मंगलवार, 22 अगस्त 2023

सामाजिक न्याय


सामाजिक न्याय को परिभाषित करना मुश्किल काम सै। सामाजिक न्याय का मतलब सै अक समाज मैं सारे माणसां नै चाहे वे स्त्री हों या पुरुष हों, इस धर्म के हों या उस धर्म के हों,इस जाति के हों या उस जाति के हों—सबको समान रूप तैं जीने का अर अपना विकास करने का मौका मिलना चाहिये। ऐसा तभी हो सकै सै जब समाज मैं वर्ग-भेद समाप्त हो, मनुष्य द्वारा मनुष्य का शोषण समाप्त हो। शायद 1935 मैं इस शब्द का इस्तेमाल करया गया जब संयुक्त राष्ट्र्र मैं संयुक्त राष्ट्र्र सामाजिक सुरक्षा अधिनियम पास करया गया। बेरोजगारी, बीमारी, शिक्षा, लैंगिक समानता, वृद्धावस्था के लिए बीमा आदि मुद्दे शामिल करे गये थे। 1938 मैं न्यूजीलैंड मैं प्रयोग हुआ तथा वृहद सामाजिक सुरक्षा पद्धति का विकास करया गया। आर्थिक विकास के साथ-साथ मानव विकास अर राष्ट्र्र विकास को भी शामिल किया गया। इसकी अलग-अलग अवधारणाएं आज भी मौजूद सैं। दलितों, स्त्रियों, आदिवासियों, गरीब सवर्णों आदि को विभिन्न प्रकार के आरक्षण देकर उन्हें सामाजिक अन्याय से बचाया जा सकता है। लेकिन क्या या समझ सही सै? क्या वास्तव मैं सामाजिक न्याय की मांग पूरी नहीं हो सकदी जब तक वर्ग, वर्ण, जाति, लिंग, धर्म, सम्प्रदाय इत्यादि के आधार पर करे जाने वाले भेदभाव को समाप्त न किया जाए? सवाल यो भी सै अक के वर्तमान व्यवस्था को कायम रखते हुए लोगों को सामाजिक न्याय उपलब्ध करवाया जा सकै सै? क्या यो जरूरी नहीं अक वर्तमान समाज व्यवस्था को बदलकर बराबरी अर भाईचारे आली इसी न्यायपूर्ण समाज व्यवस्था कायम करी जावै जिसमैं किसी के द्वारा किसी का दमन और उत्पीडऩ न हो? फेर सवाल उठै सै अक के यो सम्भव सै? जै हां तो क्यूकर? अन्याय का विरोध और न्याय की मांग असल मैं वोहे कर सकै सै जो या बात जानै सै अक न्याय के सै? सामाजिक न्याय असल मैं के सै इस बात को सही परिप्रेक्ष्य मैं समझना बहुत जरूरी सै। एक कान्ही यो सवाल देश की सभ्यता और संस्कृति से जुड़ा हुआ है तो दूसरी तरफ किसी देश की अर्थव्यवस्था और संवैधानिक व्यवस्था से भी गहन रूप से जुड़ता है। क्या दलितों को सवर्णों के विरुद्ध, पिछड़ों को अगड़ों के विरुद्ध, स्त्रियों को पुरुषों के विरुद्ध, एक धर्म सम्प्रदाय को दूसरे धर्म सम्प्रदाय के विरुद्ध लोगों को लड़ाकर किसी न्यायपूर्ण समाज व्यवस्था की स्थापना की जा सकती है? नहीं तो वर्तमान को सही-सही विश्लेषित करना बहुत जरूरी हो जाता है। आज का दौर समझना बहुत जरुरी है। वर्तमान में भूमंडलीकरण, उदारीकरण तथा निजीकरण की पूंजीवादी प्रक्रियाओं के चलते हमारे देश पर एक तरफ माओवाद का खतरा मंडरावण लागरया सै तो दूसरी तरफ धर्म अर संस्कृति के नाम पर सामाजिक न्याय की पुरानी व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने वाली फासीवादी शक्तियों का प्रभाव बढ़ रहा है। इसके विरुद्ध एक स्वस्थ, प्रगतिशील, धर्मनिरपेक्ष तथा जनतांत्रिक राष्ट्रवाद को अपनाना हमारे लिए जरूरी हो गया है क्योंकि नवसाम्राज्यवादी और नवफासीवादी शक्तियों की मार अंतत: उन्हीं लोगों पर पडऩी है जो सामाजिक अन्याय के शिकार हैं। मगर यही ताकतें धर्म, सम्प्रदाय,  वर्ण, जाति, रंग, लिंग, नस्ल, भाषा अर क्षेत्र के आधार पर लोगां नैं बांटण अर जनता नै एकजुट न होवण देवण मैं कामयाब होरी सैं। इसी हालत मैं सामाजिक न्याय की खातर करे जाने आले संघर्ष का इसा कौन-सा रूप हो सकै सै जो देश नै बाहरी गुलामी तै अर जनता नै भीतरी अन्याय तै बचा सकै? बड़ा अर जटिल सवाल सै। भारत मैं सामाजिक न्याय की बात करण आले बहोत से लोग वर्ग की बात कोन्या करते बल्कि वर्ण की बात करैं सैं। ये वर्ण व्यवस्था नै सामाजिक अन्याय का मूल कारण समझैं सैं। ये ऊंची जातियों के खिलाफ नीची जातियों की राजनीति की बात करें सैं। यह तो विडम्बना ही है कि ऊंची जाति के लोग यह समझते हैं कि उन्हें दलित को नीचा समझने का हक सै। उनकी इस दुर्भावना को दूर करना बहुत जरूरी सै। क्यूकर? फेर मुश्किल जगह सै। मूल सवाल यो सै अक हमनै जातिवाद को दूर करना सै अक जारी रखना सै? जातिवादी राजनीति तै तो यो खत्म होवण तै रहया। इसनै खत्म करण की खातिर जाति के आधार पर नहीं हमनै वर्ग के आधार पर संगठित होना बहोत जरुरी सै। अनेक देशां का अनुभव बतावै सै अक जिब ताहिं गरीब किसान और खेत मजदूर मिलकर संघर्ष नहीं करते तब तक दोनूआं की दशाओं मैं मूलभूत परिवर्तन सम्भव नहीं सै। कुछ लोग न्यों भी कहवैं सैं अक सामाजिक न्याय का नारा सामाजिक अन्याय नै जारी राखण की खातर दिया गया सै। समाज के जै वे लोग जिन-जिन के खिलाफ अन्याय होरया सै वे मिलकै लड़ैं तो सामाजिक न्याय का नारा अन्याय को बनाए रखने का काम नहीं करैगा। हरियाण ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा चलाया जा रहया समाज सुधार आन्दोलन नये नवजागरण के विचार से लैस होकर इस काम मैं जुटरया सै। समाज के सब तबकों खासकर आधारभूत तबकों को शामिल करके इस तरफ कदम बढ़ाये जा रहे हैं। आप भी साथ दें। ‘दूसरी दुनिया सम्भव सै’ का विचार आपके सहयोग तै आगै बढ़ सकै सै।

