मंगलवार, 3 जनवरी 2017

के बेरा था नयूं बणज्यागी ????

इब कोन्या ----------
एक बै एक साड़ी बेचण आला गाम मैं आग्या । उसनै एक घरबारण ताहिं कहया --देखै के सै ! घणी बढ़िया साड़ी सै ।  बस चार सौ रूपईयाँ  की । लेकै देख । सारी उम्र याद राखैगी  -----
घरबारण बोली ---- ना बाबा ना !! इसका रंग कच्चा लिकड़ाया  तो मैं के करूंगी ? देणी सै तो सौ रूपईयाँ मैं दे दे । 
---------घणी ए वार खींचतान चालती रही । 
हार करकै साड़ी आला बोल्या -------चाल तेरा जो जी करै वो दे दे । 
घरबारण डेढ़ सौ रूपईये दे दे दिए #####
उस दिन पाछै घरबारण नै साड़ी का पैंडा ए कोण्या छोड़्या । पड़ौसन कहती ----- हाय ! कितनी बढ़िया साड़ी ।  किततैं  खरीद कै ल्याई ?
--- हफ्ते मैं मैली करदी साड़ी । घरबारण गई जोहड़ पै साड़ी धोवण । 
सारा जोहड़ लाल कर दिया साड़ी नै । -----सारा रंग छूटग्या साड़ी का -----छूटती ए बोली ----ओहले मनै के बेरा था रंग उतरज्यागा  । बाकी नहीं रही घरबारण कै ।  नयों बोली------आवण दे जाये रोये नै ।  पीसे उलटे नहीं लिए तै मेरा बी नाम धमलो नहीं ।  
---फेर एक महीना बाट देखी पर जाये रोया कौनी आया ------। 
रमलू सुणकै  कमलू की बात अर बोल्या ------ इब्बी इसी इसी बावली 
रैहरी  सैं  म्हारे गाम मैं ।  भैंसवाल मैं तो सुन्या करते अक इब्बी बावले रैहरे सैं ।  --------- एक भैंसवाल का रिश्तेदार भी आरया था ---
वो बोल्या --- इब कोन्या रैहरे बावले भैंसवाल मैं । 
   रमलू नै एक चुटकला सुणाया रिश्तेदार ताहिं -----------
म्हारा एक क्लासफैलो था धनपत खर खोदे का  ओह ब्याह दिया भैंसवाल । नयी नयी शादी ।  दोनू सिनेमा देखण चले गए राज टाकीज मैं । फिल्म शुरू होगी ।  न्यूज आई ।  उनमैं कई बूढ़े बैठे बैठे होक्का पीवण लागरे थे । 
 ---  देखते की साथ धनपत की बहु नै तो एक हाथ लाम्बा घूंघट  कर लिया ।  हाफ टेम हुया  तै धनपत नै बूझी अक किसी लागी फिल्म ? 
वा बोली------फिल्म शुरू होंते की साथ वे बूढ़े आ बैठे थे ।  मनै तै जीबै घूंघट कर लिया था । फिल्म क्यूकर  देखती । ओ भैंस वालिया बी सुनै था ओ बोल्या ---- उसनै तो कदे गाम मैं भी घूंघट ना काढ्या तै उड़ै क्यूकर काढ़ लिया ? कमलू अर ठमलू जोर कै  हँस पड़े अर बोले -------तों ठीक कहवै था रमलू अक भैंस वाल के लोग इब्बी बावले रैहरे सैं ।  डमलू  बोल्या ------ भैंसवाल की तै ठीक फेर आडूआँ की तै म्हारे गाम मैं भी कमी कोन्या । किस किस का नाम गिनाऊँ । फाँचर ठोकां की एक नयी नस्ल पैदा होगी । कढ़ी बिगाड़ भी कई पा ज्यांगे ।  बांडे फांडे बी घाट नहीं । म्हारा गाम तै पूरा चिड़ियाघर होरया सै । हमनै लूट कै खावणिया कै यो पिछड़ापन खूब काम आवै सै । ज्युकर आज काल नोटबंदी पै धुम्मा ठा राख्या अर हम कहन लागरे सां करया तो ठीक बेशक दुखी होना पडरया सै । हम दिमाग पै जोर देण की कसम खाये बैठे साँ । कोए ना और धरती भिड़ी होवैगी जिब कहवैगा मनै के बेरा था नयूं बणज्यागी ????
आंडी रणबीर 


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