सते,नफे, फते,कविता,सविता,सरिता अर भारपाई ष्षनिवार नै कठ्ठे होकै बतलाये। सते बोल्या- चहणियां मैं जावण नै होरे सैं फेर ब्याह बिना ईब्बी ना सरता।नफे बोल्या- के बात सते आज बहोत गुस्से मैं दीखै सै। सते बोल्या- ओ नहीं सै म्हारी गाल मैं नसीब सिंह ओ पिचहतर साल का होरया सै। ल्याया सै बंगाली बहू।सरिता बोली- वो तो सात हजार मैं खरीद कै ल्याया सै अर दो हजार वो नहीं सै गुगण क्यांकै रमेष उसनै यू ब्याह करवावण के सर्विस चार्ज लिये सैं।नफे बोल्या- उसकी उमर कितनी सै। कविता बोली - वातो पन्दरा साल की बतावै थी। फेर उसकै म्हारी बोली तो कोन्या समझ मैं आन्ती।नफे बोल्या-यो किसा ब्याह। नसीब सिंह 75 साल का अर वा बहू 15 साल की। योतो कसूता बेमेल ब्याह सै जै इसनै ब्याह बी मानैं तो। नसीब सिंह नै इसा क्यूं करया।सते बोल्या- कहवै तो न्यूं था अक वंष चलावण की खातर एक छोरा सा तो होणा ए चाहिये। नफे सिंह बोल्या-तो इसकी खातर खरीद कै लियाओ बहू।सविता बोली- इसे छोरे आली मानसिकता के कारण तो हरियाणा मैं लड़कियां की संख्या चिन्ताजनक रुप तै घटती जावण लागरी सै।फते बोल्या-सविता जिब इसमैं कौनसी चिन्ता की बात सै। ये थोड़ी होगी तो इनकी तो समाज मैं कीमत बधैगी। लोग आंख्यां पै बिठाकै राखैंगे लुगाईयां नै। सविता बोली- याहे तो गलत फहमी सै फते।छोरियां की समाज मैं संख्या कम होवण करकै कीमत कोन्या बधै।इनपै हिंसा बधैगी।ये प्याज टमाटर थोड़ा ए सैं जो 60 रुपये किलो होज्यांगे।कविता बोली-या बात तो मनै सविता की सही लागै सै।पाछै सी अखबार मैं पढ़या था अक हैदराबाद के व्यापारी हरियाणा की मुर्रा भैंस एक लाख रुपये की खरीद कै लेगे।अर हम पांच पांच हजार मैं बहू उड़ीसा, बंगाल आसाम अर बिहार तै खरीद कै ल्यावां।यासै म्हारी कीमत तो।नफे बोल्या-कोए गाम नहीं बचरया जित 150 अर 200 ताहिं की संख्या मैं लड़के ना हों जो ओवर ऐज ना हो लिए हों। तड़कैं ए एड्डी ठाकै बाट देखनी षुरु करदें सैं सगाई आल्यां की।सविता बोली- नौकरी ना, गरीबी बधगी,उपर तै बिन ब्याहे,साथ मैं टी वी का नषे, सैक्स अर हिंसा का सोच्या समझ्या पैकेज। इसे करकै ये तरां तरां के विकृत रास्ते अपनावैं सैं। इसे करकै समाज मैं रेप,छेड़खानी,बदमाषी की घटना दिन पै दिन बधती जावण लागरी सैं। सते बोल्या-एक खास बात और सै अक म्हारे गुहांड मैं जाटां की फालतू संख्या आलेे गाम फालतू सैं। इनमैं खाते पीते परिवारां आले बालकां की तो इब्बै ब्याह षादी क्यूकरै हो ज्यावैं सैं बाकी तो सिर पर कै हाथ फिरांदे हांडे जावैं सैं।सविता बोली- हां गुजरां,यादवां अर रोड़ां मैं बी इसा ए हाल बताया। बाहर तैं महिलावां नै खरीद कै ल्यावैं सैं।पाछै सी 10-12 गामां का सर्वे करकै देख्या था इन ज्ञान विज्ञान आल्यां नै। इनमैं 50 महिला थी जो दूसरे प्रदेषां तै खरीद कै ल्या राखी थी। इसमैं रोहतक,भिवानी, जीन्द अर झझर के जिल्यां के गाम थे।बलियाना अर बहुअकबरपुर नै तो सारे गामां के रिकाट तोड़ राखे थे।