इब कोन्या ----------
एक बै एक साड़ी बेचण आला गाम मैं आग्या । उसनै एक घरबारण ताहिं कहया --देखै के सै ! घणी बढ़िया साड़ी सै । बस चार सौ रूपईयाँ की । लेकै देख । सारी उम्र याद राखैगी -----
घरबारण बोली ---- ना बाबा ना !! इसका रंग कच्चा लिकड़ाया तो मैं के करूंगी ? देणी सै तो सौ रूपईयाँ मैं दे दे ।
---------घणी ए वार खींचतान चालती रही ।
हार करकै साड़ी आला बोल्या -------चाल तेरा जो जी करै वो दे दे ।
घरबारण डेढ़ सौ रूपईये दे दे दिए #####
उस दिन पाछै घरबारण नै साड़ी का पैंडा ए कोण्या छोड़्या । पड़ौसन कहती ----- हाय ! कितनी बढ़िया साड़ी । किततैं खरीद कै ल्याई ?
--- हफ्ते मैं मैली करदी साड़ी । घरबारण गई जोहड़ पै साड़ी धोवण ।
सारा जोहड़ लाल कर दिया साड़ी नै । -----सारा रंग छूटग्या साड़ी का -----छूटती ए बोली ----ओहले मनै के बेरा था रंग उतरज्यागा । बाकी नहीं रही घरबारण कै । नयों बोली------आवण दे जाये रोये नै । पीसे उलटे नहीं लिए तै मेरा बी नाम धमलो नहीं ।
---फेर एक महीना बाट देखी पर जाये रोया कौनी आया ------।
रमलू सुणकै कमलू की बात अर बोल्या ------ इब्बी इसी इसी बावली
रैहरी सैं म्हारे गाम मैं । भैंसवाल मैं तो सुन्या करते अक इब्बी बावले रैहरे सैं । --------- एक भैंसवाल का रिश्तेदार भी आरया था ---
वो बोल्या --- इब कोन्या रैहरे बावले भैंसवाल मैं ।
रमलू नै एक चुटकला सुणाया रिश्तेदार ताहिं -----------
म्हारा एक क्लासफैलो था धनपत खर खोदे का ओह ब्याह दिया भैंसवाल । नयी नयी शादी । दोनू सिनेमा देखण चले गए राज टाकीज मैं । फिल्म शुरू होगी । न्यूज आई । उनमैं कई बूढ़े बैठे बैठे होक्का पीवण लागरे थे ।
--- देखते की साथ धनपत की बहु नै तो एक हाथ लाम्बा घूंघट कर लिया । हाफ टेम हुया तै धनपत नै बूझी अक किसी लागी फिल्म ?
वा बोली------फिल्म शुरू होंते की साथ वे बूढ़े आ बैठे थे । मनै तै जीबै घूंघट कर लिया था । फिल्म क्यूकर देखती । ओ भैंस वालिया बी सुनै था ओ बोल्या ---- उसनै तो कदे गाम मैं भी घूंघट ना काढ्या तै उड़ै क्यूकर काढ़ लिया ? कमलू अर ठमलू जोर कै हँस पड़े अर बोले -------तों ठीक कहवै था रमलू अक भैंस वाल के लोग इब्बी बावले रैहरे सैं । डमलू बोल्या ------ भैंसवाल की तै ठीक फेर आडूआँ की तै म्हारे गाम मैं भी कमी कोन्या । किस किस का नाम गिनाऊँ । फाँचर ठोकां की एक नयी नस्ल पैदा होगी । कढ़ी बिगाड़ भी कई पा ज्यांगे । बांडे फांडे बी घाट नहीं । म्हारा गाम तै पूरा चिड़ियाघर होरया सै । हमनै लूट कै खावणिया कै यो पिछड़ापन खूब काम आवै सै । ज्युकर आज काल नोटबंदी पै धुम्मा ठा राख्या अर हम कहन लागरे सां करया तो ठीक बेशक दुखी होना पडरया सै । हम दिमाग पै जोर देण की कसम खाये बैठे साँ । कोए ना और धरती भिड़ी होवैगी जिब कहवैगा मनै के बेरा था नयूं बणज्यागी ????