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2023

गाम की इज्जत--1

 सौ के तोड़ की 

गाम की इज्जत

ठमलू, रमलू अर कमलू बैठक मैं बैठ कै बात फोडण लागरे थे। इतने मैं रमलू का छोरा भाज्या भाज्या आया अर बोल्या-बाबू बाबू चाल मेरी माँ बुलावै सै।राशन कार्ड आले आरे सैं वे फोटो खींचैंगे म्हारा सबका ।। रमलू उसकी गेल्याँ चाल्या गया। कमलू बोल्या-देख लिया जोरू का गुलाम। फोटो खिंचवावैगा सारे कुनबे का । बहु भी उड़ै ए अर सुसरा भी उड़ै ए। घूंघट तार क़ै नँगी होकै , बड़े बडेरयां कै सहमी फोटू? गाम मैं रहणा सहणा कुछ ना भाई। बिना घूंघट किसी बहु? घूंघट तै लिहाज शर्म खातर हो सै। बड्डे माणसां के मान सम्मान खातर हो सै।पर बेरा ना आजकाल के बालकां का। बेशर्मी की भी कोये हद होसै। नयूँ बहु छाती दिखाती हांडै या के बर्दाश्त होवण की बात सै । 

    ठमलू भी कमलू की भकाई मैं आग्या अर दोनूं लठ ठा ठा कै चपाड़ कांहीं भाज लिए।औऱ भी कई माणस जेली अर गंडासे ठा ठा कै उनकी साथ भाज लिए। बुझी भी अक रै के बात हुई? कमलू बोल्या-रै गाम की इज्जत का मसला सै। बस बूझो मतना । तीस चालीस लोग उनकी गेल्याँ होगे। 

    लठ जेली अर गंडासे लोगां के हाथां मैं देख कै फोटो खींचनिया तै दो ए सैकिंड मैं रफू चक्कर होगे उड़े तैं। ठमलू अर कमलू नै गाम की इज्जत बचा ली आखिर मैं। रमलू नै बुझ्या अक यो गाम की इज्जत का रौला म्हारे कुनबे की फोटू गेल्याँ क्यूकर चिपग्या?

