ब्याह
बात या सै अक एक गरीब परिवार था। मां-बाप, एक बेटा दो बेटी। गाम मैं मजदूरी करकै, भैंस का दूध बेच कै अर छह बीघे धरती बाधे पै ले कै बहोत मुश्किल तै गुजारा करैं थे। छोरा ब्याहवण जोगा होग्या। फेर एक तो लड़की मिलना ए मुश्किल काम अर दूसरे ब्याह की खातर खर्चा पानी करने को पैसे नहीं। कई रिश्तेरियां की सिफारिश करकै छोरी पाई थी। कई जगां ब्याज पै 10,000 रुपइये लेवण गया फेर उसकी माड़ी माली हालत देख कै गाम मैं कोए भी तैयार नहीं हुया पीस्सा ब्याज पै देवण नै। एक बर तो ब्याह की तारीख बी आगे नै डिगावनी पड़ी भाई नै। मां न्यारी परेशान। बाबू न्यारा दुखी। करै तो के करै? फेर तारिख धर दी 10 नवम्बर की । 8 नवम्बर नै फेर पवाड़ा होग्या । के करै ? सारे कै घूम आया फेर कोणी बैठ्या जुगाड़ । फेर तारिख डीगाई सै । धरी नहीं सै , बाट देखै सै हालात ठीक होवण की ।
हमनै के पड़ी ???
कमलू कै दो किल्ले धरती। वा भी चार जागां आधा-आधा किल्ला। पहलम तो खाद गेर कै बीज नये गेर कै अर कीटनाशक का इस्तेमाल करकै फसल ठीक ठ्याक हो ज्या थी। फेर जै लागत लाकै देखता तो उसनै लागता किमै घाटे मैं ऐ रह्या सै। बुलध बेचने पड़गे। ट्रैक्टर ल्यावण का ब्योंत नहीं। पाणी का चौआ घणी नीचै चल्या गया। ट्यूबवैल का खरचा ठावण का भी ब्योंत कोनी रह्या। थ्रैसर तै गिहूं काढण का जमाणा आग्या। थ्रैसर बी क्यूकर ल्यावै। इन तीनों चीजां नै किराये पै लेकै खेती करना आसान कोन्या रह्या। कमलू नै देख्या अक पाछले आठ-दस सालां मैं गामां तै गिद्ध खत्म होगे। क्यों खत्म होगे? किसे की कोए चिंता नहीं। कई बर मोर मरे पाये जावैं सैं। कोए चिंता नहीं। एक जोहड़ का पाणी तो कती काला होग्या। होग्या तो हो ज्याओ हमनै के पड़ी। इसे मानस धोरै कितना काला धन होगा
बात या सै अक एक गरीब परिवार था। मां-बाप, एक बेटा दो बेटी। गाम मैं मजदूरी करकै, भैंस का दूध बेच कै अर छह बीघे धरती बाधे पै ले कै बहोत मुश्किल तै गुजारा करैं थे। छोरा ब्याहवण जोगा होग्या। फेर एक तो लड़की मिलना ए मुश्किल काम अर दूसरे ब्याह की खातर खर्चा पानी करने को पैसे नहीं। कई रिश्तेरियां की सिफारिश करकै छोरी पाई थी। कई जगां ब्याज पै 10,000 रुपइये लेवण गया फेर उसकी माड़ी माली हालत देख कै गाम मैं कोए भी तैयार नहीं हुया पीस्सा ब्याज पै देवण नै। एक बर तो ब्याह की तारीख बी आगे नै डिगावनी पड़ी भाई नै। मां न्यारी परेशान। बाबू न्यारा दुखी। करै तो के करै? फेर तारिख धर दी 10 नवम्बर की । 8 नवम्बर नै फेर पवाड़ा होग्या । के करै ? सारे कै घूम आया फेर कोणी बैठ्या जुगाड़ । फेर तारिख डीगाई सै । धरी नहीं सै , बाट देखै सै हालात ठीक होवण की ।
हमनै के पड़ी ???
कमलू कै दो किल्ले धरती। वा भी चार जागां आधा-आधा किल्ला। पहलम तो खाद गेर कै बीज नये गेर कै अर कीटनाशक का इस्तेमाल करकै फसल ठीक ठ्याक हो ज्या थी। फेर जै लागत लाकै देखता तो उसनै लागता किमै घाटे मैं ऐ रह्या सै। बुलध बेचने पड़गे। ट्रैक्टर ल्यावण का ब्योंत नहीं। पाणी का चौआ घणी नीचै चल्या गया। ट्यूबवैल का खरचा ठावण का भी ब्योंत कोनी रह्या। थ्रैसर तै गिहूं काढण का जमाणा आग्या। थ्रैसर बी क्यूकर ल्यावै। इन तीनों चीजां नै किराये पै लेकै खेती करना आसान कोन्या रह्या। कमलू नै देख्या अक पाछले आठ-दस सालां मैं गामां तै गिद्ध खत्म होगे। क्यों खत्म होगे? किसे की कोए चिंता नहीं। कई बर मोर मरे पाये जावैं सैं। कोए चिंता नहीं। एक जोहड़ का पाणी तो कती काला होग्या। होग्या तो हो ज्याओ हमनै के पड़ी। इसे मानस धोरै कितना काला धन होगा
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