आंडी रणबीर
एक बै एक साड़ी बेचण आला गाम मैं आग्या । उसनै एक घरबारण ताहिं कहया --देखै के सै ! घणी बढ़िया साड़ी सै । बस चार सौ रूपईयाँ की । लेकै देख । सारी उम्र याद राखैगी -----
घरबारण बोली ---- ना बाबा ना !! इसका रंग कच्चा लिकड़ाया तो मैं के करूंगी ? देणी सै तो सौ रूपईयाँ मैं दे दे ।
---------घणी ए वार खींचतान चालती रही ।
हार करकै साड़ी आला बोल्या -------चाल तेरा जो जी करै वो दे दे ।
घरबारण डेढ़ सौ रूपईये दे दे दिए #####
उस दिन पाछै घरबारण नै साड़ी का पैंडा ए कोण्या छोड़्या । पड़ौसन कहती ----- हाय ! कितनी बढ़िया साड़ी । किततैं खरीद कै ल्याई ?
--- हफ्ते मैं मैली करदी साड़ी । घरबारण गई जोहड़ पै साड़ी धोवण ।
सारा जोहड़ लाल कर दिया साड़ी नै । -----सारा रंग छूटग्या साड़ी का -----छूटती ए बोली ----ओहले मनै के बेरा था रंग उतरज्यागा । बाकी नहीं रही घरबारण कै । नयों बोली------आवण दे जाये रोये नै । पीसे उलटे नहीं लिए तै मेरा बी नाम धमलो नहीं ।
---फेर एक महीना बाट देखी पर जाये रोया कौनी आया ------।
रमलू सुणकै कमलू की बात अर बोल्या ------ इब्बी इसी इसी बावली
रैहरी सैं म्हारे गाम मैं । भैंसवाल मैं तो सुन्या करते अक इब्बी बावले रैहरे सैं । --------- एक भैंसवाल का रिश्तेदार भी आरया था ---
वो बोल्या --- इब कोन्या रैहरे बावले भैंसवाल मैं ।
रमलू नै एक चुटकला सुणाया रिश्तेदार ताहिं -----------
म्हारा एक क्लासफैलो था धनपत खर खोदे का ओह ब्याह दिया भैंसवाल । नयी नयी शादी । दोनू सिनेमा देखण चले गए राज टाकीज मैं । फिल्म शुरू होगी । न्यूज आई । उनमैं कई बूढ़े बैठे बैठे होक्का पीवण लागरे थे ।
--- देखते की साथ धनपत की बहु नै तो एक हाथ लाम्बा घूंघट कर लिया । हाफ टेम हुया तै धनपत नै बूझी अक किसी लागी फिल्म ?
वा बोली------फिल्म शुरू होंते की साथ वे बूढ़े आ बैठे थे । मनै तै जीबै घूंघट कर लिया था । फिल्म क्यूकर देखती । ओ भैंस वालिया बी सुनै था ओ बोल्या ---- उसनै तो कदे गाम मैं भी घूंघट ना काढ्या तै उड़ै क्यूकर काढ़ लिया ? कमलू अर ठमलू जोर कै हँस पड़े अर बोले -------तों ठीक कहवै था रमलू अक भैंस वाल के लोग इब्बी बावले रैहरे सैं । डमलू बोल्या ------ भैंसवाल की तै ठीक फेर आडूआँ की तै म्हारे गाम मैं भी कमी कोन्या । किस किस का नाम गिनाऊँ । फाँचर ठोकां की एक नयी नस्ल पैदा होगी । कढ़ी बिगाड़ भी कई पा ज्यांगे । बांडे फांडे बी घाट नहीं । म्हारा गाम तै पूरा चिड़ियाघर होरया सै । हमनै लूट कै खावणिया कै यो पिछड़ापन खूब काम आवै सै । ज्युकर आज काल नोटबंदी पै धुम्मा ठा राख्या अर हम कहन लागरे सां करया तो ठीक बेशक दुखी होना पडरया सै । हम दिमाग पै जोर देण की कसम खाये बैठे साँ । कोए ना और धरती भिड़ी होवैगी जिब कहवैगा मनै के बेरा था नयूं बणज्यागी ????
आंडी रणबीर
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