   कमलू नै घूंघट के फेर गुणगान कर दिए। रमलू बोल्या- जिब उड़ै खेताँ मैं लुगाइयाँ गेल्यां बलात्कार हों जिब गाम की इज्जत कड़ै जाया करै? जिब औटड़े कूद कै बदमाश म्हारे घर मैं बड़ज्यां अर बदफेली करैं अर घर का माणस विरोध करै तै मार मार कै उसनै वे बदमाश ना जीण मैं छोडें ना मरण मैं, जिब गाम की इज्जत कड़ै चाली जा सै? जिब गाम के छोरे दारू पी कै अर स्मैक चढ़ा कै बीरबानियाँ नै जंगल हो कै आवण की बी मुश्किल कर दें सैं तब गाम की इज्जत कड़ै जा सै? जिब गाम के बड्डे चौधरी अर बदमाश लोग बिजली के सीधे तार फिट करकै बिजली की रोज चोरी करैं सैं तो गाम की इज्जत कड़ै जा सै?

    रही घूंघट की बात। तै भाई इज्जत का अर घूंघट का कोये मेल नहीं । जिन कोमां मैं महिला घूंघट ना करती उनकै के इज्जत कोण्या? अर जो घूंघट तै गोड़याँ ताहिं का करले अर घणी भैड़ी बोलै वा बात सही? मैं थारी बात कोण्या मानूं । महिलावां नै दाब कै राखण खातर इस घूंघट का सहारा लिया जा सै। जै या बात ना हो अर इज्जत मान सम्मान का ए मसला हो तै फेर छोरियां नै भी घूंघट करना चाहिए। 

      यो घूंघट आज्ञाकारिता का, शुद्ध चरित्र का, औरत की पवित्रता का,  उसकी शालीनता का , बड़ी चतुराई और साजिश के साथ एक सामाजिक पैमाना बना दिया। असल मैं घरके , गाम के (पंचायत के) , हल्के के , प्रदेश के अर देश जरूरी फैंसले करण मैं महिला शामिल ना हो पावैं , इस खातर यो सब प्रपंच रच राख्या सै। जै महिलावां नै आगै बढ़ना सै तै घूंघट तै तार कै फैंकना पड़ेगा।

  ठमलू बोल्या- रै ओ रमलू सुणिये एक बै। तूं इन ज्ञान विज्ञान आल्यां मैं तै नहीं जावण लाग लिया सै? वे इसी उल्टी सीधी बात सिखावैं सैं महिलावां नै। उनकी गेल्याँ भी कदे दो दो हाथ करने ए दीखैं सैं ।

  रमलू बोल्या- साच्ची  कैहदी तै जाणों आंखयाँ मैं आंगली देदी।

1 अक्टूबर, 1998

रणबीर उर्फ 'आण्डी'

गाय की अपील मुनेश त्यागी

 गाय की अपील

************ 

                 ,,,, मुनेश त्यागी

आज मैं बाजार में घूम रहा था। चारों तरफ  कोरोना को लेकर चर्चा थी। कोई सरकार को भला बुरा कह  रहा था, कोई लोगों की गंदगी फैलाने की आदतों को दोष दे रहा था।

     तभी एक गाय दुखी मन से वहां आई। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। मैंने पूछा  बहन क्या हुआ? तो वह जोर जोर से रोने लगी और उसने कहा कि लोग मुझे लेकर पता नहीं क्या-क्या अनाप-शनाप समाज में फैला रहे हैं, कुछ लोग कह रहे हैं कि मेरे गोबर और मूत्र से कोरोना का इलाज हो जाएगा। मैं यह सब देख सुनकर बहुत दुखी हूं और मेरा मन बहुत परेशान हो रहा है, केवल आप ही हैं जिसने मेरे से पूछा कि मैं उदास क्यों हूं?

