दे कै हम पै पाछले चौवन साल तै राज करण लागरे सैं।
एक बात याद आगी, एक परिवार मैं बालकां का बाबू रोज सांझ नै जिकरा करता अक एक बीस किलो दूध देवण आली भैंस ल्यावांगे। वा काली होगी, अक भूरी होगी, रूंढी होगी अक खूंडी होगी। जड़ बालक रोज दूध का बखौरा सा पीकै सो जान्दे। म्हीना होग्या बाबू नै बात करदे पर ओ भैंस कोण्या ल्याया। एक सांझ नै बालक बाबू नै बोले अक बाबू जिब भैंस ल्यावणी ए कोन्या तै इसका जिकरा बी क्यूं करया करै? बाबू बोल्या अक ले हम तो टाला कर देंगे जिकरा करण का। दस पन्दरा दिन मैं बालक फेर दुखी होन्ते बोले - बाबू भैंस ना भी ल्यावै अर दूध ना भी प्यावै तो कम तै कम जिकरा तो कर लिया कर।
तो भाई म्हारे नेतावां नै पहलम तो ये सपने पूरे करण की बहोत बात करी फेर ईब तो शेर बात बी कोण करदे। 1950 मैं म्हारे संविधान मैं लिख्या गया अक सन् 1960 ताहिं सबनै पांचमी तांहि की शिक्षा दे द्यांगे। साठ मैं बोले अक सत्तर ताहिं दे द्यांगे। सत्तर मैं बोले अक अस्सी ताहिं दे द्यांगे। अस्सी मैं दड़ मारगे। ईब 2001 मैं आकै बोले अक सब बालकां का पढ़ना कानूनन जरूरी सै अर जो मां-बाप अपने बालकां नै नहीं पढ़ावैगा उसपै कानूनी कार्रवाई करी जागी। न्योंए सन् 1978 मैं आल्मा अटा में कसम खाई थी इननै अक सबनै 2000 ताहिं स्वास्थ्य दे द्यांगे। सन् 2001 ताहिं कागजां मैं सेहत बणाणी बी छोड़ दी। उन ताहिं अपोलो अस्पताल आगे अर म्हारे ताहिं बणे सरकारी अस्पतालां का भी फूस सा बिठान्ते जावण लागरे सैं। इनके बालक एयर कन्डीशन्ड मकान मैं रहवैं, एयर कन्डीशन्ड कार मैं चालैं अर एयर कन्डीशंड स्कूल मैं पढ़ण जावैं अर म्हारे बालकां के स्कूलां मां तै मास्टरां की नौकरी खतम करण लागरे। देखणा पड़ैगा आज 2002 की छब्बीस जनवरी पै हमनै जो 1950 की छब्बीस जनवरी नै संविधान मैं वायदे करे थे वे कितने पूरे हुए?


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