सते बोल्या- फेर इननै ‘असली बहू’ का दरजा बी तो कोन्या देन्ते। उनकै म्हारी बोली समझ मैं आवै ना म्हारै उनकी बोली समझण मैं दिक्कत आवै। आज के युग मैं किसे माणस तै उसकी भापा-बोली खोस्सण तै माड़ा काम कोए दूसरा कोनी हो सकदा।सविता बोली-उस सर्वेक्षण मैं तो और बी कई भयानक सच्चाई साहमी आई।ये महिला ‘दोयम दर्जे की पत्नी’ कै ‘ल्याई औड़ बहू’ कै ‘खरीदी औड़ बहू’ के हिसाब तै जानी जावैं सैं।कई जागां तो इननै प्रदेषां के नाम तै बुलावैंगे ज्यूकर‘पारवी बहू’, ‘बिहारी बहू’, ‘बंगाली बहू’आदि आदि।इसतै न्यारा इनका रहन सहन,तौर तरीके,खानपान सबै किमै तो बदल ज्यावैं सैं।कविता बोली - कमाल की बात सै अक पूरे समर्पण अर मूल पहवान खोए पाछै बी ये महिला‘अन्य’, ‘बाहरी’अर कै ‘खरीदी औड़’बहू के रुप मैंए मानी जावैं सैं। सरिता बोली- इननै भयंकर एकान्त अर सामाजिक अलगााव का सामना करना पड़ै सै।पषुआं तै बी बदतर जिन्दगी जीवैं सैं ये।कई घरां मैं षुरु षरु मैं बेल मारकै राखैंगे अक कदे या भाज ना जावै।सविता बोली- ‘गरीब की बहू सबकी जोरु’आली बात इस तथाकथित सभ्य समाज मैं आज ‘ बाहरी बहू घर मैं सबकी जोरु’ के रुप मैं बदलगी।कई बर तो दो दो तीन तीन बर बेच दी जावैं सैं।सते बोल्या- या किसी विचित्र बात सै अक म्हारे गुहांड मैं अन्तर्जातीय ब्याह करण पै तो लड़के लड़कियां की हत्या करदी जावै अर इस ढ़ाल की अंतर्जातीय खरीद फरोख्त की पूरी इजाजत सै। अर ये म्हारे नौजवान बी मुंह नहीं खोलते इसी बातां पै।नफे सिंह बोल्या- हरियाणा मैं महिलावां की खरीद फरोख्त का धन्धा पूरे जोरां पै चालरया सै अर इसमैं बिचौलियां की चान्दी होरी सै वे मनमाने ढ़ग तै इस माहौल का फायदा ठारे सैं। सविता बोली- खरीद फरोख्त के इस घिनौने व्यापार मैं बाजार मतलब ‘मंडी’अर पितृसता के सबतै पिछड़े रुप रंग दोनूं एक होगे दीखैं सैं। जो ‘बाजार’मैं पीस्सा खरच करैगा उसनै बदले मैं खरीद्या औड़ एक गुलाम मिलैगा जिसनै उन पीस्यां के एवज मैं सारी उमर गुलामी करनी सै।जै वा खरीदी औड़ी महिला अपनी गुलामी का विरोध करै तो वा दोबारा खरीदी अर बेची जा सकै सै। कविता बोली-एक और बात समझ मैं नहीं आन्ती अक हरियाणा मैं एक तरफ तो दहेज का व्यापार धड़ल्ले तै चाल रह्या अर बधता जावण लागर्या सै अर दूजे कान्ही महिलावां ने खरीद कै ल्यावण का रिवाज बधता जावण लागर्या सै। योके रास्सा सै। हरियाणा के बु़िद्धजीवी करैंगे कदे इस ढाल की बातां पै बिचार। सविता बोली-हरियाणा के बुद्धिजीवियां नै कड़ै फुरसत सै अपने कैरियर तै, अपने बालकां के कैरियर तै जो म्हारी इन पेचीदा बातां पे गौर करैंगे। क्यों बख्त बरबाद करैंगे वे अपना। फेर एक बात साफ सै अक जो बात कविता नै ठाई सै उसमैं साफ झलकै सै अक दोनों हालातां मैं महिला का अवमूल्यन सै। औरत की खातर एक इन्सान के रुप मैं दोनों सौदे अपमान जनक सैं।आई किमै समझ मैं अक गई सिर पर कै!
रणबीर
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