     मैं उसकी बात बड़े ध्यान से सुन रहा था तब उसने मेरे से एक रिक्वेस्ट की कि मैं जाऊं और मीडिया में यह स्टेटमेंट गाय की तरफ से दूं जिसमें उसने कहा था कि,,,,       

   "कोरोना के इलाज में मेरा कोई दूर-दूर का नाता नहीं है, मूत्र या गोबर से कोरोना कभी भी ठीक नहीं हो सकता, समाज में ऐसी बातें फैलाने वाले मेरे दुश्मन है उनकी बातों पर कोई विश्वास ना करें, मैं भी जनता से अपील करती हूं कि,,,,

 ,,वह अपने हाथ साबुन से धोते रहें, 

 ,,भीड़भाड़ के इलाकों में ना जाएं, 

 ,,सैनिटाइजर का यूज करें,

  ,,छींकने और खांसने  पर मास्क रुमाल का प्रयोग करें,

   ,, दूसरों से व्यवहार में सावधानी बरतें और दूसरों से भी कहें कि वे भी सावधानी बरतें,

  ,,तमाम तरह की अफवाहों से बचें और 

  ,,समाज में  बिना मतलब का खौफ और डर पैदा ना करें

  और मेरा नाम लेकर कोरोना का इलाज करने का इल्जाम लगाने वाले ना तो मेरे दोस्त हैं ना समाज के। यह मेरे भी दुश्मन है और समाज के भी सबसे बड़े दुश्मन हैं, इन सभी दुश्मनों से सावधान रहें और समाज को भी सावधान करें।"

मुर्गी के अंडे

 मुर्गी अंडे दे रही थी और मालिक बेच रहा था.... मुर्गी देशहित में अंडे दे रही थी...।


फिर एक दिन मुर्गी का नया मालिक आया और उस मालिक ने कहा -’’ आज राष्ट्र को तुम्हारे अंडों की जरूरत है। यदि तुम चाहती हो की तुम्हारा घर सोने का बन जाये तो जम के अंडे दिया करो। आज तक तुमसे अंडे तो लिये गये लेकिन तुम्हारा घर किसी ने सोने का नही बनवाया। हम बनवाएंगे, तुम्हारा विकास करके छोड़ेंगे।’’ मुर्गी खुशी से नाचने लगी। उसने सोचा देश को मेरी भी जरूरत पड़ती है वाह मैं एक क्या कल से दो अंडे दूंगी। देश है तो मैं हूं वह दो अंडे देने लगी। 


मालिक खुश था अंडे बेचकर पैसे कमा रहा था। उसने मुर्गी की खुराक कम कर दी मुर्गी चौंकी -’’ आज मुझे पर्याप्त खुराक नहीं दी गई कोई समस्या है क्या ? तब मालिक ने कहा देश आज संकट में है किसी भी मुर्गी को पूरा अन्न खाने का हक नहीं। जब तक एक भी मुर्गी भूखी है मैं खुद पूरा अहार नहीं लूंगा हम देश के लिए संकट सहेंगे।’’ मुर्गी आधा पेट खाकर अंडे देने लगी मालिक अंडे बेचकर अपना घर भर रहा था। 


बरसात में मुर्गी का घर नहीं बन पाया। मुर्गी बोली- -’’ आप मेरे सारे अंडे ले रहे हैं, मुझे आधा पेट खाने को दे रहे है। कहा था कि घर सोने का बनेगा, नहीं बना। मेरे घर की मरम्मत तो करवा दो’’ मालिक भावुक हो गया -’’ तुमने कभी सोचा है इस देश में कितनी मुर्गियां हैं जिनके सर पर छत नहीं हैं, रात-रात भर रोती रहती हैं तुम्हें अपनी पड़ी है। तुम्हें देश के बारे में सोचना चाहिए अपने लिए सोचना तो स्वार्थ है।’’ मुर्गी चुप हो गई देशहित में मौन रहा ही जाता है। 


अब वह अंडे नहीं दे पा रही थी

कमजोर हो गई थी!  न खाने का ठिकाना न रहने का, वह बोलना चाहती थी लेकिन भयभीत थी पूछेगी तो देशद्रोही ठहरा दी जाएगी। वह पूछना चाहती थी कि इतने पैसे जो जमा कर रहे हो, देशहित में कितना लगाया है लेकिन पूछ नहीं पाई। 


