शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2023

गाम की इज्जत--1

 सौ के तोड़ की 

गाम की इज्जत

ठमलू, रमलू अर कमलू बैठक मैं बैठ कै बात फोडण लागरे थे। इतने मैं रमलू का छोरा भाज्या भाज्या आया अर बोल्या-बाबू बाबू चाल मेरी माँ बुलावै सै।राशन कार्ड आले आरे सैं वे फोटो खींचैंगे म्हारा सबका ।। रमलू उसकी गेल्याँ चाल्या गया। कमलू बोल्या-देख लिया जोरू का गुलाम। फोटो खिंचवावैगा सारे कुनबे का । बहु भी उड़ै ए अर सुसरा भी उड़ै ए। घूंघट तार क़ै नँगी होकै , बड़े बडेरयां कै सहमी फोटू? गाम मैं रहणा सहणा कुछ ना भाई। बिना घूंघट किसी बहु? घूंघट तै लिहाज शर्म खातर हो सै। बड्डे माणसां के मान सम्मान खातर हो सै।पर बेरा ना आजकाल के बालकां का। बेशर्मी की भी कोये हद होसै। नयूँ बहु छाती दिखाती हांडै या के बर्दाश्त होवण की बात सै । 

    ठमलू भी कमलू की भकाई मैं आग्या अर दोनूं लठ ठा ठा कै चपाड़ कांहीं भाज लिए।औऱ भी कई माणस जेली अर गंडासे ठा ठा कै उनकी साथ भाज लिए। बुझी भी अक रै के बात हुई? कमलू बोल्या-रै गाम की इज्जत का मसला सै। बस बूझो मतना । तीस चालीस लोग उनकी गेल्याँ होगे। 

    लठ जेली अर गंडासे लोगां के हाथां मैं देख कै फोटो खींचनिया तै दो ए सैकिंड मैं रफू चक्कर होगे उड़े तैं। ठमलू अर कमलू नै गाम की इज्जत बचा ली आखिर मैं। रमलू नै बुझ्या अक यो गाम की इज्जत का रौला म्हारे कुनबे की फोटू गेल्याँ क्यूकर चिपग्या?

   कमलू नै घूंघट के फेर गुणगान कर दिए। रमलू बोल्या- जिब उड़ै खेताँ मैं लुगाइयाँ गेल्यां बलात्कार हों जिब गाम की इज्जत कड़ै जाया करै? जिब औटड़े कूद कै बदमाश म्हारे घर मैं बड़ज्यां अर बदफेली करैं अर घर का माणस विरोध करै तै मार मार कै उसनै वे बदमाश ना जीण मैं छोडें ना मरण मैं, जिब गाम की इज्जत कड़ै चाली जा सै? जिब गाम के छोरे दारू पी कै अर स्मैक चढ़ा कै बीरबानियाँ नै जंगल हो कै आवण की बी मुश्किल कर दें सैं तब गाम की इज्जत कड़ै जा सै? जिब गाम के बड्डे चौधरी अर बदमाश लोग बिजली के सीधे तार फिट करकै बिजली की रोज चोरी करैं सैं तो गाम की इज्जत कड़ै जा सै?

    रही घूंघट की बात। तै भाई इज्जत का अर घूंघट का कोये मेल नहीं । जिन कोमां मैं महिला घूंघट ना करती उनकै के इज्जत कोण्या? अर जो घूंघट तै गोड़याँ ताहिं का करले अर घणी भैड़ी बोलै वा बात सही? मैं थारी बात कोण्या मानूं । महिलावां नै दाब कै राखण खातर इस घूंघट का सहारा लिया जा सै। जै या बात ना हो अर इज्जत मान सम्मान का ए मसला हो तै फेर छोरियां नै भी घूंघट करना चाहिए। 

      यो घूंघट आज्ञाकारिता का, शुद्ध चरित्र का, औरत की पवित्रता का,  उसकी शालीनता का , बड़ी चतुराई और साजिश के साथ एक सामाजिक पैमाना बना दिया। असल मैं घरके , गाम के (पंचायत के) , हल्के के , प्रदेश के अर देश जरूरी फैंसले करण मैं महिला शामिल ना हो पावैं , इस खातर यो सब प्रपंच रच राख्या सै। जै महिलावां नै आगै बढ़ना सै तै घूंघट तै तार कै फैंकना पड़ेगा।

  ठमलू बोल्या- रै ओ रमलू सुणिये एक बै। तूं इन ज्ञान विज्ञान आल्यां मैं तै नहीं जावण लाग लिया सै? वे इसी उल्टी सीधी बात सिखावैं सैं महिलावां नै। उनकी गेल्याँ भी कदे दो दो हाथ करने ए दीखैं सैं ।

  रमलू बोल्या- साच्ची  कैहदी तै जाणों आंखयाँ मैं आंगली देदी।

1 अक्टूबर, 1998

रणबीर उर्फ 'आण्डी'

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