एक दिन मालिक आया और बोला- -’’ मेरी प्यारी मुर्गी तुझे देशहित में मरना पड़ेगा, देश तुमसे बलिदान मांग रहा है। तुम्हारी मौत हजारों मुर्गियों को जीवन देगा’’ मुर्गी बोली लेकिन मालिक मैने तो देश के लिय बहुत कुछ किया है, मालिक ने कहा अब तुम्हे शहीद होने पड़ेगा। बेचारी मुर्गी को अब सब कुछ समझ आ गया था लेकिन अब वक्त जा चुका था और मुर्गी कमज़ोर हो चुकी थी, मालिक ने मुर्गी का काम लगा दिया। मुर्गी देशहित में शहीद हो गई... जो  आप सोच रहे हैं ऐसा बिल्कुल भी नही है।  ये सिर्फ एक मुर्गी की कहानी है। 


वर्तमान में तो देश बदल रहा है ना?

सोमवार, 13 फ़रवरी 2023

राजेश अत्रेय

 Rajesh Atreya: नमस्ते. यदि मैं दूसरों में हमेशा अच्छाई ही ढूंढता हूँ और उन्हें अपनाता भी हूँ तो मैं लगभग सबसे आगे निकल जाता हूँ.

नमस्ते. यदि हर स्थिति में मेरे मन में शान्ति रहती है तो मैं उस स्थिति में हूँ जहाँ कि दूसरे कल्पना भी नहीं कर सकते.

हमें हर छोटी से छोटी बात पर भी विश्वास पात्र बनना चाहिए.

नमस्ते. परिवार के सम्बन्घ सबसे अधिक कीमती होते हैं. उनका सम्मान कीजिए.

नमस्ते. एक खुश व्यक्तित्व, अपने और दूसरों के घाव भरने में बहुत मदद करता है.

नमस्ते. अच्छे स्वास्थ्य के लिए अच्छे मित्र बहुत ज़रूरी हैं और अच्छे जीवन के लिए अच्छा स्वास्थ्य ज़रूरी है.

 नमस्ते. मैं हमेशा सकारात्मक और आत्मबल बढ़ाने वाले व्यक्तियों के साथ रहना चाहता हूँ.

नमस्ते. मेरा अपने दिमाग और अपने मुंह पर नियंत्रण होना चाहिए और इन दोनों में भी सामंजस्य होना चाहिए.

नमस्ते. जो समय मैंने अपने लिए खर्चा, वो गया. जो मैंने दूसरों को दिया वो अभी भी मेरे पास है.

नमस्ते. कुछ चाहने और परमात्मा से प्रार्थना करने में बहुत बड़ा अंतर है और वो है... आस्था.

नमस्ते. आत्मशक्ति की परिभाषा "कोशिश करना" नहीं, बल्कि "करना" है.

नमस्ते. दबाव पड़ने पर हमारे भीतर से वही निकलता है जो वास्तव में हमारे भीतर है. जैसे किसी भी फल को दबाने से उसका असली रस ही बाहर निकलता है.

नमस्ते. यदि मुझे खुद पर भरोसा नहीं है तो मैं हमेशा कोशिश ना करने के बहाने ही ढूंढूगा.

नमस्ते. कोई भी महान उपलब्धि तब तक याद रखी जाती है जब तक कोई दूसरी उपलब्धि नहीं हो जाती.

नमस्ते. सच को कहने ही नहीं बल्कि सुनने के लिए भी बहुत साहस चाहिए.

नमस्ते. जो काम मुझे महीने के अंत तक करना है उसके लिए महीने का अंत आने की प्रतीक्षा क्यों करूं?

नमस्ते. एक दिन भर का काम एक घंटे की चिंता से कम थकाऊ होता है.

नमस्ते. हमारा काम हमारी पहचान होना चाहिए.

नमस्ते. यदि मैं सही चीज़ों पर ध्यान नहीं दूंगा तो मेरा जीवन खराब होगा ही होगा.

नमस्ते. दयालुता बहुत शक्तिशाली, तेज़ी से फैलने वाली और व्यक्ति में परिवर्तन लाने वाली वस्तु है.

नमस्ते. अपने डर के कारण कोशिश करना बंद मत कीजिए.

नमस्ते. ये एक सच्चाई है कि हमारा स्वास्थ्य ही हमारा एकमात्र सच्चा मित्र है. यदि ये एक बार साथ छोड़ दे तो बाकी भी धीरे धीरे साथ छोड़ देते हैं.

नमस्ते. परमात्मा से प्रार्थना करना कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसका इस्तेमाल सबसे आखिर में किया जाए.

नमस्ते. सफलता छोटी नहीं बल्कि एक लम्बी दौड़ है.

 नमस्ते. अपने जीवन को पूरी सत्यनिष्ठा से जियें. यह आने वाली पीढ़ी को अवश्य प्रभावित करेगा.

नमस्ते. हार के बारे में बात मत कीजिए. इसकी बजाए आशा, विश्वास, आस्था और विजय की बात कीजिए.

नमस्ते. जो अपनी गलतियाँ स्वीकार नहीं कर सकता वो कभी सफल नहीं हो सकता.

 नमस्ते. उस पर ज़्यादा ध्यान मत दो कि आप कहाँ थे, उस पर ध्यान दो कि अब कहाँ हो और उस पर पूरा ध्यान दो जहाँ पहुँच सकते हो.

नमस्ते. अपने दिल को साफ़ और सच्चा रखिए क्योंकि दिल वो झरोखा है जिसमें से आप दुनिया को देखते हो.

नमस्ते. दूसरों के प्रति आभार प्रकट करने में मेरा पूर्ण विश्वास है. इससे मैं विनम्र होता हूँ और मुझे बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है.

नमस्ते. परिवर्तन तकलीफ नहीं देता बल्कि परिवर्तन को स्वीकार ना करना तकलीफ दायक होता है.

नमस्ते. अपनी इच्छा शक्ति को क्रियात्मक बनाने के तीन उपाय....1. एक ऐसे काम को चुनें जिसे आपने पहले नहीं किया हो और उसमें सफल होने का दृढ़ निश्चय करें. *(शेष दो उपाय आने वाले दिनों में)*

नमस्ते. उपाय नं. 2. आश्वस्त हो लें कि जो काम चुना है वो रचनात्मक और व्यावहारिक है, फिर उसकी असफलता के विचार को पूरी तरह त्याग दें.

नमस्ते. उपाय नं. 3. एक उद्देश्य पर ही एकाग्र रहें और शेष सभी योग्यताओं का इस कार्य की पूर्ति के लिए प्रयोग करें.

नमस्ते. सफलता का बीज बोने के लिए असफलता का मौसम उत्तम समय है.

नमस्ते. एक सफ़ेद झूठ आपकी प्रतिष्ठा पर एक कालिख लगा जाता है.

नमस्ते. सच हमेशा झूठ से ऊपर होता है जैसे तेल की एक बूँद हमेशा पानी के ऊपर ही होती है.

नमस्ते. यदि आपको झूठ बोलने की आदत है तो आपके सच को भी झूठ ही माना जाएगा.

नमस्ते. झूठ से हमारी आस्था अंधी हो जाती है और अंध आस्था के साथ हम कहीं नहीं पहुँच सकते.

नमस्ते. हमें अपने बारे में सब कुछ सच सच पता होता है इसलिए कभी भी अपने आपको धोखा देने की कोशिश मत करना.

नमस्ते. आधे प्रयासों से आधे परिणाम नहीं बल्कि कोई भी परिणाम नहीं मिलता.

नमस्ते. जिसकी जैसी प्रकृति है उसके साथ उसी के अनुसार व्यवहार करने पर आप तनाव रहित और शांत रह सकते हो.

नमस्ते. खुश होइए कि आप दूसरों जैसे नहीं हैं. इसी से आप आराम से रह सकते हो.

नमस्ते. जीवन को जितना हो सके साधारण रखिए इसी से आप तनाव रहित रह सकते हो.

नमस्ते. आप चाहे ये सोचें कि आप इस काम को कर सकते हैं .. या ये कि आप नहीं कर सकते... आप दोनों जगह ही ठीक हो.

नमस्ते. बुराई करने वालों की चिंता मत करो. उन्हें कहीं भी पसंद नहीं किया जाता. उनके आज तक दुनिया में कहीं भी स्मारक नहीं बने.

नमस्ते. अपने आप से प्रेम करके, स्वयं को स्वीकार करके ही दूसरों से प्रेम किया जा सकता है.

नमस्ते. जब तक आप स्वयं नियम बनाने की स्थिति में नहीं पहुँच जाते, तब तक बने हुए नियमों का ही पालन कीजिए.

नमस्ते. हर विजेता कभी ना कभी नौसिखिया ही था.

नमस्ते. किसी की सफलता पर ईर्ष्या करना सही नहीं है. आपको नहीं पता उसने अपना सफर कैसे तय किया है.

नमस्ते. आपकी असंख्य समस्याएं हो सकती हैं. पर सिर्फ आप और केवल आप ही उनका उचित हल ढूंढ सकते हैं.

नमस्ते. आपकी समस्याएं चाहे जैसी भी और जितनी भी हों, यदि मैं आपसे अपनी समस्याऐं देकर आपकी लेना चाहूं तो यकीनन आप इंकार कर देंगें.

 नमस्ते. संसार की कोई भी समस्या जीवन से बड़ी नहीं हो सकती. जीवन रहेगा तो समस्याओं का हल भी मिलेगा.

नमस्ते. आप अपनी समस्याओं से भाग नहीं सकते, वे आपका पीछा नहीं छोड़ेंगी. पर जब आप उनका सामना करने का निर्णय लेंगें तो वे अपने आप समाप्त होने लगेंगी.

 नमस्ते. जीवन का कोई भी सफर कठिनाइयों के बिना पूरा नहीं हो सकता. इसलिए उन्हें स्वीकार करना और उन्हें दूर करना शुरू कीजिए.

नमस्ते. आपके संवाद में आपके शब्दों से ज़्यादा आपकी आवाज़ की टोन और आपकी शारीरिक भाषा महत्वपूर्ण होती है.

नमस्ते. जीवन में सफल व्यक्ति वही हैं जिन्होंने दूसरों को ज़रूरत के अनुसार दिया भी और किसी की गलती पर उसे माफ़ भी किया.

नमस्ते. प्रत्येक दिन जीवन में एक उपहार लेकर आता है. सकारात्मक सोच के साथ उसे खोलिए और मज़ा लीजिए.

नमस्ते और लोहड़ी की शुभकामनाएं. जब हम अपने ऊपर विश्वास रखते हैं तो वास्तव में हम उस शक्ति में विश्वास रखते हैं जिसने हमें बनाया.

नमस्ते एवं मकर सक्रांति की शुभकामनाएं. . हम अकेले सारे काम बेहतरीन तरीके से नहीं कर सकते. इसीलिए समाज की स्थापना की गयी है.

नमस्ते. काम की गुणवत्ता ज़्यादा महत्वपूर्ण है नाकि संख्या या मात्रा.

नमस्ते. हमारी कमियां कभी ना कभी दिखाई दे ही जाती हैं. उन्हें छिपाने की बजाए उन पर विजय पाने का प्रयास करें.

नमस्ते. हमें अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनना भी सीखना चाहिए.

नमस्ते. समस्याएं भी बच्चों की तरह होती हैं उन्हें जितना ज़्यादा पालते पोसते रहोगे, वो बढ़ेंगी ही.

नमस्ते. कोई भी आपके दर्द सुनना नहीं चाहता पर अपने ज़रूर बताना चाहता है.

नमस्ते. एक सत्यनिष्ठ व्यक्ति कभी भी ना तो धोखा देता है नाही गलत राह दिखाता है. तो फिर क्यों ना वैसा ही बनने का प्रयास किया जाए?

नमस्ते. जब भी संभव हो हंसिए. यह लगभग सभी बीमारियों की सबसे सस्ती दवा है.

नमस्ते. चुनौतियां हमें मजबूत एवं दृढ़ संकल्पी बनाती हैं.


सोमवार, 6 फ़रवरी 2023

बेवफा सिस्टम

 बेवफा सिस्टम

इस बेवफा सिस्टम से वफ़ा मांग रहे हैं
हमें क्या मालूम है हम खता मांग रहे हैं
ये किस्मत का खेल रचाया है इसी ने तो
इसी से हम किस्मत की दुआ मांग रहे हैं
सच को छिपाता आधा सच बताता हमें
जहर घोला उससे साफ हवा मांग रहे हैं
रोजाना जो खेले हमारे जज्बात के साथ
सुख की राही का उससे पता मांग रहे हैं
सुरग की कामना में छिपी है जो रणबीर
अपने खुद की ही हम चिता मांग रहे हैं
13/9/09